सहकारिता विभाग में सम्मान समारोह आयोजित, अधिकारियों-कर्मचारियों ने दी शुभकामनाएं

रायपुर

आयुक्त सहकारिता एवं पंजीयक सहकारी संस्थाएं छत्तीसगढ़ श्री महादेव कावरे (आईएएस) के सेवानिवृत्त होने पर आज नवा रायपुर में भावभीनी विदाई एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया। सहकारिता विभाग राजपत्रित अधिकारी संघ एवं अपेक्स बैंक एम्प्लाइज यूनियन द्वारा आयोजित इस समारोह में अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनके दीर्घ प्रशासनिक अनुभव, कुशल नेतृत्व तथा जनहितकारी कार्यों को स्मरण करते हुए सम्मानपूर्वक विदाई दी।

बीजापुर जिले के मूल निवासी श्री महादेव कावरे की प्रारंभिक शिक्षा बीजापुर में हुई। उन्होंने अपने प्रशासनिक जीवन की शुरुआत विभिन्न महत्वपूर्ण दायित्वों से की और रक्षा, रेलवे तथा राज्य प्रशासनिक सेवा में उल्लेखनीय सेवाएं दीं। वे एसडीएम, एनआरडीए महाप्रबंधक, बेमेतरा एवं जशपुर के कलेक्टर तथा रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर संभाग के कमिश्नर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे।

इसके अलावा उन्होंने सचिव आवास एवं पर्यावरण, सचिव आबकारी, गृह विभाग तथा संचालक कोष एवं लेखा जैसे महत्वपूर्ण विभागों में अपनी सेवाएं देकर प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। सहकारिता विभाग में उनके कार्यकाल को पारदर्शिता, नवाचार और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विशेष रूप से याद किया जाएगा।

सम्मान समारोह में सहकारिता विभाग के अपर आयुक्त एवं अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक श्री के.एन. कांडे सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने श्री कावरे के प्रशासनिक योगदान की सराहना करते हुए उनके स्वस्थ, सुखद एवं सफल भविष्य की कामना की।

छत्तीसगढ़ का स्मार्ट पंजीयन मॉडल बना सुशासन की नई पहचान

रायपुर

छत्तीसगढ़ में सुशासन और नागरिक सुविधाओं को केंद्र में रखकर प्रशासनिक व्यवस्थाओं में व्यापक सुधार किए जा रहे हैं। इसी दिशा में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय और वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी के नेतृत्व में पंजीयन विभाग में ऐतिहासिक एवं परिवर्तनकारी सुधारों की शुरुआत की गई है। राज्य सरकार का उद्देश्य पंजीयन प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी, तकनीक आधारित तथा नागरिकों के लिए पूरी तरह सुविधाजनक बनाना है।

कभी लंबी कतारों, घंटों इंतजार, दस्तावेजों के सत्यापन में देरी और बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने वाली पंजीयन प्रक्रिया अब पूरी तरह बदलती दिखाई दे रही है। पहले जहां एक साधारण रजिस्ट्री पूरी करने में 4 से 6 घंटे अथवा कई बार 1 से 2 दिन तक लग जाते थे, वहीं अब आधुनिक डिजिटल व्यवस्थाओं की मदद से यही प्रक्रिया केवल 15 से 20 मिनट में पूरी हो रही है। इससे नागरिकों के समय, धन और ऊर्जा तीनों की बड़ी बचत हो रही है।

राज्य सरकार ने अगले एक वर्ष के भीतर प्रदेश के सभी 119 पंजीयन कार्यालयों को स्मार्ट एवं विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। पहले चरण में नवा रायपुर सीबीडी बिल्डिंग, बेबीलॉन टॉवर रायपुर, राम बिजनेस पार्क, सड्डू, कलेक्ट्रेट परिसर रायगढ़, दुर्ग, बिलासपुर, कुनकुरी, अभनपुर तथा तिल्दा सहित 10 प्रमुख कार्यालयों को आधुनिक स्वरूप दिया जा रहा है।

