अविनाश नगर में पेड़ों की कटाई पर बवाल

भोपाल। राजधानी के अविनाश नगर इलाके में रविवार को पेड़ों की कटाई को लेकर जमकर हंगामा हो गया। स्थानीय रहवासियों ने आरोप लगाया कि एक बिल्डर द्वारा बिना संबंधित विभागों की अनुमति के जेसीबी मशीन लगाकर करीब 50 पेड़ों को गिराया गया। घटना की जानकारी लगते ही बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए और विरोध शुरू कर दिया। मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब वीडियो बना रहे लोगों को कथित रूप से डराने-धमकाने की बात सामने आई।

सुबह से चल रही थी पेड़ हटाने की कार्रवाई

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक अविनाश नगर के मुख्य मार्ग के सामने सुबह से ही जेसीबी मशीन लगाकर पेड़ों को हटाने का काम किया जा रहा था। इलाके के लोगों का कहना है कि पेड़ों को एक-एक कर गिराया जा रहा था और मौके पर किसी विभागीय अनुमति या नोटिस की जानकारी उपलब्ध नहीं थी।

रहवासियों के अनुसार, क्षेत्र में लंबे समय से हरियाली बनी हुई थी और अचानक बड़े पैमाने पर पेड़ काटे जाने से लोग नाराज हो गए। कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि कार्रवाई जल्दबाजी में की गई, ताकि विरोध बढ़ने से पहले काम पूरा किया जा सके।

वीडियो बनाने पहुंचे लोग, बढ़ा विवाद

घटना की सूचना फैलते ही स्थानीय नागरिक मौके पर पहुंचे और मोबाइल फोन से वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू कर दी। लोगों का कहना है कि वे कार्रवाई का प्रमाण जुटाना चाहते थे ताकि संबंधित विभागों तक मामला पहुंचाया जा सके।

इसी दौरान विवाद और बढ़ गया। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि वीडियो बना रहे नागरिकों को धमकाने की कोशिश की गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कुछ लोगों ने कहा कि “तुम्हारे घर भी अवैध हैं, उन्हें भी गिराया जा सकता है।” इस कथित बयान के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया और लोगों में आक्रोश फैल गया।

रहवासियों ने उठाए अनुमति पर सवाल

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि पेड़ों की कटाई के लिए नगर निगम, वन विभाग या अन्य किसी संबंधित एजेंसी से अनुमति ली गई थी तो उसके दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं। लोगों का आरोप है कि बिना वैधानिक प्रक्रिया अपनाए पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया गया है।

रहवासियों ने कहा कि शहर में लगातार हरित क्षेत्र कम होते जा रहे हैं, ऐसे में बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई गंभीर विषय है। उनका कहना है कि विकास कार्यों के नाम पर पर्यावरण नियमों की अनदेखी नहीं की जा सकती।

प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग

मामले को लेकर क्षेत्रीय नागरिकों ने भोपाल नगर निगम, वन विभाग और पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि बिना अनुमति पेड़ काटे गए हैं तो जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

स्थानीय लोगों ने यह भी मांग की कि पूरे मामले की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि पेड़ों को हटाने का आदेश किस स्तर से जारी हुआ और क्या पर्यावरणीय नियमों का पालन किया गया था।

प्रशासन की ओर से नहीं आया आधिकारिक बयान

फिलहाल इस मामले में प्रशासन या संबंधित पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि क्षेत्र में पूरे घटनाक्रम को लेकर चर्चा बनी हुई है और रहवासी जल्द कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

