CJP विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा: फर्जी डिग्री और साजिश के आरोपों की CBI जांच की मांग

नई दिल्ली

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को लेकर जारी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें CJP से जुड़े व्यक्तियों के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से स्वतंत्र जांच कराने और उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। याचिका में फर्जी कानून डिग्रियों के इस्तेमाल, प्रतिरूपण और सर्वोच्च न्यायालय की संस्थागत पहचान के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। याचिकाकर्ता का आरोप है कि संबंधित लोगों ने खुद को वकील या कानूनी विशेषज्ञ बताकर जनता को गुमराह किया और न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता को ठेस पहुंचाई। याचिका में CBI को निर्देश देने की अपील की गई है कि जाली डिग्रियों के कथित उपयोग और आपराधिक साजिश की गहन जांच की जाए।

सोशल मीडिया पर गरमाया विवाद
यह याचिका ऐसे समय में आई है जब सोशल मीडिया पर CJP का विवाद चरम पर है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की ‘व्यवस्था पर हमला करने वालों’ वाली टिप्पणी के बाद मुद्दा सुर्खियों में आ गया। खुफिया ब्यूरो (IB) की रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार के निर्देश पर गुरुवार को CJP के आधिकारिक एक्स हैंडल को भारत में प्रतिबंधित कर दिया गया। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69A के तहत यह कार्रवाई की। खुफिया एजेंसियों ने CJP पर ‘भड़काऊ’ सामग्री फैलाने और देश की संप्रभुता को चुनौती देने का आरोप लगाया था।

क्या है कॉकरोच जनता पार्टी?
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ एक व्यंग्यात्मक और मीम-आधारित डिजिटल आंदोलन है, जिसकी शुरुआत बोस्टन विश्वविद्यालय के छात्र अभिजीत दीपके ने की थी। यह खुद को ‘बेरोजगार युवाओं की आवाज’ बताता है। पिछले सप्ताह यह आंदोलन खासकर जेन-जी युवाओं के बीच तेजी से वायरल हुआ। व्यंग्य, सत्ता-विरोधी टिप्पणियों और मीम्स के जरिए यह एक बड़े डिजिटल विरोध में बदल गया और विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर लाखों फॉलोअर्स हासिल किए। प्रतिबंध लगने के तुरंत बाद अभिजीत दीपके ने नया हैंडल ‘Cockroach is Back’ शुरू किया और समर्थकों से इसमें शामिल होने की अपील की।

क्या है संस्थापक का आरोप?
शनिवार को अभिजीत दीपके ने कार्रवाई का आरोप लगाते हुए कहा कि कई अकाउंट्स हटाए जाने और हैकिंग की घटनाओं के बाद अब संगठन की किसी भी सोशल मीडिया अकाउंट तक पहुंच नहीं रही है। उन्होंने दावा किया कि उनका व्यक्तिगत इंस्टाग्राम अकाउंट भी हैक कर लिया गया है। दीपके ने ‘एक्स’ पर लिखा कि कॉकरोच जनता पार्टी के खिलाफ कार्रवाई। इंस्टाग्राम पेज हैक किया गया। मेरा व्यक्तिगत इंस्टाग्राम अकाउंट भी हैक किया गया। ट्विटर अकाउंट पर रोक लगाई गई। बैकअप अकाउंट पर भी रोक लगा दी गई। उन्होंने आगे कहा कि फिलहाल हम अपने सोशल मीडिया अकाउंट का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। इस पोस्ट के बाद किसी भी पोस्ट को CJP का आधिकारिक बयान न माना जाए। संगठन की वेबसाइट (cockroachjanataparty.org) भी बंद कर दी गई है।

अगले साल बदल सकता है NEET-UG का पैटर्न, स्वास्थ्य मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार

 नई दिल्ली

पेपर लीक के बाद नीट-यूजी की परीक्षा से जुड़े उन सभी सुधारों को अब रफ्तार मिल सकती है, जिन पर स्वास्थ्य मंत्रालय अब तक चुप्पी साधे हुआ था।

इनमें इस परीक्षा को अगले साल से कंप्यूटर के जरिए कराने का ऐलान सरकार ने कर दिया है, हालांकि इसके बाद भी परीक्षा को कई सत्रों और चरणों कराने के साथ ही परीक्षा के प्रयासों व उम्र की अधिकतम सीमा निर्धारित करने जैसे सुझाव अभी भी लंबित है।

