मंत्री शुक्ला एवंतोमर भोपाल में 18 मई को करेंगे व्हाट्सएप चैटबॉट का शुभारंभ

भोपाल

नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्रीराकेश शुक्ला एवं ऊर्जा मंत्रीप्रद्युम्न सिंह तोमर ऊर्जा विकास निगम के व्हाट्सऐप चैटबॉट एवं प्रचार वीडियो का शुभारंभ करेंगे। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का डिजिटली प्रचार-प्रसार करने के लिये एमपीयूवीएनएल एवं काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवॉयरनमेंट एंड वॉटर के सहयोग से 18 मई सोमवार को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में व्हाट्सऐप चैटबॉट एवं प्रचार वीडियो लॉन्च किया जाएगा।

व्हाट्सऐप चैटबॉट और प्रचार वीडियो से नागरिकों को पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की जानकारी सरल एवं डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी। इससे योजना के प्रति आमजन में जागरूकता बढ़ेगी और नागरिकों को आवेदन एवं सोलर संयंत्र लगाने की प्रक्रिया को समझने में मदद मिलेगी।

आमजन के बीच लोकप्रिय हो रही है योजना

प्रदेश में योजना को लेकर लगातार सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। अब तक मध्यप्रदेश में 1 लाख 96 हजार 791 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। इनमें से 1 लाख 24 हजार 663 सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। इन संयंत्रों की कुल क्षमता 467.06 मेगावाट है। भारत सरकार द्वारा अब तक 879.69 करोड़ रुपये का अनुदान भी प्रदान किया जा चुका है।

चैटबॉट शुभारंभ कार्यक्रम में भारत सरकार के अधिकारी, जिला कलेक्टर, बैंक प्रतिनिधि, विद्युत वितरण कंपनियों एवं नगर निगम के अधिकारी तथा योजना से जुड़े पंजीकृत वेंडर भी कार्यक्रम में शामिल होंगे।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कमला पार्क स्थित शनि मंदिर में पूजा-अर्चना की

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनि जयंती के अवसर पर शनिवार को कमला पार्क स्थित शनि मंदिर में दर्शन किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शनि मंदिर और हनुमान मंदिर पहुंचकर पूजा अर्चना की और मंदिर में आए अनके दर्शनार्थियों से भी भेंट की । उन्होंने श्रृद्धालुओं और बच्चों के साथ सेल्फी भी खिंचवाई। इस अवसर विधायक श्री भगवान दास सबनानी के अलावा श्री राहुल कोठारी और अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

MP में दरिंदगी: बस स्टैंड से नाबालिग का अपहरण कर मुसाफिरखाने में गैंगरेप, इलाके में सनसनी

छतरपुर

मध्य प्रदेश के छतरपुर के बस स्टैंड क्षेत्र में नाबालिग लड़की के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म की वारदात सामने आने के बाद सनसनी फैल गई। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि देर रात तीन युवक उसे बस स्टैंड स्थित मुसाफिरखाने से अपने साथ ले गए और उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस हरकत में आ गई और मामले में गैंगरेप सहित विभिन्न गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

जानकारी के मुताबिक, घटना शुक्रवार देर रात करीब 10 से 11 बजे के बीच की बताई जा रही है। पीड़िता शनिवार सुबह अपने परिजनों के साथ कोतवाली थाने पहुंची और पूरी घटना की जानकारी पुलिस को दी। इसके बाद पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए 8 अलग-अलग टीमें गठित की गई हैं। पुलिस बस स्टैंड, मुसाफिरखाने और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है, ताकि आरोपियों की पहचान की जा सके। इसके अलावा पुलिस संभावित ठिकानों और होटलों में भी जांच कर रही है।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पीड़िता सटई थाना क्षेत्र की रहने वाली है और वह अपने परिचित युवक के साथ घर से निकली थी। बताया जा रहा है कि युवक उसे बस स्टैंड पर छोड़कर कहीं चला गया, जिसके बाद कथित तौर पर तीन युवक उसे अपने साथ ले गए। फिलहाल पुलिस इस पूरे घटनाक्रम की हर पहलू से जांच कर रही है।

नगर पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सोनी ने बताया कि मामले में गंभीर धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर लिया गया है और आरोपियों की तलाश के लिए लगातार दबिश दी जा रही है। पुलिस तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है।

घटना के बाद शहर में लोगों के बीच आक्रोश का माहौल है। बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक क्षेत्र में हुई इस वारदात ने सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा।

 

इंदौर में बस किराया दोगुना करने की मांग, डीजल महंगा होने पर ऑपरेटरों ने बढ़ाया दबाव

 इंदौर

अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद से ही लगातार कई उत्पादों के दाम में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। हाल ही में केंद्र सरकार ने डीजल-पेट्रोल की कीमत में बढ़ोतरी कर दी। इस बढ़ोतरी के बाद निजी बस ऑपरेटरों ने बस किराये में बढ़ोतरी की मांग शुरू कर दी है।

बस ऑपरेटरों का कहना है कि पांच वर्षों से किराये में किसी तरह की बढ़ोतरी नहीं हुई है। इस दौरान डीजल, टायर, पार्ट्स और लुब्रिकेंट के दाम में बढ़ोतरी हो चुकी है। इससे बस संचालन करना मुश्किल हो रहा है। इंदौर

 

न्यायपालिका को अस्पतालों की तरह 24X7 कार्य करना होगा: भारत के मुख्य न्यायाधीशसूर्यकांत

