अमेरिका-ईरान तनाव से तय होगी बाजार की चाल, कच्चा तेल बना बड़ा फैक्टर

नई दिल्ली

 सोमवार 11 मई से शेयर बाजार का नया कारोबारी हफ्ता शुरू होगा। विश्लेषकों के अनुसार आगामी हफ्ते में शेयर बाजार की दिशा (Stock Market Outlook for Next Week) अमेरिकी-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतों से तय होगी। विश्लेषकों का कहना है कि रुपये-डॉलर की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार को प्रभावित करेंगी। ऑनलाइन ट्रेडिंग कंपनी एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि बाजार इस सप्ताह भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के प्रति बेहद संवेदनशील रहेगा और निवेशकों का ध्यान अमेरिका-ईरान से संबंधित घटनाक्रमों पर रहेगा।

कच्चे तेल पर रहेगी नजर
पोनमुडी ने कहा कि ब्रेंट कच्चे तेल के दाम बाजार की दिशा तय करने वाला एक अहम कारक रहेगा। उन्होंने कहा, ‘‘यदि कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बनी रहती हैं या तनाव कम करने की दिशा में प्रगति होती है तो जोखिम वाले निवेश माध्यमों में राहत भरी तेजी देखी जा सकती है। वहीं तनाव बढ़ने की स्थिति में बाजार पर दबाव बना रह सकता है।’’
एक अन्य विशेषज्ञ के मुताबिक इस सप्ताह महंगाई के आंकड़े भी आने हैं जो बाजार के लिए महत्वपूर्ण होंगे। इस बीच, केनरा बैंक, टाटा पावर, भारती एयरटेल, डीएलएफ, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) और जेएसडब्ल्यू स्टील जैसी कंपनियां सप्ताह के दौरान अपने तिमाही नतीजों की घोषणा करेंगी।

और कौन-से फैक्टर्स रहेंगे अहम?
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च हेड सिद्धार्थ खेमका ने कहा कि भारतीय शेयर बाजार निकट भविष्य में भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के प्रति बेहद संवेदनशील बने रहेंगे और बाजार व्यापक दायरे में कारोबार कर सकता है।
खेमका ने कहा कि भारत के अप्रैल महीने के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति (सीपीआई) के आंकड़े भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ब्याज दर नीति का संकेत देंगे, जबकि अमेरिका के सीपीआई और पीपीआई आंकड़े फेडरल रिजर्व की संभावित ब्याज दर कटौती, बॉन्ड प्रतिफल और वैश्विक जोखिम धारणा को प्रभावित कर सकते हैं।

कैसा रहा पिछला हफ्ता?
बीते सप्ताह बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 414.69 अंक यानी 0.53 प्रतिशत मजबूत हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 178.6 अंक यानी 0.74 प्रतिशत के लाभ में रहा। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफआईआई) ने भी भारतीय बाजारों से निकासी जारी रखी है।
इस महीने अब तक एफपीआई भारतीय शेयर बाजारों से 14,231 करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। स्वस्तिका इन्वेस्टमार्ट लिमिटेड के शोध प्रमुख संतोष मीणा ने कहा कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा मुख्य रूप से भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की चाल और विदेशी निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगी। साथ ही चौथी तिमाही के नतीजों का अंतिम चरण शेयर और क्षेत्र आधारित गतिविधियों को प्रभावित करेगा।

 

मिडिल ईस्ट तनाव से भारत की अर्थव्यवस्था पर असर, तेल महंगा रहने की आशंका

नई दिल्ली

अमेरिका और ईरान युद्ध का असर दुनिया पर पड़ा है और ये आगे भी बना रहेगा. विदेश से भारतीय इकोनॉमी और कच्चे तेल को लेकर एक बुरी खबर आई है. एशियन डेवलपमेंट बैंक यानी ADB के मुताबिक, Iran War की वजह से पैदा हुई ग्लोबल टेंशन का असर जारी रहेगा और कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती है. इकोनॉमिस्ट ने कहा है कि इसका असर भारत में भी देखने को मिलेगा और यहां पर महंगाई का बम फूट सकता है. इसके साथ ही एडीबी ने भारत के जीडीपी ग्रोथ अनुमान में भी बड़ी कटौती की है.

इतनी रहेगी कच्चे तेल की कीमत
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, एडीबी के चीफ इकोनॉमिस्ट अल्बर्ट पार्क ने कहा है कि मिडिल ईस्ट संकट के उम्मीद से अधिक लंबे समय तक चला, इसके कारण सप्लाई चेन में पैदा हुआ रुकावट से कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहने की आशंका है.

