नौतपा में बदला मौसम का मिजाज! MP में आंधी-तूफान और ओलावृष्टि का अलर्ट, कई जिलों में बारिश

भोपाल 

मध्यप्रदेश में नौतपा की तपिश के बीच मौसम का मिजाज तेजी से बदलने वाला है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, वर्तमान में एक साथ 4 ताकतवर मौसम प्रणालियाँ सक्रिय हैं, जो प्रदेश के मौसम को प्रभावित कर रही हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण मध्य पाकिस्तान से राजस्थान और मध्यप्रदेश होते हुए ओडिशा तक जाने वाली ट्रफ लाइन है। इसके अलावा अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती परिसंचरण मानसून को आगे बढ़ाने में मदद कर रहे हैं। इन प्रणालियों के असर से प्रदेश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी के बीच अचानक धूलभरी आंधी, गरज-चमक और हल्की से मध्यम बारिश की चेतावनी जारी की गई है।

मध्य प्रदेश में इस रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ रही है। बुंदेलखंड, बघेलखंड, चंबल से लेकर पूरा इलाका गर्म हवाओं, सीधी तीखी जलाने वाली धूप के कारण लाल हो रहा है। बीते 24 घंटों में खजुराहो और राजगढ़ में 46.5 और 46.0 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया था। इसके अलावा दतिया में 45.7 डिग्री, मलाजखंड बालाघाट, नौगांव छतरपुर, दमोह और विदिशा में 45.5 डिग्री तापमान दर्ज किया गया था। रात में सिवनी और राजगढ़ में न्यूनतम तापमान ही 31 डिग्री तक पहुंच रहा है। एक दर्जन जिलों में वार्म नाइट का अलर्ट चल रहा है।

मध्य प्रदेश में बीते एक महीने से भीषण गर्मी और झुलसाने वाली गर्मी 46-47 डिग्री तापमान और हीटवेव के बीच राहत मिलने की खबर सामने आई है। आईएमडी ने बताया कि पाकिस्तान से ओडिशा तक ट्रफ लाइन बनी है। मध्य पाकिस्तान से राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तर छत्तीसगढ़ होते हुए आंतरिक ओडिशा तक 0.9 किमी की ऊंचाई पर एक ट्रफ लाइन गुजरी है, जिससे प्रदेश में नमी और अस्थिरता बढ़ गई है। आसमान में बन रही इस ट्रफ लाइन के प्रभाव से मध्यप्रदेश के कई इलाकों में गरज-चमक के साथ धूलभरी आंधी और हल्की से मध्यम वर्षा हो सकती है। पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी जिलों में इसका असर सबसे ज्यादा दिखेगा।

आज 9 जिलों में अलर्ट जारी

रात से आंधी, बारिश और ओले गिरने का सिलसिला शुरू हो गया. ग्वालियर-चंबल इलाके में शुक्रवार रात अचानक मौसम बदल गया. ठंडी हवाएं चलने लगी. श्योपुर और शिवपुरी में तूफानी बारिश के साथ ओले गिरे. सिंगरौली के चितरंगी में सबसे अधिक 40.1 मिमी वर्षा रिकार्ड हुई. रीवा के हनुमाना में 16 मिमी, मुरैना में 18 मिमी और गोहद में 17 मिमी बारिश दर्ज की गई. मौसम विभाग ने शनिवार को मध्य प्रदश के 9 जिलों के लिए बारिश और ओले का अलर्ट जारी किया है. नौतपा आधा बीत जाने के बाद मौसम की ये करवट लोगों के लिए राहत लेकर आई है। 

इन जिलों में बारिश के साथ ओले की चेतावनी
भोपाल मौसम केंद्र के अनुसार शनिवार को ग्वालियर के साथ ही 9 जिलों में तेज बारिश के साथ ओले गिरने का अलर्ट है. ग्वालियर, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, नीमच और मंदसौर में तूफानी बारिश के साथ ओले गिरने की संभावना है. वहीं नौतपा के दौरान गर्मी से झुलस रहे लोगों को मौसम बदलने से काफी राहत मिली. भले ही ओले व बारिश का अलर्ट 9 जिलों में हो लेकिन इसका असर पूरे प्रदेश में दिखाई देगा. शुक्रवार रात से ही प्रदेश के अधिकांश जिलों में तापमान में गिरावट देखी गई। 

    नौतपा के बीच एमपी में मौसम का बड़ा यू-टर्न
    4 शक्तिशाली वेदर सिस्टम एक साथ एक्टिव
    कई जिलों में आंधी-बारिश और वज्रपात का अलर्ट
    धूलभरी आंधी के साथ तेज हवाएं चलने की संभावना
    भीषण गर्मी के बीच मिल सकती है राहत

गर्म हवाएं नौतपा में भी भीषण गर्मी
मध्य पाकिस्तान के ऊपर 1.5 किमी की ऊंचाई पर एक चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है। इसके कारण राजस्थान से होकर आ रही गर्म और शुष्क हवाएं प्रदेश के तापमान को सामान्य से ऊपर बनाए हुए हैं, जिससे नौतपा की तपिश बरकरार है। हालांकि शुक्रवार—शनिवार से गर्मी में राहत की उम्मीद जताई गई है।

इन जिलों में भीषण आंधी का अलर्ट
इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, नर्मदापुरम, झाबुआ, धार, इंदौर, रतलाम, उज्जैन, देवास, आगर-मालवा, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, मुरैना, श्योपुरकलां, सिंगरौली, सीधी, रीवा, मऊगंज, सतना, अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, डिंडौरी, कटनी, सिवनी, मंडला, बालाघाट और पांढुर्णा जिलों में भी 40 से 50 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से तेज हवाओं के साथ बारिश और वज्रपात की चेतावनी जारी की गई है. वहीं, विदिशा, राजगढ़, शाजापुर, जबलपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, दमोह और सागर जिलों में भी मौसम बिगड़ने के संकेत हैं. यहां आंधी और गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। 

अगले 3 से 4 दिन कई जिलों में आंधी-बारिश
मौसम विभाग का अनुमान है कि 31 मई से 2 जून तक भी प्रदेश के अधिकांश जिलों में आंधी-बारिश का दौर जारी रहेगा. मालवा क्षेत्र के अलीराजपुर, झाबुआ, रतलाम, मंदसौर और नीमच जिलों में लगातार तेज हवाओं और बारिश की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं. वहीं 1 जून को रतलाम में भारी बारिश की संभावना जताई गई है, जबकि अलीराजपुर और झाबुआ में भी तेज बारिश के साथ ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की गई है. इसके साथ ही कई जिलों में 40 से 60 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। 

इसलिए बदला मौसम का मिजाज
मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार “उत्तर-पश्चिम भारत के ऊपर सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और राजस्थान-पाकिस्तान क्षेत्र में बने चक्रवातीय परिसंचरण के कारण मध्यप्रदेश में नमी लगातार पहुंच रही है. इसी सिस्टम से जुड़ी ट्रफ लाइन मध्यप्रदेश से गुजर रही है, जिससे प्रदेशभर में प्री-मानसून गतिविधियां तेज हो गई हैं. इसके अलावा अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी के कारण बादलों का विकास तेजी से हो रहा है और कई क्षेत्रों में आंधी, बारिश तथा ओलावृष्टि की परिस्थितियां बन रही हैं। 

शिवपुरी में गिरे ओले, पारा 32 पर पहुंचा
शुक्रवार रात शिवपुरी जिले में अचानक मौसम ने करवट ली. आंधी-बारिश और ओलावृष्टि से तापमान काफी गिर गया. लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली. तापमान गिरकर 44 डिग्री सेल्सियस से 32 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया. जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण अंचल में बारिश रिकॉर्ड की गई है. सतन बाड़ा, नयागांव, सुभाषपुरा इलाकों के साथ बैराड़ और अन्य इलाकों में बारिश हुई. ठंडी हवाओं के झोंके चलने से लोगों को भारी सुकून मिला। 

