मोदी कैबिनेट का बड़ा ऐलान: पहली स्वदेशी सेमी हाई-स्पीड ट्रेन और किसानों को बढ़ी MSP की सौगात

नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में आज बुनियादी ढांचे और कृषि क्षेत्र के लिए क्रांतिकारी फैसलों को मंजूरी दी गई है. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि सरकार ने अहमदाबाद (सरखेज) से धोलेरा के बीच देश की पहली स्वदेशी सेमी हाई-स्पीड डबल लाइन रेल परियोजना को हरी झंडी दे दी है. करीब 20,667 करोड़ रुपये की लागत वाला यह प्रोजेक्ट न केवल सफर की रफ्तार बढ़ाएगा, बल्कि धोलेरा को भविष्य के सेमीकंडक्टर हब के रूप में स्थापित करने में मील का पत्थर साबित होगा। 

धोलेरा रेल प्रोजेक्ट से कैसे बदलेगी गुजरात की तस्वीर?
यह 134 किलोमीटर लंबी रेल लाइन गुजरात के अहमदाबाद जिले के 284 गांवों को सीधे जोड़ेगी. इससे करीब 5 लाख लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी. यह प्रोजेक्ट आने वाले धोलेरा एयरपोर्ट और लोथल मैरीटाइम कॉम्प्लेक्स को भी जोड़ेगा. सबसे खास बात यह है कि यह पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से तैयार होगा. इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि हर साल 0.48 करोड़ लीटर तेल की बचत भी होगी, जो पर्यावरण के लिए 10 लाख पेड़ लगाने जैसा होगा। 

किसानों के लिए MSP में कितना हुआ इजाफा?
सरकार ने साल 2026-27 के लिए खरीफ फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को मंजूरी दे दी है. कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की सिफारिशों पर आधारित यह MSP उत्पादन लागत से कम से कम 50% अधिक रखी गई है। 

कैबिनेट ने 2026-27 सीजन के लिए खरीफ फसलों के MSP को मंजूरी दी.
सरकार को उम्मीद है कि इससे किसानों को करीब 2.60 लाख करोड़ रुपये का भुगतान होगा. 824.41 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य रखा गया है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देगा। 

कोयला गैसीकरण और नागपुर एयरपोर्ट पर क्या है प्लान?
कैबिनेट ने कोयला गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए 37,500 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय वाली योजना को मंजूरी दी है. अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत के पास 200 साल का कोयला भंडार है, जिसका उपयोग अब गैस बनाने में होगा. इसमें 3 लाख करोड़ रुपये का निवेश होगा. इसके अलावा, नागपुर एयरपोर्ट को अब पीपीपी मॉडल के तहत इंटरनेशनल स्तर पर विकसित किया जाएगा, जिससे विदर्भ क्षेत्र में पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। 

किसानों के लिए मोदी सरकार का बड़ा तोहफा: खरीफ फसलों की MSP बढ़ी, धान अब ₹2441 प्रति क्विंटल

नई दिल्ली
 केंद्रीय कैबिनेट ने 2026-27 सीजन के लिए खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) हेतु 2.60 लाख करोड़ रुपये को मंजूरी दे दी है, जिसका मकसद किसानों को मजबूत आय सहायता देना है। MSP को कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों के आधार पर तय किया गया है। मंत्रिमंडल ने 2026-27 के लिए 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में वृद्धि को मंजूरी दी।

सरकार ने विपणन सत्र 2026-27 के लिए खरीफ फसलों का MSP बढ़ा दिया है, ताकि किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित किया जा सके। 

धान समेत अन्य फसलों की नई MSP
सरकार ने बुधवार को 2026-27 के खरीफ मार्केटिंग सीजन के लिए धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 72 रुपये बढ़ाकर 2,441 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया।पिछले वर्ष की तुलना में MSP में सबसे अधिक वृद्धि की सिफारिश सूरजमुखी के बीज (₹622 प्रति क्विंटल) के लिए की गई है, जिसके बाद कपास (₹557 प्रति क्विंटल), नाइजर बीज (₹515 प्रति क्विंटल) और तिल (₹500 प्रति क्विंटल) का स्थान है।

आधिकारिक अनुमानों के मुताबिक, इस फैसले से किसानों को लगभग 2.60 लाख करोड़ रुपये का भुगतान होने की उम्मीद है, जबकि सालाना खरीद 824.41 लाख मीट्रिक टन (LMT) रहने का अनुमान है। सरकार ने यह भी बताया कि MSP उत्पादन लागत से कम से कम 50% ज्यादा है, जो 2019 में शुरू की गई उस नीति को जारी रखता है जिसका मकसद किसानों को बेहतर रिटर्न सुनिश्चित करना है।

