सहकारिता विभाग में सम्मान समारोह आयोजित, अधिकारियों-कर्मचारियों ने दी शुभकामनाएं

रायपुर

आयुक्त सहकारिता एवं पंजीयक सहकारी संस्थाएं छत्तीसगढ़ श्री महादेव कावरे (आईएएस) के सेवानिवृत्त होने पर आज नवा रायपुर में भावभीनी विदाई एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया। सहकारिता विभाग राजपत्रित अधिकारी संघ एवं अपेक्स बैंक एम्प्लाइज यूनियन द्वारा आयोजित इस समारोह में अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनके दीर्घ प्रशासनिक अनुभव, कुशल नेतृत्व तथा जनहितकारी कार्यों को स्मरण करते हुए सम्मानपूर्वक विदाई दी।

बीजापुर जिले के मूल निवासी श्री महादेव कावरे की प्रारंभिक शिक्षा बीजापुर में हुई। उन्होंने अपने प्रशासनिक जीवन की शुरुआत विभिन्न महत्वपूर्ण दायित्वों से की और रक्षा, रेलवे तथा राज्य प्रशासनिक सेवा में उल्लेखनीय सेवाएं दीं। वे एसडीएम, एनआरडीए महाप्रबंधक, बेमेतरा एवं जशपुर के कलेक्टर तथा रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर संभाग के कमिश्नर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे।

इसके अलावा उन्होंने सचिव आवास एवं पर्यावरण, सचिव आबकारी, गृह विभाग तथा संचालक कोष एवं लेखा जैसे महत्वपूर्ण विभागों में अपनी सेवाएं देकर प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। सहकारिता विभाग में उनके कार्यकाल को पारदर्शिता, नवाचार और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विशेष रूप से याद किया जाएगा।

सम्मान समारोह में सहकारिता विभाग के अपर आयुक्त एवं अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक श्री के.एन. कांडे सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने श्री कावरे के प्रशासनिक योगदान की सराहना करते हुए उनके स्वस्थ, सुखद एवं सफल भविष्य की कामना की।

छत्तीसगढ़ का स्मार्ट पंजीयन मॉडल बना सुशासन की नई पहचान

रायपुर

छत्तीसगढ़ में सुशासन और नागरिक सुविधाओं को केंद्र में रखकर प्रशासनिक व्यवस्थाओं में व्यापक सुधार किए जा रहे हैं। इसी दिशा में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय और वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी के नेतृत्व में पंजीयन विभाग में ऐतिहासिक एवं परिवर्तनकारी सुधारों की शुरुआत की गई है। राज्य सरकार का उद्देश्य पंजीयन प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी, तकनीक आधारित तथा नागरिकों के लिए पूरी तरह सुविधाजनक बनाना है।

कभी लंबी कतारों, घंटों इंतजार, दस्तावेजों के सत्यापन में देरी और बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने वाली पंजीयन प्रक्रिया अब पूरी तरह बदलती दिखाई दे रही है। पहले जहां एक साधारण रजिस्ट्री पूरी करने में 4 से 6 घंटे अथवा कई बार 1 से 2 दिन तक लग जाते थे, वहीं अब आधुनिक डिजिटल व्यवस्थाओं की मदद से यही प्रक्रिया केवल 15 से 20 मिनट में पूरी हो रही है। इससे नागरिकों के समय, धन और ऊर्जा तीनों की बड़ी बचत हो रही है।

राज्य सरकार ने अगले एक वर्ष के भीतर प्रदेश के सभी 119 पंजीयन कार्यालयों को स्मार्ट एवं विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। पहले चरण में नवा रायपुर सीबीडी बिल्डिंग, बेबीलॉन टॉवर रायपुर, राम बिजनेस पार्क, सड्डू, कलेक्ट्रेट परिसर रायगढ़, दुर्ग, बिलासपुर, कुनकुरी, अभनपुर तथा तिल्दा सहित 10 प्रमुख कार्यालयों को आधुनिक स्वरूप दिया जा रहा है।