श्योपुर में तूफानी बारिश से वाहनचालक डरे
श्योपुर में भी शुक्रवार देर रात गरज-चमक के साथ मौसम का मिजाज बदल गया. तूफानी बारिश हुई. इस दौरान ओले भी गिरे. सड़क किनारे खड़े लोगों में अफरा तफरी भी देखने को मिली. तूफानी बारिश के दौरान वाहन चालकों को आगे दिखना लगभग बंद हो गया. वाहन जहां-तहां थम गए. श्योपुर शहर के अधिकांश इलाकों में बिजली भी गुल हो गई। 

तहसील और ग्रामीण इलाकों में भी बिजली गायब हो गई. वीरपुर में आधा घंटे के अंदर 2 बार तूफानी बारिश हुई. साथ ही ओले भी गिरे. श्योपुर जिले में मौसम विभाग ने आंधी और बारिश के साथ ओले गिरने की चेतावनी पहले ही दे दी थी. मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ की वजह से ये बदलाव देखने को मिला। 

श्योपुर में 2 जून तक ऐसा ही रहेगा मौसम
देर रात तक श्योपुर में रुक-रुककर बारिश जारी रही. इससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई. 33 डिग्री सेल्सियस तामपान पहुंचने से लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली. वीरपुर के इस्ताक़ खान ने बताया “अचानक शुक्रवार देर रात मौसम ने करवट ली. तूफानी बारिश से लोग जहां थे, वहीं रुक गए.” श्योपुर निवासी दीपक शर्मा ने बताया “शुक्रवार की देर रात अचानक तेज आंधी तूफान ने गदर मचाया. सड़कों पर खड़ी बाइक इधर उधर गिरती नजर आईं. उसके बाद बारिश का दौर शुरू हुआ.” मौसम विभाग का अनुमान है कि 2 जून तक मौसम का मिजाज इसी तरह बना रहेगा। 

पश्चिमी विक्षोभ के असर से एमपी के इन हिस्सों में चलेगी आंधी
उत्तर भारत में 5.8 किमी की ऊंचाई पर एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है। हालांकि इसका सीधा असर सीमित है, लेकिन यह उत्तर-पश्चिम मध्यप्रदेश में वायुमंडलीय अस्थिरता बढ़ाकर आंधी-तूफान की स्थिति पैदा कर सकता है।

मानसून के लिए अनुकूल परिस्थितियां
रिटायर्ड मौसम विज्ञानी डॉ. शैलेंद्र नायक ने बताा कि दक्षिण-पूर्व अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में ऊपरी हवा के चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय हैं। ये दोनों सिस्टम दक्षिण-पश्चिम मानसून को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद कर रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में प्रदेश में नमी बढ़ेगी।

ट्विशा केस में बड़ा खुलासा! गिरिबाला सिंह ने माना- ‘बेटे से हो गई गलती’, CBI भी हुई सतर्क

भोपाल 

ट्विशा शर्मा डेथ केस में भोपाल की पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह कानून के शिकंजे में हैं। कोर्ट ने उन्हें 5 दिन की रिमांड पर सीबीआई को सौंप दिया है। देशभर में सुर्खियोें में आने के बाद इस केस की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी यानि सीबीआई को सौंपी गई थी। सीबीआई के जांच अधिकारी मामले में पूर्व जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे ट्विशा के पति समर्थ सिंह से कई घंटों की पूछताछ कर चुके हैं। इस दौरान सीबीआई अधिकारियों द्वारा उनपर उठे एक सवाल पर पूर्व जज गिरिबाला सिंह ने स्वीकारोक्ति भी की। सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों ने उनसे कहा कि आप खुद एक जिम्मेदार न्यायिक अधिकारी रह चुकीं हैं, ऐसे में मामले में बेटे समर्थ को फरार क्योें होने दिया! इस पर गिरिबाला सिंह ने माना कि हम दोनों से यह गलती तो हुई है।

बयानों के साथ ही साक्ष्य जुटाने के काम में भी लगी सीबीआई
एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में सास रिटायर्ड जज गिरिबाला को रिमांड पर लेने के बाद सीबीआई फिर पूछताछ में जुट गई है। उन्हें बेटे समर्थ सिंह के साथ बैठाकर सवाल जवाब किए जाने की तैयारी चल रही है। सीबीआई बयानों के साथ ही साक्ष्य जुटाने के काम में भी लगी है।

मुद्दे पर अपनी गलती स्वीकार कर ली
सीबीआई की पूछताछ के दौरान गिरिबाला सिंह ने एक बड़ी बात कही। शुरुआती ना नुकुर के बाद उन्होंने एक मुद्दे पर अपनी गलती स्वीकार कर ली। गिरिबाला सिंह, जिला एवं सत्र न्यायाधीश जैसे अहम पद पर रह चुकी हैं। इसी बात का उल्लेख करते हुए सीबीआई ने उनसे बेटे समर्थ सिंह की फरारी की वजह पूछी थी जिसपर पूर्व जज ने मान लिया कि यह हमारी गलती थी।

बेटा समर्थ सिंह फरार कैसे और क्यों हो गया?
दरअसल जांच अधिकारियों ने गिरिबाला सिंह से सीधा सवाल किया कि आप अहम न्यायिक पदों पर रही हैं, नियम-कानूनों की आपको हर जानकारी है। ऐसे में भी 12 मई को बहू ट्विशा शर्मा की मौत के बाद बेटा समर्थ सिंह फरार कैसे और क्यों हो गया? इस सवाल पर गिरिबाला सिंह पहले तो कुछ असहज हुईं लेकिन बाद में इसे गलती के रूप में स्वीकार कर लिया। उन्होंने यह स्पष्टीकरण भी दिया कि वे परिस्थितियों का ठीक से अंदाजा नहीं लगा सकीं थीं।

डरे सीबीआई अधिकारी, 5 वजहों से घिरीं
सीबीआई ने भोपाल की पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को 5-5 दिन की रिमांड पर ले लिया है। भोपाल कोर्ट ने शुक्रवार को दोनों को 2 जून तक के लिए सीबीआई को सुपुर्द कर दिया। ट्विशा शर्मा की सास गिरिबाला सिंह करीब पौने दो साल तक भोपाल की जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर रहीं हैं। इतना ही नहीं, वे क्राइम सीन मैनेजमेंट में भी दक्ष हैं। गिरिबाला सिंह के इस स्टेटस और स्किल का हवाला देते हुए ही सीबीआई ने उनका रिमांड मांगा। जांच अधिकारियों को डर है कि बाहर रहकर वे सबूतों और गवाहों को प्रभावित कर सकती हैं। कोर्ट ने उनके तर्क स्वीकार कर लिए।

7 दिन की रिमांड मांगी पर कोर्ट ने 5 दिन की ही मंजूरी दी
सीबीआई ने गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह को भोपाल जिला कोर्ट में पेश किया यहां जस्टिस शोभना भलावे की अदालत के समक्ष वे दो घंटे से ज्यादा कठघरे में खड़ी रहीं। सीबीआइ कोर्ट से पूछताछ के लिए 7 दिन की रिमांड मांगी पर कोर्ट ने 5 दिन की ही मंजूरी दी।

मायके वालों ने दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाया
बता दें कि ट्विशा शर्मा की कटारा हिल्स स्थित आवास पर जब संदिग्ध हालात में मौत हुई तब सास गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह की घर पर मौजूद थे। दोनों ने कहा कि ट्विशा ने सुसाइड की जबकि मायके वालों ने दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाया।