5 साल पुराने माइग्रेन से मुक्त हुईं सीमा

रायपुर

बीते पांच साल सुकमा निवासी 39 वर्षीय श्रीमती सीमा सिंह के लिए किसी दुःस्वप्न से कम नहीं थे। माइग्रेन के दर्द से तड़पती सीमा ने राहत की चाह में दूर-दूर के बड़े शहरों के चक्कर काटे, एलोपैथी की ढेरों दवाइयां खाईं, लेकिन बीमारी जस की तस रही। निराशा के इन बादलों के बीच उम्मीद की एक किरण तब जागी, जब वे बीते 4 मई को ‘आयुष स्पेशलिटी क्लिनिक सुकमा’ पहुँचीं। यहाँ अनुभवी चिकित्सक डॉ. मनोरंजन पात्रो की देखरेख में लगभग एक सप्ताह तक चले आयुर्वेदिक इलाज, सटीक दवाइयों और पंचकर्म की ‘शिरोधारा’ पद्धति के जादू ने कमाल कर दिया। वर्षों पुराना वह दर्द गायब हो गया जिसने उनकी रातों की नींद छीन रखी थी। दर्द से इस मुफ्ती ने सीमा के चेहरे पर मुस्कान लौटा दी है, जिसके लिए उन्होंने दिल से शासन-प्रशासन का आभार जताया है।

बदलती स्वास्थ्य व्यवस्था की सुखद तस्वीर

सीमा सिंह की यह मुस्कान सुकमा जिला प्रशासन के उन संजीदा प्रयासों का नतीजा है, जो दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को आम लोगों तक पहुँचाने के लिए किए जा रहे हैं। कलेक्टरअमित कुमार के पदभार संभालते ही जिला आयुष चिकित्सालय की तस्वीर बदलने के प्रयास तेज कर दिए गए। अस्पताल में न केवल बुनियादी ढाँचे को मजबूत किया गया, बल्कि पारंपरिक और बेहद असरदार ‘पंचकर्म’ चिकित्सा की भी शुरुआत की गई। प्रशासन की इसी विशेष पहल का असर है कि आज यह अस्पताल रविवार को छोड़कर सप्ताह के छह दिन पूरी मुस्तैदी से काम कर रहा है, जहाँ हर दिन औसतन 14 से 15 मरीज डॉ. पात्रो की देखरेख में नया और स्वस्थ जीवन पा रहे हैं।

बंदूकों के साए से बाहर, मुख्यधारा का सहारा

कलेक्टरअमित कुमार की यह मुहिम सिर्फ मरीजों को ठीक करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बेहद संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण भी छिपा है। जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ-साथ सुकमा के युवाओं के पुनर्वास की भी एक अनूठी मिसाल पेश की है। कलेक्टर की विशेष पहल पर दो आत्मसमर्पित युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ा गया और उन्हें इसी आयुष चिकित्सालय में ‘कलेक्टर दर’ पर सम्मानजनक रोजगार प्रदान किया गया। कभी गुमराह रहे इन युवाओं के हाथों को रोजगार देकर प्रशासन ने न सिर्फ उनके परिवारों को आर्थिक सुरक्षा दी है, बल्कि जिले में शांति और विकास का एक नया अध्याय भी लिखा है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन का सुकमा मॉडल

सुकमा का आयुष चिकित्सालय आज सिर्फ एक अस्पताल नहीं, बल्कि उम्मीद और पुनर्वास का एक जीवंत केंद्र बन चुका है। एक तरफ जहाँ असाध्य बीमारियों से जूझ रहे आम नागरिकों को सुकमा की वादियों में ही विश्वस्तरीय आयुर्वेदिक और पंचकर्म उपचार मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ भटके हुए युवाओं को रोजगार देकर देश की मुख्यधारा में वापस लाया जा रहा है। स्वास्थ्य क्रांति और सामाजिक सुधार के इस बेजोड़ संगम ने साबित कर दिया है कि अगर प्रशासनिक इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो नक्सल प्रभावित माने जाने वाले सुकमा जैसे दूरस्थ अंचलों में भी संवेदनशीलता और सुशासन की नई इबारत लिखी जा सकती है।

प्रत्येक स्नातक पाठ्यक्रम में शहीदों की विधवाओं एवं संतानों के लिए अब एक सीट रहेगी आरक्षित

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की घोषणा के परिपालन में उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी स्नातक स्तर के पाठ्यक्रमों में पुलिस, होमगार्ड एवं नागरिक सुरक्षा (सिविल डिफेंस) में शहीद होने वाले कर्मियों की विधवाओं तथा उनके आश्रित बच्चों के लिए एक अतिरिक्त सीट आरक्षित की है। आयुक्त उच्च शिक्षा द्वारा इस संबंध में सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