न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार इस संबंध में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) की बैठक में एक फैसला लिया गया।

2026-27 के खरीफ मार्केटिंग सीज़न (सितंबर-अक्टूबर) के लिए, सामान्य और ‘A-ग्रेड’ किस्मों का समर्थन मूल्य 72 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाकर क्रमशः 2,441 रुपये और 2,461 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है।

37500 करोड़ रुपये की कोयला गैसीकरण योजना को मंजूरी
कैबिनेट ने 37,500 करोड़ रुपये की कोयला गैसीकरण योजना को मंजूरी दी। इस योजना का मकसद भारत की आयातित प्राकृतिक गैस, मेथनॉल और अमोनिया पर निर्भरता को कम करना है, साथ ही घरेलू कोयला भंडारों का ज्यादा साफ-सुथरे तरीके से इस्तेमाल करना है।

इस योजना का लक्ष्य 2030 तक 100 मिलियन टन कोयला गैसीकरण क्षमता हासिल करना है, और यह सार्वजनिक और निजी, दोनों क्षेत्रों की परियोजनाओं के लिए वित्तीय प्रोत्साहन देगी।

TCS कांड में बड़ा एक्शन: निदा खान के मददगार AIMIM पार्षद मतीन पटेल के घर-ऑफिस पर चला बुलडोजर

 नासिक
महाराष्ट्र के नासिक में टीसीएस कर्मचारी से जुड़े कथित सेक्सुअल हैरेसमेंट और धर्मांतरण मामले ने अब राजनीतिक और प्रशासनिक रंग ले लिया है. मुख्य आरोपी निदा खान की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसकी मदद करने वालों पर कार्रवाई तेज की है. इसी कड़ी में AIMIM के पार्षद अब्दुल मतीन पटेल का नाम सामने आने के बाद नगर निगम ने उनके घर और ऑफिस पर बुलडोजर कार्रवाई शुरू कर दी है। 

मतीन पटेल पर दर्ज हुआ था केस
पुलिस के मुताबिक, मतीन पटेल पर आरोप है कि उन्होंने आरोपी निदा खान को नारेगाव स्थित कौसर पार्क इलाके में अपने घर में शरण दी थी. इस मामले में नासिक पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 249 के तहत केस दर्ज किया है. निदा खान की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने मतीन पटेल को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की थी। 

इधर, नगर निगम ने दावा किया कि पार्षद के घर और कार्यालय का निर्माण नियमों के विपरीत किया गया है. तीन दिन पहले नोटिस जारी किया गया था और तय समय सीमा पूरी होने के बाद बुधवार सुबह निगम की टीम भारी पुलिस बल के साथ कार्रवाई करने पहुंची। 

महिलाओं ने किया ‘बुल्डोजर टीम’ का स्वागत
हालांकि, कार्रवाई के दौरान वहां एक अलग ही नजारा देखने को मिला. इलाके की कुछ महिलाएं निगम अधिकारियों के सामने फूल लेकर पहुंचीं और उनका स्वागत किया. महिलाओं ने अधिकारियों को संविधान की प्रतियां भी भेंट कीं. उनका कहना था कि कानून का पालन होना चाहिए, लेकिन कार्रवाई संविधान और न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में रहकर की जानी चाहिए। 

महिलाओं के इस अनोखे विरोध ने पूरे इलाके का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. मौके पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात रहे और पूरे क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बना रहा. बुलडोजर कार्रवाई के दौरान स्थानीय लोगों की भीड़ भी जमा हो गई, जिसके चलते प्रशासन पूरी सतर्कता बरतता नजर आया। 

नगर निगम कर्मचारियों को महिलाओं ने दिया संविधान
इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है. AIMIM नेताओं ने इसे राजनीतिक दबाव में की गई कार्रवाई बताया है, जबकि प्रशासन का कहना है कि अवैध निर्माण के खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा रही है और कानून से ऊपर कोई नहीं है। 

फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की जांच कई पहलुओं से कर रही है. अधिकारियों का कहना है कि आरोपी निदा खान से पूछताछ में मिले इनपुट के आधार पर आगे भी कार्रवाई की जा सकती है. वहीं, शहर में बुलडोजर एक्शन और महिलाओं द्वारा संविधान की कॉपी देकर किए गए विरोध की चर्चा लगातार बनी हुई है। 

CM सुवेंदु का बड़ा ऐलान: विधवा, वृद्धावस्था और दिव्यांग पेंशन डबल, अवैध फैक्ट्रियों पर सख्त कार्रवाई