इन नए स्मार्ट पंजीयन कार्यालयों में अब नागरिकों को वेटिंग लाउंज, वातानुकूलित सुविधा, स्वच्छ एवं व्यवस्थित परिसर, निःशुल्क वाई-फाई, मोबाइल चार्जिंग स्टेशन, शुद्ध पेयजल, आधुनिक शौचालय, हेल्प डेस्क तथा प्री-प्रेजेंटेशन काउंटर जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं। इससे पंजीयन कार्यालय अब किसी आधुनिक सेवा केंद्र की तरह दिखाई देने लगे हैं।

रायगढ़ के लाभार्थी  आशीष अग्रवाल ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि, पहले यहां आने पर निराशा महसूस होती थी, लेकिन अब माहौल पूरी तरह बदल गया है। बैठने की अच्छी व्यवस्था है, एसी लगा है, ठंडे पानी की सुविधा है और पूरा वातावरण बेहतर हो गया है। इसके लिए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय और वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी का बहुत-बहुत धन्यवाद।

डिजिटल तकनीक के उपयोग से पंजीयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता भी बढ़ी है। टोकन सिस्टम लागू होने से भीड़ और अव्यवस्था कम हुई है, वहीं बिचौलियों की भूमिका समाप्त होने से अतिरिक्त खर्च पर रोक लगी है। अब नागरिकों को व्हाट्सएप नोटिफिकेशन, कैशलेस भुगतान, खसरा नंबर के माध्यम से संपत्ति की ऑनलाइन जानकारी तथा डिजीलॉकर जैसी सुविधाएं भी मिल रही हैं, जिससे दस्तावेज तुरंत और सुरक्षित रूप से उपलब्ध हो रहे हैं।

यह पूरी व्यवस्था तेजी से पेपरलेस और डिजिटल मॉडल की ओर बढ़ रही है, जिससे शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों मजबूत हो रही हैं। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में लागू यह स्मार्ट पंजीयन मॉडल “रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म” के विजन को धरातल पर उतारने का प्रभावी उदाहरण बन गया है।

छत्तीसगढ़ आज पुराने, जटिल और फाइलों के बोझ वाले सिस्टम को पीछे छोड़ते हुए आधुनिक डिजिटल प्रशासन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य का यह स्मार्ट पंजीयन मॉडल न केवल प्रदेश में सुशासन की नई परिभाषा गढ़ रहा है, बल्कि देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बनता जा रहा है।

मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान

रायपुर

 मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की मंशानुरूप संचालित ‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान’ के तहत दंतेवाड़ा जिले के सुदूर और दुर्गम क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग की टीम 13 किलोमीटर का कठिन पहाड़ी रास्ता पैदल तय कर बैलाडीला क्षेत्र के दूरस्थ ग्राम बड़ेपल्ली पहुंची और ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराईं।

गांव में आयोजित स्वास्थ्य शिविर में कुल 227 ग्रामीणों की जांच की गई। इस दौरान मलेरिया, सिकल सेल, हीमोग्लोबिन, मधुमेह, रक्तचाप सहित अन्य आवश्यक परीक्षण किए गए। जरूरतमंद मरीजों को उपचार के साथ निशुल्क दवाइयां वितरित की गईं।

महिलाओं और गंभीर मरीजों पर विशेष ध्यान

शिविर में गर्भवती महिलाओं और बच्चों की विशेष जांच की गई। एक उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिला को बेहतर उपचार और सुरक्षित प्रसव के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया। वहीं हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज से पीड़ित 12 मरीजों को आगे के उपचार के लिए उच्च स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया।
ग्रामीणों को ‘आयुष्मान भारत योजना’ की जानकारी दी गई तथा सुरक्षित मातृत्व, पोषण और स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के माध्यम से दूरस्थ अंचलों के लोगों को घर के नजदीक स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं। यह अभियान न केवल उपचार उपलब्ध करा रहा है, बल्कि ग्रामीणों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और भरोसा भी बढ़ा रहा है।

वन धन विकास केंद्र ने बदली आदिवासी महिलाओं की तकदीर

रायपुर

 छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी वन धन विकास केंद्र (वीडीवीके) योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से कोरबा जिले के कटघोरा वन प्रभाग अंतर्गत डोंगनाला की आदिवासी महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है। डोंगनाला का हरिबोल स्वयं सहायता समूह आज हर्बल उद्यमों के माध्यम से महिला सशक्तिकरण का एक आदर्श बनकर उभरा है।