माना जा रहा है कि स्वास्थ्य मंत्रालय जल्द ही उच्चस्तरीय समिति की इन सिफारिशों पर अंतिम निर्णय ले सकता है। इससे जहां अगले साल से नीट-यूजी की परीक्षा कंप्यूटर के जरिए होगी, वहीं कई अन्य बड़े बदलाव भी दिखेंगे।

नीट-यूजी पेपर लीक मामले पर पिछले दिनों संसदीय समिति के सामने पेश हुए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ( एनटीए) के अधिकारियों ने 2024 में नीट-यूजी पेपर लीक के बाद डा राधाकृष्णन की अगुवाई में गठित उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों को साझा किया। साथ ही बताया कि समिति ने नीट-यूजी परीक्षा में सुधार से जुड़े तीन अहम सुझाव स्वास्थ्य मंत्रालय को भी दिए थे।

इनमें परीक्षा को पेन-पेपर की जगह कंप्यूटर के जरिए कराने का, परीक्षा को कई सत्रों व चरणों में कराने का और अंतिम सुझाव परीक्षा के प्रयासों और अधिकतम उम्र सीमा को निर्धारित करने को लेकर था। जो स्वास्थ्य मंत्रालय के पास लंबित है।

सूत्रों के मुताबिक, एनटीए ने संसदीय समिति को बताया कि इन सिफारिशों को मंजूरी के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय को नए सिरे से प्रस्ताव दिया गया है।

गौरतलब है कि मेडिकल के स्नातक कोर्सों में दाखिले से जुड़ी नीट-यूजी की परीक्षा स्वास्थ्य मंत्रालय के अधीन है। इसके लिए मानक आदि का निर्धारण स्वास्थ्य मंत्रालय ही करता है। एनटीए सिर्फ उसके मानक के अनुरूप नीट-यूजी की परीक्षा कराता है।

नीट-यूजी को अगले साल से कंप्यूटर के जरिए कराने के ऐलान से पहले शिक्षा मंत्रालय इस मुद्दे पर स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ कई बार बैठक भी कर चुका है। लेकिन कुछ निर्णय नहीं हो पाया था।
प्रयासों व उम्र की अधिकतम सीमा तय हुई तो कम होंगे आवेदक भी

एनटीए से जुड़े सूत्रों की मानें तो स्वास्थ्य मंत्रालय ने यदि नीट-यूजी के प्रयासों व उम्र की अधिकतम सीमा तय कर दी तो परीक्षा के लिए आवेदन करने वालों की संख्या काफी कम हो जाएगी। अभी इस परीक्षा में हर साल 22 से 23 लाख छात्र शामिल होते है।

अभी इस परीक्षा के प्रयासों की कोई संख्या तय नहीं है, ऐसे में बड़ी संख्या में आवेदक इसमें पांच से अधिक बार शामिल होते है। वही परीक्षा में शामिल होने की न्यूनतम उम्र तो 17 वर्ष निर्धारित की गई है लेकिन अधिकतम उम्र की कोई सीमा तय नहीं है। ऐसे में 50-60 साल के लोग भी आवेदन करते रहते है।
जेईई मेन व नीट-यूजी को एक साथ कराने का भी सुझाव

नीट-यूजी में सुधार को लेकर गठित उच्च स्तरीय समिति ने कई दीर्घकालिक सुझाव भी दिए थे। इनमें जेईई मेन और नीट-यूजी को एक साथ कराने का भी सुझाव दिया है। एनटीए ने संसदीय समिति को इसकी भी जानकारी दी है। साथ ही बताया कि उसने इस दिशा में मंथन शुरू किया है।

हालांकि मौजूदा परिस्थितियों में इसे कराना थोड़ा कठिन है, क्योंकि मौजूदा समय में नीट-यूजी या जेईई मेन में शामिल होने वाले बड़ी संख्या में छात्र ऐसे होते है जो 12 वीं की पढ़ाई मैथ और बायोलाजी में दोनों की करते है। साथ ही दोनों ही परीक्षाओं में शामिल होते है। दोनों ही में जिन परीक्षा में उन्हें अच्छी रैंकिंग मिलती है, वह उस क्षेत्र में दाखिला लेते है।

 

पहलगाम हमले में बड़ा खुलासा, लश्कर आतंकियों तक कैसे पहुंचा GoPro कैमरा? NIA जांच तेज