पहले समर्थ सिंह और बाद में गिरिबाला सिंह को कोर्ट में पेश किया
पहले सीबीआइ ने समर्थ सिंह और बाद में गिरिबाला सिंह को कोर्ट में पेश किया। बेटे को यहां दोपहर 12.35 बजे लाया गया जबकि 10 मिनट बाद पूर्व जज को लाए।
आशंका जताई कि यदि रिमांड पर नहीं रहीं तो जांच प्रभावित कर सकती हैं

सीबीआइ ने रिमांड के लिए गिरिबाला सिंह के स्टेटस और स्किल को आधार बनाया। अधिकारियों ने कोर्ट में आशंका जताई कि यदि रिमांड पर नहीं रहीं तो इनके बल पर वे जांच प्रभावित कर सकती हैं।

15 जुलाई 2021 से 28 फरवरी 2023 तक भोपाल की जिला जज रहीं
अदालत से सीबीआई ने कहा कि गिरिबाला बड़े न्यायिक पद पर रहीं हैं। उन्होंने गुजरात से क्राइम सीन मैनेजमेंट की ट्रेनिंग भी ले रखी है। ऐसे में गिरिबाला सिंह को बाहर रखने से साक्ष्य प्रभावित कर सकती हैं। इसका बचाव पक्ष के वकीलों ने विरोध नहीं किया। बता दें कि 15 जुलाई 2021 से 28 फरवरी 2023 तक गिरिबाला सिंह भोपाल की जिला जज रहीं हैं। इस प्रकार वे करीब 19 माह तक यहां पदस्थ थीं।

इन 5 आधारों पर जांच एजेंसी ने मांगा रिमांड
सीबीआइ ने तर्क दिया, गिरिबाला सिंह बड़े न्यायिक पद पर रहीं हैं। यदि रिमांड पर नहीं रहीं तो जांच प्रभावित कर सकती हैं।

जिला कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत के बाद लगातार घटनाक्रम को लेकर वे मीडिया में बनी रहीं।

गिरिबाला सिंह ने केस को दूसरी ओर मोल्ड करने की भरपूर कोशिश की है।

पूर्व जज गिरिबाला सिंह क्राइम मैनेजमेंट में दक्ष हैं, उन्होंने गुजरात से क्राइम सीन मैनेजमेंट की ट्रेनिंग ले रखी है।

सीबीआई ने कोर्ट से कहा कि गिरिबाला सिंह को बाहर रखने से वे साक्ष्य प्रभावित कर सकती है। इसका बचाव पक्ष के वकीलों ने विरोध नहीं किया।

माता वैष्णो देवी पहुंचे CM मोहन यादव, श्राइन बोर्ड के मॉडल से हुए प्रभावित; बताई यात्रा की खास वजह

भोपाल
 मध्य प्रदेश के महाकाल, ओंकारेश्वर जैसे तीर्थ स्थानों पर क्राउड मैनेजमेंट का पूरा प्लान तैयार करने जम्मू के वैष्णो देवी मंदिर के भीड़ प्रबंधन का अध्ययन किया जाएगा. कटरा पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने बताया, ” हमारे साथ पूरा एक प्रतिनिधिमंडल भी आया है, जो यहां श्रद्धालुओं के दर्शन से लेकर मंदिर ट्रस्ट की सभी व्यवस्थाओं का अध्ययन कर रहा है. जिस पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी और आगे मध्य प्रदेश के तीर्थ स्थलों में इसे लागू किया जाएगा। 

माता वैष्णों देवी के दरबार में पहुंचे मोहन यादव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को जम्मू कश्मीर के कटरा पहुंचे. वे यहां पर माता वैष्णों देवी के दर्शन तो करेंगे ही, लेकिन यहां की व्यवस्थाओं का अध्ययन भी होगा. उन्होंने बताया कि वे यहां माता वैष्णों के दर्शन के साथ-साथ भीड़ प्रबंधन सहित सभी व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे. इन चीजों पर अध्ययन करने के लिए उनके साथ प्रतिनिधिमंडल भी है. केवल वैष्णों देवी नहीं देश के अलग-अलग तीर्थ स्थलों में किस तरह के प्रबंध है, ये जानने के लिए इसी तरह के अध्ययन के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कई अन्य प्रतिनिधिमंडल देश के अलग-अलग हिस्सों में भी भेजे हैं। 

बताई दौरे की वजह
कटरा पहुंचने पर सीएम डॉ. यादव ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि हम एक प्रतिनिधिमंडल के साथ यहां आए हैं, ताकि महाकाल मंदिर, महाकालेश्वर देवस्थान, ओंकारेश्वर देवस्थान तथा भोजशाला जैसे प्रमुख धार्मिक संस्थानों का अध्ययन किया जा सके। सीएम ने आगे बताया कि हाल ही में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भोजशाला को मां वाग्देवी के मंदिर की मान्यता दी है। हमारा उद्देश्य यह समझना है कि धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ प्रबंधन, जनसुविधाओं और धार्मिक सेवाओं के लिए एक उत्कृष्ट एवं प्रभावी मॉडल किस प्रकार विकसित किया जा सकता है।

बताई दौरे की वजह
कटरा पहुंचने पर सीएम डॉ. यादव ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि हम एक प्रतिनिधिमंडल के साथ यहां आए हैं, ताकि महाकाल मंदिर, महाकालेश्वर देवस्थान, ओंकारेश्वर देवस्थान तथा भोजशाला जैसे प्रमुख धार्मिक संस्थानों का अध्ययन किया जा सके। सीएम ने आगे बताया कि हाल ही में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भोजशाला को मां वाग्देवी के मंदिर की मान्यता दी है। हमारा उद्देश्य यह समझना है कि धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ प्रबंधन, जनसुविधाओं और धार्मिक सेवाओं के लिए एक उत्कृष्ट एवं प्रभावी मॉडल किस प्रकार विकसित किया जा सकता है।

सीएम यादव ने बताया कि वह अधिकारियों के एक दल के साथ यहां आए हैं ताकि वैष्णो देवी मंदिर की व्यवस्थाओं का अध्ययन किया जा सके और इसे मध्य प्रदेश के प्रमुख मंदिरों के लिए एक मॉडल के रूप में विकसित किया जा सके। उन्होंने कहा कि उनके राज्य में भी प्रमुख मंदिरों में भीड़ प्रबंधन, सार्वजनिक सेवाओं और श्रद्धालु सुविधाओं को बेहतर बनाने पर काम किया जा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि देश के अलग-अलग धार्मिक स्थलों का अध्ययन कर एक प्रभावी प्रबंधन मॉडल तैयार किया जा रहा है। वैष्णो देवी मंदिर में बेहतर व्यवस्थाओं और सुचारू दर्शन व्यवस्था की उन्होंने सराहना की।

मुख्यमंत्री ने बताया कि श्राइन बोर्ड द्वारा यहां शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े कई संस्थान भी संचालित किए जा रहे हैं, जो श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के लिए उपयोगी हैं। उन्होंने कहा कि इसी तरह का समन्वित मॉडल अन्य मंदिरों में भी लागू करने की योजना है। इससे पहले हाल ही में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के एक फैसले का भी उल्लेख किया गया जिसमें एक धार्मिक स्थल से जुड़े मामले में ऐतिहासिक निर्णय दिया गया था।

धार्मिक संस्थानों का होगा अध्ययन
मीडिया से बात करते हुएमुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, ” हम एक प्रतिनिधिमंडल के साथ यहां आए हैं, जिससे महाकाल मंदिर, महाकालेश्वर देवस्थान, ओंकारेश्वर देवस्थान व भोजशाला जैसे प्रमुख धार्मिक संस्थानों का अध्ययन किया जा सके. हाल ही में उच्च न्यायालय ने भोजशाला को मां वाग्देवी के मंदिर की मान्यता दी है. हमारा उद्देश्य यह समझना है कि धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ प्रबंधन, जनसुविधाओं और धार्मिक सेवाओं के लिए कैसे एक मॉडल तैयार हो सके. जिससे श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ाई जा सके। 