दिहाड़ी मजदूरी से सफल उद्यमिता तक का सफर 
मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व और वन मंत्री  केदार कश्यप की मंशानुरूप 

12 आदिवासी महिलाओं से गठित इस समूह की सदस्य पहले दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर थीं। सीमित रोजगार और अस्थिर आय के कारण परिवार की जरूरतें पूरी करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था। लेकिन शासन की वन धन विकास केंद्र योजना से जुड़ने के बाद इन महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया।

प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग से मिली नई पहचान

स्थानीय स्तर पर उपलब्ध औषधीय पौधों और लघु वनोपज की संभावनाओं को देखते हुए महिलाओं को संगठित किया गया। उन्हें आयुर्वेद विशेषज्ञों तथा छत्तीसगढ़ राज्य लघु वन उत्पाद (व्यापार एवं विकास) सहकारी संघ लिमिटेड द्वारा हर्बल प्रसंस्करण, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन का विशेष प्रशिक्षण दिया गया।

हर्बल उत्पादों की बढ़ी मांग

प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद समूह ने त्रिफला चूर्ण, अश्वगंधा चूर्ण, हर्बल फेस पैक, हर्बल हेयर पाउडर और टूथ पाउडर जैसे गुणवत्तापूर्ण हर्बल उत्पाद तैयार करना शुरू किया। गुणवत्ता और प्रभावशीलता के कारण इन उत्पादों की स्थानीय तथा संस्थागत बाजारों में अच्छी मांग बनी।
आयुष विभाग से मिला बड़ा ऑर्डर

समूह को उस समय बड़ी सफलता मिली जब उन्हें आयुष विभाग से बड़ा ऑर्डर प्राप्त हुआ। इस ऑर्डर से समूह को लगभग 20 लाख रुपए का लाभ हुआ। इससे समूह की विश्वसनीयता बढ़ी और नए बाजारों के द्वार खुले।

38.90 लाख रूपए का लाभ, आर्थिक स्थिति हुई मजबूत

वित्तीय वर्ष 2024-25 में समूह ने लगभग 38.90 लाख रुपए का लाभ और कमीशन अर्जित किया। इससे सदस्यों और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई तथा
जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार आया।

26.11 करोड़ रूपए की संचयी बिक्री

वर्ष 2020 से मार्च 2026 तक वीडीवीके डोंगनाला ने लगभग 26.11 करोड़ रूपए की संचयी बिक्री दर्ज की है। यह उपलब्धि समूह की निरंतर मेहनत, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और प्रभावी विपणन रणनीति का परिणाम है।

हर सदस्य की आय पहुंची 1.7 लाख रुपए वार्षिक

इस पहल से समूह की प्रत्येक सदस्य की वार्षिक आय बढ़कर लगभग 1.7 लाख रुपए हो गई है। आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ महिलाओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और निर्णय लेने की शक्ति भी बढ़ी है।

राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान

हर्बल प्रसंस्करण और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए समूह को ट्रायफेड (TRIFED) तथा छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।
अन्य समूहों के लिए प्रेरणा

हरिबोल स्वयं सहायता समूह की सफलता यह साबित करती है कि शासन की योजनाओं, कौशल विकास, संस्थागत सहयोग और बाजार उपलब्धता के माध्यम से आदिवासी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। डोंगनाला की यह सफलता आज पूरे प्रदेश और देश के स्वयं सहायता समूहों के लिए प्रेरणास्रोत बन गई

पितृत्व विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, DNA टेस्ट को बताया न्याय के लिए जरूरी

महासमुंद.

महासमुंद जिले के बसना ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पलसापाली से जुड़े एक चर्चित पितृत्व विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने डीएनए परीक्षण कराने के आदेश को बरकरार रखते हुए स्पष्ट कहा कि जब पितृत्व का प्रश्न सीधे विवाद का विषय हो और उसका समाधान किसी अन्य साक्ष्य से संभव न हो, तब न्यायहित में वैज्ञानिक जांच आवश्यक हो जाती है।