विभागीय निर्देशानुसार प्रत्येक स्नातक पाठ्यक्रम में स्वीकृत सीटों के अतिरिक्त एक सुपरन्यूमेरेरी (अतिरिक्त) सीट निर्धारित की गई है, इससे नियमित सीटों की संख्या प्रभावित नहीं होगी। इस आरक्षण का लाभ केवल पात्र अभ्यर्थियों को सक्षम प्राधिकारी(गृह विभाग अथवा संबंधित विभाग) द्वारा जारी प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने पर मिलेगा। पात्र अभ्यर्थियों को ऑनलाइन प्रवेश पोर्टल पर पृथक श्रेणी के अंतर्गत आवेदन करना होगा।

 

MP के रेल यात्रियों के लिए अहम सूचना, भोपाल मंडल से गुजरने वाली कई ट्रेनें डायवर्ट

भोपाल

उत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल अंतर्गत जौनपुर जंक्शन स्टेशन पर चार मई से 27 मई तक यार्ड रिमॉडलिंग कार्य किया जा रहा है। रेलवे के अनुसार यह काम यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा और ट्रेनों के बेहतर संचालन के लिए किया जा रहा है।

इस दौरान भोपाल मंडल से होकर गुजरने वाली कई लंबी दूरी की ट्रेनों का मार्ग अस्थायी रूप से बदल दिया गया है। इससे भोपाल सहित मध्य प्रदेश के यात्रियों को यात्रा के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत होगी।
इन ट्रेनों के बदले गए मार्ग

रेलवे ने बताया कि वलसाड-मुजफ्फरपुर, गोदान एक्सप्रेस, ताप्ती गंगा एक्सप्रेस, इंदौर-पटना एक्सप्रेस और एलटीटी-अयोध्या कैंट जैसी कई ट्रेनों को अलग-अलग तारीखों में परिवर्तित मार्ग से चलाया जाएगा। कुछ ट्रेनों को वाराणसी, अयोध्या, सुलतानपुर और प्रयागराज होकर निकाला जाएगा, जबकि कुछ ट्रेनों के नियमित स्टापेज भी प्रभावित हो सकते हैं।

 

छतरपुर के डायल-112 हीरोज रास्ता भटकी मानसिक रूप से अस्वस्थ 13 वर्षीय बालिका को सुरक्षित परिजनों से मिलाया

भोपाल 

छतरपुर जिले के थाना बकस्वाहा क्षेत्र में डायल-112 जवानों की संवेदनशील एवं तत्पर कार्रवाई से घर का रास्ता भटक गई मानसिक रूप से अस्वस्थ 13 वर्षीय बालिका को सुरक्षित उसके परिजनों से मिलाया गया। समय पर की गई इस मानवीय पहल से बालिका को सुरक्षा एवं परिवार का सान्निध्य प्राप्त हो सका।

15 मई को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112, भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना बकस्वाहा क्षेत्र अंतर्गत देवरी तिराहा के पास एक 13 वर्षीय बालिका अकेली घूम रही है, जो मानसिक रूप से अस्वस्थ है एवं पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही बकस्वाहा थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना किया गया।

मौके पर पहुँचकर डायल-112 स्टाफ आरक्षक श्री मुकेश कुमार एवं पायलट श्री पंकज कुमार दुबे ने बालिका को सुरक्षित संरक्षण में लिया। बालिका मानसिक रूप से कमजोर होने के कारण अपने बारे में कोई स्पष्ट जानकारी देने में असमर्थ थी।

डायल-112 जवानों ने तत्परता एवं संवेदनशीलता का परिचय देते हुए बालिका को एफआरव्ही वाहन से आसपास के क्षेत्रों में ले जाकर परिजनों की तलाश एवं पूछताछ की। पूछताछ के दौरान बालिका के सम्बन्ध में कोई जानकारी प्राप्त नहीं हो सकी। इसके उपरांत बालिका को सुरक्षित बमोरी चौकी लाया गया।

कुछ समय पश्चात बालिका के परिजन बमोरी चौकी पहुँचे। डायल-112 टीम द्वारा पहचान एवं आवश्यक सत्यापन उपरांत बालिका को उसके पिता के सुपुर्द किया गया।