बाकी तीर्थ स्थलों में भी जनसुविधाओं की लेंगे जानकारी
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा, “देश के अलग-अलग हिस्सों में भी जो दल गए हैं, वे अध्ययन के बाद अपनी रिपोर्ट सौपेंगे. उसके हिसाब से मध्य प्रदेश के तीर्थ स्थलों में प्लान लागू होगा.” उन्होंने कहा, “मुझे जानकारी दी गई है कि यहां मंदिर प्रबंधन के साथ-साथ एक विश्वविद्यालय, एक मेडिकल कॉलेज व अनेक सेवा-प्रधान संस्थाएं भी संचालित की जा रही हैं. हमारी सरकार भी अब रिलीजियस टूरिज्म के नए सर्किट तैयार कर उन्हें विकसित करने पर जोर दे रही है। 

 

जबलपुर एयरपोर्ट के पास मिला 12 किलो का जिंदा मोर्टार, इलाके में मचा हड़कंप

जबलपुर 

जबलपुर में एयरपोर्ट के पास बम मिला है। यह अनएक्सप्लोडेड बम देख इलाके में दहशत पसर गई। जबलपुर के इस इलाके में ही खमरिया ऑर्डिनेंस फैक्ट्री सहित सेना की इन्फैंट्री और हथियार कारखाने हैं। ऐसे में बम मिलने के मामले की गंभीरता बढ़ गई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और पूरा इलाका घेर लिया। जांच में पता चला कि यह करीब 12 किलो का जिंदा मोर्टार है। इसे सेना का UXO (Unexploded Ordnance – अनएक्सप्लोडेड ऑर्डनेंस) यानी बिना फटा हुआ जिंदा बम बताया जा रहा है। पुलिस ने तुरंत सैन्य अधिकारियोें को मामले की जानकारी दी। अब सेना अपनी कार्यवाही कर रही है।

शनिवार को दिखाई दिया एक जिंदा बम
डुमना में एयरपोर्ट से लगे खमरिया थाने के गदेरी गांव में एक घर के निर्माण के लिए खुदाई की जा रही है। इस दौरान शनिवार  को एक जिंदा बम दिखाई दिया। इससे हड़कंप मच गया। दहशत में आए ग्रामीणों ने तुरंत पुलिस को मामले की जानकारी दी।

खमरिया इलाके में सेना की बड़ी ऑर्डिनेंस फैक्ट्री और हथियार डिपो
खमरिया इलाके में सेना की बड़ी ऑर्डिनेंस फैक्ट्री और हथियार डिपो हैं ऐसे में जिंदा बम मिलने की खबर से हड़कंप मच गया। पुलिस गदेरी गांव में घटनास्थल पर पहुंची। एहतियातन पूरे इलाके को भी घेर लिया।

भवन निर्माण के लिए कॉलम की खुदाई का काम चल रहा
पुलिस अधिकारियों के अनुसार गांव के सुनील यादव के प्लॉट पर भवन निर्माण के लिए कॉलम की खुदाई का काम चल रहा था। इसी दौरान शाम करीब 6 बजे मजदूरों को जमीन के अंदर बम मिला। सूचना मिलते ही पुलिस ने तत्काल मौके पर पहुंचकर सुरक्षा के लिहाज से घटनास्थल को घेर लिया।

पुलिसकर्मियों ने जब ध्यान से देखा तो सेना का पुराना बम निकला
मौके पर आए खमरिया थाने के पुलिसकर्मियों ने जब ध्यान से देखा तो सेना का पुराना बम निकला। यह एक UXO (Unexploded Ordnance – अनएक्सप्लोडेड ऑर्डनेंस) यानी बिना फटा हुआ जिंदा बम है। पुलिस ने भारतीय सेना के अधिकारियों को विस्फोटक मिलने की खबर दी। सेना का यह बम काफी पुराना है जो कि यहां सालों से दबा था।

फिलहाल सेना अपनी कार्यवाही में जुटी
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जानकारी मिलते ही सैन्य अधिकारियों को मामले की सूचना दी ताकि बम निरोधक दस्ता (Bomb detection and Disposal Squad) मौके पर आकर बम को सुरक्षित रूप से डिफ्यूज कर सके। फिलहाल सेना अपनी कार्यवाही में जुटी है। इधर पुलिस ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है।

 

मात्र 5 रुपये में 1 लाख 10 हजार से अधिक किसानों को मिला नया स्थाई कृषि पंप कनेक्शन

मात्र 5 रुपये में 1 लाख 10 हजार से अधिक किसानों को मिला नया स्थाई कृषि पंप कनेक्शन

भोपाल 

राज्‍य शासन द्वारा घोषित ‘किसान कल्याण वर्ष 2026’ के अंतर्गत किसानों को सिंचाई पम्‍प कनेक्‍शन आसानी से उपलब्‍ध कराए जा रहे हैं। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कंपनी के कार्यक्षेत्र में किसानों को अब मात्र 5 रूपये के प्रारंभिक शुल्‍क में नए बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से अब तक 01 लाख 10 हजार 478 कृषि पम्‍प कनेक्‍शन उपलब्‍ध करा दिये गये हैं।

भोपाल रीजन के 8 जिलों के 9 हजार 305 गावों में 85 हजार 362 कृषि पम्‍प उपभोक्‍ताओं ने तथा ग्‍वालियर रीजन के 8 जिलों के 7 हजार 284 गावों में 25 हजार 116 कृषि पम्‍प उपभोक्‍ताओं ने 5 रूपये में नवीन कनेक्‍शन योजना का लाभ उठाया है। कंपनी द्वारा कृषि पम्पों के कनेक्शनों की संख्या बढ़ाए जाने के लिए ऐसे कृषक जिनके खेत विद्युत की उपलब्ध लाइन के समीप स्थित हैं, उनको प्रारंभिक शुल्‍क 5 रूपये में स्थाई कृषि पंप कनेक्शन प्रदान किये जा रहे हैं। कनेक्‍शन की शेष शुल्‍क राशि का भुगतान मासिक देयकों के साथ किश्‍तों में लिया जा रहा है। कंपनी ने कहा है कि आवेदक 5 रूपये में नवीन कनेक्‍शन के संबंध में किसी भी जानकारी के लिए नजदीकी विद्युत केन्‍द्र/जोन अथवा कंपनी के कॉल सेन्‍टर नंबर 1912 पर संपर्क कर सकते हैं।

 

मध्यप्रदेश में वरिष्ठजनों के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों की सुदृढ़ व्यवस्था

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य शासन द्वारा सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों को नई दिशा और गति प्रदान की गई है। विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों के लिए संचालित योजनाएं और पहलें इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार उनके सम्मानजनक जीवन, सुरक्षा एवं अधिकारों के संरक्षण के प्रति प्रतिबद्ध है। बदलते सामाजिक परिवेश में जहां पारिवारिक संरचना में निरंतर परिवर्तन हो रहा है, वहीं वरिष्ठजनों की देखभाल और उनके अधिकारों की रक्षा एक महत्वपूर्ण विषय बनकर उभरा है। इस दिशा में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा बहुआयामी प्रयास किए जा रहे हैं।

कानूनी संरक्षण: अधिकारों की मजबूत नींव

वरिष्ठ नागरिकों को उनके अधिकार दिलाने के लिए माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया है। यह अधिनियम वरिष्ठजनों को यह अधिकार देता है कि यदि वे स्वयं अपना भरण-पोषण करने में सक्षम नहीं हैं, तो वे अपने बच्चों या संबंधितों से भरण-पोषण प्राप्त कर सकते हैं।