भोपाल 

भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्तिसूर्यकांत ने कहा है कि अमरकंटक से निकलने वाली मां नर्मदा, छोटी-छोटी नदियों के मिलने से विशाल स्वरूप प्राप्त करती है। इसी प्रकार नई तकनीक की धाराओं के माध्यम से कोर्ट, पुलिस, प्रिजन, फॉरेंसिक और मेडिको लीगल की शाखाएं यूनाइटेड डिजिटल प्लेटफॉर्म में एकाकार होते हुए न्याय पाने में आमजन के लिए सहायक सिद्ध होंगी। आम नागरिक को त्वरित रूप से न्याय देने के लिये न्यायपालिका को अस्पतालों की तरह 24X7 कार्य करना होगा। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा नागरिकों के लिए डिजिटल सेवाओं का विकास कर न्याय प्रक्रिया को तेज और सरल बनाना सराहनीय और अनुकरणीय है। उच्च न्यायालय के डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से समय पर बंदियों को मुक्त करने, अर्जेंट हियरिंग, कोर्ट ऑर्डर के डिजिटलीकरण जैसी अनेक सुविधाएं मिलेंगी। भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्तिसूर्यकांत ने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह व्यवस्था देश के सभी न्यायालयों में लागू की जाए। भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्तिसूर्यकांत जबलपुर में आयोजित फ्रेगमेंटेशन ऑफ फ्यूजन: एम्पावरिंग जस्टिस वाया-यूनाइटेड डिजिटल प्लेटफार्म इंटीग्रेशन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। न्यायमूर्तिसूर्यकांत ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्रीअर्जुन राम मेघवाल, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्तिसंजीव सचदेवा के साथ दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश तथा मुख्य सचिवअनुराग जैन कानूनविद एवं न्यायविद उपस्थित थे।

मध्यप्रदेश पुलिस के सहयोग से वॉर्ड स्तर पर स्थापित संकेत समाधान मध्यस्थता केंद्रों का हुआ शुभारंभ

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में वंदे मातरम और जन गण मन के साथ कार्यक्रम आरंभ हुआ। पुष्पगुच्छ और प्रतीक चिन्ह भेंट कर अतिथियों का स्वागत किया गया। इस अवसर पर हाईकोर्ट के डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की लॉन्चिंग की गई। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने लाइव वीडियो स्ट्रीमिंग के लिए अपना नया CLASS (कोर्टरूम लाइव ऑडियो-विजुअल स्ट्रीमिंग सिस्टम) लॉन्च किया। यह एक ओटीटी स्टाइल में तैयार किया गया डिजिटल सिस्टम है, जिससे थर्ड पार्टी सिस्टम पर निर्भरता खत्म होगी और लाइव स्ट्रीमिंग का पूरा कंट्रोल हाईकोर्ट अथॉरिटी के पास होगा। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का नया पोर्टल भी लॉन्च किया गया। यहां जज, वकील और फरियादियों के लिए कोर्ट के ऑर्डर, बेल एप्लिकेशन सहित अन्य जरूरी दस्तावेज आसानी से उपलब्ध होंगे। यह फ्यूचर रेडी ज्यूडिशियल सिस्टम की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने डिजिटल डेटा मैनेजमेंट सिस्टम ‘प्रथम’ भी लॉन्च किया है। यह सिस्टम आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस से लैस है। यह पारदर्शिता और प्रक्रियाओं को सरल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इस अवसर पर हाईकोर्ट की डिजिटल क्रांति के अंतर्गत कॉपीइंग ऑटोमेशन एंड ज्यूडीशियल इन्फॉर्मेशन डिसएमीनेशन सिस्टम की शुरुआत भी की गई। इससे फरियादियों, वकीलों और जजों को आसानी से ऑडर्स की प्रमाणित प्रतियां मिल सकेंगी। इसके साथ ही प्रिजनर रिलीज के लिए ऑनलाइन क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम की शुरुआत की गई। इस अवसर पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की वार्षिक रिपोर्ट 2025 का विमोचन किया गया। मध्यप्रदेश पुलिस के सहयोग से वॉर्ड स्तर पर स्थापित संकेत समाधान मध्यस्थता केंद्रों का शुभारंभ किया गया। सीजेआई ने वाक एवं श्रवण बाधित नागरिकों की सहायता के लिए मोबाइल एप्लीकेशन संकेत वाणी भी लॉन्च किया। मध्यप्रदेश ज्यूडीशियल एकेडमी द्वारा निर्मित ज्योति जर्नल 2.0 सॉफ्टवेयर की लॉन्चिंग भी की गई।

डिजिटल तकनीक से नागरिकों को त्वरित, किफायती, भेदभाव रहित न्याय सुलभ कराने में मदद मिलेगी

न्यायमूर्तिसूर्यकांत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा न्याय प्रक्रिया में एआई के सदुपयोग पर गठित कमेटी ने अद्भुत कार्य किया है। जल्द ही कमेटी के सुझावों को देश में लागू किया जाएगा। भारत आदिकाल से नवीन तकनीक को अपनाने में अग्रणी रहा है। कोविड महामारी के दौर में भारतीय न्याय व्यवस्था ने नई तकनीक को अंगीकार किया और उस कठिन दौर में न्यायपालिका ने अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया। कोविड के दौर में भी अदालतों में कामकाज बंद नहीं हुआ। इसके लिए दुनियाभर की न्यायपालिकाओं ने भारतीय व्यवस्था की सराहना की थी। उन्होंने कहा कि भविष्य में आम आदमी को तेजी से न्याय दिलवाने में एआई महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। डिजिटल तकनीक को न्याय व्यवस्था के साथ जोड़ने से कोर्ट का समय बचेगा और न्याय प्रक्रिया को गति मिलेगी और जस्टिस डिलीवरी सिस्टम ज्यादा पारदर्शी बनेगा। संविधान की भावना के अनुसार सभी नागरिकों को त्वरित, किफायती, भेदभाव रहित न्याय सुलभ कराने में मदद मिलेगी।