कोलकाता
 पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पद संभालने के बाद से ताबड़तोड़ फैसले लेते दिख रहे हैं. सबसे पहले उन्होंने हावड़ा के तिलजला, टॉपसिया इलाके में हादसे के बाद यहां संचालित तमाम अवैध फैक्ट्रियों का बिजली और पानी कनेक्शन काटने के आदेश दिए. वहीं विधवा भत्ता, बुढ़ापा भत्ता और विकलांगता भत्ता 1000 रुपये से बढ़ाकर 2000 रुपये करने का आदेश दिया है. नई सरकार के गठन के बाद विधानसभा की पहली कार्यवाही के दौरान लंच में चावल, मछली, दाल, तले हुए आलू और सब्जियां शामिल थीं। 

तिलजला-टॉपसिया की अवैध फैक्ट्रियों पर सख्ती
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने तिलजला, टॉपसिया और आसपास के इलाकों में चल रही अवैध फैक्ट्रियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है. मंगलवार को तपसिया स्थित एक बहुमंजिला फैक्ट्री में आग लगने से दो लोगों की मौत हो गई थी. इस घटना के बाद मुख्यमंत्री ने तत्काल अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन फैक्ट्रियों के पास वैध अनुमति, बिल्डिंग प्लान या फायर एनओसी नहीं है, उनकी बिजली और पानी की सप्लाई काट दी जाए. मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों की जान जोखिम में डालने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा. फैक्ट्री मालिक सहित दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है और फोरेंसिक टीम ने मौके का निरीक्षण किया है। 

चार विभागों की कमेटी गठित
घटना की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने चार विभागों की समन्वय समिति बनाई है. मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रारंभिक रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं. बिजली विभाग को CESC के साथ मिलकर उन भवनों का ऑडिट करने को कहा गया है जिनके निर्माण की मंजूरी नहीं है. सरकार पहले ऐसे भवन मालिकों को नोटिस देकर सुधार का अवसर देगी. इसके बाद नियमों का पालन नहीं करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। 

विधवा, वृद्धावस्था और दिव्यांग पेंशन हुआ डबल
नई भाजपा सरकार ने आम लोगों को बड़ी राहत देते हुए विधवा भत्ता, वृद्धावस्था पेंशन और दिव्यांग भत्ता 1,000 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये प्रति माह करने का फैसला किया है. इस निर्णय से लाखों लाभार्थियों को सीधा फायदा मिलेगा. सरकारी सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में जनहित से जुड़े कई और बड़े फैसलों की घोषणा की जा सकती है। 

विधानसभा के मेन्यू में मछली
नई विधानसभा की पहली कार्यवाही के दौरान विधायकों के लिए दोपहर के भोजन में चावल, मछली, दाल, आलू भुजिया और सब्जियां परोसी गईं. इस बंगाली मेन्यू ने भाजपा सरकार की ओर से एक स्पष्ट संदेश दिया कि वह बंगाल की संस्कृति और खानपान परंपरा का सम्मान करती है। 

चुनाव प्रचार के दौरान तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि भाजपा सत्ता में आने पर मछली और मांस खाने पर रोक लगा सकती है. विधानसभा के इस मेन्यू ने उन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। 

राजनीतिक और सांस्कृतिक संदेश साथ-साथ
शुभेंदु अधिकारी के शुरुआती फैसलों से स्पष्ट है कि उनकी सरकार कानून व्यवस्था को सख्ती से लागू करने के साथ-साथ जनकल्याण और बंगाली अस्मिता पर भी बराबर जोर दे रही है. अवैध गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई, गरीबों के लिए राहत और सांस्कृतिक प्रतीकों के माध्यम से संदेश इन सबने यह संकेत दिया है कि पश्चिम बंगाल की नई सरकार तेज, निर्णायक और प्रतीकात्मक राजनीति का संतुलित मिश्रण पेश कर रही है। 

गुजरात में प्रशासनिक महाभूकंप: 72 IAS अधिकारियों के तबादले, कई जिलों को मिले नए कलेक्टर

अहमदाबाद 

गुजरात सरकार ने मंगलवार देर रात एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 72 अधिकारियों का तबादला कर दिया है। 13 मई की रात सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, राज्य के कई जिलों के कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त और विभिन्न सरकारी विभागों के टॉप पदों पर बैठे लोग इस फेरबदल से प्रभावित हुए हैं। इसके तहत अहमदाबाद, सूरत, भरूच, नवसारी, मोरबी, दाहोद और जूनागढ़ जैसे महत्वपूर्ण जिलों में नए कलेक्टरों की नियुक्ति की गई है।