डायल-112 जवानों की संवेदनशील एवं समर्पित कार्यवाही से एक असहाय बालिका को सुरक्षित उसके परिवार तक पहुँचाया जा सका। डायल-112 हीरोज श्रृंखला के अंतर्गत यह घटना दर्शाती है कि मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा आमजन, विशेषकर बच्चों एवं जरूरतमंद व्यक्तियों की सुरक्षा एवं सहायता हेतु सदैव सजग, संवेदनशील एवं प्रतिबद्ध है।

 

बैतूल में पर्यावरण को नुकसान महंगा पड़ा, कंपनी पर 10 लाख का जुर्माना

भोपाल

बैतूल जिले की मुलताई तहसील में ग्राम अम्भोरी में औद्योगिक गतिविधियों के लिए पर्यावरण सुरक्षा के नियमों को ताक पर रखकर विस्फोट किए जा रहे हैं, जिससे क्षेत्र में प्रदूषण फैल रहा है।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की सेंट्रल जोन बेंच ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि विकास के नाम पर पर्यावरण और ग्रामीणों की जिंदगी से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस मामले में पूर्व में बनाई गई जांच कमेटी की रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए।

बिना ट्रीटमेंट के बहाया जा रहा था जहरीला पानी
कंपनी विस्फोटक मिश्रण तैयार करने के बाद निकलने वाले जहरीले लाल रंग के दूषित पानी को बिना किसी ट्रीटमेंट के खुले मैदान में बहा रही थी। पानी डिस्चार्ज का कोई रिकॉर्ड तक मौजूद नहीं था। परिसर में सेप्टिक टैंक, सोक पिट और धूल नियंत्रण के लिए जरूरी वाटर स्प्रिंकलर सिस्टम तक नहीं मिला।

मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जिसके बाद कंपनी को 10 लाख रुपए का पर्यावरणीय मुआवजा जमा करना पड़ा। एनजीटी ने आदेश दिया कि यह रकम सिर्फ प्रभावित क्षेत्र के रेस्टोरेशन और पर्यावरण सुधार कार्यों पर ही खर्च की जाएगी।

निगरानी समिति का गठन
ट्रिब्यूनल ने बैतूल कलेक्टर की अध्यक्षता में संयुक्त निगरानी समिति बनाकर कंपनी को कड़ी चेतावनी दी है कि आगामी मानसून में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण करना अनिवार्य किया गया। साथ ही मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को औचक निरीक्षण और सख्त मॉनिटरिंग के निर्देश दिए गए हैं। अब कंपनी को जीरो लिक्विड डिस्चार्ज प्रणाली लागू करनी होगी और भविष्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही मिली तो और कठोर कार्रवाई की जाएगी।

 

बिजली उपभोक्ता सायबर जालसाजों से सावधान रहें : मंत्रीतोमर

भोपाल

ऊर्जा मंत्रीप्रद्युम्न सिंह तोमर ने बिजली उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अपने बिजली बिलों का नगद भुगतान कंपनी के जोन, वितरण केन्द्र कार्यालय, पीओएस मशीन अथवा अधिकृत भुगतान केन्द्रों जैसे एम.पी.ऑनलाइन, कॉमन सर्विस सेंटर पर ही करें। उपभोक्ताओं को बिजली बिलों के केशलेस भुगतान के लिये कंपनी के पोर्टल (नेट बैंकिंग, क्रेडिट/डेबिट कार्ड, यूपीआई, ईसीएस, बीबीपीएस, कैश कार्ड एवं वॉलेट आदि) फोन पे, अमेजान पे, गूगल पे, पेटीएम ऐप, व्हाट्सएप पे एवं उपाय मोबाइल ऐप के माध्यम से भी बिल भुगतान की सुविधा उपलब्ध है।