ग्रामीण निवासियों को ऑनलाइन फैसिलिटी का उपयोग सिखाना होगा

न्यायमूर्ति श्रीसूर्यकांत ने कहा कि मध्यप्रदेश सांस्कृतिक और भौगोलिक रूप से विविधता से भरा प्रदेश है। ग्रामीण और नागरिकों को न्यायिक व्यवस्था की ऑनलाइन फैसिलिटी का उपयोग करना सिखाना होगा। इसे लागू करने में भाषा और इंटरनेट की उपलब्धता पर ध्यान देने की आवश्यकता है। हमारे पैरा लीगल वॉलेंटियर्स की मदद से लोगों को स्थानीय और सरल भाषा में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के सदुपयोग के प्रति जागरूक किया जाए।

तकनीक का समन्वय न्याय व्यवस्था को और अधिक विश्वसनीय बनाएगा

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि न्याय व्यवस्था के डिजिटली सशक्त होने से प्रक्रियाएं पारदर्शी होंगी, जिसका सीधा परिणाम आम नागरिक को त्वरित न्याय मिलने के रूप में सामने आएगा। तकनीक का यह समन्वय हमारी न्याय व्यवस्था को और अधिक विश्वसनीय बनाएगा। वर्तमान समय तकनीक और नवाचार का है। विज्ञान ने हमारे जीवन को सरल बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है। जब जीवन के हर क्षेत्र में बदलाव आ रहा है, तब हमारी न्याय व्यवस्था को भी डिजिटली एनेबल होना बेहद जरूरी है। फ्रेगमेंटेशन ऑफ फ्यूजन: एम्पावरिंग जस्टिस वाया यूनाइटेड डिजिटल प्लेटफार्म इंटीग्रेशन कार्यक्रम न्याय व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से सुसज्जित करने, न्यायिक प्रक्रियाओं को गति प्रदान करने और पूरी व्यवस्था को जन-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इंटीग्रेटेड डिजिटल प्लेटफॉर्म कागजी फाइलों की लंबी प्रक्रिया और जटिलता को समाप्त कर, फाइलों के त्वरित निपटारे और बेहतर प्रबंधन का मार्ग प्रशस्त करेगा।

मध्यप्रदेश सुशासन की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सुशासन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार ने टेक्नोलॉजी को सुशासन के मूल मंत्र के साथ जोड़ा है। प्रदेश में सायबर तहसीलों की स्थापना हो चुकी है। पेपरलेस प्रक्रियाओं की ओर अग्रसर होते हुए मंत्रीपरिषद की कार्यवाही डिजिटल की जा चुकी है। प्रदेश में सीएम हेल्पलाइन नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित कर रही है। डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से आम आदमी के जीवन को सरल बनाने की दिशा में राज्य सरकार लगातार कार्यरत है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने देवी अहिल्या माता का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने सीमित संसाधनों में सुव्यवस्था स्थापित की और देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर परोपकार की गतिविधियां भी चलाईं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने अपने नवाचारों के माध्यम से व्यवस्थाओं को आसान बनाया है। प्रदेश में मूक-बधिरों के लिए मोबाइल एप्लीकेशन से न्याय, फाइलों के त्वरित निराकरण, कोर्ट ऑडर्स का डिजिटल सर्टिफिकेशन करते हुए बेहतर प्रबंधन इन नवाचारों के उदाहरण है।

भारतीय जीवन पद्धति से प्राप्त न्याय के मूल्य हमारे रोजमर्रा के जीवन में रचे-बसे हैं

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश के इतिहास में न्याय की प्रक्रिया सम्राट विक्रमादित्य और बेताल के प्रसंगों से जुड़ती है। सम्राट विक्रमादित्य का सुशासन और पारदर्शी न्याय व्यवस्था आज भी हमारे लिए नजीर है। भारतीय ज्ञान परंपरा की किवदंतियों के माध्यम से प्राचीन भारत के समृद्ध न्याय तंत्र पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य ने सदैव नागरिकों के लिए न्यायपूर्ण शासन का संचालन किया। भारतीय जीवन पद्धति से विरासत में मिले न्याय के यह मूल्य, हमारे रोजमर्रा के जीवन में रचे-बसे हैं।

मध्यप्रदेश ने उच्च न्यायालयों को न्याय प्रक्रिया के इंटीग्रेशन की दिशा दिखाई

केंद्रीय विधि एवं कानून राज्य मंत्रीअर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि देश की न्याय व्यवस्था में आज का दिन ऐतिहासिक है। मध्यप्रदेश सिंहासन बत्तीसी की धरती है, सम्राट विक्रमादित्य का सिंहासन धरती में दबकर भी न्याय करता था। मध्यप्रदेश ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ जस्टिस की ओर तेजी से बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश सीसीटीएनएस और मूक-बधिरों के लिए ऐप्लीकेशन की शुरुआत करने वाला नवाचारी राज्य है। अब मशीन लर्निंग, एआई, डिजिटल प्रिंटिंग हमारी जीवनशैली का अभिन्न अंग बन चुके हैं। प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ट्रांसफॉर्म, रिफॉर्म और परफॉर्म की ओर तेजी से बढ़ रहा है। जबलपुर से सैन्य उपकरणों के निर्माण में भी मध्यप्रदेश अग्रणी है। डिजिटलाइजेशन केवल स्कैन करना नहीं है अपितु कई प्रक्रियाओं का इंटीग्रेशन करते हुए व्यवस्था का सशक्तिकरण करना है। मध्यप्रदेश ने देशभर के उच्च न्यायालयों को न्याय प्रक्रिया के सशक्तिकरण की दिशा दिखाई है। तकनीकी एकीकरण से न्याय प्रक्रिया में तेजी आएगी। इन सभी नवाचारों के लिए मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय बधाई का पात्र है। इनसे नागरिकों में न्याय के प्रति विश्वास बढ़ेगा। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने तकनीक के साथ न्याय तक पहुंचने का रास्ता आसान बनाया है। अब तकनीक केवल एक सुविधा नहीं बल्कि न्याय का प्रवेश द्वार है।