अहमदाबाद के कलेक्टर सुजीत कुमार को अब राज्य कर (State Tax) का विशेष आयुक्त नियुक्त किया गया है, जबकि उनकी जगह भव्य वर्मा को अहमदाबाद का नया कलेक्टर बनाया गया है। इसी तरह, सूरत के कलेक्टर डॉ. सौरभ पारधी को गांधीनगर में नागरिक आपूर्ति निदेशक के पद पर भेजा गया है और उनकी जगह तेजस दिलीपभाई परमार सूरत के नए कलेक्टर होंगे।

कच्छ-भुज के कलेक्टर आनंद बाबूलाल पटेल को गांधीनगर में स्कूलों का आयुक्त नियुक्त किया गया है, साथ ही उन्हें पीएम-पोषण योजना और जीसीईआरटी (GCERT) के निदेशक का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है।

गांधीनगर में विकास आयुक्त बनाए गए डीएन मोदी
सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, डीएन मोदी को जामनगर नगर निगम के नगर आयुक्त पद से हटाकर गांधीनगर में विकास आयुक्त नियुक्त किया गया है। इस पद पर वह केएल बचानी के अतिरिक्त प्रभार की जिम्मेदारी को खत्म करेंगे। वहीं, आनंद बाबूलाल पटेल को कच्छ-भुज के कलेक्टर पद से हटाकर गांधीनगर में स्कूल आयुक्त बनाया गया है। इसके साथ ही उन्हें पीएम-पोषण योजना (मिड-डे मील) आयुक्त और गुजरात काउंसिल ऑफ एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग (GCERT) के निदेशक का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। इन पदों का अतिरिक्त प्रभार अब तक रचित राज के पास था।

कई अन्य बड़े अधिकारियों का भी हुआ तबादला
अहमदाबाद के कलेक्टर सुजीत कुमार का तबादला कर उन्हें अहमदाबाद में राज्य कर विभाग का विशेष आयुक्त नियुक्त किया गया है। इस पद का अतिरिक्त प्रभार पी. भारती संभाल रही थीं। अजय प्रकाश को गुजरात ऊर्जा विकास एजेंसी (GEDA) के निदेशक पद से हटाकर ऊर्जा एवं पेट्रोकेमिकल विभाग में भेजा गया है। उन्हें वडोदरा स्थित गुजरात एनर्जी ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (GETCO) का प्रबंध निदेशक नियुक्त किया जाएगा। सूरत के कलेक्टर डॉ. सौरभ पारधी  को गांधीनगर में नागरिक आपूर्ति निदेशक और खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग में पदेन अतिरिक्त सचिव बनाया गया है। वह इस पद पर मयूर मेहता की जगह लेंगे।

बड़े पैमाने पर हुआ था IPS अफसरों का तबादला
बता दें कि इसके पहले मार्च की शुरुआत में गुजरात में बड़े पैमाने पर IPS अफसरों का तबादला हुआ था। उस समय राज्य के IB चीफ के साथ-साथ कई रेंजेस के चीफ भी बदले गए थे। वहीं, लंबे समय से पोस्टिंग का इंतजार कर रहे कई अधिकारियों को पोस्टिंग अलॉट की गई थी।

नगर निगमों और विकास प्राधिकरणों में भी बदलाव
नगर निगमों और विकास प्राधिकरणों में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। अजय प्रकाश को गुजरात ऊर्जा ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (GETCO) का प्रबंध निदेशक नियुक्त किया गया है, जबकि जामनगर के नगर आयुक्त डी एनमोदी अब गांधीनगर में विकास आयुक्त की जिम्मेदारी संभालेंगे। इसके अलावा, अहमदाबाद नगर निगम (AMC) में भी नए उप-आयुक्तों की नियुक्ति की गई है और मिरांत जतिन पारिख को अहमदाबाद शहरी विकास प्राधिकरण (AUDA) का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) बनाया गया है।

इन अधिकारियों के भी तबादले
भारतीय प्रशासनिक सेवा के 2013 बैच के अधिकारी और वर्तमान में दाहोद के कलेक्टर के रूप में कार्यरत योगेश बबनराव निर्गुडे का ट्रांसफर कर उन्हें एडिशनल डेवलपमेंट कमिश्नर गांधीनगर के पद पर नियुक्त किया गया है। उनकी इस नियुक्ति से स्तुति चरण, IAS, इस पद के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त हो जाएंगी।

इसी तरह अमित प्रकाश यादव, जो 2013 बैच के अधिकारी हैं और खेड़ा-नडियाद के कलेक्टर के पद पर तैनात थे, उनका ट्रांसफर कर उन्हें गांधीनगर में एडिशनल कमिश्नर ऑफ इंडस्ट्रीज नियुक्त किया गया है।