ऊर्जा मंत्रीतोमर ने कहा है कि उपभोक्ता को असमय विद्युत विच्छेदन से बचने के लिए किसी निजी मोबाईल नंबर से कॉल कर भुगतान करने के लिये कोई एसएमएस/ व्हाट्सएप जारी नहीं किया जाता है। कंपनी द्वारा एसएमएस केवल निर्धारित सेंडर आईडी से ही भेजे जाते हैं। उपभोक्ता किसी अन्य सेंडर आईडी अथवा निजी नंबर से आए भ्रामक मेसेज से सतर्क रहें। कंपनी अंतर्गत विद्युत देयकों के भुगतान के लिए उपभोक्ता पहचान नंबर यानि आईवीआरएस नंबर की जरूरत होती है। आईवीआरएस नंबर के आधार पर ही जोन, वितरण केन्द्रों या अन्य गेटवे एमपी ऑनलाइन, पेटीएम, फोन पे, गूगल पे. अमेजन पे, व्हाट्सएप पे आदि पर बिजली बिलों का भुगतान होता है। उपभोक्ता किसी भी अनजान मोबाइल नंबर से आए फोन या व्हाट्सएप मैसेज के आधार पर किसी भी मोबाइल नंबर पर देयकों की राशि अंतरित न करें। साथ ही अपना पिन नंबर भी किसी के साथ साझा न करें।

कंपनी के संज्ञान में आया है कि सायबर जालसाजों द्वारा बिजली उपभोक्ताओं को एसएमएस, व्हाट्सएप मैसेज अथवा आई.व्ही.आर. तकनीक से फोन कॉल पर नंबर दबाने के लिये कहा जाता है, जिसमें बिल भुगतान कराने के लिए भय बनाकर कि आपकी बिजली कुछ घंटों बाद काट दी जाएगी, इसके लिए बिल भुगतान करने के लिये विशेष नंबर दबाएं, मोबाइल नंबर विशेष अथवा अनजान लिंक/ऐप पर क्लिक कर या संपर्क कर बकाया राशि जमा कराएं। इस प्रकार के एसएमएस, व्हाट्सएप मैसेज एवं आई.व्ही.आर. फोन कॉल फर्जी हैं। इन पर ध्यान नहीं दें। इस प्रकार के फर्जी सायबर जालसाजों से सतर्क और सावधान रहें। साइबर फ्रॉड संबंधित किसी भी घटना की सूचना तत्काल भारत सरकार की हेल्पलाइन 1930 पर दर्ज कराएं।

 

डिजिटल परिवर्तन और पेपरलेस न्याय व्यवस्था भविष्य के लिये महत्वपूर्ण और आवश्यक : सीजेआई न्यायमूर्तिसूर्यकांत

भोपाल

भारत के मुख्‍य न्‍यायाधीश न्‍यायमूर्तिसूर्यकांत ने कहा कि डिजिटल परिवर्तन और पेपरलेस न्याय व्यवस्था भारतीय न्यायपालिका के भविष्य का सबसे महत्वपूर्ण और आवश्यक विषय है। उन्होंने कहा कि अदालतों की पहचान अब लाल कपड़ों में बंधी भारी-भरकम फाइलों से नहीं, बल्कि स्मार्ट तकनीक से होगी। कोविड-19 महामारी के दौर को एक ऐतिहासिक मोड़ बताते हुए उन्होंने कहा कि उस संकटकाल में वर्चुअल हियरिंग और ई-फाइलिंग से न्याय प्रणाली को नई दिशा मिली। सुप्रीम कोर्ट ने अब ‘मिसलेनियस डेट्स’ पर पूरी तरह वर्चुअल हियरिंग का निर्णय लिया है, जिससे वकीलों को घर बैठे दलीलें रखने की सुविधा मिलेगी। उन्‍होंने यह बात जबलपुर में महाधिवक्ता कार्यालय द्वारा आयोजित “डिजिटल ट्रांसमिशन: एडवांसिंग पेपरलेस लीगल सिस्टम” विषय पर आयोजित विधिक व्याख्यान कार्यक्रम में कही।

मुख्य न्‍यायाधीश न्यायमूर्तिसूर्यकांत ने अपने 37 वर्ष की आयु में महाधिवक्ता बनने के दौर को याद करते हुए बताया कि पूर्व केन्द्रीय मंत्री स्व. अरुण जेटली के सहयोग से उन्होंने देश का पहला पूर्णतः कंप्यूटरीकृत महाधिवक्ता कार्यालय तैयार कराया था। अब लाइव स्ट्रीमिंग और नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड ने न्याय व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाई है।

