तेज आंधी-बारिश से रायपुर बेहाल, पेड़ गिरे, फिर बिगड़ सकता है मौसम

रायपुर.

राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के कई इलाकों में शनिवार को आषाढ़ जैसी झमाझम बारिश हुई. तेज अधड़ और गरज-चमक का असर देखने को मिला. कुछ स्थानों पर बड़े पेश धराशाई हो गए, जिससे आवागमन बाधित रहा. इसके कारण वाहनें क्षतिग्रस्त भी हुई.

रविवार सुबह तक पेड़ नहीं हटाए गए हैं. छत्तीसगढ़ में बस्तर संभाग को छोड़कर प्रदेश के शेष हिस्से में सोमवार को मौसम साफ होने लगेगा. आसमान अपेक्षाकृत साफ होगा और दिन के तापमान में वृद्धि होगी. वहीं मई के आखिरी सप्ताह तक कुछ इलाकों पर लू चलने की स्थिति बन सकती है. पूर्व-पश्चिम द्रोणिका पश्चिमी मध्य प्रदेश से पूर्वी मध्य प्रदेश के ऊपर स्थित चक्रवाती परिसंचरण, दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तरी गांगेय पश्चिम बंगाल होते हुए उत्तरी बांग्लादेश तक बनी द्रोणिका और कुछ अन्य सिस्टमों के कारण पिछले दिनों समुद्र  से बड़ी मात्रा में नमी आई.

ज्यादा नमी आने और प्रदेश में दोपहर में पड़ने वाली तेज गर्मी के कारण लोकल सिस्टम बनने से कहीं-कहीं बारिश की स्थितियां बनीं. रविवार तक इन हिस्सों में से कुछ जगहों पर हल्की बारिश और गरज-चमक पड़ सकती है. सोमवार से यहां मौसम साफ होने लगेगा. 20 मई के बाद पूरे प्रदेश में एक बार फिर से तापमान में बढ़ने पर गर्मी महसूस होगी.

मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थियां अनुकूल 
मौसम विज्ञानी एच.पी. चंद्रा ने बताया कि निकोबार द्वीप समूह और उससे लगे अंडमान द्वीप क्षेत्र में अधिकांश स्थानों पर लगातार वर्षा की गतिविधियां दर्ज की जा रही हैं. साथ ही इस क्षेत्र में पश्चिमी हवाएं 35 किलोमीटर प्रति घंटे या उससे अधिक की रफ्तार से चल रही हैं, जो वातावरण में लगभग 4.5 किलोमीटर ऊंचाई तक विस्तारित हैं. इसके अलावा, धरती से उत्सर्जित दीर्घ तरंग विकिरण इन इलाकों में 200 वॉट प्रति वर्ग मीटर से कम दर्ज किया गया है. इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के लिए अनुकूल माहौल बन गया है.

दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे लगे पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक चिन्हित निम्न दाब क्षेत्र बना हुआ है. इसके प्रभाव से जुड़ा ऊपरी हवा का चक्रीय चक्रवाती परिसंचरण लगभग 4.5 किलोमीटर ऊंचाई तक फैला हुआ है. दूसरी ओर, एक पश्चिमी विक्षोभ जम्मू और उससे लगे उत्तर पाकिस्तान क्षेत्र के ऊपर सक्रिय है. इसके साथ ही उत्तर-पूर्व विदर्भ और आसपास के क्षेत्रों में भी 1.5 किलोमीटर ऊंचाई तक एक ऊपरी हवा का चक्रीय चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है. प्रदेश में रविवार को एक दो स्थानों पर हल्की वर्षा और गरज चमक के साथ छींटे पड़ने की संभावना है. अंधड़ और वज्रपात के भी आसार हैं. वहीं अधिकतम तापमान में अब बढ़ोतरी का दौर शुरू हो सकता है.

कई इलाकों में बारिश और बिजली गिरने का अलर्ट
मौसम विभाग ने कई जिलों में बारिश और तेज आंधी-तूफान का अलर्ट जारी है. नारायणपुर, उत्तर बस्तर कांकेर, बालोद, राजनांदगांव, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, बिलासपुर, कोरबा, जशपुर, गौरेला-पेंड्रा मरवाही, दुर्ग, बेमेतरा, कबीरधाम, मुंगेली, सुरगुजा, सूरजपुर, कोरिया, बलरामपुर, में यलो अलर्ट जारी किया है.
मौसम विभाग ने रायपुर में आज 17 मई को आसमान में बादल छाएंगे. बारिश और गरज-चमक के साथ तेज हवा चल सकती है. अधिकतम तापमान 41 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है.

खरीदी केंद्र पर ताला देख फूटा किसानों का गुस्सा, NH-146 पर 3 किमी लंबा जाम

विदिशा.