हाईकोर्ट का डिजिटल प्लेटफॉर्म नागरिकों के जीवन को आसान बनाएगा

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्तिसंजीव सचदेवा ने कहा कि मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय आज एक डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च कर रहा है। अब फरियादियों को न्यायालय के फैसलों की कॉपी के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा। सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत के मार्गदर्शन में तैयार हुआ हाईकोर्ट का यह डिजिटल प्लेटफॉर्म नागरिकों के जीवन को आसान बनाएगा। आज हम ‘फ्रेगमेंटेशन ऑफ फ्यूजन” के माध्यम से ऐसी प्रक्रिया की ओर बढ़ रहे हैं, जहां सूचनाओं का प्रवाह तेजी और पारदर्शिता के साथ होगा। मध्यप्रदेश लीगल अथॉरिटी ने सबके लिए न्याय प्रक्रिया को आसान बनाने का दायित्व उठाया है। अब आम लोगों के साथ पुलिस को भी ई-समन जारी करना आसान हुआ है, जमानत के आवेदनों का निपटारा करने में भी तेजी आई है। अब रियल टाइम में जानकारियां साझा की जा सकेंगी। हाईकोर्ट के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जमानत और केस से जुड़े फैसलों की ई-कॉपी उपलब्ध होगी।

फाउंटेन पेन से लिखा गया हमारा संविधान अब एआई के दौर में पहुंच चुका है

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एन कोटेश्वर सिंह ने कहा कि फाउंटेन पेन से लिखा गया हमारा संविधान अब एआई के दौर में पहुंच चुका है। किसी कैदी की रिहाई का आदेश पहुंचने में देरी कोई तकनीकी गड़बड़ी नहीं है। लेकिन इस देरी से रिहा हुए व्यक्ति को एक और रात जेल में गुजारनी पड़ती है। एक मिसिंग फॉरेंसिक रिपोर्ट किसी फरियादी के लिए न्याय प्रक्रिया में देरी का कारण बन जाती है। अब कोर्ट के आदेश की सर्टिफाइड कॉपी पाने के लिए किसी को मीलों का सफर नहीं करना पड़ेगा। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की यह नवाचारी पहल अभियोजन पक्ष, पुलिस और नागरिकों के लिए न्याय प्रक्रिया के नए द्वार खोल रही है। डिजिटल तकनीक के उपयोग से देश की न्याय व्यवस्था में बड़ा बदलाव आ रहा है। नवाचारी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से हमारी न्यायपालिक नागरिक अधिकारों के प्रति अधिक जिम्मेदार होगी। हम सभी को मिलकर न्यायिक व्यवस्था की चुनौतियों को समाप्त करने की दिशा में प्रयास करने होंगे।

सर्वोच्च न्यायालय के जस्टिस आलोक अराधे ने कहा कि आज मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने न्यायिक प्रक्रियाओं के सरलीकरण की दिशा में नया अध्याय शुरू किया है। न्याय प्रक्रिया में विलंब, संवैधानिक चिंता का विषय रहा है। न्यायपालिका- कोर्ट, पुलिस, प्रिजन, फॉरेंसिक और मेडिको लीगल सर्विसेस के साथ आने से यह चिंता समाप्त होगी। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने नवाचारी पहलों से नई दिशा दिखाई है। इंटीग्रेडेट डिजिटल इकोसिस्टम से डेटा और सूचनाओं का आदान प्रदान आसानी से संभव हुआ है।

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के एडमिनिस्ट्रेटिव जज जस्टिस विवेक रूसिया ने समारोह में उपस्थित सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में सांसदआशीष दुबे, जबलपुर के महापौरजगत बहादुर अन्नू, महाधिवक्ताप्रशांत सिंह, न्यायाधीशगण, न्यायिक प्राधिकरण से जुड़े प्रशिक्षु, पुलिस अधिकारी और बड़ी संख्या में वकील उपस्थित थे।

 

देश की अनोखी नीमच हर्बल मंडी

भोपाल 

मध्यप्रदेश के नीमच जिले की हर्बल मंडी प्रदेश के औषधीय फसलों के उत्पादक किसानों के लिए वरदान साबित हुई है। यह देश की एक मात्र मंडी है जहां कांटे, फूल, पत्ती, छिलके, बीज, छाल, जड़ सब बिकते हैं। किसानों को विभिन्न औषधीय फसलों के 500 रूपये से लेकर 2 लाख रूपये प्रति क्विंटल तक भाव मिल जाते हैं। नीमच मंडी की प्रसिद्ध‍ि देखते हुए गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के किसान अपनी फसलें लेकर यहां आ रहे हैं।

अप्रैल माह तक मंडी की भरपूर आवक बनी रहती है जो मई के आखरी सप्ताह तक कम होने लगती है। किसानों को निराश नहीं होना पड़ता। हर प्रकार की जड़ी-बूटी बिक जाती है।

मुख्य मंडी प्रांगण में 16 शेड हैं। यह एक मात्र मंडी है जहां 40−50 प्रकार के औषधीय पौधों की खरीदी बोली लगाकर होती है। मसाला फसलों की खरीदी करने वाली देश की एक मात्र सबसे बड़ी मंडी है।

श्री नीलेश पाटीदार नीमच के बड़े काश्तकार हैं। उनकी 45 एकड जमीन है। परिवार में 12 सदस्य हैं। वे पिछले दो-तीन सालों से मसाला फसलों की खेती कर रहे हैं। वे बताते हैं कि इसबगोल, इरानी अकरकारा, चिरायता, आजवाइन, किनोवा, चियासीड, तुलसी बीज जैसी फसलों के बहुत अच्छे दाम मिल जाते हैं। लहसून के भी अच्छे दाम मिलते हैं। नीलेश को इस बात की प्रसन्नता है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव औषधीय फसलों के उत्पादन के लिये प्रोत्साहित कर रहे हैं। वे कहते हैं कि सरकार जड़ी-बूटी की खेती के तौर-तरीकों के संबंध में अच्छी ट्रेनिंग दिलवायेगी तो अच्छे परिणाम मिलेंगे। फिलहाल सरकार की ओर से हर जरूरी सहूलियतें मिल रही हैं। मदद सरकार की और मेहनत हमारी। जड़ी-बूटी उगाने वाले किसानों के लिये नीमच मंडी एक बड़ा सहारा है।