इन नए स्मार्ट पंजीयन कार्यालयों में अब नागरिकों को वेटिंग लाउंज, वातानुकूलित सुविधा, स्वच्छ एवं व्यवस्थित परिसर, निःशुल्क वाई-फाई, मोबाइल चार्जिंग स्टेशन, शुद्ध पेयजल, आधुनिक शौचालय, हेल्प डेस्क तथा प्री-प्रेजेंटेशन काउंटर जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं। इससे पंजीयन कार्यालय अब किसी आधुनिक सेवा केंद्र की तरह दिखाई देने लगे हैं।

रायगढ़ के लाभार्थी  आशीष अग्रवाल ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि, पहले यहां आने पर निराशा महसूस होती थी, लेकिन अब माहौल पूरी तरह बदल गया है। बैठने की अच्छी व्यवस्था है, एसी लगा है, ठंडे पानी की सुविधा है और पूरा वातावरण बेहतर हो गया है। इसके लिए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय और वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी का बहुत-बहुत धन्यवाद।

डिजिटल तकनीक के उपयोग से पंजीयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता भी बढ़ी है। टोकन सिस्टम लागू होने से भीड़ और अव्यवस्था कम हुई है, वहीं बिचौलियों की भूमिका समाप्त होने से अतिरिक्त खर्च पर रोक लगी है। अब नागरिकों को व्हाट्सएप नोटिफिकेशन, कैशलेस भुगतान, खसरा नंबर के माध्यम से संपत्ति की ऑनलाइन जानकारी तथा डिजीलॉकर जैसी सुविधाएं भी मिल रही हैं, जिससे दस्तावेज तुरंत और सुरक्षित रूप से उपलब्ध हो रहे हैं।

यह पूरी व्यवस्था तेजी से पेपरलेस और डिजिटल मॉडल की ओर बढ़ रही है, जिससे शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों मजबूत हो रही हैं। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में लागू यह स्मार्ट पंजीयन मॉडल “रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म” के विजन को धरातल पर उतारने का प्रभावी उदाहरण बन गया है।

छत्तीसगढ़ आज पुराने, जटिल और फाइलों के बोझ वाले सिस्टम को पीछे छोड़ते हुए आधुनिक डिजिटल प्रशासन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य का यह स्मार्ट पंजीयन मॉडल न केवल प्रदेश में सुशासन की नई परिभाषा गढ़ रहा है, बल्कि देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बनता जा रहा है।

नीमच रिश्वत कांड पर भड़के दिग्विजय सिंह, कलेक्टर-एसपी से मांगा जवाब

नीमच

जनपद पंचायत जावद के अध्यक्ष गोपाल चारण के रिश्वत लेते पकड़े जाने के मामले में लगभग तीन साल तक कोई कार्रवाई नहीं होने पर पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर कलेक्टर और एसपी को संबोधित पोस्ट करते हुए कई सवाल किए हैं और जवाब नहीं मिलने की दशा में कहा कि अन्यथा मुझे आपकी जनसुनवाई में आना पड़ेगा।

सोशल मीडिया पर उठाए सवाल

दिग्विजय सिंह ने 30 मई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स और फेसबुक पर पोस्ट की है, जिसमें उन्होंने जावद के अध्यक्ष के रिश्वत लेते पकड़े जाने पर गिरफ्तार नहीं किए, पद से नहीं हटाए जाने और सरपंच व सचिव के भ्रष्टाचार की जांच में दोषी पाए जाने के बावजूद पंचायत अधिनियम के तहत पद से बेदखल नहीं करने जैसे सवाल उठाए हैं। नीमच कलेक्टर व एसपी से सवालों के जवाब मांगे हैं।

 

क्या भगवान मंत्रियों का इंतजार करते हैं? VIP दर्शन व्यवस्था पर हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी

चेन्नई

मद्रास हाईकोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए बीते  पूछा कि भगवान के सामने तो सभी लोग समान होते हैं तो मंदिरों में VIP दर्शन जैसी व्यवस्था क्यों होनी चाहिए। इसकी वजह से आम श्रद्धालुओं को मंदिर के बाहर इंतजार करना पड़ता है। दरअसल, जस्टिस जी. आर. स्वामीनाथन और जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन की बेंच मंदिरों में वीआईपी दर्शन और स्पेशल दर्शन व्यवस्था को खत्म करने की मांग वाली अर्जी पर सुनवाई कर रही थी, तब उन्होंने यह टिप्पणी की।