विदिशा जिले के उपार्जन केंद्रों पर जारी कुप्रबंधन और पिछले पांच दिनों से बने बारदाने के गंभीर संकट के कारण शनिवार को किसानों के सब्र का बांध टूट गया। नेशनल हाईवे-146 स्थित धतुरिया के आदित्य वेयरहाउस खरीदी केंद्र पर जब किसानों को ताला लटका मिला, तो आक्रोशित 500 से अधिक किसानों ने नेशनल हाईवे पर ट्रैक्टर-ट्रालियां आड़ी खड़ी कर चक्काजाम कर दिया।

हालात इस कदर बिगड़ गए कि फंसे हुए दोपहिया वाहनों को निकालने के लिए प्रशासन को बुलडोजर बुलाना पड़ा, जिसने सड़क किनारे मिट्टी डालकर अस्थाई रास्ता बनाया, तब जाकर बाइक सवार वहां से निकल सके।

भीषण गर्मी में थमे पहिए, 3 किलोमीटर तक लगी गाड़ियां
चक्काजाम के कारण नेशनल हाईवे के दोनों ओर करीब तीन किलोमीटर लंबा जाम लग गया। दोपहर के समय पारा 40 डिग्री के पार था, और इस भीषण गर्मी के बीच एक घंटे से अधिक समय तक एंबुलेंस, यात्री बसें और सैकड़ों राहगीर फंसे रहे। छोटे बच्चों और मरीजों के लिए यह एक घंटा बेहद प्रताड़ना भरा रहा।

70 KM दूर से आए किसान बोले- “रात-दिन भूखे-प्यासे दे रहे पहरा”
इस केंद्र पर अव्यवस्थाओं का आलम यह है कि दूर-दराज के क्षेत्रों से आए किसानों को भीषण धूप में प्रताड़ित होना पड़ रहा है।
राकेश चौकसे (धनियाखेड़ी): “हम 11 मई की सुबह ही ट्रॉली लेकर आ गए थे। 5 दिन बीत गए पर तौल नहीं हुई। अब खुले आसमान के नीचे फसल बचाएं या खुद को।”

विशाल ठाकुर (कछुआ बरखेड़ा): “रात-दिन ट्रॉली के पास ही भूखे-प्यासे पहरा देना पड़ रहा है। पानी तक की सही व्यवस्था नहीं है।”

किसान अवतार सिंह और नीलेश अहिरवार ने बताया कि बारदाना, हम्माल और कांटों की कमी के कारण तौल पहले ही कछुआ गति से चल रही थी, और शनिवार को प्रबंधन ने हाथ खड़े करते हुए केंद्र पर ताला ही जड़ दिया।

बारदाना आने पर ही खोला जाम
समिति प्रबंधकों ने अपनी लाचारी जताते हुए कहा कि जिला स्तर से बार-बार मांग के बावजूद पर्याप्त बारदाना उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। चक्काजाम की खबर मिलते ही एसडीएम क्षितिज शर्मा और तहसीलदार अजय पाठक पुलिस बल के साथ पहुंचे। पहले तो किसान सिर्फ कागजी आश्वासन पर हटने को तैयार नहीं हुए। जब प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए मौके पर ही बारदाने से भरी गाड़ी मंगवाई, तब जाकर किसानों ने हाईवे खाली किया।

विपक्ष का आरोप
इस पर विपक्ष और किसान कांग्रेस के जिलाध्यक्ष विनीत दांगी ने तीखा हमला बोलते हुए कहा, “यह पूरी तरह से प्रशासनिक कुप्रबंधन है। जब किसान पांच दिन से गुहार लगा रहे थे, तब कोई सुनवाई नहीं हुई। लेकिन जैसे ही चक्काजाम हुआ, एक घंटे के भीतर बारदाने की गाड़ी आ गई। इससे साफ है कि जानबूझकर लापरवाही बरती जा रही थी।”

तुलाई शुरू करवा दी है –
धतुरिया केंद्र पर बारदाने की कमी और तौल बंद होने की शिकायत मिलते ही हम पुलिस बल के साथ पहुंचे थे। किसानों को तुरंत बारदाना उपलब्ध कराकर तुलाई शुरू करवा दी गई है। सभी केंद्रों की व्यवस्थाओं पर नजर रखी जा रही है।
– क्षितिज शर्मा, एसडीएम, विदिशा

रूस पर यूक्रेन का अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन अटैक, 500 से ज्यादा हमलों से दहला देश; 4 की मौत

नई दिल्ली.
यूक्रेन ने रूस पर सबसे बड़े ड्रोन हमले को अंजाम दिया है। रात भर चले इन हमलों में मॉस्को समेत रूस के कई इलाकों को निशाना बनाया गया। रूस के अधिकारियों की अगर मानें तो इस अटैक में 500 से ज्यादा ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। अधिकारियों ने इस हमले को रूसी राजधानी क्षेत्र पर एक साल से ज्यादा समय में हुआ सबसे बड़ा हमला बताया है। इस हमले में कम से कम चार लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। साथ ही, अलग-अलग इलाकों में रिहायशी इमारतों और बुनियादी सुविधाओं को भी नुकसान पहुंचा।