नई दिल्ली

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। अमेरिका में निर्मित GoPro कैमरा, जिसे आधिकारिक रूप से चीन के एक अधिकृत वितरक को भेजा गया था, वह लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के आतंकवादियों के पास कैसे पहुंच गया, इसकी जांच एजेंसी तेजी से कर रही है। NIA के जांचकर्ताओं का मानना है कि यह मामला केवल एक कैमरे की सप्लाई चेन तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत-विरोधी ताकतों को सीमाओं के पार हाई-टेक उपकरण मुहैया कराने वाले अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को उजागर कर सकता है।

दरअसल, पिछले साल जुलाई में दाचीगाम जंगलों में मुठभेड़ के दौरान मारे गए लश्कर आतंकियों के पास से बरामद उच्च गुणवत्ता वाले GoPro कैमरे ने इस पूरे प्रकरण को नई दिशा दी है। आतंकी संगठन अब हमलों को रिकॉर्ड कर दुष्प्रचार और मनोवैज्ञानिक युद्ध के लिए इन कैमरों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

GoPro कंपनी का बयान
NIA ने आधिकारिक तौर पर अमेरिकी कंपनी GoPro Inc. से संपर्क किया। कंपनी ने अपनी रिपोर्ट में साफ बताया कि उक्त कैमरा चीन में स्थित अपने अधिकृत वाणिज्यिक वितरक को भेजा गया था। अब जांच एजेंसी इस बात का पता लगा रही है कि चीन से प्राप्त यह उपकरण लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों तक कैसे पहुंचा। जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि कैमरे पाकिस्तानी सेना द्वारा खरीदे गए होने और बाद में आतंकी संगठनों को सौंपे जाने की प्रबल आशंका है। बता दें कि भारत और चीन के बीच आपसी कानूनी सहायता संधि (MLAT) न होने के कारण यह मामला राजनयिक स्तर पर उठाया जा रहा है।

आरोपपत्र के बाद भी जांच जारी
NIA ने पहलगाम आतंकी हमले का विस्तृत आरोपपत्र दाखिल कर दिया है, जिसमें हमले के तात्कालिक परिचालन संबंधी तथ्य स्थापित किए गए हैं। हालांकि, उपकरण की खरीद और आपूर्ति शृंखला की जांच अभी भी चल रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हम यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि चीन से आयातित एक सामान्य व्यावसायिक उत्पाद जम्मू-कश्मीर में सक्रिय प्रतिबंधित आतंकी संगठन तक कैसे पहुंचा?

पहलगाम हमला और ऑपरेशन सिंदूर
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी। अधिकतर मृतक पर्यटक थे। इस हमले के बाद केंद्र सरकार ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया, जिसमें पाकिस्तान नियंत्रित क्षेत्रों में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों को निशाना बनाया गया।

जनजातीय महाकुंभ में बोले Amit Shah — आदिवासी समाज सनातन संस्कृति का अभिन्न हिस्सा

नई  दिल्ली

राजधानी दिल्ली में भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर आयोजित विशाल जनजातीय महाकुंभ में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने आदिवासी समाज को सनातन परंपरा का अभिन्न हिस्सा बताते हुए मतांतरण और सांस्कृतिक विघटन पर तीखा प्रहार किया।

देशभर से पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्ययंत्रों और सांस्कृतिक गीतों के साथ पहुंचे जनजातीय समुदायों के बीच शाह ने कहा कि यह केवल आयोजन नहीं, बल्कि भगवान बिरसा मुंडा के उलगुलान के बाद देश को एक सूत्र में जोड़ने वाला सबसे बड़ा सांस्कृतिक आंदोलन है। इस समागम में विष्णुदेव साय, मंत्री केदार कश्यप, सांसद महेश कश्यप समेत सैकड़ों जनजातीय समुदाय के लोग शामिल हुए।

 

दिल्ली के लालकिला मैदान में आदिवासी संगठनों का विशाल प्रदर्शन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी पहुंचे

नई दिल्ली 

 देश की राजधानी दिल्ली का लालकिला मैदान आज एक बड़े जनजातीय सांस्कृतिक समागम और प्रदर्शन का गवाह बन रहा है। इस विशाल रैली और सभा में शामिल होने के लिए छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग, मध्य प्रदेश के रतलाम सहित देशभर से लाखों की संख्या में जनजातीय समाज के लोग परंपरागत वेशभूषा और वाद्ययंत्रों के साथ दिल्ली पहुंच रहे हैं। इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए अंबिकापुर से जनजातीय समाज के लोगों को लेकर दो विशेष ट्रेनें दिल्ली के लिए रवाना हुई थीं, जबकि हजारों लोग अपने निजी साधनों से भी यहां पहुंचे हैं। अन्य राज्यों से भी लोग पहुंच रहे है।