‘मंदिर में मंत्रियों की प्रतीक्षा नहीं कर रहे भगवान’
सुनवाई के दौरान, मद्रास हाईकोर्ट ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा, ‘मंत्रियों और विधायकों को यह ना समझने दें कि वे किसी भी वक्त मंदिर में प्रवेश कर सकते हैं और भगवान उनकी प्रतीक्षा कर रहे होंगे। VIP दर्शन की जरूरत ही क्या है? भगवान के सामने सभी समान हैं।’

याचिका में की गई VIP दर्शन को खत्म करने की मांग
लाइव लॉ में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस याचिका में वरिष्ठ नागरिक, दिव्यांगजन, मंदिर कला से जुड़े कलाकार, नवविवाहित जोड़े, राज्य के प्रमुख, संवैधानिक पदाधिकारी और गर्भवती महिलाओं को छोड़कर बाकी लोगों के लिए VIP दर्शन और विशेष दर्शन व्यवस्था को खत्म करने की मांग की गई है। सुनवाई के दौरान, मद्रास हाईकोर्ट ने पहले यह भी पूछा था कि क्या 15 मई को किसी मंत्री के दर्शन के लिए तिरुपरंकुंद्रम सुब्रमण्यस्वामी मंदिर के बंद होने का वक्त बढ़ाया गया था।

6 हफ्ते बाद होगी मामले की अगली सुनवाई
इस पर एडिशनल एडवोकेट जनरल पी. वी. बालासुब्रमण्यम ने बेंच को बताया कि मंदिर के बंद होने के वक्त में कोई बदलाव नहीं किया गया था। इस संबंध में एक रिपोर्ट भी हाईकोर्ट के समक्ष पेश की गई है। फिर, पी. वी. बालासुब्रमण्यम ने बेंच से जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए वक्त मांगा। मद्रास हाईकोर्ट ने इस अपील को स्वीकार करते हुए केस की अगली सुनवाई 6 हफ्ते के लिए स्थगित कर दी।

VHP के पदाधिकारी ने दाखिल की है याचिका
जान लें कि यह याचिका, मद्रास हाईकोर्ट में विश्व हिंदू परिषद की उत्तर तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष पी. चोक्कलिंगम ने दाखिल की है। याचिकाकर्ता ने कहा है कि हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम की धारा 6(15)(b) के अंतर्गत उनकी अर्जी विचार योग्य है।

सनातन धर्म नहीं सिखाता भेदभाव
पी. चोक्कलिंगम ने अपनी याचिका में कहा कि सनातन धर्म, जाति, आर्थिक संपन्नता या सामाजिक हैसियत के आधार पर कोई भेदभाव नहीं करता है। उन्होंने तर्क दिया कि सनातन धर्म सभी मनुष्यों को एक बराबर मानने की शिक्षा देता है, इसलिए मंदिरों के अंदर वीआईपी और आम श्रद्धालु या अमीर और गरीब के बीच किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए।

क्या है पूरा मामला?
दरअसल, यह पूरा विवाद हाल ही में विजय सरकार में मंत्री बने आर निर्मल कुमार के दौरे को लेकर है। उन पर आरोप लगे थे कि उन्होंने दर्शन के लिए तिरुपरनकुंड्रम स्थित सुब्रमण्य स्वामी मंदिर को बंद करवा दिया था। इसके बाद जब उन्होंने दर्शन कर लिए उसके बाद मंदिर खोला गया। विपक्ष के इन आरोपों को विजय सरकार ने खारिज किया है।

मद्रास हाई कोर्ट में यह मामला विश्व हिंदू परिषद तमिलनाडु ईकाई के नेता पी, चोकलिंगम की याचिका पर शुरू हुआ। उन्होंने दावा किया कि निर्मल कुमार की तरह ही कई बार मंत्री और विधायक मंदिरों में वीआईपी दर्शन के लिए जाते हैं, जिसकी वजह से आम जनता को काफी परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में धन, सामाजिक स्थिति या जाति के आधार पर भेदभाव की अनुमति नहीं देता है और सभी भक्तों के साथ समान व्यवहार किया जाना चाहिए।

हालांकि, चोकलिंगम ने अपनी याचिका में वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों, गर्भवती महिलाओं, नवविवाहित जोड़ों, मंदिर में सेवा करने वाले कलाकारों, राष्ट्राध्यक्षों और संवैधानिक अधिकारियों सहित कुछ श्रेणियों के लिए छूट की मांग की।