श्री प्रहलाद सिंह रतलाम जिले के आजमपुर डोडिया गांव में रहते हैं। उन्हें अश्वगंधा और अकरकारा बीज बेचने के अच्छे दाम मिले हें। मंडी में समय पर बोली लग जाती है और आसानी से फसल बिक जाती है। किसानों को जरा सी भी परेशानी नहीं होती। मंडी के सब लोगों का व्यवहार बहुत अच्छा है। सरकार ने हमारे जैसे छोटे और मझौले किसानों के लिए मंडी में अच्छी व्यवस्थाएं करा दी हैं।

श्री पंचम सिंह भी इसी गांव के किसान है और आजवाइन, अश्वगंधा लेकर आते हैं। उन्हें तत्काल भुगतान हो जाता है। मंडी की व्यवस्थाएं बहुत अच्छी हो गई हैं। वे बताते हैं कि अब मंडी की प्रसिद्ध‍ि दूर-दूर तक फैल गई है। गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान, महाराष्ट्र , उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के किसान लंबी दूर तय कर यहां माल जाते हैं। अच्छी तुलाई और अच्छे दाम और तत्काल भुगतान के कारण सब यहां आना पसंद करते हैं। इसबगोल, अश्वगंधा, कलौंजी, सतावारी, सफ़ेद मूसली, केसर, सर्पगंधा, अकलकारा जड, जैसी फसलों के दाम ज्यादा है और मांग भी हमेशा बनी रहती है।

मंडी की विशेषताओं की चर्चा करते हुए मंडी सचिवउमेश बसेडिया शर्मा बताते हैं कि समय पर नीलामी, गुणवत्तापूर्ण तुलाई और भुगतान की व्यवस्था किसानों के लिए वरदान साबित हुई है। किसानों के हित में निरंतर सुविधाएं बढाई जा रही हैं। वित्तीय प्रबंधन निरंतर सुधरा है। वर्ष 2024−25 में 64.16 लाख क्विंटल और 2025−26 में 72.40 क्विंटल आवक हुई थी। वे बताते हैं कि मंडी ने किसानों के हित की सभी व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरूस्त कर दिया है। राष्ट्रीय पादप बोर्ड ने साढे पांच करोड़ रूपये का अनुदान भी मंडी की अधोसंरचनात्मक गतिविधियों के लिये उपलब्ध कराया है। इलेक्ट्रानिक नाप-तौल और सीधे व्यापारियों के गोडाउन में पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। यह मंडी प्रांगण 10.9 हेक्टेयर में फैला है। करीब 1100 लाइसेंसधारी व्यापारी इससे जुडे हैं और 150 से ज्यादा तुलावटी उपलब्ध रहते हैं।

औषधीय फसलों के उत्पादन में देश में आगे मप्र

मध्यप्रदेश औषधीय फसलों के उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य है। प्रदेश में 46 हजार 837 हैक्टेयर क्षेत्र में औषधीय फसलों ईसबगोल, सफेद मूसली, कोलियस व अन्य फसलों की खेती की जा रही है। वर्ष 2024-25 में प्रदेश में लगभग सवा लाख मीट्रिक टन औषधीय फसलों का उत्पादन हुआ है। देश और विदेश में औषधीय फसलों की बढ़ती मांग से किसान इन फसलों की ओर आकर्षित हुए हैं।

देश में औषधीय फसलों का 44 प्रतिशत हिस्सा मध्यप्रदेश में उत्पादित होता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के साथ किसानों को अनुदान और अन्य सहूलियतें दी जा रही है। औषधीय पौधों की खेती से किसानों की आय बढ़ाने और रोजगार के अवसर पैदा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार किसानों को औषधीय पौधों की खेती के लिए 20 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक का अनुदान देती है। औषधीय पौधों की खेती और संग्रह से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं। प्रदेश में प्रमुख रूप से अश्वगंधा, सफेद मूसली, गिलोय, तुलसी और कोलियस जैसी कई औषधीय फसलों का उत्पादन होता है।

 

टोंकखुर्द पटाखा फैक्ट्री विस्फोट प्रकरण में राज्य शासन की सख्त कार्रवाई

भोपाल 

देवास जिले की टोंकखुर्द तहसील के ग्राम टोंककला स्थित पटाखा फैक्ट्री में हुई विस्फोट एवं आगजनी की घटना के मामले में पुलिस एवं राजस्व विभाग के तीन अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

गृह विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार सोनकच्छ, जिला-देवास की अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस)  दीपा मांडे को निलंबित किया गया है। आयुक्त उज्जैन संभाग से प्राप्त प्रतिवेदन और पुलिस महानिदेशक की अनुशंसा के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। आदेश में उल्लेख किया गया है कि संबंधित अधिकारी द्वारा शासन स्तर से समय-समय पर जारी निर्देशों के अनुरूप फैक्ट्री संचालन संबंधी निरीक्षण नहीं किए गए। वरिष्ठ कार्यालय को आवश्यक प्रतिवेदन भी प्रेषित नहीं किए गए। शासन ने इसे कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही एवं उदासीनता माना है।

इसी क्रम में संभाग आयुक्तआशीष सिंह द्वारा टोंकखुर्द के एसडीएमसंजीव सक्सेना एवं टप्पा चिडावद के नायब तहसीलदाररवि शर्मा को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। जारी आदेश में कहा गया है कि विस्फोटक सामग्री से संबंधित प्रकरणों में शासन द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रशासनिक निरीक्षण एवं निगरानी नहीं की गई। मामले में गंभीर लापरवाही पाई गई।