उन्होंने कहा कि,’Crude Oil की ऊंची कीमतों की संभावना के साथ, नए आउटलुक को देखें, तो ये 2026 के लिए औसत कीमत 96 डॉलर प्रति बैरल रहेगी. 2027 में यह 80 डॉलर प्रति बैरल पर बनी रहनी चाहिए.’  अल्बर्ट के मुताबिक, भविष्य के अनुमानों के अनुसार अगले साल के लिए कीमतें पहले की तुलना में अधिक रहने का संकेत दे रही हैं.

 भारत की GDP को लगेगा झटका
भारत पर वेस्ट एशिया संकट के प्रभाव के बारे में बात करते हुए अल्बर्ट पार्क ने कहा कि इससे देश की जीडीपी वृद्धि (India’s GDP Growth) में 0.6 फीसदी की कमी आएगी, जिससे यह 6.3 फीसदी पर आ जाएगी.

गौरतलब है कि एशियाई विकास बैंक ने बीते अप्रैल महीने में अनुमान लगाया था कि भारत की जीडीपी ग्रोथ मौजूदा वित्त वर्ष में 6.9 फीसदी पर मजबूती से बनी रहेगी, जबकि मजबूत घरेलू डिमांड के कारण अगले वित्त वर्ष में बढ़कर 7.3 फीसदी हो जाएगी. पार्क ने राहत भरी बात भी कही कि इससे अगले वर्ष देश का विकास फिर से पटरी पर आ जाएगा.

क्या फूटने वाला है महंगाई बम?
Middle East War और Crude Oil Price के हाई बने रहने के चलते सिर्फ भारत की जीडीपी पर ही असर नहीं पड़ेगा. बल्कि देश में महंगाई का बम भी फूट सकता है. एडीडी अर्थशास्त्री ने कहा है कि चालू वित्त वर्ष में India Inflation में भी काफी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. पहले अनुमान 4.5 फीसदी का जताया गया था, जिसे बढ़ाते हुए 6.9 फीसदी किया गया है. यानी महंगाई दर में सीधे 2.4 फीसदी का उछाल आ सकता है.

देश में महंगाई बढ़ने के पीछे के कारणों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत आयातित तेल और गैस पर अधिक निर्भर है. अगर चीन को हटा दिया जाए, तो इस वर्ष ग्रोथ पर पड़ने वाला यह नकारात्मक 0.6 फीसदी पूरे क्षेत्र के लिए भी लगभग एक समान है.

इकोनॉमिस्ट का कहना है कि फर्टिलाइजर की लागत बढ़ने से किसान कम इस्तेमाल को मजबूर होंगे, जिससे पैदावार कम होगी और साल के अंत में इसकी उपलब्धता भी कम हो जाएगी. इसका सीधा असर खाद्य पदार्थों की कीमतों (Food Price) पर पड़ेगा, लेकिन कितना असर पड़ेगा यह गैस आपूर्ति में व्यवधान पर निर्भर करेगा.

शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव, निवेशकों के लिए सावधानी जरूरी

नई दिल्ली

भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ दिनों से उतार-चढ़ाव का माहौल बना हुआ है। मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में जारी तनाव और वैश्विक राजनीतिक हलचलों के बीच शुक्रवार 8 मई को सेंसेक्स और निफ्टी लगातार दूसरे दिन गिरावट के साथ बंद हुए। बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में कमजोरी के कारण सेंसेक्स 516 अंक गिरकर 77,328 पर और निफ्टी 151 अंक फिसलकर 24,176 के स्तर पर आ गया। बाजार की इस अस्थिरता के बावजूद आनंद राठी (Anand Rathi) के टेक्निकल रिसर्च के सीनियर मैनेजर गणेश डोंगरे का मानना है कि घबराने की जरूरत नहीं है। उनके अनुसार, बाजार अब ‘Buy-on-Dips’ यानी हर गिरावट पर खरीदारी के मोड में है। सोमवार 11 मई 2026 के लिए उन्होंने तीन ऐसे शेयरों को चुना है जो निवेशकों को अच्छा मुनाफा दे सकते हैं।