यह मामला कई वर्षों से न्यायालयों में लंबित था। विवाद उस युवक द्वारा दायर दीवानी वाद से जुड़ा है, जिसमें उसने स्वयं को संबंधित व्यक्ति का पुत्र बताते हुए संपत्ति में हिस्सेदारी का दावा किया था। युवक की माता का कहना था कि वर्ष 1999 में दोनों के बीच संबंध बने थे, जिसके बाद युवक का जन्म हुआ। दूसरी ओर संबंधित व्यक्ति लगातार पितृत्व से इंकार करता रहा। मामले में पहले भरण-पोषण को लेकर भी कई कानूनी कार्यवाहियां हुई थीं। निचली अदालतों और बाद में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने डीएनए परीक्षण कराने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि पितृत्व का स्पष्ट निर्धारण डीएनए परीक्षण के बिना संभव नहीं है। इसके बाद मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।

सुप्रीम कोर्ट में अपीलकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि किसी व्यक्ति को जबरन डीएनए सैंपल देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता तथा यह निजता के अधिकार का उल्लंघन है। वहीं दूसरी ओर पीड़ित पक्ष की ओर से कहा गया कि लगातार पितृत्व से इंकार किए जाने के कारण सच्चाई सामने लाने का एकमात्र प्रभावी माध्यम डीएनए परीक्षण ही है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अपने कई पुराने महत्वपूर्ण फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में डीएनए परीक्षण सामान्य रूप से आदेशित नहीं किया जाता, लेकिन जब पितृत्व का प्रश्न सीधे विवाद का विषय हो और उसका उत्तर किसी अन्य साक्ष्य से संभव न हो, तब न्यायालय वैज्ञानिक जांच का आदेश दे सकता है। अदालत ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि इस मामले में ऐसा कोई अन्य ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं है, जो विवाद का अंतिम समाधान दे सके। न्यायालय ने यह भी माना कि यदि इस प्रश्न का स्पष्ट उत्तर कभी सामने नहीं आया, तो संबंधित युवक अपने वैधानिक और संपत्ति संबंधी अधिकारों से वंचित हो सकता है।

निजता के अधिकार पर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निजता का अधिकार पूर्ण नहीं होता और न्यायहित में उसका संतुलन दूसरे पक्ष के अधिकारों के साथ किया जा सकता है। अदालत ने कहा कि इस मामले में दोनों पक्षों के हितों का संतुलन डीएनए परीक्षण के पक्ष में जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने अंततः अपील खारिज करते हुए संबंधित दीवानी न्यायालय को डीएनए परीक्षण की तिथि निर्धारित कर आगे की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इस महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट में पीड़ित पक्ष की ओर से अभिनव श्रीवास्तव व स्थानीय अधिवक्ता बजरंग अग्रवाल की पुत्री अधिवक्ता बरखा अग्रवाल ने पैरवी की। 

गुरु अर्जुन देव जी का बलिदान सत्य, सेवा और मानवता की रक्षा का अमर संदेश : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर 

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज  गुरु अर्जुन देव जी के शहीदी दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर के तेलीबांधा स्थित गुरुद्वारा परिसर में छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज द्वारा आयोजित विशाल छबील एवं छायाचित्र प्रदर्शनी में शामिल होकर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया और उनके महान बलिदान को मानवता, सत्य तथा सेवा की रक्षा का अमर संदेश बताया। 

इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने राहगीरों को शरबत एवं प्रसादी वितरित कर सेवा परंपरा में सहभागी बनते हुए समाज को परोपकार, संवेदना और मानवीय मूल्यों का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान सिक्ख समाज ने मुख्यमंत्री को पगड़ी पहनाकर आत्मीय स्वागत किया।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने गुरुद्वारा परिसर में आयोजित  गुरु अर्जुन देव जी के जीवन पर आधारित छायाचित्र प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। प्रदर्शनी में उनके दिव्य जन्म से लेकर शहादत तक की प्रेरक और गौरवपूर्ण यात्रा को प्रभावशाली ढंग से प्रदर्शित किया गया था। इसमें गुरु गद्दी की प्राप्ति, हरमिंदर साहिब गुरुद्वारा के निर्माण, आदि ग्रंथ साहिब के संकलन, जहांगीर से वैचारिक संघर्ष, गिरफ्तारी, असहनीय यातनाओं के बीच अडिग आस्था का विस्तृत चित्रण शामिल था।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि  गुरु अर्जुन देव जी त्याग, तपस्या, सत्य, सेवा और मानवता की महान प्रतिमूर्ति थे। उनका संपूर्ण जीवन समाज को प्रेम, समानता, करुणा, समर्पण और मानव कल्याण का मार्ग दिखाता है। उन्होंने कहा कि गुरु अर्जुन देव जी ने अन्याय, अत्याचार और दमन के सामने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। असहनीय यातनाओं के बावजूद उनका धैर्य, साहस, आत्मबल और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास आज भी संपूर्ण मानवता के लिए अमर प्रेरणा का स्रोत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीदी दिवस पर आयोजित ‘छबील सेवा’ केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि सेवा, करुणा, भाईचारे और मानवता की जीवंत अभिव्यक्ति है। भीषण गर्मी के बीच राहगीरों को ठंडा और मीठा शरबत पिलाना निस्वार्थ मानव सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि सिक्ख परंपरा में छबील सेवा मानवता के प्रति समर्पण, सह-अस्तित्व और परोपकार की भावना को जीवंत बनाए रखने का माध्यम रही है।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज द्वारा आयोजित छायाचित्र प्रदर्शनी की सराहना करते हुए कहा कि यह नई पीढ़ी को  गुरु अर्जुन देव जी के जीवन, संघर्ष, आध्यात्मिक चेतना और महान बलिदान से परिचित कराने का अत्यंत सराहनीय प्रयास है। उन्होंने कहा कि इतिहास तभी जीवंत रहता है, जब नई पीढ़ी अपने महापुरुषों के विचारों, मूल्यों और त्याग से जुड़ी रहती है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर सभी लोगों से गुरु अर्जुन देव जी के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने तथा सत्य, सेवा, सद्भाव और मानव कल्याण के मार्ग पर चलने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने इस गरिमामय एवं पुनीत आयोजन के लिए छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज को साधुवाद भी दिया।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य आपूर्ति निगम के अध्यक्ष  संजय वास्तव सहित छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज के पदाधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

सुशासन तिहार बना लोगों की राहत का जरिया, घर के पास ही सुलझ रहीं समस्याएं

रायपुर.

छत्तीसगढ़ शासन की मंशानुरूप अंतिम व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुंचाने और जनता की समस्याओं को उनके घर के पास ही सुलझाने का महाअभियान ”सुशासन तिहार 2026” लगातार सफलता के नए कीर्तिमान गढ़ रहा है। इसी कड़ी में धमतरी जिले के विकासखंड नगरी के ग्राम पंचायत घठुला में आयोजित क्लस्टर स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर में ग्रामीणों का जबरदस्त उत्साह देखने को मिला, जहां प्रशासनिक मुस्तैदी के चलते एक ही छत के नीचे 509 आवेदनों का मौके पर ही निराकरण कर ग्रामीणों को बड़ी राहत दी गई।

इस शिविर में घठुला, लटियारा, पाईकभाठा, रतावा, पोड़ागांव, लखनपुरी, फरसगांव, पांवद्वार, गिधावा, बोरई, घुटकेल, मैनपुर, बिरनासिली एवं लिखमा सहित कुल 14 ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों का हुजूम उमड़ पड़ा। शिविर में न केवल लोगों की शिकायतें सुनी गईं, बल्कि विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों के माध्यम से शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की लाइव जानकारियां भी साझा की गईं, जिससे लोगों को जागरूक होने का अवसर मिला। शिविर के दौरान कुल 528 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें 523 आवेदन विभिन्न मांगों से संबंधित और 05 आवेदन जनता की शिकायतों से जुड़े थे। शासन और प्रशासन की संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्राप्त आवेदनों में से 509 का मौके पर ही निपटारा कर हितग्राहियों को तत्काल राहत प्रदान की गई, जबकि शेष बचे आवेदनों के लिए उपस्थित आला अधिकारियों ने संबंधित विभागों को समय-सीमा के भीतर त्वरित कार्रवाई करने के कड़े निर्देश जारी किए। 

हितग्राहियों को योजनाओं की  दी सौगात
शिविर स्थल पर ही हितग्राहियों को योजनाओं की सौगात दी गई, जिसके तहत महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 04 हितग्राहियों को सुपोषण किट, स्वास्थ्य विभाग द्वारा 03 ग्रामीणों को आयुष्मान कार्ड, समाज कल्याण विभाग द्वारा 01 हितग्राही को दिव्यांग सहायक उपकरण और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा ग्रामीणों को मनरेगा जॉब कार्ड का वितरण किया गया।