डिजिटल समावेशन और पर्यावरण संरक्षण पर जोर

न्‍यायमूर्तिसूर्यकांत ने विशेष रूप से कहा कि सिक्किम की तरह मध्यप्रदेश भी पूर्णतः पेपरलेस बनने की दिशा में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के साथ आगे बढ़ रहा है। इससे पर्यावरण संरक्षण को भारी संबल मिलेगा। देश के ग्रामीण व वरिष्‍ठजनों को ध्यान में रखते हुए तकनीक को ‘बाधा’ नहीं बल्कि ‘पुल’ बनना होगा। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की एआई कमेटी, न्याय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाने पर लगातार काम कर रही है।

मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्रीनरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश स्वर्णिम युग की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने अयोध्या मामले में सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णय और शाहबानो प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि जब अदालतें ऐसे युगांतरकारी फैसले देती हैं, तो लोकतंत्र सशक्त होता है। आज का समय न्याय व्यवस्था, लोकतंत्र और भारतीय मूल्यों के पुनर्जागरण का काल है।

मध्यप्रदेश न्याय और संस्कृति की गौरवशाली परंपराओं का प्रदेश है

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश न्याय और संस्कृति की गौरवशाली परंपराओं का प्रदेश है। यह भूमि सम्राट विक्रमादित्य और राजाभोज की परंपराओं से जुड़ी रही है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में “पंच परमेश्वर” की परंपरा रही है, जहाँ गाँवों में पाँच लोग बैठकर न्याय करते थे। उन्होंने आदि शंकराचार्य और मंडन मिश्र के शास्त्रार्थ का उदाहरण देते हुए कहा कि महेश्वर में हुए उस ऐतिहासिक संवाद में मंडन मिश्र की पत्नी ने निष्पक्ष निर्णय देते हुए शंकराचार्य को विजयी घोषित किया था। उन्होंने कहा कि यह भारतीय न्याय परंपरा की महानता का उदाहरण है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कई बार समाज और सरकार की जटिलताओं के कारण मामलों में देरी होती है। न्यायालय ऐतिहासिक फैसले देकर लोकतंत्र को मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास के कठिन दौरों में भी हमारे वीरों ने विदेशी दासता के सामने कभी आत्मसमर्पण नहीं किया। उन्होंने कहा कि अनेक युद्ध जीतने के बाद भी जब आवश्यकता पड़ी, तब उन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपना बलिदान देना स्वीकार किया। उनका साहस, संघर्ष और राष्ट्रभक्ति केवल उनके समय तक सीमित नहीं रही, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करती रही।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नर्मदा की उज्ज्वल धारा हमारी संस्कृति, शुचिता और आध्यात्मिक चेतना को प्रदर्शित करती है। उन्होंने उपस्थित सभी अतिथियों, न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं और नागरिकों का अभिनंदन किया।

‘पेपरलेस व्यवस्था’ आज की आवश्यकता : केन्‍द्रीय राज्य मंत्रीमेघवाल

केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्रीअर्जुनराम मेघवाल ने आयोजन को न्यायपालिका, सरकार और तकनीक का एक शानदार संगम बताया। उन्होंने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि पहले बजट सत्रों में भारी-भरकम दस्तावेज ले जाने पड़ते थे, लेकिन आज संसद पूरी तरह पेपरलेस हो चुकी है और बजट मोबाइल पर उपलब्ध है। उन्होंने मध्यप्रदेश विधानसभा को भी इसी दिशा में आगे बढ़ाने की उम्मीद जताते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव को अग्रिम बधाई दी। उन्होंने दुष्‍यंत कुमार की पंक्ति सुनाते हुए कहा कि यह ‘पेपरलेस व्यवस्था’ भी एक नई सोच की चिंगारी है, जो पूरी न्याय प्रणाली में उजाला फैलाएगी।