सभी अधिकारियों के विरुद्ध मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 तथा मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के प्रावधानों के अंतर्गत कार्रवाई की गई है।

निलंबन अवधि के दौरान सुश्री दीपा मांडे का मुख्यालय पुलिस मुख्यालय, भोपाल निर्धारित किया गया है।संजीव सक्सेना एवंरवि शर्मा का मुख्यालय कलेक्टर कार्यालय, देवास रहेगा। सभी अधिकारियों को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता रहेगी।             

 

बैंक कर्मचारी की सड़क हादसे में मौत, परिजनों को 1.15 करोड़ का मुआवजा

विवेक झा, भोपाल। सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले पंजाब एंड सिंध बैंक के कर्मचारी के परिजनों को भोपाल की मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण अदालत ने बड़ी राहत दी है। अदालत ने मृतक के माता-पिता को 1 करोड़ 15 लाख रुपए से अधिक का मुआवजा 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित देने के आदेश बीमा कंपनी को दिए हैं। यह फैसला मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, भोपाल की सदस्य न्यायाधीश श्रीमती ज्योति राजपूत ने सुनाया।

उज्जैन दर्शन के दौरान हुआ था हादसा

मामले के अनुसार इंदौर निवासी प्रतीक पोल पंजाब एंड सिंध बैंक की बैरसिया शाखा में कैशियर के पद पर पदस्थ थे। 28 जून 2024 को वे अपने चार साथियों के साथ कार से उज्जैन दर्शन के लिए जा रहे थे। इसी दौरान अहमदपुर रोड पर ग्राम रमपुरा बालाचौंन के पास कार चालक ने लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाते हुए कार को सड़क किनारे पेड़ से टकरा दिया। हादसे में प्रतीक गंभीर रूप से घायल हो गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। घटना की रिपोर्ट थाना बैरसिया में दर्ज कराई गई थी।

माता-पिता ने दायर किया था दावा

दुर्घटना के बाद मृतक के पिता देवीदास पोल और माता ऊषा पोल ने अधिवक्ता रणधीर सिंह ठाकुर के माध्यम से कार चालक, वाहन स्वामी और बीमा कंपनी के खिलाफ क्षतिपूर्ति राशि के लिए दावा प्रस्तुत किया। परिजनों ने अदालत में कहा कि प्रतीक परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे और उनकी असमय मृत्यु से परिवार आर्थिक व मानसिक संकट में आ गया।

अदालत ने चालक को माना दोषी

सुनवाई के दौरान अदालत ने दुर्घटना से जुड़े दस्तावेज, एफआईआर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, वाहन संबंधी रिकॉर्ड और गवाहों के बयान पर विचार किया। न्यायालय ने पाया कि दुर्घटना कार चालक की लापरवाही से हुई थी। अदालत ने स्पष्ट कहा कि चालक ने तेज और असावधानीपूर्वक वाहन चलाया, जिसके कारण वाहन अनियंत्रित होकर पेड़ से टकरा गया।

बैंक नौकरी और आय को आधार बनाकर तय हुई राशि

अदालत ने मृतक की आय, नौकरी और भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए मुआवजा तय किया। आदेश में उल्लेख किया गया कि प्रतीक पोल की मासिक आय 70 हजार रुपए से अधिक थी और वे बैंक में नियमित सेवा में थे। न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए भविष्य की आय, आश्रितों की स्थिति और पारिवारिक नुकसान को ध्यान में रखा।

बीमा कंपनी को भुगतान के आदेश

मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने बीमा कंपनी को आदेश दिया कि मृतक के माता-पिता को कुल 1,03,52,544 रुपए मूल क्षतिपूर्ति राशि तथा अन्य मदों सहित करीब 1 करोड़ 15 लाख रुपए का भुगतान 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित किया जाए। अदालत ने यह राशि निर्धारित समयसीमा में जमा कराने के निर्देश भी दिए हैं।

फैसले को बताया महत्वपूर्ण

कानूनी जानकारों के अनुसार यह फैसला सड़क दुर्घटना मामलों में आश्रित परिवारों को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेष रूप से निजी और बैंकिंग क्षेत्र में कार्यरत युवाओं की आय और भविष्य की संभावनाओं को आधार बनाकर बड़ी क्षतिपूर्ति राशि तय किए जाने को अहम माना जा रहा है।

प्रदेश में निरंतर सशक्त हो रही स्वास्थ्य सेवाएं : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को निरंतर सशक्त एवं उन्नत बनाया जा रहा है। प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के साथ ही उनकी सतत एवं सशक्त निगरानी सुनिश्चित की जा रही है, जिससे आमजन को गुणवत्तापूर्ण उपचार सुविधाएं समय पर उपलब्ध हो सकें। महिला एवं शिशु स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य सरकार द्वारा आधुनिक स्वास्थ्य अधोसंरचना, विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं एवं प्रभावी मॉनिटरिंग तंत्र को मजबूत किया जा रहा है। इन प्रयासों से प्रदेश में नवजात एवं मातृ स्वास्थ्य संकेतकों में सतत सुधार दर्ज किया जा रहा है।

नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाइयों का सशक्त संचालन

राज्य में जन्म के समय कम वजन वाले, समय पूर्व जन्मे एवं जन्म के समय गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं के बेहतर उपचार और नवजात मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाइयाँ (एसएनसीयू) प्रभावी रूप से संचालित की जा रही हैं। इन इकाइयों से नवजात शिशुओं को विशेषज्ञ उपचार, आधुनिक चिकित्सा उपकरण एवं प्रशिक्षित चिकित्सकीय देखरेख उपलब्ध कराई जा रही है।