रूस ने 556 ड्रोन को किया तबाह
रूस के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि रात भर चले इस हमले के दौरान उसके हवाई सुरक्षा तंत्र ने एक दर्जन से ज्यादा इलाकों में यूक्रेन के 556 ड्रोन को रोककर नष्ट कर दिया। इस दौरान मॉस्को और पश्चिमी रूस के आसपास धमाकों और आपातकालीन बचाव कार्यों की खबरें भी आईं। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों में कम से कम चार लोगों की जान चली गई। इनमें से तीन लोगों की मौत मॉस्को क्षेत्र में और एक व्यक्ति की मौत यूक्रेन की सीमा के पास स्थित बेलगोरोद क्षेत्र में हुई।

मॉस्को क्षेत्र के गवर्नर आंद्रेई वोरोब्योव ने बताया कि इन हमलों में कम से कम तीन लोगों की मौत हुई है। वोरोब्योव के मुताबिक, एक ड्रोन के एक निजी रिहायशी मकान से टकराने के कारण एक महिला की मौत हो गई, जबकि बचाव अभियान के दौरान एक अन्य व्यक्ति घंटों तक मलबे के नीचे फंसा रहा।

सुबह तड़के शुरू हुए हमले
हमलों से जुड़ी अलग-अलग घटनाओं में दो लोगों के मारे जाने की भी खबर है। वोरोब्योव ने टेलीग्राम पर लिखा, “एक प्राइवेट घर पर यूएवी गिरने से एक महिला की मौत हो गई। एक और व्यक्ति मलबे के नीचे फंसा हुआ है।” उन्होंने आगे बताया कि हमले सुबह तड़के शुरू हुए और रूसी एयर डिफेंस यूनिट्स को लगातार ऑपरेशन करने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा, “सुबह 3 बजे से एयर डिफेंस फोर्सेज राजधानी के इलाके पर बड़े पैमाने पर हो रहे यूएवी हमले का जवाब दे रही हैं।” साथ ही बताया कि इस हमले के दौरान कम से कम चार लोग घायल हुए और कई इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाओं को निशाना बनाया गया। हालांकि मॉस्को और आस-पास के इलाकों को पहले भी यूक्रेनी ड्रोनों द्वारा निशाना बनाया गया है, लेकिन सीधे रूसी राजधानी को प्रभावित करने वाले हमले तुलनात्मक रूप से कम ही हुए हैं।

जेलेंस्की ने दी थी चेतावनी
रूसी अधिकारियों ने तुरंत इंफ्रास्ट्रक्चर को हुए नुकसान की पूरी जानकारी नहीं दी, लेकिन अधिकारियों ने संकेत दिया कि रिहायशी इलाके और रणनीतिक ठिकाने ही हमले के मुख्य निशाने थे। ये ताजा हमले यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के उस बयान के कुछ ही दिनों बाद हुए, जिसमें उन्होंने कीव पर रूस के एक बड़े हमले के बाद जवाबी कार्रवाई तेज करने की कसम खाई थी। उस हमले में 24 लोगों की जान चली गई थी। जेलेंस्की ने चेतावनी दी थी कि यूक्रेन के शहरों और आम नागरिकों पर लगातार हमलों के लिए मॉस्को को नतीजे भुगतने पड़ेंगे। हाल के दिनों में, कैदियों की अदला-बदली पूरी होने और तीन दिन के अस्थायी युद्धविराम के टूटने के बाद मॉस्को और कीव के बीच हवाई हमले तेज हो गए हैं। यह युद्धविराम इसी हफ्ते खत्म हुआ था।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद का केंद्र सरकार पर हमला, वंदे मातरम फैसले के खिलाफ कोर्ट जाने की चेतावनी

नई दिल्ली

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने की केंद्रीय कार्यसमिति के दो दिवसीय अधिवेशन में सरकार की नीतियों पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि वंदे मातरम को अनिवार्य बनाने और मुस्लिम धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने के खिलाफ उनका संगठन अदालत का दरवाजा खटखटाएगा.

जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने केंद्र सरकार के वंदे मातरम को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के बराबर दर्जा दिया जाने के फैसले को खारिज कर दिया है. मदनी ने वंदे मातरम को ‘विवादित गीत’ और ‘मुसलमानों के खिलाफ’ करार दिया है.

बता दें सरकार ने सभी सरकारी और शैक्षणिक संस्थानों में वंदे मातरम के छह बंद गाना अनिवार्य किया है. इस पर मौलाना अरशद मदनी ने कहा, ‘एक नोटिफिकेशन के जरिए वंदे मातरम जैसे विवादित गीत को राष्ट्रीय गीत घोषित किया गया है. बीजेपी शासित राज्यों में इसे अनिवार्य भी किया जा रहा है.’