शासन और जनता के बीच का फासला हुआ कम
शिविर में पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सुशासन तिहार का असली मकसद आम नागरिकों की समस्याओं का संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ तुरंत समाधान करना है, जिससे शासन और जनता के बीच का फासला कम हो रहा है और प्रशासन के प्रति लोगों का विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है।

CG के थाने में नाबालिग से अभद्रता पर बड़ा एक्शन, TI और महिला हेड कांस्टेबल सस्पेंड

राजनांदगांव.

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में पुलिस कर्मियों की गंभीर लापरवाही पर एसपी ने सख्त एक्शन लिया है. रातभर थाने में नाबालिग बालिका और उसके परिवार को बैठाकर रखा गया. इस दौरान नाबालिग बालिका के साथ अभद्र व्यवहार किया गया. मामले में थाना प्रभारी और महिला हेड कांस्टेबल को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर रक्षित केंद्र में भेज दिया गया है.

जानकारी के मुताबिक, सोमनी थाना में यह अमानवीय घटना हुई. जहां के टीआई  अरुण नामदेव ने एक नाबालिग बालिका को गलत मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर उसे गर्भवती बता दिया. इसके बाद नाबालिग और उसके परिवार को रातभर थाने में बैठाकर रखा. इतना ही नहीं ड्यूटी पर तैनात महिला प्रधान आरक्षण राजश्री सिंह ने नाबालिग से अभद्र व्यवहार किया. बताया जा रहा है कि जानकारी मिलने पर एसपी खुद मौके पर पहुंची और हड़काते हुए दोनों तत्काल निलंबित कर दिया.

आदेश जारी
एसपी कार्यालय से इस संबंध में आज जारी आदेश किया गया है. दोनों पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच किया गया है. साथ ही बिना अनुमति मुख्यालय नहीं छोड़ने के निर्देश दिए गए हैं. निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता की पात्रता रहेगी.

छत्तीसगढ़ की बेटियों का नेशनल बास्केटबॉल में जलवा, स्वर्ण जीतने पर CM साय ने दी बधाई

रायपुर.

छत्तीसगढ़ की बालिका बास्केटबाल टीम ने नेशनल टूर्नामेंट के फाइनल मे शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए 14 साल बाद विजेता होने का गौरव हासिल किया है। चार साल पूर्व जूनियर बालिका वर्ग की टीम ने रजत पदक प्राप्त किया था। बालिका टीम की इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के साथ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने बधाई दी है।

छत्तीसगढ़ की बालिका बास्केटबॉल टीम ने पुद्दुचेरी में बास्केटबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा पुद्दुचेरी बास्केटबॉल एसोसिएशन के सहयोग से आयोजित जूनियर नेशनल बास्केटबॉल प्रतियोगिता में केरल को 55-51 अंकों से परास्त कर स्वर्ण पदक जीता। टीम की ओर से दिव्या रंगारी ने 22 अंक, अंजली कोडापे कप्तान 14, रूमी कोनवर और अंजनी ने 7-7 अंक, अदिति कोडापे 3 अंक, सारा सिंह 2 अंक लगा कर अपनी टीम को विजयी होने में शानदार भूमिका निभाई। वहीं सोफी सिका एवं नंदनी माधो प्रधान ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। टीम ने सेमीफाइनल में कर्नाटक की टीम को 67-62 को परास्त कर फाइनल में प्रवेश किया। क्वार्टर फाइनल मैच में छत्तीसगढ़ की टीम ने महाराष्ट्र की टीम को 56-44 अको से परास्त किया था। छत्तीसगढ़ प्रदेश बास्केटबॉल संघ में विवाद होने के कारण बास्केटबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा छत्तीसगढ़ टीम के चयन के लिए एड हॉक कमेटी बनाई है, जो छत्तीसगढ़ के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों की टीम चयनीत कर विभिन्न राष्ट्रीय बास्केटबॉल प्रतियोगिता में भेजती है।