प्रदेश में इस अधिनियम के तहत प्रत्येक अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय को भरण-पोषण अधिकरण तथा जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय को अपील अधिकरण घोषित किया गया है। इससे वरिष्ठ नागरिकों को त्वरित एवं सुलभ न्याय प्राप्त हो रहा है। इसके अतिरिक्त, सामाजिक न्याय विभाग के जिला अधिकारियों को भरण-पोषण अधिकारी के रूप में नामित किया गया है, जो इस व्यवस्था को प्रभावी रूप से संचालित करते हैं।

अधिनियम के अंतर्गत वरिष्ठ नागरिकों की उपेक्षा या परित्याग को दंडनीय अपराध माना गया है, जिससे समाज में उनके प्रति उत्तरदायित्व की भावना को सुदृढ़ किया गया है। साथ ही, भरण-पोषण हेतु मासिक राशि निर्धारित करने का प्रावधान भी वरिष्ठजनों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करता है।

संस्थागत व्यवस्था: आश्रय और देखभाल

प्रदेश में वरिष्ठ नागरिकों के लिए आश्रय और देखभाल की सुदृढ़ व्यवस्था की गई है। विभिन्न संस्थाओं एवं स्थानीय निकायों के माध्यम से संचालित वरिष्ठ आश्रमों में जरूरतमंद वरिष्ठजनों को आश्रय, भोजन, स्वास्थ्य सेवाएं एवं मनोरंजन की सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।

इसी कड़ी में भोपाल में विकसित “संध्या छाया” वरिष्ठजन निवास एक महत्वपूर्ण पहल है। यह आधुनिक एवं सर्वसुविधायुक्त आवासीय परिसर वरिष्ठजनों को सुरक्षित, आरामदायक एवं गरिमापूर्ण जीवन प्रदान करता है। यहां वातानुकूलित कक्ष, लाइब्रेरी, फिजियोथेरेपी, चिकित्सा सुविधाएं एवं मनोरंजन के साधन उपलब्ध कराए गए हैं। यह पहल दर्शाती है कि राज्य शासन वरिष्ठजनों को केवल आश्रय ही नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण जीवन प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

योजनाएं और कार्यक्रम: समग्र विकास की दिशा

भारत सरकार की अटल वयो अभ्युदय योजना के माध्यम से भी राज्य में वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण हेतु विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इस योजना के तहत स्वास्थ्य देखभाल, पोषण, आजीविका, सामाजिक सहभागिता एवं जागरूकता जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

वरिष्ठजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए अंतर-पीढ़ी संवाद, सामूहिक गतिविधियां और कौशल विकास कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इससे न केवल उनकी सक्रियता बनी रहती है, बल्कि समाज में उनके अनुभवों का लाभ भी नई पीढ़ी को मिलता है।

हेल्पलाइन और सहायता तंत्र: हर समय साथ

वरिष्ठ नागरिकों की सहायता के लिए Elder Line 14567 जैसी पहल अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो रही है। यह टोल-फ्री हेल्पलाइन वरिष्ठजनों को जानकारी, परामर्श, भावनात्मक सहयोग एवं आपात स्थिति में सहायता प्रदान करती है।

इस हेल्पलाइन के माध्यम से वरिष्ठजन अपनी समस्याएं साझा कर सकते हैं और उन्हें त्वरित समाधान प्राप्त होता है। यह सेवा न केवल उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करती है, बल्कि उन्हें यह विश्वास भी दिलाती है कि शासन हर समय उनके साथ खड़ा है।

सम्मान और सामाजिक स्वीकृति

वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान को बढ़ावा देने के लिए राज्य में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर “शतायु सम्मान” जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से 100 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठजनों को सम्मानित किया जाता है। यह पहल समाज में वरिष्ठजनों के प्रति सम्मान और प्रेरणा का वातावरण तैयार करती है।

नवाचार और सुधार

राज्य शासन द्वारा समय-समय पर नियमों में संशोधन कर व्यवस्थाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। उदाहरण के लिए, शासकीय कर्मचारियों द्वारा माता-पिता की उपेक्षा करने पर उनके वेतन से भरण-पोषण भत्ता काटकर सीधे माता-पिता के खाते में जमा करने का प्रावधान एक महत्वपूर्ण और प्रभावी कदम है।

यह व्यवस्था न केवल वरिष्ठजनों के अधिकारों की रक्षा करती है, बल्कि परिवारों में जिम्मेदारी और संवेदनशीलता को भी बढ़ावा देती है।

मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में वरिष्ठ नागरिकों के लिए संचालित सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम एक समग्र, संवेदनशील और प्रभावी तंत्र के रूप में उभरकर सामने आए हैं। कानूनी संरक्षण, संस्थागत व्यवस्थाएं, योजनाएं, हेल्पलाइन सेवाएं और सम्मान कार्यक्रम—इन सभी प्रयासों ने मिलकर वरिष्ठजनों के जीवन को अधिक सुरक्षित, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर बनाया है।

यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि मध्यप्रदेश में वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों के संरक्षण और उनके कल्याण के लिए किए जा रहे प्रयास न केवल राज्य के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। आने वाले समय में इन पहलों के माध्यम से वरिष्ठजनों के जीवन में और अधिक सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलेंगे, जो एक संवेदनशील और समावेशी समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

 

मुस्कुराहटों के बीच सजे सोलह श्रृंगार, चौक बहु मंडल ने बांटी खुशियां

विवेक झा, भोपाल। चौक बहु मंडल द्वारा आयोजित पारिवारिक मिलन समारोह में समाज की बहुओं ने भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों की खूबसूरत झलक पेश की। केरवा डेम स्थित एक निजी स्थल पर आयोजित कार्यक्रम में पारंपरिक भारतीय परिधानों से सजी बहुओं के चेहरों पर मुस्कान और उत्साह साफ दिखाई दे रहा था। कार्यक्रम का उद्देश्य आपसी संवाद, सामाजिक समरसता और पारिवारिक संबंधों को मजबूत करना रहा।

सोलह श्रृंगार सामग्री भेंट कर किया स्वागत

कार्यक्रम की शुरुआत चौक बहु मंडल की अध्यक्ष श्रीमती नीलू जैन द्वारा सभी सदस्यों के स्वागत से हुई। इस अवसर पर उन्होंने सोलह श्रृंगार की सामग्री भेंट कर सभी महिलाओं का अभिनंदन किया। स्वागत के दौरान पारंपरिक भारतीय संस्कृति और महिला सशक्तिकरण की भावना भी देखने को मिली।

  

आपसी संवाद से मजबूत हुए रिश्ते

मिलन समारोह में उपस्थित महिलाओं ने एक-दूसरे से खुलकर बातचीत की और अपने अनुभव साझा किए। पारिवारिक माहौल में आयोजित इस कार्यक्रम ने समाज की महिलाओं को एक-दूसरे को बेहतर ढंग से जानने और समझने का अवसर प्रदान किया। महिलाओं ने सामाजिक और पारिवारिक विषयों पर चर्चा करते हुए रिश्तों को और मजबूत बनाने का संकल्प लिया।

गेम्स, नृत्य और फिल्मी तरानों ने बांधा समां

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न मनोरंजक खेलों का आयोजन किया गया, जिनमें सभी सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पुराने फिल्मी गीतों और सदाबहार तरानों पर महिलाओं ने नृत्य प्रस्तुत कर माहौल को आनंदमय बना दिया। कई सदस्यों ने अपनी कला और प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए कार्यक्रम को यादगार बना दिया।