मदरसों-मस्जिदों पर अतिक्रमण का विरोध
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में अरशद मदनी ने कहा, ‘दूसरी ओर मस्जिदों, मकबरों और मदरसों को अवैध बताकर गिराया जा रहा है. मदरसों के खिलाफ रोज नए-नए आदेश जारी किए जा रहे हैं, मानो वो शैक्षणिक संस्थान न होकर गैरकानूनी गतिविधियों के केंद्र हों.’

मदनी ने बताया कि वंदे मातरम् को अनिवार्य किए जाने के खिलाफ भी अब कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी. उनके मुताबिक, ‘ये गीत हमारे धार्मिक विश्वासों के खिलाफ है और इसे अनिवार्य बनाकर हमारी धार्मिक स्वतंत्रता को छीनने की कोशिश की जा रही है.’

देश के राजनीतिक माहौल पर बात करते हुए जमीयत ने आरोप लगाया कि पहले सिर्फ मुसलमान ही सांप्रदायिक ताकतों के निशाने पर थे, लेकिन अब सीधे इस्लाम धर्म को निशाना बनाया जा रहा है.

‘शांति और एकता के साथ खतरनाक खेल खेला जा…’
अरशद मदनी ने दावा किया कि देश में नफरत की पॉलिटिक्स अब डराने-धमकाने की पॉलिटिक्स में बदल गई है. इसका मकसद मुसलमानों को डराना और उन्हें थोपी हुई शर्तों के तहत जीने के लिए मजबूर करना है. सत्ता के लिए शांति और एकता के साथ एक खतरनाक खेल खेला जा रहा है, जिससे धार्मिक कट्टरता और नफरत लगातार बढ़ रही है, जबकि कानून के रखवाले चुपचाप देखते रहते हैं.

मदनी ने लिखा, ‘हाल के चुनावों के बाद, कुछ नेताओं का नफरत के ज़रिए सत्ता पाने का जुनून और बढ़ गया है और धार्मिक भावनाओं को भड़काकर मेजोरिटी को माइनॉरिटी के खिलाफ खड़ा किया जा रहा है, जबकि सरकारें इंसाफ और निष्पक्षता से चलती हैं, डर और धमकियों से नहीं.’

शुभेंदु अधिकारी पर मदनी का निशाना
मदनी ने शुभेंदु अधिकारी को लेकर कहा, ‘पश्चिम बंगाल के नए चुने गए मुख्यमंत्री का ये बयान कि वो सिर्फ हिंदुओं के लिए काम करेंगे पूरी तरह से संवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है. क्योंकि हर मुख्यमंत्री सभी नागरिकों के लिए न्याय बनाए रखने की शपथ लेता है. सत्ता में बैठे लोगों की जिम्मेदारी हर नागरिक के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना है, न कि किसी खास समुदाय के खिलाफ नफरत और बांटने वाली राजनीति को बढ़ावा देना.’

मदनी ने आरोप लगाया है कि देश को एक सोची-समझी सोच वाले देश में बदलने की एक सोची-समझी कोशिश है. यूनिफॉर्म सिविल कोड, वंदे मातरम को जरूरी बनाना, मस्जिदों और मदरसों के खिलाफ कार्रवाई और SIR की आड़ में असली नागरिकों को वोट देने के अधिकार से रोकना, ये सब एक ही कड़ी की कड़ी हैं.

‘इस्लाम खुद निशाना बन गया है’
उन्होंने साफ किया कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद ऐसे सभी कदमों के खिलाफ अपनी कानूनी और लोकतांत्रिक लड़ाई जारी रखेगी. पिछली सरकारों ने भी मुसलमानों को सामाजिक, शैक्षणिक, राजनीतिक और आर्थिक नुकसान पहुंचाया, लेकिन आज हालात कहीं ज्यादा खतरनाक हो गए हैं. पहले सिर्फ मुसलमानों को निशाना बनाया जाता था, अब इस्लाम खुद निशाना बन गया है.

मदनी ने लिखा, ‘2014 के बाद बनाए गए कानून और हाल के कदम इस बात का साफ सबूत हैं कि मौजूदा सरकार सिर्फ मुसलमानों को ही नहीं, बल्कि इस्लाम को भी नुकसान पहुंचाना चाहती है. दुनिया भर में भी इस्लाम के खिलाफ संगठित प्रोपेगैंडा चलाया जा रहा है. हालांकि, इतिहास गवाह है कि जो लोग इस्लाम को मिटाना चाहते थे, वो खुद ही मिट गए. इस्लाम जिंदा था, जिंदा है, और कयामत तक जिंदा रहेगा.’