जनजातीय समाज द्वारा दिल्ली के पांच प्रमुख ऐतिहासिक स्थानों से एक साथ विशाल रैलियां निकाली जा रही हैं, जो सीधे लालकिला मैदान पहुंचकर एक महा-सभा में तब्दील होगी। इन रैलियों के रूट इस प्रकार हैं…

  •     राजघाट से लाल किला: 2.5 किलोमीटर
  •     रामलीला मैदान से लाल किला: 2.8 किलोमीटर
  •     अजमेरी गेट से लाल किला: 2.5 किलोमीटर
  •     कुदसिया बाग से लाल किला: 2 किलोमीटर
  •     श्यामगिरी मन्दिर से लाल किला: 3.5 किलोमीटर

गृहमंत्री अमित शाह होंगे शामिल, राष्ट्रपति और पीएम को सौंपा जाएगा ज्ञापन

लालकिला मैदान में आयोजित होने वाले इस मुख्य कार्यक्रम में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हो रहे हैं। इस प्रदर्शन के माध्यम से देश का मूल जनजातीय समाज राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम एक संयुक्त ज्ञापन सौंपेगा। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य मतांतरित (धर्म परिवर्तन कर चुके) लोगों को अनुसूचित जनजाति (ST) की सूची से बाहर करने के लिए ‘डिलिस्टिंग’ कानून बनाने की मांग करना है।

 

बदरीनाथ के पास कंचनगंगा में ग्लेशियर टूटने से हलचल, प्रशासन सतर्क

उत्तराखंड

उत्तराखंड में बदरीनाथ धाम से 4 किलोमीटर दूर कंचनगंगा के ऊपर ग्लेशियर टूटने की खबर है। हालांकि, इस घटना में किसी प्रकार के नुकसान की खबर नहीं है। हर वर्ष नीचे की तरफ खिसक रहा ग्लेशियर गर्मी में तापमान बढ़ते ही तेजी के साथ पिघलने लगता है। इस मामले में चमोली के पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने कहा कि प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

मार्च-अप्रैल में गिर रही ज्यादा बर्फ
पर्यावरण वैज्ञानिकों के अनुसार, हिमालय में बर्फबारी का पैटर्न बदल रहा है। बर्फबारी के महीने माने जाने वाले जनवरी-फरवरी से ज्यादा बर्फ अब मार्च-अप्रैल में गिर रही है। इसका सीधा असर वाटर बैंक माने जाने वाले ग्लेशियरों पर पड़ेगा। इस पैटर्न के कारण ट्री लाइन भी लगातार ऊपर को खिसक रही है। वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों के शोध में यह चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। ताजा शोध जर्मनी की एप्लाइड जियोमेटिक्स शोध पत्रिका में भी प्रकाशित हुआ है।

सर्दियों में कम बर्फबारी
हिमालय में सर्दियों की तुलना में गर्मियों में ज्यादा हो रही बर्फबारी का कारण पश्चिमी विक्षोभ में आई असमानता है। सर्दियों में पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर होने से बारिश और बर्फबारी में कमी आ रही है। गर्मियों में इसके बढ़ने से बर्फबारी के साथ बारिश, ओलावृष्टि और आपदाओं के खतरे बढ़े हैं। वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. पंकज चौहान कहते हैं कि बागेश्वर के पिंडारी और कफनी ग्लेशियर की तरह पूरा मध्य हिमालय इस बदलाव से जूझ रहा है।

आर्थिक और सामाजिक नुकसान
पर्यावरणविद् पद्मविभूषण डॉ. अनिल जोशी के मुताबिक, हिमालय में मौसम के बदले पैटर्न से आर्थिक और सामाजिक नुकसान का खतरा भी बढ़ा है। इससे खाद्य सुरक्षा प्रभावित होगी और अनाज की कीमतें बढ़ सकती हैं। पर्यटन और हॉर्टिकल्चर भी प्रभावित होगा।

सामान्य से अधिक तापमान
पिंडारी और कफनी ग्लेशियर क्षेत्र में इस साल सबसे अधिक 158 सेंटीमीटर बर्फ अप्रैल में गिरी है। मार्च में ये आकड़ा 84 सेंटीमीटर रहा, जबकि जनवरी में महज 96 सेंटीमीटर ही बर्फ पड़ी। दिसंबर में महज चार बार बर्फबारी हुई, वह भी बेहद ऊपरी क्षेत्र में। वैज्ञानिकों के मुताबिक अध्ययन क्षेत्र में बर्फबारी रिकॉर्ड करने लायक भी नहीं हुई। इससे ग्लेशियर और आसपास के क्षेत्र का तापमान भी सामान्य से अधिक दर्ज किया गया। कुछ जगहों पर तापमान में 0.1 से बढ़कर 5 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हुई है।