एनएमडीसी ने वित्त वर्ष 26 में रचा इतिहास, उत्पादन और बिक्री ने बनाए नए रिकॉर्ड

हैदराबाद    

 सरकार के स्वामित्व वाली लौह अयस्क की प्रमुख कंपनी एनएमडीसी ने अब तक के सबसे मजबूत परिचालन और वित्तीय प्रदर्शन के साथ वित्त वर्ष 26 को समाप्त किया। उत्पादन में मजबूत वृद्धि और अनुशासित निष्पादन ने कंपनी को प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करने में मदद की।

वित्त वर्ष 26 में लौह अयस्क उत्पादन 21% बढ़कर 53.16 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया और बिक्री 13% बढ़कर 50.24 मिलियन टन हो गई, जिससे एनएमडीसी ने  अपने इतिहास में अब तक की सबसे अधिक वार्षिक मात्रा दर्ज की। ये दोनों मील के पत्थर घरेलू इस्पात की सुदृढ़ मांग और भारत के सबसे बड़े लौह अयस्क उत्पादक की बढ़ती क्षमताओं दोनों का संकेत देते हैं। 

उत्पादन और प्रेषण में वृद्धि ने सीधे एनएमडीसी के वित्तीय प्रदर्शन को बढ़ावा दिया, जिससे वित्त वर्ष 26 में टर्न ओवर 33% बढ़कर अब तक के उच्चतम स्तर 31,554 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। । ईबीआईटीडीए 9% बढ़कर रु. 10,737 करोड़ हो गया जबकि कर पूर्व लाभ 9% बढ़कर रु. 10,155 करोड़ और निवल लाभ 11% बढ़कर रु. 7,421 करोड़.हो गया। 

एनएमडीसी ने वित्त वर्ष 26 में 3,690 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय किया साथ ही शेयरधारक रिटर्न को सुदृढ़ बनाए रखा। बोर्ड ने शेयरधारक अनुमोदन के अधीन, 1 रुपये प्रति शेयर के अंतिम लाभांश की सिफारिश की। साथ ही वित्त वर्ष26 के लिए प्रति इक्विटी शेयर रु. 2.5 के अंतरिम लाभांश घोषित किया। इस प्रकार वर्ष के लिए कुल लाभांश की राशि रु. 3,077 करोड़ होती है।.

एनएमडीसी ने उत्पादन, बिक्री और वित्तीय मेट्रिक्स में व्यापक आधार पर वृद्धि के साथ चौथी तिमाही के उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ वित्त वर्ष 26 को एक मजबूत स्थिति में समाप्त किया। लौह अयस्क का उत्पादन वर्ष -दर-वर्ष 22% बढ़कर 16.27 मिलियन टन हो गया, जबकि बिक्री 21% बढ़कर 15.30 मिलियन टन हो गई।

मात्रा में मजबूत वृद्धि ने वित्तीय प्रदर्शन में तेजी से वृद्धि की, जिसमें टर्न ओवर 61% बढ़कर रु. 11,173 करोड़ हो गया। कर पूर्व लाभ 22% बढ़कर रु. हो गया। 2,875 करोड़, जबकि कर पश्चात लाभ 35% बढ़कर रु. 2,020 करोड़ रुपये हो गया। इसे बेहतर प्राप्ति और स्थिर परिचालन दक्षता द्वारा समर्थन मिला। ईबीआईटीडीए 21% बढ़कर रु. 3,072 करोड़ हो गया।  तिमाही के प्रदर्शन ने इस सेक्टर क्षेत्र में एनएमडीसी के प्रभुत्व को और मजबूत किया।
 
एनएमडीसी के सीएमडी  अमिताभ मुखर्जी ने कहा, “रिकॉर्ड उत्पादन, टॉप लाइन में वृद्धि, रणनीतिक पूंजी नियोजन और सभी क्षेत्रों में मजबूत वित्तीय मेट्रिक्स के साथ, एनएमडीसी ने वित्त वर्ष 26 को एक ऐसी गति के साथ बंद किया जो हमें भारत के बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में एक विशिष्ट उच्च स्थान में रखता है। हम इस मात्रात्मक वृद्धि को बनाए रखने, परिसंपत्ति उत्पादकता बढ़ाने और भविष्य के लिए तैयार खनन क्षमता का निर्माण करने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।“ 
 