आखिर में उन्होंने अपील करते हुए कहा कि हम सभी इंसाफ पसंद पार्टियों, सामाजिक संगठनों और देशभक्त नागरिकों से अपील करते हैं कि वो डेमोक्रेटिक और सामाजिक लेवल पर सांप्रदायिक और फासिस्ट ताकतों के खिलाफ एकजुट हों और देश में भाईचारे, सहनशीलता, इंसाफ और संविधान के लिए मिलकर संघर्ष करें.

जनगणना में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही ने रचा रिकॉर्ड, तय समय से पहले पूरा किया लक्ष्य

​गौरेला-पेंड्रा-मरवाही.

भारत की जनगणना 2027 के अंतर्गत मकान सूचीकरण और मकानों की गणना के कार्य में जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) ने पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है. निर्धारित समय-सीमा (30 मई) से काफी पहले, 16 मई की स्थिति में ही जिले ने शत-प्रतिशत कार्य पूर्ण कर एक नया कीर्तिमान रचा है.

​इस बड़ी उपलब्धि पर कलेक्टर एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने पूरी टीम को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं. ​उल्लेखनीय है कि जब 8 मई 2026 को कलेक्टर डॉ. संतोष देवांगन ने कार्यभार ग्रहण किया था, तब जिले में जनगणना की प्रगति मात्र 6 प्रतिशत थी.
राष्ट्रीय महत्व के इस कार्य की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने इसे मिशन मोड पर लिया. उनके निरंतर पर्यवेक्षण और कड़े नीतिगत फैसलों का ही नतीजा था कि महज 8 दिनों के भीतर (11 मई तक) आधे से अधिक ब्लॉक का काम पूरा हो गया और 16 मई को जिला प्रदेश में सबसे पहले 100% लक्ष्य हासिल करने वाला जिला बन गया.

​कलेक्टर ने बताया कि इस सफलता के पीछे जमीनी अमले का कड़ा परिश्रम है. कार्य की प्रगति को गति देने के लिए उन्होंने बीच में ही उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया था, जिससे पूरी टीम का उत्साह दोगुना हो गया. इस पूरे महाअभियान में 513 प्रगणक और 85 पर्यवेक्षक मुस्तैदी से जुटे हुए थे.

​कलेक्टर डॉ. संतोष देवांगन ने इस सफलता के लिए प्रशासनिक अधिकारियों की पूरी टीम की पीठ थपथपाई है, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं. अमित बेक (जिला जनगणना अधिकारी), ​विक्रांत अंचल (अनुविभागीय जनगणना अधिकारी, पेंड्रारोड) ,​देवेंद्र सिरमौर (अनुविभागीय जनगणना अधिकारी, मरवाही), ​चार्ज जनगणना अधिकारी शेषनारायण जायसवाल (पेंड्रारोड ग्रामीण), प्रीति शर्मा (मरवाही ग्रामीण), अविनाश कुजूर (पेंड्रा ग्रामीण), दशोदा अर्मो (सकोला ग्रामीण), नारायण साहू (गौरेला नगरीय) और अमलदीप मिंज (पेंड्रा एवं मरवाही नगरीय) मुख्य रूप से रहे.

​कलेक्टर का कहना है कि यह सफलता निरंतर समीक्षा और हमारी टीम के कठिन परिश्रम का परिणाम है. मैं इस कार्य में बढ़-चढ़कर सहयोग करने के लिए जिले की आम जनता, जनप्रतिनिधियों और मीडिया साथियों का सहृदय आभार व्यक्त करता हूँ कार्य पूरा करने की अवधि 1 से 30 मई थी, जिसे 14 दिन पहले ही 16 मई को पूरा कर लिया गया. 8 मई को जो काम केवल 6% था, वह 100% मुकाम पर पहुँचा. 513 प्रगणकों और 85 पर्यवेक्षकों ने दिन-रात एक कर जिले को प्रदेश में नंबर-1 बनाया.

मुख्यमंत्री साय ने दी जिला प्रशासन को बधाई
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जनगणना कार्य में अव्वल रहने पर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिला प्रशासन को बधाई दी है. उन्होंने कहा, हमारी सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ और सुशासन के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है. आगामी जनगणना 2027 के ये आंकड़े भविष्य में छत्तीसगढ़ के विकास, जनकल्याणकारी योजनाओं और नीति निर्धारण की मजबूत बुनियाद बनेंगे. डिजिटल तकनीकों का उपयोग कर समय-सीमा में कार्य पूर्ण करना सराहनीय है. जिन बड़े शहरों या नगर निगमों में गति धीमी है, वहां के अधिकारी मैदानी मॉनिटरिंग बढ़ाएं और जल्द इस राष्ट्रीय महत्व के कार्य को गति दें.