बेटियों ने प्रदेश का मान बढ़ाया –
पुडुचेरी में आयोजित 76वीं जूनियर नेशनल बास्केटबॉल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर छत्तीसगढ़ की बेटियों ने पूरे प्रदेश का मान बढ़ाया है। यह उपलब्धि उनकी प्रतिभा, कठिन परिश्रम और समर्पण का गौरवपूर्ण प्रतिफल है। पूरे टूर्नामेंट में उत्कृष्ट खेल का प्रदर्शन करते हुए हमारी बेटियों…
— Vishnu Deo Sai (@vishnudsai) May 30, 2026

बेटियों ने प्रदेश को गौरवान्वित किया –
पुद्दुचेरी में आयोजित 76वीं जूनियर नेशनल बास्केटबॉल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर छत्तीसगढ़ की बेटियों ने पूरे प्रदेश को गौरवान्वित किया है। फाइनल मुकाबले में केरल को पराजित कर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का परचम लहराने वाली सभी खिलाड़ियों, कोच एवं सहयोगी दल को हार्दिक…
— Dr Raman Singh (@drramansingh) May 29, 2026

पत्रकार लोकतंत्र के सच्चे सेनानी, समाज को दिशा देने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

पत्रकार लोकतंत्र के सच्चे सेनानी, समाज को दिशा देने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

पत्रकारिता ने राष्ट्र निर्माण और सामाजिक परिवर्तन में निभाई ऐतिहासिक भूमिका : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर 
पत्रकार लोकतंत्र के सच्चे सेनानी हैं, जो कठिन परिस्थितियों में भी निरंतर परिश्रम करते हुए सूचनाओं को जन-जन तक पहुंचाते हैं और समाज को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मीडिया की सकारात्मक आलोचना केवल व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि प्रशासन और सरकार को भी आत्ममंथन और बेहतर कार्य की दिशा प्रदान करती है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के वीआईपी रोड स्थित राम मंदिर परिसर के सुंदर सदन में आयोजित पत्रकारिता गौरव मार्तंड उत्सव को संबोधित करते हुए यह बात कही। यह आयोजन हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित किया गया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि माता कौशल्या की धरती और भगवान श्रीराम के ननिहाल छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता की गौरवशाली परंपरा पर आधारित ऐसा अद्भुत आयोजन निश्चित रूप से अभिनंदनीय है। उन्होंने आयोजन के लिए रायपुर प्रेस क्लब को बधाई देते हुए कहा कि रायपुर प्रेस क्लब देश के पुराने और प्रतिष्ठित प्रेस क्लबों में से एक है, जिसका इतिहास समृद्ध और प्रेरणादायी रहा है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता और पत्रकारों के सम्मान में आयोजित ऐसे कार्यक्रम प्रेस क्लब की प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता का सशक्त प्रमाण हैं।

मुख्यमंत्री साय ने रायपुर की पत्रकारिता परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस शहर ने पत्रकारिता जगत को अनेक शिखर पुरुष दिए हैं। उन्होंने मधुकर खेर, मायाराम सुरजन, ललित सुरजन, रमेश नैय्यर और बबन प्रसाद मिश्र सहित अनेक प्रतिष्ठित संपादकों और पत्रकारों का स्मरण करते हुए कहा कि इन विभूतियों ने पत्रकारिता की सशक्त और वैचारिक परंपरा को समृद्ध किया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मीडिया लोकतंत्र की आधारशिला है और देश के स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन तक पत्रकारिता ने हमेशा परिवर्तनकारी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि 30 मई 1826 को कोलकाता से जुगल किशोर शुक्ल द्वारा प्रकाशित देश के प्रथम हिंदी समाचार पत्र उदंत मार्तंड ने भारतीय पत्रकारिता की मजबूत नींव रखी। हिंदी पत्रकारिता के दो सौ वर्षों की यह गौरवशाली यात्रा देशवासियों के लिए गर्व का विषय है।