उपचार एवं डिस्चार्ज दर में उल्लेखनीय वृद्धि

वर्ष 2024-25 की तुलना में वित्तीय वर्ष 2025-26 में नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाइयों के प्रदर्शन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 24-25 में जहाँ 1 लाख 29 हजार 212 नवजात शिशुओं को उपचार प्रदान किया गया था, वहीं वर्ष 25-26 में यह संख्या बढ़कर 1 लाख 34 हजार 410 तक पहुँच गई है। साथ ही नवजात शिशुओं की सफलतापूर्वक डिस्चार्ज दर भी अब तक के सर्वोत्तम स्तर 82.3 प्रतिशत पर पहुँच गई है। राज्य में संचालित 62 एसएनसीयू में इस वर्ष 1 अप्रैल से 15 मई 2026 तक कुल 15 हजार 54 नवजात शिशुओं को उपचारित किया गया, जिनमें से 12 हजार 818 नवजात शिशुओं को सफलतापूर्वक डिस्चार्ज किया गया। एसएनसीयू में 85.2 प्रतिशत डिस्चार्ज दर राष्ट्रीय औसत से अधिक दर्ज की गई है। इसके साथ ही लामा दर मात्र 2.12 प्रतिशत, रेफरल दर 4.2 प्रतिशत एवं मृत्यु दर 8.29 प्रतिशत रही, जो राष्ट्रीय औसत से कम है। यह उपलब्धि प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण नवजात चिकित्सा सेवाओं एवं प्रभावी उपचार प्रबंधन को दर्शाती है।

बिस्तरों की संख्या में वृद्धि से उपचार क्षमता बढ़ी

राज्य शासन द्वारा नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाइयों में उपलब्ध बिस्तरों की संख्या में भी वृद्धि की गई है। वर्ष 24-25 में जहाँ कुल 1654 बिस्तर उपलब्ध थे, वह अब बढ़कर 1770 हो गए हैं। इससे अधिक संख्या में गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं को समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।

आधुनिक उपकरणों एवं विशेषज्ञ उपचार की उपलब्धता

राज्य सरकार गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं के उपचार के लिये अत्याधुनिक एवं समर्पित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य की एसएनसीयू इकाइयों में जटिल एवं गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं के उपचार के लिये वेंटिलेटर, सी-पैप, निर्बाध ऑक्सीजन, फोटोथेरेपी सहित आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। साथ ही, फैसिलिटी बेस्ड न्यूबोर्न केयर (एफबीएनसी) में प्रशिक्षित चिकित्सकों एवं नर्सिंग ऑफिसर्स द्वारा वैज्ञानिक एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार प्रदान किया जा रहा है। इन इकाइयों में भर्ती नवजात शिशुओं को आवश्यकता अनुसार वेंटिलेटर सपोर्ट, सी-पैप, फोटोथेरेपी एवं ऑक्सीजन सपोर्ट उपलब्ध कराया जा रहा है तथा एंटीबायोटिक के तार्किक उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही सर्फ़ैक्टेंट एवं कैफीन साइट्रेट जैसी आधुनिक औषधियों के उपयोग से समय पूर्व जन्मे गंभीर नवजात शिशुओं का उपचार कर जीवन संरक्षित किया जा रहा है। इन इकाइयों में भर्ती लगभग 8 प्रतिशत नवजात शिशुओं को वेंटिलेटर सपोर्ट, 37 प्रतिशत को फोटोथेरेपी, 49 प्रतिशत नवजात शिशुओं को तार्किक ऑक्सीजन तथा 47 प्रतिशत नवजात शिशुओं को तार्किक एंटीबायोटिक उपचार प्रदान किया गया।

एनबीएसयू के माध्यम से उप जिला स्तर पर सशक्त नवजात उपचार सेवाएं

राज्य में संचालित 200 एनबीएसयू (न्यूबॉर्न स्टेबिलाइजेशन यूनिट) के माध्यम से भी नवजात शिशुओं को प्रभावी उपचार एवं स्थिरीकरण सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस वर्ष 1 अप्रैल से 15 मई 2026 तक 2 हजार 241 नवजात शिशुओं को उपचार कर सफलतापूर्वक डिस्चार्ज किया गया है। एनबीएसयू इकाइयों के माध्यम से उच्च जोखिम वाले नवजात शिशुओं को स्थिरीकरण सेवाओं के साथ-साथ ऑक्सीजन सपोर्ट एवं फोटोथेरेपी जैसी आवश्यक उपचार सुविधाएं उप जिला स्तर पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे गंभीर स्थिति वाले नवजात शिशुओं को प्रारंभिक स्तर पर ही समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार मिल रहा है, जिससे उनकी जीवन रक्षा एवं बेहतर स्वास्थ्य परिणाम सुनिश्चित हो रहे हैं।

एमएनसीयू : “जीरो सेपरेशन” अवधारणा की अभिनव पहल

माँ एवं नवजात शिशु को एक साथ गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भारत सरकार के नवीन दिशा-निर्देशों के अनुरूप राज्य में एमएनसीयू (मदर एंड न्यू बोर्न केयर यूनिट) की अवधारणा को भी विस्तार दिया जा रहा है। यह व्यवस्था “जीरो सेपरेशन” सिद्धांत पर आधारित है, जिसमें माँ और नवजात शिशु को अलग नहीं किया जाता। इससे स्तनपान, कंगारू मदर केयर तथा नवजात की समुचित देखभाल को बढ़ावा मिलता है। यह पहल विशेष रूप से कम वजन एवं समय पूर्व जन्मे शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य परिणाम सुनिश्चित करने में अत्यंत सहायक सिद्ध हो रही है।

प्रदेश में 23 एमएनसीयू संचालित

प्रदेश में वर्तमान में 23 एमएनसीयू प्रारंभ किए जा चुके हैं, जिनके माध्यम से माताओं एवं नवजात शिशुओं को संवेदनशील, सुरक्षित एवं समग्र स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र में आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित हो तथा मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में प्रभावी कमी लाई जा सके।