कमजोर पड़ रहे ग्लेशियर
डॉक्टर पंकज चौहान ने बताया कि मार्च-अप्रैल में हो रही बर्फबारी से ग्लेशियर खतरे में पड़ सकते हैं। चूंकि इन महीनों में तापमान अधिक रहता है इसलिए जिस गति से बर्फ पड़ती है, उसी गति से पिघल भी रही है और ग्लेशियर कमजोर पड़ रहे हैं। ये भविष्य में जलधाराओं को प्रभावित करेंगे, साथ ही आपदा के खतरों को भी बढ़ाएंगे।

पश्चिम बंगाल में अवैध प्रवासियों पर सख्ती, ‘होल्डिंग सेंटर’ बनाने के निर्देश जारी

पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को लेकर एक बहुत बड़ा कदम उठाया है. राज्य सरकार ने अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों को उनके देश वापस भेजने के लिए विशेष ‘होल्डिंग सेंटर’ बनाने के  निर्देश जारी किए हैं.

शुभेंदु सरकार की ओर से इस संबंध में पश्चिम बंगाल के सभी जिलाधिकारियों को लिखित निर्देश और गाइडलाइंस जारी कर दी गई हैं. सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में इन होल्डिंग सेंटरों को बनाने के लिए सही जगह की पहचान करने और आगे की कार्रवाई जल्द से जल्द शुरू करने को कहा है.

प्रशासन का फोकस सीमावर्ती जिलों और उन इलाकों पर है, जहां अवैध प्रवासियों के छिपे होने की ज्यादा उम्मीद रहती है.

डिपोर्ट होने तक सेंटरों में रखे जाएंगे घुसपैठिए
सरकार के बनाए जा रहे इन होल्डिंग सेंटरों का मकसद अवैध रूप से रह रहे लोगों पर कड़ी नजर रखना है. राज्य के अलग-अलग हिस्सों से पकड़े गए अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों को सीधे जेल में रखने के बजाय इन सेंटरों में ट्रांसफर किया जाएगा.

जब तक इन पकड़े गए विदेशी नागरिकों की पहचान की पुष्टि करने और उन्हें कानूनी रूप से उनके मूल देश वापस भेजने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक उन्हें इन्हीं होल्डिंग सेंटरों में रखा जाएगा.

चुनाव प्रचार के दौरान किया था ये वादा
बता दें कि बीजेपी ने इसी साल हुए बंगाल विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान राज्य से अवैध प्रवासियों को निकालने का वादा किया था. अमित शाह ने अपने एक संबोधन में साफ तौर पर कहा था कि जिस तरह बीजेपी ने असम में घुसपैठ को पूरी तरह से खत्म किया, उसी तरह पार्टी बंगाल में भी अवैध घुसपैठ पूरी तरह से खत्म कर देगी. अब राज्य में बीजेपी की सरकार कायम होने के बाद, पार्टी अपने उस वादे को पूरा करने में जुट गई है.

भारत-अमेरिका वार्ता में मजबूत साझेदारी पर जोर, जयशंकर-रुबियो की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस

नई दिल्ली

 भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने नई दिल्ली में द्विपक्षीय वार्ता के बीच में एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया है. अमेरिकी विदेश मंत्री के रूप में अपनी पहली भारत यात्रा पर आए मार्को रुबियो और डॉ. जयशंकर ने सुबह की द्विपक्षीय बैठक के बाद आयोजित इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोनों देशों के मजबूत होते रिश्तों की रूपरेखा साझा की. इस कूटनीतिक मुलाकात का मुख्य उद्देश्य भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते व्यापक रक्षा, सुरक्षा, आर्थिक और ऊर्जा सहयोग की समीक्षा करना तथा वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर आपसी समझ को मजबूत करना था.

दोनों नेताओं ने कल अमेरिकी विदेश मंत्री की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई मुलाकात के बाद आज अपनी बैठक में पश्चिम एशिया, भारतीय उपमहाद्वीप, पूर्वी एशिया, खाड़ी देशों के घटनाक्रमों और यूक्रेन संघर्ष जैसे वैश्विक संकटों पर गहन रणनीतिक बातचीत की है. दोनों देशों ने हाल ही में अपने 10-वर्षीय प्रमुख रक्षा भागीदारी ढांचा समझौते को नवीनीकृत करने के साथ-साथ एक व्यापक अंडरवाटर डोमेन अवेयरनेस रोडमैप पर भी हस्ताक्षर किए हैं.

विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत करते हुए बताया कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और उनके बीच आज सुबह द्विपक्षीय वार्ता का पहला दौर संपन्न हुआ है. दोनों नेता इस चर्चा के बीच में हैं और प्रेस कॉन्फ्रेंस के तुरंत बाद लंच पर शेष मुद्दों को पूरा करने के लिए वापस वार्ता की मेज पर लौटेंगे. हालांकि, ये सचिव रुबियो की पहली भारत यात्रा है, लेकिन वे अपने कार्यकाल के पहले दिन से ही एक-दूसरे के साथ नियमित संपर्क में बने हुए हैं.

विदेश मंत्री ने उठाया वीजा का मुद्दा
बातचीत के दौरान जयशंकर ने भारत के वैध यात्रियों को अमेरिकी वीजा मिलने में आ रही हैं चुनौतियों को भी उठाया. इसके जवाब में रुबियो ने कहा कि सबसे पहले, मैं अमेरिकी अर्थव्यवस्था में भारतीयों के योगदान को स्वीकार करता हूं. भारतीय कंपनियों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 20 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है. हम चाहते हैं कि ये संख्या बढ़ती रहे… जो बदलाव अभी हो रहे हैं या अमेरिका में हमारी प्रवासन सिस्टम का आधुनिकीकरण, ये कदम केवल भारतीय को टारगेट नहीं करता, बल्कि ये नियम पूरे वर्ल्ड के लिए है, इसे पूरी दुनिया में लागू किया जा रहा है.

USA में घुसपैठ कर चुके हैं 20 मिलियन लोग
उन्होंने कहा कि हम आधुनिकीकरण के दौर में हैं. अमेरिका में प्रवासन संकट रहा है. ये भारत की वजह से नहीं है, लेकिन व्यापक रूप से, पिछले कुछ वर्षों में 20 मिलियन से अधिक लोग अवैध रूप से अमेरिका में प्रवेश कर चुके हैं और हमें इस चुनौती का सामना करना पड़ा है… एक देश के रूप में आप जो कुछ भी करते हैं, वह आपके राष्ट्रीय हित में होना चाहिए और इसमें आपकी आव्रजन नीति भी शामिल है. मेरा मानना ​​है कि अमेरिका आव्रजन के मामले में दुनिया का सबसे स्वागत करने वाला देश है. हर साल लगभग दस लाख लोग अमेरिका के स्थायी निवासी बनते हैं और इसमें महत्वपूर्ण योगदान देते हैं.

‘क्यूबा से आए थे मेरे माता-पिता’
अमेरिकी विदेश मंत्री ने खुलासा करते हुए बताया कि मेरे माता-पिता 1956 में क्यूबा से स्थायी निवासी के रूप में संयुक्त राज्य अमेरिका में आए थे. इस प्रक्रिया ने हमें समृद्ध किया है, लेकिन ये एक ऐसी प्रक्रिया होनी चाहिए जो हर युग में मॉर्डन वक्त की वास्तविकताओं के हिसाब हो. हम ऐसा कर रहे हैं और ये बहुत पहले ही हो जाना चाहिए था. इसलिए संयुक्त राज्य अमेरिका वर्तमान में उस सिस्टम में सुधार की प्रक्रिया से गुजर रहा है, जिसके द्वारा हम ये तय करते हैं कि हमारे देश में कितने लोग आते हैं, कौन आता है, कब आता है. जब भी आप कोई सुधार करते हैं, जब भी आप लोगों को एंट्री देने के सिस्टम में कोई बदलाव करते हैं तो एक बदलाव (संक्रमणकालीन) का दौर होता है जो कुछ मतभेद और कठिनाइयां पैदा करता है… ये कदम केवल भारत को टारगेट नहीं करता, ये एक ऐसी प्रणाली है, जिसे वैश्विक स्तर पर लागू किया जा रहा है. लेकिन हम एक बदलाव के दौर में हैं और इस रास्ते में कुछ बाधाएं तो आएंगी ही, लेकिन हमें लगता है कि अंततः हमारा उद्देश्य एक बेहतर सिस्टम, एक अधिक कुशल प्रणाली होगी, जो पहले की प्रणाली से बेहतर काम करेगी और साथ ही अधिक टिकाऊ भी होगी.