जंगल में महिला अधिवक्ता की हत्या से सनसनी, इंटरनेट दोस्ती बनी मौत की वजह

रायगढ़

 महिला अधिवक्ता की नग्न लाश मिलने वाली हत्याकांड की गुत्थी को पुलिस ने बाइक नंबर और सीसीटीवी फुटेज सूक्ष्मता से खंगाल कर आरोपित विवाहित प्रेमी को धर दबोचा है। आरोपित ने लगातार बन रहे शादी के दबाव के चलते सुनियोजित तरीके से हत्या की वारदात को अंजाम निर्मम तरीके से दे दिया।

आज पुलिस कंट्रोल रूम में आयोजित प्रेस वार्ता में एसएसपी शशि मोहन सिंह ने पूरे मामले का राजफाश किया है।एसएसपी ने वारदात के संबंध में बताया कि 12 मई को थाना पूंजीपथरा पुलिस को सूचना मिली थी कि ग्राम पूंजीपथरा के कटेल टिकरा जंगल अंदर शासकीय जमीन पर एक अज्ञात महिला का शव पड़ा हुआ है।

 

मध्यप्रदेश के जंगलों में 1000 साल पुराने पदचिन्ह, पुरातत्व विभाग की जांच जारी

रायसेन
 
मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के जंगलों में पुरातत्वविदों को एक बेहद प्राचीन और महत्वपूर्ण सफलता हाथ लगी है। रायसेन के जामगढ़ गांव में पथरीले रास्तों के बीच करीब 800 मीटर के दायरे में फैले पत्थरों पर उकेरी गई प्राचीन पदचिन्हों (पैरों के निशान) की खोज की गई है।

ये पदचिन्ह किसी महान संत के हो सकते हैं

इसके साथ ही वहां शुरुआती ‘नागरी लिपि’ में लिखा एक शिलालेख भी मिला है, जोकरीब 10वीं-11वीं शताब्दी (परमार काल) का माना जा रहा है। इतिहासकारों का मानना है कि पत्थरों पर बने ये कदम किसी महान संत या जैन मुनि के हो सकते हैं, जो एक हजार साल पहले इस क्षेत्र से गुजरे थे।

 

श्योपुर में बड़ा हादसा: मजदूरों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटी, 40 घायल, 6 जिंदगी की जंग लड़ रहे

श्योपुर.

मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले से एक बड़े हादसे की खबर आ रही है। यहां आवदा थाना इलाके के भोजका गांव के पास तेंदूपत्ता तोड़कर लौट रहे मजदूरों से भरी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली अनियंत्रित होकर पलट गई। इस दर्दनाक हादसे में ट्रॉली में सवार करीब 40 मजदूर घायल हो गए हैं।

बताया जा रहा है कि सभी मजदूर काम खत्म करके वापस लौट रहे थे, तभी यह हादसा हुआ। घटना के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। सभी घायलों को तुरंत जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां 6 मजदूरों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।

इसके पहले भी जिले के विजयपुर क्षेत्र में शादी में भात मांगन जा रहे एक ट्रैक्टर पलटने से चार महिलाओं की मौत हो गई और दो दर्जन से अधिक लोग घायल हो गये।सभी घायलों को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र विजयपुर में भर्ती कराया गया है। हादसे मैं गंभीर रूप से घायल हुए छह लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद ग्वालियर रेफर कर दिया गया। गुर्जर समाज के महिला पुरुष ट्रैक्टर ट्राली में सवार होकर घूघस से झारबड़ौदा भात मांगने जा रहे थे, तभी खितरपाल एमएस रोड इंडेन गैस एजेंसी के पास तेज रफ्तार के कारण ट्रैक्टर ट्रॉली अनियंत्रित होकर पलट गए, जिससे ट्रॉली में सवार चार महिलाओं की घटनास्थल पर ही मौत हो गई।

इस घटना के बाद जहां विवाह की खुशियां मातम में बदल गई, वहीं पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल निर्मित हो गया है। घटनाक्रम की सूचना मिलने के बाद पूर्व वनमंत्री रामनिवास रावत, एसडीएम अभिषेक मिश्रा और टीआई राजन गुर्जर सहित पुलिस और प्रशासन के अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे और मरीजों को कर के लिए अस्पताल भर्ती करने में मदद की।

चुप्पी को सहमति बताकर तालिबान ने बढ़ाया खतरा, अफगानिस्तान में बाल विवाह को मिली खुली छूट

नई दिल्ली.
अफगानिस्तान में तालिबान शासन ने शादी, तलाक और बाल विवाह से जुड़ा एक नया और विवादित पारिवारिक कानून लागू किया है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने बड़े पैमाने पर आलोचना की है। अफ़गानी मीडिया आउटलेट ‘अमू टीवी’ के अनुसार, 31 अनुच्छेदों वाले इस नियम को तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने मंजूरी दी थी और मई के मध्य में इसे शासन के आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित किया गया था। इसका शीर्षक पति-पत्नी के बीच अलगाव के सिद्धांत है।