मातृ दुग्ध इकाई (सीएलएमसी) से नवजात शिशुओं को जीवनदायी पोषण

प्रदेश सरकार नवजात शिशु को समय पर सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण पोषण उपलब्ध कराने के लिए सतत प्रयास कर रही है। कम वजन एवं बीमार नवजात शिशुओं को बेहतर पोषण एवं सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराने के लिए मातृ दुग्ध इकाई से नवजातों को जीवनदायी पोषण दिया जा रहा है। वर्ष 2025-26 में इंदौर एवं भोपाल स्थित 2 क्रियाशील सीएलएमसी (कॉम्प्रहेंसिव लैक्टेशन मैनेजमेंट सेंटर) इकाइयों के माध्यम से 1,031 स्वैच्छिक माताओं द्वारा 241.6 लीटर मातृ दुग्ध दान किया गया। दान किए गए इस मातृ दुग्ध को वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत सुरक्षित रूप से पाश्चुरीकृत कर 1,159 कमज़ोर एवं बीमार भर्ती नवजात शिशुओं को कुल 282.11 लीटर सुरक्षित दाता मातृ दुग्ध (डोनर ह्यूमन मिल्क) उपलब्ध कराया गया। यह पहल उन नवजात शिशुओं के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रही है, जिन्हें जन्म के तुरंत बाद पर्याप्त मातृ दुग्ध उपलब्ध नहीं हो पाता। कॉम्प्रहेंसिव लैक्टेशन मैनेजमेंट सेंटर की यह व्यवस्था नवजात शिशुओं को संक्रमण से सुरक्षा, बेहतर पोषण एवं स्वस्थ विकास सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने डिजिटल नवाचार ई-शिशु परियोजना से अब तक 9 हज़ार 889 शिशु लाभान्वित

प्रदेश में नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करने के लिये डिजिटल नवाचार के रूप में ई-शिशु परियोजना भी प्रभावी रूप से संचालित की जा रही है। दिसंबर 2025 से अब तक इस परियोजना के माध्यम से कुल 9,889 नवजात शिशु लाभान्वित हुए हैं। इंदौर एवं उज्जैन संभाग की 16 एसएनसीयू स्पोक इकाइयों में इस परियोजना के सकारात्मक परिणाम स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुए हैं, जहां औसत रेफरल दर 5 प्रतिशत से घटकर 4 प्रतिशत तथा मृत्यु दर 8 प्रतिशत से घटकर 6 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह परियोजना नवजात गहन चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार, विशेषज्ञ मार्गदर्शन एवं समय पर उपचार सुनिश्चित करने में प्रभावी सिद्ध हो रही है।

 

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के उद्देश्य से चलाया गया 15 दिवसीय विशेष अभियान

भोपाल 

पुलिस महानिदेशककैलाश मकवाणा के निर्देशन एवं पुलिस परिवहन शोध संस्थान, पुलिस मुख्यालय भोपाल के नेतृत्व में सड़क सुरक्षा नियमों के प्रभावी पालन एवं सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के उद्देश्य से दिनांक 26 अप्रैल से 10 मई 2026 तक प्रदेशव्यापी विशेष अभियान संचालित किया गया। अभियान का मुख्य उद्देश्य दो पहिया वाहन चालकों, विशेषकर युवाओं एवं महिला चालकों में हेलमेट उपयोग के प्रति जागरूकता विकसित करना तथा यातायात नियमों के पालन के प्रति नागरिकों को प्रेरित करना रहा।

प्रदेश स्तर पर चलाए गए इस व्यापक जन-जागरूकता अभियान के अंतर्गत सभी जिलों में विद्यालयों, महाविद्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों एवं सार्वजनिक स्थलों पर विविध जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। पुलिस अधिकारियों एवं यातायात अमले द्वारा नागरिकों को हेलमेट पहनने की अनिवार्यता, सड़क सुरक्षा के महत्व तथा यातायात नियमों के पालन से होने वाले लाभों की जानकारी दी गई। अभियान के दौरान विशेष रूप से युवाओं को यह संदेश दिया गया कि हेलमेट केवल कानूनी बाध्यता नहीं, बल्कि जीवन सुरक्षा का महत्वपूर्ण साधन है।

अभियान के दौरान प्रदेश के समस्त जिलों में हेलमेट नहीं पहनकर वाहन चलाने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध सघन चालानी कार्यवाही की गई। इस अवधि में कुल 97 हजार 965 चालान बनाए गए तथा लगभग 2 करोड़ 87 लाख 64 हजार 200 रुपए की शमन शुल्क राशि वसूल की गई। साथ ही गंभीर उल्लंघनों के मामलों में POS मशीन के माध्यम से 5 हजार 253 ड्राइविंग लाइसेंस निलंबन की कार्यवाही हेतु परिवहन विभाग को प्रेषित किए गए। अभियान के सफल संचालन में प्रदेश के सभी जिलों द्वारा सक्रिय सहभागिता निभाई गई, जिसमें इंदौर शहर, जिला रीवा एवं जिला मैहर का प्रदर्शन विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा।

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए भविष्य में भी इस प्रकार के जागरूकता एवं प्रवर्तन अभियान निरंतर संचालित किए जाते रहेंगे, जिससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके एवं नागरिकों में सुरक्षित यातायात व्यवहार विकसित हो सके।

आमजन से अपील

मध्यप्रदेश पुलिस प्रदेशवासियों से अपील करती है कि वे स्वयं एवं अपने परिवार की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए दो पहिया वाहन चलाते समय अनिवार्य रूप से हेलमेट धारण करें, यातायात नियमों का पालन करें तथा सुरक्षित एवं अनुशासित यातायात व्यवस्था निर्माण में सहयोग प्रदान करें।

 

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