रुबियो ने की भारत की तारीफ
इससे पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारों में से एक बताते हुए इस यात्रा को अपने लिए एक बड़ा सम्मान कहा. उन्होंने रणनीतिक साझेदारी को परिभाषित करते हुए कहा कि अमेरिका और भारत दुनिया के कई अन्य देशों के साथ अलग-अलग या क्षेत्रीय मुद्दों पर काम करते हैं, लेकिन एक ‘रणनीतिक साझेदारी’ इन सब से बहुत अलग और कहीं अधिक व्यापक होती है. ये तब होती है जब दो देशों के हित पूरी तरह एक दिशा में संरेखित होते हैं.

मार्को रुबियो ने अपने संबोधन में कहा कि भारत और अमेरिका के बीच सहयोग की चौड़ाई और दायरा ही ये साबित करता है कि भारत अमेरिका का कितना महत्वपूर्ण वैश्विक साझेदार है. उन्होंने कहा कि इस रिश्ते की शुरुआत दोनों देशों के साझा लोकतांत्रिक मूल्यों से होती है. भारत और अमेरिका दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र हैं, इसलिए स्वाभाविक रूप से दोनों के हित एक-दूसरे से जुड़े हैं क्योंकि दोनों देशों के नेता सीधे तौर पर अपनी जनता और मतदाताओं के प्रति जवाबदेह होते हैं.

मेक इन इंडिया पर जोर
साथ ही रक्षा और सुरक्षा के मोर्चे पर डॉ. जयशंकर ने जानकारी दी कि दोनों देशों ने हाल ही में अपने 10-वर्षीय प्रमुख रक्षा भागीदारी ढांचा समझौते को नया जीवन दिया है और व्यापक अंडरवाटर डोमेन अवेयरनेस रोडमैप पर साइन किए हैं.

उन्होंने बताया कि रक्षा क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए दोनों देशों ने भारत के ‘मेक इन इंडिया’ दृष्टिकोण को ध्यान में रखने और हाल के वैश्विक संघर्षों से सीखे गए कड़े सबकों को शामिल करने के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की है.

आपको बता दें कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ हैदराबाद हाउस में प्रतिनिधिमंडल स्तर की महत्वपूर्ण वार्ता की. इस दौरान दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा हुई. इस बैठक में जयशंकर के साथ विदेश सचिव विक्रम मिस्री और विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल समेत वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जबकि अमेरिका की ओर से मार्को रुबियो अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के साथ उपस्थित थे.

 

भारत दौरे पर मार्को रुबियो का बड़ा दावा, बोले- ईरान मुद्दे पर जल्द आ सकती है ‘अच्छी खबर’

नई दिल्ली

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत दौरे के दौरान ईरान के साथ शांति समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। चार दिवसीय भारत यात्रा पर दिल्ली पहुंचे रुबियो ने कहा कि अगले कुछ घंटों में दुनिया को ईरान मुद्दे पर ‘अच्छी खबर’ मिल सकती है। रविवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए रुबियो ने कहा कि मुझे लगता है कि शायद अगले कुछ घंटों में दुनिया को कुछ अच्छी खबर मिलने की संभावना है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित शांति समझौता होर्मुज स्ट्रेट में जारी तनाव को समाप्त करेगा।

बता दें कि ईरान ने अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमले के जवाब में इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को आंशिक रूप से अवरुद्ध कर दिया था। रुबियो ने जोर देकर कहा कि यह समझौता उस प्रक्रिया की शुरुआत करेगा जिसका अंतिम लक्ष्य एक ऐसी दुनिया बनाना है जहां किसी को भी ईरानी परमाणु हथियारों से डरने या चिंता करने की जरूरत न पड़े।

ईरान कभी भी परमाणु हथियार नहीं रख सकता
इस दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर सकता। उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट को अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग बताते हुए ईरान की कार्रवाई की निंदा की। रुबियो ने कहा कि व्यावसायिक जहाजों को नुकसान पहुंचाने की धमकी अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।

शनिवार को ट्रंप ने क्या कहा था?
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कहा था कि वह ईरान के नवीनतम प्रस्ताव पर चर्चा करने के लिए अपने वार्ताकारों से मिल रहे हैं और रविवार तक युद्ध फिर से शुरू करने के बारे में फैसला करेंगे। ट्रंप ने ‘एक्सियोस’ से बात करते हुए कहा था कि इस बात की ”पूरी तरह से 50/50” संभावना है कि वह कोई ‘अच्छा’ सौदा कर पाएंगे
या फिर उन्हें पूरी तरह से बर्बाद कर देंगे।