यह प्रदर्शन कंपनी के भीतर चल रहे परिवर्तन को दर्शाता है, जो मुख्य रूप से उच्च-नकदी-प्रवाह खनन पीएसयू से एक बड़े पैमाने वाले, पूंजी-गहन संसाधन उद्यम के रूप में उभर रहा है, जिसमें परिचालन और वित्तीय पैमाना बढ़ रहा है।

वृद्धि , नकदी प्रवाह और क्षमता एनएमडीसी के वित्त वर्ष 26 रिकॉर्ड प्रदर्शन को परिभाषित करते हैं – टॉपलाइन में 33% की वृद्धि, आउटपुट में 21% की वृद्धि

वि.व. 26    वि.व.25    वृद्धि     4थी तिमाही वि.व.26    4थी तिमाही वि.व.25    वृद्धि

उत्पादन    53.16    44.07    21%    16.27    13.31    22%
बिक्री    50.24    44.40    13%    15.30    12.67    21%
टर्नओवर    31,554    23,668    33%    11,173    6,953    61%
पीबीटी    10,155    9,296    9%    2,875    2,351    22%
पी ए टी    7,421    6,693    11%    2,020    1,496    35%
ईबीआईटीडीए    10,737    9,847    9%    3,072    2,538    21%
उत्पादन और बिक्री मिलियन टन में, और वित्तीय आंकड़े करोड़ रुपये में

मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान

रायपुर

 मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की मंशानुरूप संचालित ‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान’ के तहत दंतेवाड़ा जिले के सुदूर और दुर्गम क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग की टीम 13 किलोमीटर का कठिन पहाड़ी रास्ता पैदल तय कर बैलाडीला क्षेत्र के दूरस्थ ग्राम बड़ेपल्ली पहुंची और ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराईं।

गांव में आयोजित स्वास्थ्य शिविर में कुल 227 ग्रामीणों की जांच की गई। इस दौरान मलेरिया, सिकल सेल, हीमोग्लोबिन, मधुमेह, रक्तचाप सहित अन्य आवश्यक परीक्षण किए गए। जरूरतमंद मरीजों को उपचार के साथ निशुल्क दवाइयां वितरित की गईं।

महिलाओं और गंभीर मरीजों पर विशेष ध्यान

शिविर में गर्भवती महिलाओं और बच्चों की विशेष जांच की गई। एक उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिला को बेहतर उपचार और सुरक्षित प्रसव के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया। वहीं हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज से पीड़ित 12 मरीजों को आगे के उपचार के लिए उच्च स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया।
ग्रामीणों को ‘आयुष्मान भारत योजना’ की जानकारी दी गई तथा सुरक्षित मातृत्व, पोषण और स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के माध्यम से दूरस्थ अंचलों के लोगों को घर के नजदीक स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं। यह अभियान न केवल उपचार उपलब्ध करा रहा है, बल्कि ग्रामीणों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और भरोसा भी बढ़ा रहा है।

वन धन विकास केंद्र ने बदली आदिवासी महिलाओं की तकदीर

रायपुर

 छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी वन धन विकास केंद्र (वीडीवीके) योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से कोरबा जिले के कटघोरा वन प्रभाग अंतर्गत डोंगनाला की आदिवासी महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है। डोंगनाला का हरिबोल स्वयं सहायता समूह आज हर्बल उद्यमों के माध्यम से महिला सशक्तिकरण का एक आदर्श बनकर उभरा है।

दिहाड़ी मजदूरी से सफल उद्यमिता तक का सफर 
मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व और वन मंत्री  केदार कश्यप की मंशानुरूप 

12 आदिवासी महिलाओं से गठित इस समूह की सदस्य पहले दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर थीं। सीमित रोजगार और अस्थिर आय के कारण परिवार की जरूरतें पूरी करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था। लेकिन शासन की वन धन विकास केंद्र योजना से जुड़ने के बाद इन महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया।