अगले हफ्ते के लिए बाजार का आउटलुक
मिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गणेश डोंगरे के मुताबिक, निफ्टी के लिए 23,500–23,800 का स्तर एक मजबूत सपोर्ट (सहारा) का काम करेगा, जबकि 24,800–25,000 की रेंज में बड़ी रुकावट (Resistance) देखी जा सकती है। अगर निफ्टी 24,800 के ऊपर टिकने में कामयाब रहता है, तो यह जल्द ही 25,300 के स्तर की ओर बढ़ सकता है। वहीं, बैंक निफ्टी के लिए 54,500–55,000 का स्तर अहम सपोर्ट है।
एक्सपर्ट की टॉप 3 पिक्स (Top Picks for Monday)

सोमवार के लिए गणेश डोंगरे ने इन तीन शेयरों में खरीदारी की सलाह दी है।

1- एमक्योर फार्मा (Emcure Pharmaceuticals):-
खरीदें:- ₹1640 – ₹1660 की रेंज में

टारगेट (लक्ष्य):- ₹1730

स्टॉप लॉस:- ₹1615

2- केफिन टेक (Kfin Technologies):-
खरीदें:- ₹910 – ₹920 की रेंज में

टारगेट (लक्ष्य):- ₹980

स्टॉप लॉस:- ₹890

3- मझगांव डॉक (Mazagon Dock Shipbuilders):-
खरीदें:- ₹2640 – ₹2660 की रेंज में

टारगेट (लक्ष्य):- ₹2750

स्टॉप लॉस:- ₹2580

निवेशकों के लिए जरूरी सुझाव
एक्सपर्ट का कहना है कि आने वाला हफ्ता काफी महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि निवेशक अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत और संस्थागत निवेशकों (FIIs/DIIs) की गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखेंगे। बाजार में किसी भी बड़ी खबर से उतार-चढ़ाव (Volatility) बढ़ सकता है, इसलिए चुनिंदा शेयरों में ही निवेश करें और स्टॉप लॉस (Stop Loss) का सख्ती से पालन करें। अनुशासन के साथ निवेश करना ही मौजूदा बाजार में मुनाफे की कुंजी है।

टाटा पंच बनी भारत की नंबर-1 SUV, फ्रॉन्क्स ने दिग्गजों की चिंता बढ़ाई, क्रेटा भी पीछे रह गई

मुंबई 

भारतीय वाहन बाजार में एसयूवी गाड़ियों की मांग लगातार बढ़ती जा रही है और अप्रैल 2026 के बिक्री आंकड़ों ने यह साफ कर दिया है कि ग्राहकों की पसंद अब तेजी से बदल रही है। इस बार बिक्री के मोर्चे पर सबसे बड़ा धमाका टाटा पंच ने किया है। दमदार सुरक्षा, आकर्षक डिजाइन और किफायती कीमत के दम पर इस गाड़ी ने एक बार फिर देश की सबसे ज्यादा बिकने वाली एसयूवी बनने का गौरव हासिल कर लिया। दूसरी ओर मारुति की फ्रॉन्क्स ने भी ऐसा प्रदर्शन किया कि कई स्थापित मॉडलों की चिंता बढ़ गई। लंबे समय से बाजार में मजबूत पकड़ रखने वाली हुंडई क्रेटा को भी इस बार पीछे रहना पड़ा। 

टाटा पंच ने फिर साबित की अपनी ताकत
अप्रैल 2026 के दौरान टाटा पंच की बिक्री में शानदार उछाल देखने को मिला। कंपनी ने इस अवधि में 19 हजार से ज्यादा इकाइयों की बिक्री दर्ज की, जो पिछले साल की तुलना में काफी अधिक रही। बिक्री में यह बढ़ोतरी दिखाती है कि छोटे आकार की लेकिन मजबूत और सुरक्षित एसयूवी को ग्राहक तेजी से पसंद कर रहे हैं।

टाटा पंच की लोकप्रियता के पीछे इसकी मजबूत सुरक्षा व्यवस्था, ऊंचा बैठने का अनुभव और शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक आसान संचालन को बड़ी वजह माना जा रहा है। कम कीमत में बेहतर सुविधाएं मिलने के कारण यह मध्यम वर्गीय परिवारों की पहली पसंद बनती जा रही है।

मारुति फ्रॉन्क्स ने बढ़ाई प्रतिस्पर्धा
इस बार बिक्री के आंकड़ों में सबसे ज्यादा चर्चा मारुति फ्रॉन्क्स की रही। कंपनी ने अप्रैल महीने में इसकी रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की और यह सीधे दूसरे स्थान पर पहुंच गई। पिछले वर्ष की तुलना में इसकी बिक्री में जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिली।