वहीं, ट्रंप ने रविवार सुबह दावा किया कि इजरायल और क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ व्यापक परामर्श के बाद ईरान के साथ शांति समझौते पर ‘काफी हद तक’ बातचीत हो चुकी है। तीन महीने से चल रहे युद्ध को समाप्त करने की दिशा में यह अहम प्रगति मानी जा रही है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर कहा कि औपचारिक घोषणा से पहले समझौते के अंतिम विवरण पर चर्चा जारी है। उन्होंने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से अलग से हुई बातचीत को ‘बहुत अच्छी’ बताया। ट्रंप ने इस वार्ता को ‘शांति से संबंधित समझौता ज्ञापन’ करार दिया। हालांकि, ईरान ने ट्रंप के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। तेहरान ने स्पष्ट किया कि वह होर्मुज स्ट्रेट पर अपना पूर्ण नियंत्रण बनाए रखेगा

फार्स समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान केवल गुजरने वाले जहाजों की संख्या को युद्ध-पूर्व स्तर पर वापस लाने की अनुमति देने को तैयार हुआ है, लेकिन इसका मतलब ‘मुक्त आवागमन की पूर्ण बहाली’ नहीं है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने ट्रंप के पोस्ट को ‘प्रचार’ बताया। आईआरजीसी ने कहा कि समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई गई है। आईआरजीसी के बयान में कहा गया है कि ट्रंप ने पहले परमाणु कार्यक्रम को किसी भी समझौते की मुख्य शर्त बताया था, लेकिन ईरान की ओर से इस पर कोई सहमति नहीं बनी है। इस स्तर पर परमाणु मुद्दे पर कोई चर्चा भी नहीं हुई है।

भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी पर बोले मार्को रूबियो, रिश्तों को बताया “वैश्विक सहयोग का आधार”

नई दिल्ली

 भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने आज दिल्ली में अपने समकक्ष एस. जयशंकर के साथ बातचीत के दौरान कहा कि भारत और अमेरिका न केवल सहयोगी हैं बल्कि रणनीतिक साझेदार भी हैं, जो दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में मिलकर काम करते हैं।

रूबियो ने आज सुबह अपने भारतीय समकक्ष जयशंकर से मिले। प्रतिनिधिमंडल-स्तर की बातचीत के दौरान शीर्ष अमेरिकी राजनयिक ने कहा कि रणनीतिक संबंध भारत और अमेरिका के रिश्तों को अन्य देशों से अलग बनाते हैं।

रूबियो ने क्या कहा?
उन्होंने कहा, “अमेरिका और भारत सिर्फ सहयोगी नहीं हैं। हम रणनीतिक सहयोगी हैं और यह बात बेहद अहम है। जाहिर है हम दुनिया भर के देशों के साथ कई अलग-अलग मुद्दों पर काम करते हैं, लेकिन हमारी रणनीतिक साझेदारी ही इस रिश्ते को सबसे अलग बनाती है।”

रूबियो ने आगे कहा, “ऐसा इसलिए है क्योंकि यह साझेदारी सिर्प इसी क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में, वैश्विक स्तर पर सहयोग करने के अवसर भी देती है। और जैसा कि मैंने कहा और जैसा कि कल रात हमने खाने पर थोड़ी चर्चा भी की थी इसमें पश्चिमी गोलार्ध और वैसी ही दूसरी जगहें भी शामिल हो सकती हैं।”

‘भारत-अमेरिका रखते हैं साझा हित’
उन्होंने आगे कहा कि भारत और अमेरिका दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र होने के नाते कई साझा हित रखते हैं। उन्होंने आगे कहा, “हम दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र हैं। सिर्फ यही बात हमारे बीच जबरदस्त सहयोग के लिए एक मजबूत आधार है। हमारे इतने सारे साझा हित हैं कि हमारे लिए उन पर लगातार काम करते रहना पूरी तरह से समझदारी की बात है।”

अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा, “यह किसी चीज को फिर से बहाल करने या उसमें नई जान डालने के बारे में नहीं है। मैंने कुछ लोगों को इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल करते देखा है बल्कि यह तो उस पहले से ही बहुत ठोस और मजबूत रणनीतिक साझेदारी को और आगे बढ़ाने के बारे में है, जो हमारी सबसे अहम साझेदारियों में से एक है। मैं तो यहां तक कहूंगा कि यह दुनिया की सबसे अहम साझेदारियों में से एक है।”

🏠 Home 🔥 Trending 🎥 Video 📰 E-Paper Menu