प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग से मिली नई पहचान

स्थानीय स्तर पर उपलब्ध औषधीय पौधों और लघु वनोपज की संभावनाओं को देखते हुए महिलाओं को संगठित किया गया। उन्हें आयुर्वेद विशेषज्ञों तथा छत्तीसगढ़ राज्य लघु वन उत्पाद (व्यापार एवं विकास) सहकारी संघ लिमिटेड द्वारा हर्बल प्रसंस्करण, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन का विशेष प्रशिक्षण दिया गया।

हर्बल उत्पादों की बढ़ी मांग

प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद समूह ने त्रिफला चूर्ण, अश्वगंधा चूर्ण, हर्बल फेस पैक, हर्बल हेयर पाउडर और टूथ पाउडर जैसे गुणवत्तापूर्ण हर्बल उत्पाद तैयार करना शुरू किया। गुणवत्ता और प्रभावशीलता के कारण इन उत्पादों की स्थानीय तथा संस्थागत बाजारों में अच्छी मांग बनी।
आयुष विभाग से मिला बड़ा ऑर्डर

समूह को उस समय बड़ी सफलता मिली जब उन्हें आयुष विभाग से बड़ा ऑर्डर प्राप्त हुआ। इस ऑर्डर से समूह को लगभग 20 लाख रुपए का लाभ हुआ। इससे समूह की विश्वसनीयता बढ़ी और नए बाजारों के द्वार खुले।

38.90 लाख रूपए का लाभ, आर्थिक स्थिति हुई मजबूत

वित्तीय वर्ष 2024-25 में समूह ने लगभग 38.90 लाख रुपए का लाभ और कमीशन अर्जित किया। इससे सदस्यों और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई तथा
जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार आया।

26.11 करोड़ रूपए की संचयी बिक्री

वर्ष 2020 से मार्च 2026 तक वीडीवीके डोंगनाला ने लगभग 26.11 करोड़ रूपए की संचयी बिक्री दर्ज की है। यह उपलब्धि समूह की निरंतर मेहनत, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और प्रभावी विपणन रणनीति का परिणाम है।

हर सदस्य की आय पहुंची 1.7 लाख रुपए वार्षिक

इस पहल से समूह की प्रत्येक सदस्य की वार्षिक आय बढ़कर लगभग 1.7 लाख रुपए हो गई है। आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ महिलाओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और निर्णय लेने की शक्ति भी बढ़ी है।

राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान

हर्बल प्रसंस्करण और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए समूह को ट्रायफेड (TRIFED) तथा छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।
अन्य समूहों के लिए प्रेरणा

हरिबोल स्वयं सहायता समूह की सफलता यह साबित करती है कि शासन की योजनाओं, कौशल विकास, संस्थागत सहयोग और बाजार उपलब्धता के माध्यम से आदिवासी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। डोंगनाला की यह सफलता आज पूरे प्रदेश और देश के स्वयं सहायता समूहों के लिए प्रेरणास्रोत बन गई

पितृत्व विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, DNA टेस्ट को बताया न्याय के लिए जरूरी

महासमुंद.

महासमुंद जिले के बसना ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पलसापाली से जुड़े एक चर्चित पितृत्व विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने डीएनए परीक्षण कराने के आदेश को बरकरार रखते हुए स्पष्ट कहा कि जब पितृत्व का प्रश्न सीधे विवाद का विषय हो और उसका समाधान किसी अन्य साक्ष्य से संभव न हो, तब न्यायहित में वैज्ञानिक जांच आवश्यक हो जाती है।

यह मामला कई वर्षों से न्यायालयों में लंबित था। विवाद उस युवक द्वारा दायर दीवानी वाद से जुड़ा है, जिसमें उसने स्वयं को संबंधित व्यक्ति का पुत्र बताते हुए संपत्ति में हिस्सेदारी का दावा किया था। युवक की माता का कहना था कि वर्ष 1999 में दोनों के बीच संबंध बने थे, जिसके बाद युवक का जन्म हुआ। दूसरी ओर संबंधित व्यक्ति लगातार पितृत्व से इंकार करता रहा। मामले में पहले भरण-पोषण को लेकर भी कई कानूनी कार्यवाहियां हुई थीं। निचली अदालतों और बाद में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने डीएनए परीक्षण कराने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि पितृत्व का स्पष्ट निर्धारण डीएनए परीक्षण के बिना संभव नहीं है। इसके बाद मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।