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशसंजीव सचदेवा ने अपने पुराने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि वर्ष 2008-09 के दौर में अदालतों में लैपटॉप ले जाने पर प्रतिबंध हुआ करता था। आज तकनीक ने पूरी व्यवस्था बदल दी है। उन्होंने बताया कि महाधिवक्ता कार्यालय की सुविधा के लिए अब उन सभी मामलों की डिजिटल पहुंच उपलब्ध करा दी गई है, जिनमें सरकार पक्षकार है। अब नोटिसों का डिजिटल ट्रांसमिशन होने से जवाब तेजी से आ रहे हैं और प्रतिदिन स्टेटस रिपोर्ट अपलोड हो रही है। उन्होंने केंद्र और राज्य दोनों के महाधिवक्ता कार्यालयों की उत्कृष्ट और सक्षम टीम को बधाई देते हुए कहा कि उनकी पूरी तैयारी के कारण ही न्यायालयीन प्रकरणों के निराकरण का कार्य बेहतर ढंग से हो पा रहा है।

कार्यक्रम के आरंभ में महाधिवक्‍ताप्रशांत सिंह ने स्‍वागत भाषण में डिजिटल इंर्फोमेशन एडवांसिंग पेपरलेस लीगल सिस्‍टम की उपयोगिता पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप-प्रज्ज्वलन, राष्ट्रगीत एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ।

कार्यक्रम में सर्वोच्‍च न्‍यायालय और उच्‍च न्‍यायालय के न्‍यायाधीश, लोक निर्माण मंत्रीराकेश सिंह, सांसदआशीष दुबे, महापौर जबलपुरजगत बहादुर अन्नू, सीएसअनुराग जैन, न्यायिक प्राधिकरण से जुड़े प्रशिक्षु, प्रशासन व पुलिस के अधिकारी और बड़ी संख्या में वकील उपस्थित थे। 

मंत्री शुक्ला एवंतोमर भोपाल में 18 मई को करेंगे व्हाट्सएप चैटबॉट का शुभारंभ

भोपाल

नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्रीराकेश शुक्ला एवं ऊर्जा मंत्रीप्रद्युम्न सिंह तोमर ऊर्जा विकास निगम के व्हाट्सऐप चैटबॉट एवं प्रचार वीडियो का शुभारंभ करेंगे। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का डिजिटली प्रचार-प्रसार करने के लिये एमपीयूवीएनएल एवं काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवॉयरनमेंट एंड वॉटर के सहयोग से 18 मई सोमवार को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में व्हाट्सऐप चैटबॉट एवं प्रचार वीडियो लॉन्च किया जाएगा।

व्हाट्सऐप चैटबॉट और प्रचार वीडियो से नागरिकों को पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की जानकारी सरल एवं डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी। इससे योजना के प्रति आमजन में जागरूकता बढ़ेगी और नागरिकों को आवेदन एवं सोलर संयंत्र लगाने की प्रक्रिया को समझने में मदद मिलेगी।

आमजन के बीच लोकप्रिय हो रही है योजना

प्रदेश में योजना को लेकर लगातार सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। अब तक मध्यप्रदेश में 1 लाख 96 हजार 791 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। इनमें से 1 लाख 24 हजार 663 सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। इन संयंत्रों की कुल क्षमता 467.06 मेगावाट है। भारत सरकार द्वारा अब तक 879.69 करोड़ रुपये का अनुदान भी प्रदान किया जा चुका है।

चैटबॉट शुभारंभ कार्यक्रम में भारत सरकार के अधिकारी, जिला कलेक्टर, बैंक प्रतिनिधि, विद्युत वितरण कंपनियों एवं नगर निगम के अधिकारी तथा योजना से जुड़े पंजीकृत वेंडर भी कार्यक्रम में शामिल होंगे।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कमला पार्क स्थित शनि मंदिर में पूजा-अर्चना की

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनि जयंती के अवसर पर शनिवार को कमला पार्क स्थित शनि मंदिर में दर्शन किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शनि मंदिर और हनुमान मंदिर पहुंचकर पूजा अर्चना की और मंदिर में आए अनके दर्शनार्थियों से भी भेंट की । उन्होंने श्रृद्धालुओं और बच्चों के साथ सेल्फी भी खिंचवाई। इस अवसर विधायक श्री भगवान दास सबनानी के अलावा श्री राहुल कोठारी और अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

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