घर से लाए व्यंजनों का लिया स्वाद

समारोह की एक विशेष आकर्षण सामूहिक भोजन व्यवस्था रही। सभी महिलाएं अपने घरों से विशेष व्यंजन बनाकर लाई थीं। इन व्यंजनों को एक-दूसरे के साथ साझा कर सभी ने स्वाद और अपनत्व का आनंद लिया। इस पहल ने आपसी प्रेम और सहयोग की भावना को और मजबूत किया।

सामाजिक सरोकारों में भी सक्रिय है बहु मंडल

समाज के प्रवक्ता अंशुल जैन ने बताया कि चौक बहु मंडल केवल सामाजिक मेल-मिलाप तक सीमित नहीं है, बल्कि संस्था की सदस्य शिक्षा, चिकित्सा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में भी निरंतर सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। बहु मंडल द्वारा समय-समय पर सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिससे समाज में सकारात्मक संदेश पहुंचता है।

इनकी रही विशेष उपस्थिति

कार्यक्रम में अध्यक्ष श्रीमती नीलू जैन, कोषाध्यक्ष श्रीमती कविता जैन, श्रीमती मंजू जैन, उपाध्यक्ष श्रीमती निकिता जैन, मंत्री श्रीमती आरती जैन, मंत्री श्रीमती ज्योति जैन, सांस्कृतिक मंत्री श्रीमती आवृत्ति जैन एवं श्रीमती प्रियंका जैन सहित भावना जैन, सोना जैन, ममता जैन, डिंपल जैन, पूजा जैन, प्रीति जैन, संगीता जैन, रीना जैन, रानी जैन, मनीष जैन, विनीता जैन, पायल जैन, माही जैन, सिल्की जैन, मेघा जैन, अलका जैन, कोपल जैन, दीपिका जैन, नेहा जैन, अनिका जैन, अपेक्षा जैन, ऋतु जैन, अंजना जैन, जयति जैन सहित बड़ी संख्या में सदस्य उपस्थित रहीं।

भारतीय संस्कृति और सामाजिक एकता का संदेश

चौक बहु मंडल के इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि सामाजिक संगठनों के माध्यम से महिलाओं को न केवल अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है, बल्कि समाज में एकता, सहयोग और सकारात्मकता का वातावरण भी मजबूत होता है। भारतीय परंपरा, संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों से जुड़े ऐसे आयोजन सामाजिक समरसता को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।

Smart Manufacturing, Welding Excellence and Skill Development Take Center Stage at CII MP WeldTech Conclave 2026

Vivek Jha, Bhopal, May 29, 2026 : The Confederation of Indian Industry (CII), Madhya Pradesh, successfully organized the second edition of the CII MP WeldTech Conclave 2026 at Sant Shiromani Ravidas Global Skills Park, Bhopal, bringing together industry leaders, technical experts, MSMEs, academicians and students to deliberate on the future of welding and manufacturing technologies.

The conclave focused on advanced welding techniques, automation, quality standards, global best practices and skill development, providing a common platform for stakeholders from the manufacturing and fabrication ecosystem to exchange ideas and explore emerging opportunities.

Need for Modern Technologies in Manufacturing

Welcoming the participants, Siddharth Chaturvedi, Chairman, CII Madhya Pradesh, highlighted the rapid growth of manufacturing, engineering and fabrication industries in the state. He emphasized that the increasing adoption of automation and advanced technologies has created a strong demand for skilled manpower and modern welding solutions.

He stated that CII remains committed to enhancing industrial competitiveness by facilitating knowledge-sharing platforms and industry-focused initiatives.

Growing Global Demand for Skilled Welders

Setting the context for the conclave, Uttam Ganguly, Former Chairman, CII Madhya Pradesh and Managing Director, Bend Joints Pvt. Ltd., pointed out that skilled welders are in high demand worldwide.

He noted that critical sectors such as infrastructure, automotive, defence, energy and manufacturing depend heavily on high-quality welding practices. According to him, platforms like WeldTech play a crucial role in addressing both current and future industry requirements.

Skill Development Key to Industrial Growth

Delivering the special address, Neeraj Sahay, Director, Sant Shiromani Ravidas Global Skills Park, emphasized the importance of skill development in meeting the evolving needs of industries.

He said that the Madhya Pradesh Government is creating world-class skill development infrastructure aligned with industry requirements, which will enhance employability among youth while improving industrial productivity.

Experts Share Insights on Emerging Welding Trends

The technical sessions featured renowned experts from leading organizations across the country.

Amlan Saha from Fronius, Pune, delivered a presentation on “Intelligent Welding Technology for Gen-Z”, explaining how digital technologies, automation and smart welding solutions are making welding processes more efficient, accurate and user-friendly for the next generation workforce.

Focus on Quality Excellence and Future Readiness

Pallavit Dubey from BHEL, Bhopal, spoke on “Quality Excellence in Welding and Fabrication: Industry Expectations and Future Readiness.” He stressed the importance of maintaining global quality standards and preparing industries for future technological advancements.

Importance of Standards and Lean Practices

Satish P. Sawant from the Institute of Welding and Testing Technology addressed the topic “Role of Welding Standards, NDT and Lean Practices in Building Globally Competitive Industries.”

He highlighted the significance of quality standards, non-destructive testing (NDT) and lean manufacturing practices in enhancing industrial competitiveness and ensuring product reliability.

Practical Solutions for MSMEs

R. Nipin Shankar from Lincoln Electric, Mumbai, delivered a session on “Reducing Rework, Improving Quality: Practical Welding Solutions for MSMEs.”

He shared cost-effective and practical approaches that can help small and medium enterprises improve quality, reduce production losses and enhance operational efficiency.

Modern Welding Engineering Requires Global Skills

Partha Pratim Brahma from TWI India, Chennai, discussed “Standards and Skills in Modern Welding Engineering.” He emphasized the growing need for globally recognized skills and industry-aligned training to meet future demands in welding engineering.

Robotic Welding Demonstration Draws Attention

One of the major attractions of the conclave was a live robotic-arm welding demonstration, which provided participants with a firsthand experience of advanced robotic welding technologies.

The demonstration showcased how automation can improve precision, safety, productivity and ease of operation in modern manufacturing environments. Participants witnessed the transformative impact of robotics on welding processes and industrial efficiency.

Strengthening Industry-Academia Collaboration

Speakers unanimously emphasized the need for stronger collaboration between industry, technical institutions and skill development organizations to bridge the skill gap and prepare a future-ready workforce.

Driving Manufacturing Excellence in Madhya Pradesh

The conclave concluded with a networking session where participants exchanged ideas and explored collaborative opportunities. CII reaffirmed its commitment to promoting manufacturing excellence, technological innovation, skill development and global competitiveness across industries in Madhya Pradesh.

About CII MP WeldTech Conclave

The CII MP WeldTech Conclave is a dedicated initiative aimed at bringing together industry professionals, manufacturing companies, welding experts, technical institutions and policymakers on a common platform. The conclave focuses on emerging technologies, quality standards, skill development and future trends in welding, fabrication and manufacturing industries, fostering meaningful dialogue and industry growth.