सुप्रीम कोर्ट में अपीलकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि किसी व्यक्ति को जबरन डीएनए सैंपल देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता तथा यह निजता के अधिकार का उल्लंघन है। वहीं दूसरी ओर पीड़ित पक्ष की ओर से कहा गया कि लगातार पितृत्व से इंकार किए जाने के कारण सच्चाई सामने लाने का एकमात्र प्रभावी माध्यम डीएनए परीक्षण ही है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अपने कई पुराने महत्वपूर्ण फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में डीएनए परीक्षण सामान्य रूप से आदेशित नहीं किया जाता, लेकिन जब पितृत्व का प्रश्न सीधे विवाद का विषय हो और उसका उत्तर किसी अन्य साक्ष्य से संभव न हो, तब न्यायालय वैज्ञानिक जांच का आदेश दे सकता है। अदालत ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि इस मामले में ऐसा कोई अन्य ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं है, जो विवाद का अंतिम समाधान दे सके। न्यायालय ने यह भी माना कि यदि इस प्रश्न का स्पष्ट उत्तर कभी सामने नहीं आया, तो संबंधित युवक अपने वैधानिक और संपत्ति संबंधी अधिकारों से वंचित हो सकता है।

निजता के अधिकार पर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निजता का अधिकार पूर्ण नहीं होता और न्यायहित में उसका संतुलन दूसरे पक्ष के अधिकारों के साथ किया जा सकता है। अदालत ने कहा कि इस मामले में दोनों पक्षों के हितों का संतुलन डीएनए परीक्षण के पक्ष में जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने अंततः अपील खारिज करते हुए संबंधित दीवानी न्यायालय को डीएनए परीक्षण की तिथि निर्धारित कर आगे की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इस महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट में पीड़ित पक्ष की ओर से अभिनव श्रीवास्तव व स्थानीय अधिवक्ता बजरंग अग्रवाल की पुत्री अधिवक्ता बरखा अग्रवाल ने पैरवी की। 

गुरु अर्जुन देव जी का बलिदान सत्य, सेवा और मानवता की रक्षा का अमर संदेश : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर 

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज  गुरु अर्जुन देव जी के शहीदी दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर के तेलीबांधा स्थित गुरुद्वारा परिसर में छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज द्वारा आयोजित विशाल छबील एवं छायाचित्र प्रदर्शनी में शामिल होकर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया और उनके महान बलिदान को मानवता, सत्य तथा सेवा की रक्षा का अमर संदेश बताया। 

इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने राहगीरों को शरबत एवं प्रसादी वितरित कर सेवा परंपरा में सहभागी बनते हुए समाज को परोपकार, संवेदना और मानवीय मूल्यों का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान सिक्ख समाज ने मुख्यमंत्री को पगड़ी पहनाकर आत्मीय स्वागत किया।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने गुरुद्वारा परिसर में आयोजित  गुरु अर्जुन देव जी के जीवन पर आधारित छायाचित्र प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। प्रदर्शनी में उनके दिव्य जन्म से लेकर शहादत तक की प्रेरक और गौरवपूर्ण यात्रा को प्रभावशाली ढंग से प्रदर्शित किया गया था। इसमें गुरु गद्दी की प्राप्ति, हरमिंदर साहिब गुरुद्वारा के निर्माण, आदि ग्रंथ साहिब के संकलन, जहांगीर से वैचारिक संघर्ष, गिरफ्तारी, असहनीय यातनाओं के बीच अडिग आस्था का विस्तृत चित्रण शामिल था।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि  गुरु अर्जुन देव जी त्याग, तपस्या, सत्य, सेवा और मानवता की महान प्रतिमूर्ति थे। उनका संपूर्ण जीवन समाज को प्रेम, समानता, करुणा, समर्पण और मानव कल्याण का मार्ग दिखाता है। उन्होंने कहा कि गुरु अर्जुन देव जी ने अन्याय, अत्याचार और दमन के सामने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। असहनीय यातनाओं के बावजूद उनका धैर्य, साहस, आत्मबल और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास आज भी संपूर्ण मानवता के लिए अमर प्रेरणा का स्रोत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीदी दिवस पर आयोजित ‘छबील सेवा’ केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि सेवा, करुणा, भाईचारे और मानवता की जीवंत अभिव्यक्ति है। भीषण गर्मी के बीच राहगीरों को ठंडा और मीठा शरबत पिलाना निस्वार्थ मानव सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि सिक्ख परंपरा में छबील सेवा मानवता के प्रति समर्पण, सह-अस्तित्व और परोपकार की भावना को जीवंत बनाए रखने का माध्यम रही है।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज द्वारा आयोजित छायाचित्र प्रदर्शनी की सराहना करते हुए कहा कि यह नई पीढ़ी को  गुरु अर्जुन देव जी के जीवन, संघर्ष, आध्यात्मिक चेतना और महान बलिदान से परिचित कराने का अत्यंत सराहनीय प्रयास है। उन्होंने कहा कि इतिहास तभी जीवंत रहता है, जब नई पीढ़ी अपने महापुरुषों के विचारों, मूल्यों और त्याग से जुड़ी रहती है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर सभी लोगों से गुरु अर्जुन देव जी के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने तथा सत्य, सेवा, सद्भाव और मानव कल्याण के मार्ग पर चलने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने इस गरिमामय एवं पुनीत आयोजन के लिए छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज को साधुवाद भी दिया।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य आपूर्ति निगम के अध्यक्ष  संजय वास्तव सहित छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज के पदाधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