तालिबान के नए नियम

  • इस दस्तावेज में बाल विवाह, लापता पतियों, जबरदस्ती अलग करने, धर्म-त्याग, व्यभिचार के आरोपों और अन्य धार्मिक व कानूनी मामलों से जुड़े नियम बताए गए हैं। 
  • इसके सबसे विवादित प्रावधानों में से एक यह है कि यौवन प्राप्त करने के बाद किसी कुंवारी लड़की की चुप्पी को शादी के लिए उसकी सहमति माना जा सकता है।
  • हालांकि, इस नियम में यह भी कहा गया है कि किसी लड़के या पहले से शादीशुदा महिला की चुप्पी को अपने-आप सहमति नहीं माना जाएगा।
  • इस आदेश में “खियार अल-बुलूग” या “जवानी आने पर मिलने वाले विकल्प” की भी बात की गई है। यह इस्लामिक कानून का एक ऐसा सिद्धांत है जिसके तहत कम उम्र में शादी करने वाला कोई भी बच्चा, जवानी आने के बाद अपनी शादी रद करवा सकता है।
  • नियम के अनुच्छेद 5 के अनुसार, अगर किसी बच्चे के पिता या दादा के अलावा कोई और रिश्तेदार किसी नाबालिग की शादी तय करता है तो भी उस शादी को कानूनी रूप से वैध माना जा सकता है, बशर्ते कि जीवनसाथी सामाजिक रूप से मेल खाता हो और दहेज भी उचित हो।
  • बच्चा बाद में शादी रद करवाने की मांग कर सकता है, लेकिन ऐसा सिर्फ तालिबान की अदालत के आदेश से ही हो सकता है।
  • एक और नियम यह कहता है कि अगर जीवनसाथी मेल न खाता हो या दहेज अनुचित हो तो ऐसी शादियों को वैध नहीं माना जाएगा।
  • यह नियम पिता और दादाओं को बाल विवाह के मामले में काफी अधिकार देता है। हालांकि इसमें यह भी कहा गया है कि अगर अभिभावक ज़ुल्म करने वाले, मानसिक रूप से अयोग्य या नैतिक रूप से भ्रष्ट पाए जाते हैं तो ऐसी शादियों को रद किया जा सकता है।

जजों को क्या अधिकार मिले?
यह दस्तावेज तालिबान के जजों को उन विवादों में दखल देने का अधिकार देता है जिनमें व्यभिचार, धर्म-परिवर्तन, पति की लंबे समय तक गैर-मौजूदगी और “जिहार” (Zihar) के आरोप शामिल हों। “जिहार” एक पुरानी इस्लामी प्रथा है जिसमें पति अपनी पत्नी की तुलना किसी ऐसी महिला रिश्तेदार से करता है जिससे शादी करना मना होता है। इन नियमों के तहत जज कुछ मामलों में अलग होने, जेल भेजने या सजा देने का आदेश दे सकते हैं। यह नया आदेश ऐसे समय में आया है जब अगस्त 2021 में सत्ता में लौटने के बाद से तालिबान द्वारा महिलाओं और लड़कियों पर लगाई गई पाबंदियों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना बढ़ रही है।

अफगानिस्तान में लड़कियों को छठी क्लास के बाद पढ़ाई करने से रोक दिया गया है, महिलाओं के यूनिवर्सिटी जाने पर पाबंदी लगा दी गई है और रोजगार, यात्रा और सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेने पर कड़ी पाबंदियां लगाई गई हैं। कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने तालिबान की नीतियों को “जेंडर रंगभेद” (gender apartheid) की व्यवस्था बताया है। ‘गर्ल्स नॉट ब्राइड्स’ के मुताबिक, अफगानिस्तान की लगभग एक-तिहाई लड़कियों की शादी 18 साल की उम्र से पहले ही हो जाती है।

रूस के खतरनाक डूम्सडे हथियार: दुनिया में बढ़ा परमाणु खतरा

नई दिल्ली

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक खतरनाक हथियारों को जमा कर रहे हैं. ये हथियार इतने भयानक हैं कि इन्हें दबाने मात्र से पूरा एक देश तबाह हो सकता है. रूस के वैज्ञानिक परमाणु ऊर्जा से चलने वाले ड्रोन, हाइपरसोनिक मिसाइलें, स्पेस में हमला करने वाले हथियार और परमाणु टॉरपीडो बना रहे हैं. पश्चिमी देशों के विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया 1962 की क्यूबा मिसाइल संकट के बाद अब सबसे ज्यादा परमाणु खतरे के करीब पहुंच गई है.

पोसाइडन: समुद्र के अंदर का ‘डूम्सडे’ हथियार
रूस का सबसे चर्चित हथियार पोसाइडन है. यह एक परमाणु ऊर्जा से चलने वाला विशाल अंडरवाटर ड्रोन है, जो छोटी पनडुब्बी जितना बड़ा है. यह हजारों किलोमीटर तक समुद्र के अंदर यात्रा कर सकता है. दुश्मन के तट के पास पहुंचकर यह फट सकता है.