वेल्डिंग तकनीक में बदलाव की आहट: स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, रोबोटिक वेल्डिंग और स्किल डेवलपमेंट पर मंथन

विवेक झा, भोपाल। विनिर्माण और फैब्रिकेशन उद्योगों में तेजी से बदलती तकनीक, ऑटोमेशन और कुशल मानव संसाधन की बढ़ती जरूरतों के बीच भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) मध्यप्रदेश द्वारा आयोजित द्वितीय सीआईआई एमपी वेल्डटेक कॉन्क्लेव-2026 में देशभर के विशेषज्ञों ने स्मार्ट वेल्डिंग तकनीकों, गुणवत्ता मानकों और कौशल विकास के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क में आयोजित इस कॉन्क्लेव में उद्योग, तकनीकी संस्थानों, एमएसएमई इकाइयों तथा विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

उद्योगों की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने का मंच बना कॉन्क्लेव

कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए सीआईआई मध्यप्रदेश के अध्यक्ष सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने कहा कि मध्यप्रदेश में इंजीनियरिंग, विनिर्माण और फैब्रिकेशन क्षेत्र का तेजी से विस्तार हो रहा है। ऐसे समय में आधुनिक वेल्डिंग तकनीकों, ऑटोमेशन और प्रशिक्षित मानव संसाधन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धात्मक औद्योगिक वातावरण में टिके रहने के लिए तकनीकी नवाचारों को अपनाना आवश्यक है और सीआईआई भविष्य में भी उद्योगों को ऐसे ज्ञानवर्धक मंच उपलब्ध कराता रहेगा।

वैश्विक स्तर पर बढ़ रही कुशल वेल्डरों की मांग

कॉन्क्लेव की भूमिका प्रस्तुत करते हुए सीआईआई मध्यप्रदेश के पूर्व अध्यक्ष एवं बेंड जॉइंट्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक उत्तम गांगुली ने कहा कि दुनिया भर में कुशल वेल्डरों की भारी मांग है। उन्होंने बताया कि आधारभूत संरचना, रक्षा, ऑटोमोबाइल, ऊर्जा और भारी विनिर्माण जैसे क्षेत्रों की सफलता काफी हद तक गुणवत्तापूर्ण वेल्डिंग पर निर्भर करती है। ऐसे आयोजनों से उद्योगों को वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं को समझने का अवसर मिलता है।

स्किल डेवलपमेंट से बढ़ेगी युवाओं की रोजगार क्षमता

संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क के निदेशक नीरज सहाय ने कहा कि बदलते औद्योगिक परिदृश्य में कौशल विकास सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है। मध्यप्रदेश सरकार उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप विश्वस्तरीय प्रशिक्षण अवसंरचना विकसित कर रही है, जिससे युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ेगी और उद्योगों को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध हो सकेगा।

जेन-ज़ेड के लिए स्मार्ट और डिजिटल हो रही वेल्डिंग

तकनीकी सत्रों में फ्रोनियस, पुणे के विशेषज्ञ अमलान साहा ने “इंटेलिजेंट वेल्डिंग टेक्नोलॉजी फॉर जेन-ज़ेड” विषय पर प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि डिजिटल तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम और ऑटोमेशन वेल्डिंग प्रक्रियाओं को अधिक सटीक, सरल और प्रभावी बना रहे हैं। नई पीढ़ी के तकनीकी पेशेवरों के लिए यह क्षेत्र तेजी से आकर्षक बनता जा रहा है।

गुणवत्ता और भविष्य की तैयारी पर विशेष जोर

बीएचईएल भोपाल के विशेषज्ञ पल्लवित दुबे ने उद्योगों में गुणवत्ता उत्कृष्टता और भविष्य की तैयारी के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों का पालन करना भी आवश्यक है। गुणवत्ता आधारित उत्पादन से ही भारतीय उद्योग वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना सकते हैं।

वैश्विक मानकों और निरीक्षण प्रणाली की अहम भूमिका

इंस्टीट्यूट ऑफ वेल्डिंग एंड टेस्टिंग टेक्नोलॉजी के सतीश पी. सावंत ने अपने संबोधन में वेल्डिंग स्टैंडर्ड्स, नॉन-डिस्ट्रक्टिव टेस्टिंग (एनडीटी) और लीन प्रैक्टिसेज की उपयोगिता पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता नियंत्रण और निरीक्षण प्रणालियां किसी भी उद्योग की विश्वसनीयता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

एमएसएमई को बताए लागत घटाने के उपाय

लिंकन इलेक्ट्रिक, मुंबई के आर. निपिन शंकर ने एमएसएमई इकाइयों के लिए व्यावहारिक वेल्डिंग समाधानों पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आधुनिक तकनीकों के उपयोग से रीवर्क कम किया जा सकता है, जिससे उत्पादन लागत घटती है और गुणवत्ता में सुधार आता है। इससे छोटे और मध्यम उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ती है।

आधुनिक वेल्डिंग इंजीनियरिंग में कौशल सबसे बड़ी जरूरत

द वेल्डिंग इंस्टीट्यूट (टीडब्ल्यूआई) इंडिया, चेन्नई के पार्थ प्रतिम ब्रह्मा ने आधुनिक वेल्डिंग इंजीनियरिंग में कौशल और अंतरराष्ट्रीय मानकों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उद्योगों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित तकनीकी विशेषज्ञ तैयार करने होंगे।

रोबोटिक वेल्डिंग डेमो बना आकर्षण का केंद्र

कॉन्क्लेव का प्रमुख आकर्षण रोबोटिक आर्म आधारित लाइव वेल्डिंग डेमोंस्ट्रेशन रहा। प्रतिभागियों ने अत्याधुनिक रोबोटिक वेल्डिंग तकनीक को प्रत्यक्ष रूप से देखा और समझा। प्रदर्शन के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि रोबोटिक तकनीक के उपयोग से वेल्डिंग प्रक्रिया अधिक सटीक, सुरक्षित और उत्पादक बन रही है। इससे उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ-साथ मानवीय त्रुटियों में भी कमी आती है।

उद्योग, शिक्षा और कौशल विकास के बीच मजबूत समन्वय की जरूरत

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि उद्योगों, तकनीकी शिक्षण संस्थानों और कौशल विकास केंद्रों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना समय की मांग है। इससे उद्योगों को प्रशिक्षित कार्यबल मिलेगा और युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।

मध्यप्रदेश को विनिर्माण हब बनाने की दिशा में पहल

कॉन्क्लेव के समापन पर सीआईआई ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि मध्यप्रदेश को विनिर्माण और इंजीनियरिंग क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के लिए ऐसे कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाएंगे। संस्था का उद्देश्य तकनीकी नवाचार, कौशल विकास और गुणवत्ता आधारित उत्पादन को बढ़ावा देकर प्रदेश के उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करना है।

क्या है सीआईआई एमपी वेल्डटेक कॉन्क्लेव?

सीआईआई एमपी वेल्डटेक कॉन्क्लेव एक विशेष पहल है, जिसका उद्देश्य वेल्डिंग, फैब्रिकेशन और विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े उद्योगों, विशेषज्ञों, तकनीकी संस्थानों और पेशेवरों को एक मंच पर लाना है। यहां नवीनतम तकनीकों, गुणवत्ता मानकों, कौशल विकास और उद्योग की भविष्य की आवश्यकताओं पर विचार-विमर्श किया जाता है।

MP में तबादलों की तैयारी तेज, विभागों ने मांगी पदस्थापना डिटेल; NHM 2 जून तक लेगा आवेदन

भोपाल 

प्रदेश  में तबादलों का काउंटडाउन शुरू हो गया है। सरकार द्वारा लंबे समय से एक ही जगह पर जमे अधिकारियों और कर्मचारियों को हटाने की तैयारी तेज कर दी गई है। खासतौर पर राजस्व विभाग और पुलिस महकमे में बड़े स्तर पर फेरबदल के संकेत मिल रहे हैं। विभागीय स्तर पर अधिकारियों की सूचियां तैयार होना शुरू हो गई हैं। तीन साल या उससे अधिक समय से एक ही जिले और अनुभाग में पदस्थ अधिकारियों की जानकारी जुटाई जा रही है। इससे एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और पटवारियों सहित कई अधिकारी प्रभावित होंगे।

तबादले की अवधि नजदीक आने के साथ प्रदेश के अलग-अलग विभागों के विभागाध्यक्षों ने विभागीय तबादला नीति जारी करने के साथ जिलों में पदस्थ अलग-अलग कैडर के अफसरों का ब्यौरा जुटाना शुरू कर दिया है।