मुख्यमंत्री ने भारतीय सनातन परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि देवर्षि नारद को आदि पत्रकार माना जाता है और इसी कारण पत्रकार बंधु नारद जयंती को सम्मानपूर्वक मनाते हैं। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत रोचक और प्रेरक तथ्य है कि उदंत मार्तंड का प्रकाशन भी नारद जयंती के दिन आरंभ हुआ, जो इस बात का प्रतीक है कि भारतीय पत्रकारिता की जड़ें हमारी सांस्कृतिक चेतना और सनातन मूल्यों से गहराई से जुड़ी रही हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय पत्रकारिता ने राष्ट्रवादी चेतना को स्वर देने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महात्मा गांधी, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, माधवराव सप्रे और सुभाषचंद्र बोस सहित अनेक स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने पत्रकारिता को सामाजिक जागरण और राष्ट्रीय चेतना के माध्यम के रूप में उपयोग किया। उन्होंने कहा कि जब भी भारतीय पत्रकारिता का गौरवशाली इतिहास लिखा जाएगा, तब छत्तीसगढ़ का नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होगा। 

उन्होंने मां भारती के सपूत माधवराव सप्रे का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने छत्तीसगढ़ से छत्तीसगढ़ मित्र का संपादन कर स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लोगों को जागृत और संगठित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पत्रकारिता की चर्चा जब भी होगी, तब भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी का स्मरण स्वाभाविक रूप से होगा। उन्होंने कहा कि अटल जी ने अपनी पत्रकारिता के माध्यम से राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय चेतना की जो अलख जगाई, उसने स्वतंत्र भारत में लाखों लोगों को प्रेरित किया। स्वदेश और राष्ट्रधर्म जैसे प्रकाशनों ने राष्ट्र चेतना और राष्ट्रीय अस्मिता को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने मोदी की गारंटियों को धरातल पर उतारने का कार्य किया है और प्रदेश की अनेक जनकल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने विशेष रूप से नक्सलवाद उन्मूलन का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस तथा जनसहभागिता के साथ-साथ पत्रकारों की महत्वपूर्ण भूमिका के कारण प्रदेश में शांति और विकास का वातावरण मजबूत हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिंसा और भटकाव के रास्ते पर जाने वाले लोगों को शांति, विकास और मुख्यधारा की ओर प्रेरित करने में पत्रकारों ने बड़ी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि आज जब मीडिया बस्तर में हो रहे सकारात्मक बदलाव, विकास, पर्यटन, प्राकृतिक सौंदर्य और बढ़ती संभावनाओं की खबरें सामने लाता है, तब देश और दुनिया में छत्तीसगढ़ की नई पहचान बनती है। जो बस्तर कभी बंदूक और हिंसा की खबरों से पहचाना जाता था, आज वही बस्तर पर्यटन, प्रकृति और विकास की नई संभावनाओं का केंद्र बनकर उभर रहा है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता की 200 वर्षों की यात्रा अत्यंत गौरवशाली रही है। उन्होंने कहा कि 1826 में जब उदंत मार्तंड की शुरुआत हुई, तब देश अंग्रेजी शासन के कठिन दौर से गुजर रहा था। ऐसे समय में पत्रकारिता ने अंधकार को सामने लाने के साथ समाज को उजाले की दिशा दिखाने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का मूल धर्म समाज और राष्ट्र को सही दिशा प्रदान करना है।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार एवं इंडिया हैबिटेट सेंटर के डायरेक्टर डॉ. के.जी. सुरेश ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर स्वतंत्र भारत तक पत्रकारिता ने राष्ट्रधर्म और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा है। उन्होंने कहा कि हिंदी पत्रकारिता ने समय के साथ बदलती तकनीकों के अनुरूप स्वयं को विकसित किया है, किंतु सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और नागरिक पत्रकारिता की अवधारणा ने कई नई चुनौतियां भी उत्पन्न की हैं। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता को शोधपरक, तथ्यात्मक और साक्ष्य आधारित बनाए रखना समय की आवश्यकता है, ताकि पत्रकारिता की विश्वसनीयता और सामाजिक भूमिका और मजबूत हो सके।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विशिष्टजनों को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में प्रकाशित नवप्रदेश के विशेष अंक, रायपुर प्रेस क्लब की पत्रकार डायरेक्टरी तथा दिनेश यदु की पुस्तक ‘मैं अगहन हूं’ का विमोचन भी किया।

कार्यक्रम में विधायक पुरंदर मिश्रा, छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, सीएसआईडीसी के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल, राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती वर्णिका शर्मा, राम मंदिर ट्रस्ट के उपाध्यक्ष सुनील रामदास, रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष मोहन तिवारी, प्रेस क्लब के पदाधिकारीगण, गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे।

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