विस्फोट से विशाल रेडियोएक्टिव सुनामी उठ सकती है, जो तटीय शहरों और नौसैनिक अड्डों को पूरी तरह नष्ट कर देगी. पुतिन का दावा है कि इसे रोका नहीं जा सकता. पश्चिमी विशेषज्ञ इसे डूम्सडे वेपन कहते हैं. रूस ने हाल ही में इसका सफल परीक्षण किया है. इसे ले जाने वाली नई पनडुब्बी खाबारोवस्क भी तैयार हो रही है.

बुरेवेस्तनिक: फ्लाइंग चेरनोबिल मिसाइल
बुरेवेस्तनिक मिसाइल को फ्लाइंग चेरनोबिल भी कहा जाता है. यह परमाणु रिएक्टर से चलने वाली क्रूज मिसाइल है, जिसकी रेंज अनलिमिटेड बताई जाती है. पुतिन का कहना है कि यह कई दिनों तक उड़ सकती है.

2019 में इसके परीक्षण के दौरान रूस में विकिरण रिसाव हुआ था, जिसमें कई वैज्ञानिक मारे गए थे. फिर भी रूस इसे विकसित कर रहा है. पश्चिमी देश इसे बहुत खतरनाक मानते हैं क्योंकि इसमें रेडियोएक्टिव कचरा फैलने का खतरा है.

सरमत: दुनिया की सबसे भयानक मिसाइल
Sarmat या Satan-2 रूस की नई इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल है. यह 200 टन से ज्यादा भारी है. इसमें कई परमाणु वॉरहेड लगाए जा सकते हैं, जो अलग-अलग शहरों को निशाना बना सकते हैं.

पुतिन ने हाल ही में इसका सफल परीक्षण किया और कहा कि साल के अंत तक इसे युद्ध के लिए तैयार कर लिया जाएगा. यह मिसाइल दक्षिणी ध्रुव से भी होकर दुश्मन पर हमला कर सकती है, जहां रडार नहीं होते.

हाइपरसोनिक हथियार  
एवनगार्ड: यह हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल है, जो 24 हजार किलोमीटर प्रति घंटे से भी तेज गति से दुश्मन पर टूट पड़ता है. बीच में अपना रास्ता बदल सकता है.
किंझल: हवा से छोड़ी जाने वाली हाइपरसोनिक मिसाइल. यूक्रेन में इसका इस्तेमाल हो चुका है.
जिरकॉन: समुद्र से छोड़ी जाने वाली हाइपरसोनिक मिसाइल, जो 11265 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से जहाजों को डुबो सकती है.
ये सभी मिसाइलें इतनी तेज हैं कि मौजूदा डिफेंस सिस्टम उन्हें रोक पाना मुश्किल है.

स्पेस में युद्ध: सैटेलाइट ब्लाइंड करने वाला हथियार
रूस संभवतः स्पेस में भी परमाणु हथियार विकसित कर रहा है. अमेरिका का आरोप है कि रूस एक ऐसा सैटेलाइट बना रहा है जो दुश्मन के सैटेलाइट को उड़ा या ब्लाइंड कर सकता है. इससे GPS, कम्युनिकेशन और सैन्य नेटवर्क बंद हो सकते हैं. रूस इससे इनकार करता है, लेकिन उसने UN में इस पर प्रस्ताव को वीटो कर दिया.

पेरेसवेट लेजर और S-500 डिफेंस सिस्टम
पेरेसवेट लेजर सिस्टम सैटेलाइट को अंधा कर सकता है. S-500 Prometheus सिस्टम स्टेल्थ विमान, बैलिस्टिक मिसाइल और स्पेस ऑब्जेक्ट्स को मारने का दावा करता है.

क्यों बना रहा है रूस ये हथियार?
पुतिन इन हथियारों को अजेय बताते हैं. ये हथियार न सिर्फ युद्ध जीतने के लिए हैं, बल्कि पश्चिमी देशों को डराने और उन्हें झुकाने के लिए भी हैं. रूस यूक्रेन युद्ध में फंसा है. लगातार परमाणु खतरे की बात कर रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया अब 1962 के बाद सबसे ज्यादा परमाणु खतरे में है.

रूस के ये हथियार सिर्फ सुरक्षा नहीं, बल्कि आतंक फैलाने का हथियार बन गए हैं. पुतिन का सुपरवेपन आर्सेनल दुनिया के लिए बड़ी चिंता का विषय है. पोसाइडन, सरमत, बुरेवेस्तनिक और हाइपरसोनिक मिसाइलें परमाणु युद्ध के खतरे को बढ़ा रही हैं. यदि इनमें से कोई हथियार इस्तेमाल हुआ तो पूरा क्षेत्र तबाह हो सकता है.

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