फ्रॉन्क्स की सफलता का बड़ा कारण इसका आधुनिक डिजाइन, आकर्षक लुक और बेहतर ईंधन क्षमता मानी जा रही है। युवाओं के बीच यह एसयूवी तेजी से लोकप्रिय हो रही है। खास बात यह है कि इसने कई पुराने और भरोसेमंद मॉडलों को पीछे छोड़ते हुए बाजार में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है।

टाटा नेक्सन की पकड़ अब भी बरकरार
टाटा मोटर्स की एक और लोकप्रिय एसयूवी नेक्सन भी बिक्री के मामले में मजबूत स्थिति में रही। अप्रैल 2026 में इसकी बिक्री में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि यह शीर्ष दो स्थानों में जगह नहीं बना सकी, लेकिन तीसरे स्थान पर रहकर इसने बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी।

नेक्सन लंबे समय से अपनी सुरक्षा और दमदार प्रदर्शन के लिए जानी जाती रही है। यही कारण है कि ग्राहकों का भरोसा इस गाड़ी पर लगातार बना हुआ है। पेट्रोल, डीजल और विद्युत विकल्पों में उपलब्ध होने के कारण यह अलग-अलग वर्ग के ग्राहकों को आकर्षित कर रही है।

हुंडई क्रेटा की रफ्तार पड़ी धीमी
एक समय भारतीय बाजार की सबसे लोकप्रिय एसयूवी मानी जाने वाली हुंडई क्रेटा के लिए अप्रैल का महीना ज्यादा अच्छा साबित नहीं हुआ। बिक्री में गिरावट ने साफ कर दिया कि अब बाजार में मुकाबला पहले से कहीं ज्यादा कड़ा हो चुका है।

क्रेटा लंबे समय तक अपने प्रीमियम स्वरूप और आधुनिक सुविधाओं की वजह से ग्राहकों की पसंद बनी रही, लेकिन अब कम कीमत में ज्यादा सुविधाएं देने वाले नए मॉडल इसकी चुनौती बढ़ा रहे हैं। बिक्री में आई गिरावट कंपनी के लिए चिंता का विषय मानी जा रही है।

महिंद्रा स्कॉर्पियो की मांग में भी आई नरमी
महिंद्रा की लोकप्रिय एसयूवी स्कॉर्पियो भी इस बार बिक्री के मामले में थोड़ी पीछे नजर आई। हालांकि इसकी मांग पूरी तरह कमजोर नहीं हुई है, लेकिन पिछले वर्ष की तुलना में बिक्री में हल्की गिरावट दर्ज की गई। ग्रामीण और अर्धशहरी इलाकों में अब भी स्कॉर्पियो की मजबूत पहचान बनी हुई है, लेकिन नए मॉडलों की बढ़ती प्रतिस्पर्धा इसका असर दिखाने लगी है।

ब्रेजा और वेन्यू ने भी दिखाया दम
मारुति ब्रेजा की बिक्री में इस बार गिरावट जरूर देखने को मिली, लेकिन इसके बावजूद यह शीर्ष गाड़ियों की सूची में अपनी जगह बनाए रखने में सफल रही। दूसरी ओर हुंडई वेन्यू ने शानदार वापसी करते हुए बाजार में मजबूत प्रदर्शन किया। इसकी बिक्री में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे साफ है कि ग्राहकों का भरोसा एक बार फिर इस गाड़ी की ओर बढ़ रहा है।

वहीं किआ सेल्टोस और किआ सोनेट ने भी बाजार में अच्छा प्रदर्शन किया। दोनों एसयूवी की बिक्री में मजबूती देखने को मिली, जिससे यह साफ हो गया कि भारतीय वाहन बाजार में अब प्रतिस्पर्धा पहले से कहीं अधिक तेज हो चुकी है।

एसयूवी बाजार में लगातार बढ़ रही चुनौती
अप्रैल 2026 के बिक्री आंकड़े यह संकेत देते हैं कि भारतीय ग्राहक अब केवल बड़े नामों पर भरोसा नहीं कर रहे, बल्कि सुरक्षा, सुविधाएं, कीमत और ईंधन बचत जैसे पहलुओं को ज्यादा महत्व दे रहे हैं।

आने वाले महीनों में यह प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना है। नई तकनीक, बेहतर सुरक्षा और आधुनिक सुविधाओं के साथ कंपनियां लगातार नए मॉडल बाजार में उतार रही हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में कौन सी कंपनी ग्राहकों का सबसे ज्यादा भरोसा जीतने में सफल रहती है।

🏠 Home 🔥 Trending 🎥 Video 📰 E-Paper Menu