सुशासन तिहार बना लोगों की राहत का जरिया, घर के पास ही सुलझ रहीं समस्याएं

रायपुर.

छत्तीसगढ़ शासन की मंशानुरूप अंतिम व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुंचाने और जनता की समस्याओं को उनके घर के पास ही सुलझाने का महाअभियान ”सुशासन तिहार 2026” लगातार सफलता के नए कीर्तिमान गढ़ रहा है। इसी कड़ी में धमतरी जिले के विकासखंड नगरी के ग्राम पंचायत घठुला में आयोजित क्लस्टर स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर में ग्रामीणों का जबरदस्त उत्साह देखने को मिला, जहां प्रशासनिक मुस्तैदी के चलते एक ही छत के नीचे 509 आवेदनों का मौके पर ही निराकरण कर ग्रामीणों को बड़ी राहत दी गई।

इस शिविर में घठुला, लटियारा, पाईकभाठा, रतावा, पोड़ागांव, लखनपुरी, फरसगांव, पांवद्वार, गिधावा, बोरई, घुटकेल, मैनपुर, बिरनासिली एवं लिखमा सहित कुल 14 ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों का हुजूम उमड़ पड़ा। शिविर में न केवल लोगों की शिकायतें सुनी गईं, बल्कि विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों के माध्यम से शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की लाइव जानकारियां भी साझा की गईं, जिससे लोगों को जागरूक होने का अवसर मिला। शिविर के दौरान कुल 528 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें 523 आवेदन विभिन्न मांगों से संबंधित और 05 आवेदन जनता की शिकायतों से जुड़े थे। शासन और प्रशासन की संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्राप्त आवेदनों में से 509 का मौके पर ही निपटारा कर हितग्राहियों को तत्काल राहत प्रदान की गई, जबकि शेष बचे आवेदनों के लिए उपस्थित आला अधिकारियों ने संबंधित विभागों को समय-सीमा के भीतर त्वरित कार्रवाई करने के कड़े निर्देश जारी किए। 

हितग्राहियों को योजनाओं की  दी सौगात
शिविर स्थल पर ही हितग्राहियों को योजनाओं की सौगात दी गई, जिसके तहत महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 04 हितग्राहियों को सुपोषण किट, स्वास्थ्य विभाग द्वारा 03 ग्रामीणों को आयुष्मान कार्ड, समाज कल्याण विभाग द्वारा 01 हितग्राही को दिव्यांग सहायक उपकरण और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा ग्रामीणों को मनरेगा जॉब कार्ड का वितरण किया गया।

शासन और जनता के बीच का फासला हुआ कम
शिविर में पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सुशासन तिहार का असली मकसद आम नागरिकों की समस्याओं का संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ तुरंत समाधान करना है, जिससे शासन और जनता के बीच का फासला कम हो रहा है और प्रशासन के प्रति लोगों का विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है।

🏠 Home 🔥 Trending 🎥 Video 📰 E-Paper Menu