लोक निर्माण और जल संसाधन विभाग ने इंजीनियरों की वर्तमान पोस्टिंग, पदनाम और अतिरिक्त प्रभार की जानकारी मांगी है तो स्कूल शिक्षा विभाग ने हर विद्यालय में पदस्थ एक-एक शिक्षक का ब्यौरा पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए हैं।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने संविदा कर्मचारियों के तबादले के लिए 2 जून तक ऑनलाइन आवेदन बुला लिए हैं, तो पीएचक्यू ने आरक्षक से सब इंस्पेक्टर तक के तबादले पांच जून तक करने की डेडलाइन तय कर दी है।

मोहन कैबिनेट के फैसले के बाद 22 मई को सामान्य प्रशासन विभाग ने प्रदेश के कर्मचारी अधिकारियों के राज्य और जिला संवर्ग स्तर पर तबादले की पॉलिसी जारी कर दी है। इसमें तबादले की अलग-अलग परिस्थितियों के आधार पर विभागों को ऑनलाइन आवेदन मंगाने के लिए कहा गया है। साथ ही यह भी साफ किया गया है कि अगर कोई अधिकारी कर्मचारी सरकार द्वारा तय टारगेट को अचीव नहीं कर पाता है तो उसे प्रशासनिक आधार पर तीन साल की अवधि के पहले भी स्थानांतरित किया जा सकता है।

जल संसाधन विभाग ने मांगी इंजीनियरों की पदस्थापना, अतिरिक्त प्रभार की जानकारी
जल संसाधन विभाग ने आयुक्त कमांड क्षेत्र और विकास संचालनालय, आयुक्त भू अर्जन और पुनर्वास बाणसागर रीवा, सभी मुख्य अभियंता, परियोजना संचालक, अधीक्षण यंत्री और कार्यपालन यंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि विभाग के प्रथम, द्वितीय, तृतीय श्रेणी कर्मचारियों के नाम, पदनाम, पदस्थापना स्थल, जहां से वेतन निकलता है वहां की जानकारी के साथ गृह जिला, सेवानिवृत्ति तिथि, जिन पदों के अतिरिक्त प्रभार में हैं उस पद और कार्यालय का नाम तथा तारीख की जानकारी शासन को भेजें।

स्कूल शिक्षा विभाग ने तबादले के पहले मांगा हर टीचर की पोस्टिंग का ब्यौरा
उधर स्कूल शिक्षा विभाग ने भी एजुकेशन 3.0 पोर्टल पर हर विद्यालय में विषय वार पदस्थ शिक्षकों का ब्यौरा एंट्री करने के लिए कहा है। इसके लिए सभी जिला शिक्षा अधिकारियों से कहा गया है कि विद्यालय वार और विषय वार एंट्री कराएं और जिन शिक्षकों की मृत्यु हो गई है या रिटायर हो गए हैं, उनके नाम विद्यालय में पदस्थ शिक्षकों की सूची से हटाएं ताकि जब विभाग द्वारा तबादले की कार्यवाही की जाए तो यह स्थिति न बने कि विद्यालय में पहले से पर्याप्त शिक्षक पदस्थ हों और अतिरिक्त पदस्थापना हो जाए या फिर पद भरे होने की जानकारी पोर्टल पर हो जबकि वास्तव में टीचर न हों तो वहां पोस्टिंग न हो पाए। लोक शिक्षण आयुक्त इसकी जिलावार समीक्षा 30 मई को करेंगे।

जनगणना में लगे शिक्षकों के तबादले फरवरी 2027 तक नहीं होंगे
लोक शिक्षण आयुक्त ने एक अन्य निर्देश जारी कर कहा है कि जिन शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना में लगी है उनके तबादले फरवरी 2027 तक नहीं होंगे। ऐसे शिक्षकों की संख्या 58 हजार से अधिक है जो जनगणना ड्यूटी में लगे हैं। इसलिए एक जून 2026 तक ऐसे सभी शिक्षकों की जानकारी एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर एंट्री करने के लिए कहा गया है जो जनगणना में लगे हैं।

एनएचएम ने 2 जून तक मांगा संविदा कर्मचारियों की डिटेल
दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग ने भी इस पर काम शुरू कर दिया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की अपर मिशन संचालक दिशा नागवंशी ने एनएचएम में काम करने वाले संविदा कर्मचारियों के स्वैच्छिक स्थानांतरण के ऑनलाइन प्रस्ताव 2 जून तक मांगे हैं। इसके लिए संविदा तबादले की पॉलिसी भी जारी कर दी गई है। ऑनलान आवेदन 27 मई से लेने का सिलसिला पोर्टल पर शुरू हुआ है और 2 जून की रात 12 बजे तक आवेदन किए जा सकेंगे। इसके बाद तबादले किए जाएंगे।

निर्देशों में कहा गया है कि तबादले के लिए तीन माह की सार्थक एप की उपस्थिति भी अपलोड करनी होगी। आवेदन सिर्फ ग्रामीण क्षेत्र से ग्रामीण क्षेत्र और शहरी क्षेत्र से शहरी क्षेत्र के लिए किए जा सकेंगे। रिक्त पद पर तबादले के लिए कम से कम और अधिकम 5 संस्थाओं की एंट्री आवेदन में करनी होगी। ऐसे कर्मचारी जिनकी नियुक्त दो साल के भीतर हुई है तथा दो साल में जिनका तबादला हो चुका है, उनके तबादले पर प्रतिबंध रहेगा।

5 जून तक आरक्षक से एसआई तक के तबादले करेंगे पुलिस आयुक्त-एसपी
इसी तरह गृह विभाग के अंतर्गत पुलिस मुख्यालय ने भोपाल, इंदौर के पुलिस आयुक्त, एसपी रेल समेत सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों से कहा है कि किसी एक थाने में आरक्षक से लेकर सब इंस्पेक्टर तक के कर्मचारी की एक पद पर पदस्थापना पांच साल से अधिक नहीं होना चाहिए।

साथ ही एक बार पोस्टिंग के बाद संबंधित कर्मचारी की पदस्थापना दोबारा उसी थाने में नहीं होनी चाहिए। अलग-अलग पदों पर पदस्थापना के मामले में किसी भी कर्मचारी की पोस्टिंग में तीन साल का अंतर होना चाहिए।

इसके अलावा यह भी कहा गया है कि आरक्षक से लेकर सब इंस्पेक्टर तक के कर्मचारी को एक ही पुलिस अनुविभाग में दस साल से अधिक समय तक नहीं रहना चाहिए। पुलिस मुख्यालय ने इस आधार पर पांच जून तक तबादला करके सूची मुख्यालय को भेजने कहा है।

सूत्रों के मुताबिक राज्य शासन जल्द ही तबादला नीति जारी कर सकता है। इसके पहले ही विभागों में अंदरखाने हलचल बढ़ गई है। कई अधिकारी अपने पसंदीदा जिलों में पदस्थापना के लिए राजनीतिक संपर्क साधने में जुट गए हैं। नेताओं और जनप्रतिनिधियों के यहां सिफारिशी पत्रों का दौर भी शुरू हो गया है। राजधानी भोपाल से लेकर जिला मुख्यालयों तक तबादलों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।

राजस्व विभाग में सबसे ज्यादा बदलाव की संभावना जताई जा रही है। जिन अधिकारियों पर लंबे समय से एक ही क्षेत्र में जमे रहने के आरोप लगते रहे हैं। उन्हें हटाने की तैयारी है। वहीं पुलिस विभाग में भी थाना प्रभारियों, एसडीओपी और अन्य अधिकारियों की सूची तैयार की जा रही है। कानून व्यवस्था और प्रशासनिक कसावट को ध्यान में रखते हुए सरकार इस बार बड़े पैमाने पर बदलाव कर सकती है। 

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