CBSE 12वीं रिजल्ट घोषित: 85.20% छात्र पास, Digilocker और UMANG ऐप पर तुरंत देखें मार्कशीट

नई दिल्ली

CBSE यानी सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन ने 12वीं का रिजल्ट जारी कर दिया है। कुल 85.20% स्‍टूडेंट्स पास हुए हैं। यह पिछले साल से 3% कम है। कुल 94,028 छात्रों ने 90% से ज्‍यादा नंबर स्‍कोर किए हैं। वहीं, 17,113 बच्‍चों ने 95% से ज्‍यादा नंबर स्‍कोर किए हैं।

इस बार कॉपियां ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम के तहत चेक की गई हैं। कैंडिडेट्स cbse.gov.in पर अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं। अगर स्टूडेट्स के मोबाइल में इंटरनेट न हो या सर्वर डाउन हो तो सब्जेक्ट वाइज अंक जानने के लिए एसएमएस भेजकर रिजल्ट प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि, ऑनलाइन स्कोर कार्ड मान्य नहीं होगा। छात्रों के लिए अपने स्कूल से ओरिजिनल मार्कशीट लेना जरूरी है।

मेरिट लिस्‍ट जारी नहीं होगी
CBSE बोर्ड मेरिट लिस्‍ट जारी नहीं करता है। इसके अलावा रिजल्‍ट में कोई टॉपर भी घोषित नहीं किया जाता है। बोर्ड सभी स्‍कूलों और शैक्षणिक संस्‍थानों को ये निर्देश देता है कि किसी भी बच्‍चे को स्‍कूल या जिले का टॉपर घोषित न करें।

लड़कियों का रिजल्‍ट लड़कों से 6.73% बेहतर
लड़कियों का रिजल्‍ट 88.86% रहा है, जबकि लड़कों का रिजल्‍ट 82.23% रहा है। लड़कियों का रिजल्‍ट लड़कों से 6.73% बेहतर रहा है। ट्रांसजेंडर स्‍टूडेंट्स का रिजल्‍ट 100% है।

त्रिवेंद्रम का रिजल्‍ट फिर बेस्‍ट, प्रयागराज फिर सबसे पीछे
त्रिवेंद्रम रीजन में 95.62% स्टूडेंट पास हुए। जो देशभर में सबसे ज्यादा है। वहीं, प्रयागराज रीजन 72.43% रिजल्‍ट के साथ सबसे नीचे रहा है। पिछले साल भी त्रिवेंद्रम का रिजल्‍ट सबसे ज्‍यादा और प्रयागराज का सबसे कम रहा था।

अपार आईडी न होने पर क्या करें
यदि किसी के पास APAAR ID नहीं है, तो उन्हें अपना अकाउंट बनाना होगा। हालांकि, जिन छात्रों की APAAR ID CBSE से लिंक है, उन्हें रिजल्ट जारी होने के बाद डिजिलॉकर के ‘Issued Documents’ सेक्शन में अपनी मार्कशीट मिल जाएगी।

कितनों की आई कंपार्टमेंट
सीबीएसई 12वीं कक्षा के परिणाम घोषित हो गए हैं. इस साल  1,63,800 बच्चों की कंपार्टमेंट आई है जिसमे प्रयागराज सबसे ऊपर है. 

प्रयागराज — 16.76%
दिल्ली ईस्ट — 12.57%
बेंगलुरु — 12.14%
पंचकूला — 12.30%

लुधियाना — 11.42%
रायपुर — 10.35%
रांची — 9.67%
लखनऊ — 9.30%
चेन्नई — 9.23%
पटना — 9.13%
पुणे — 8.66%
अजमेर — 8.44%
नोएडा — 8.06%
गुवाहाटी — 7.35%
दिल्ली वेस्ट — 5.65%
विजयवाड़ा — 5.44%
अहमदाबाद — 5.41%
गुरुग्राम — 4.52%
देहरादून — 4.30%
तिरुवनंतपुरम — 3.38%

 टॉप 0.1% विद्यार्थियों को मेरिट सर्टिफिकेट मिलेगा
सीबीएसई ने इस बार भी टॉपर्स की लिस्ट नहीं जारी करने का फैसला लिया है और न ही मेरिट लिस्ट जारी की जाएगी. जिन छात्रों ने अपने विषयों में सबसे अधिक अंक हासिल किए हैं, उनमें से टॉप 0.1% विद्यार्थियों को मेरिट सर्टिफिकेट दिया जाएगा. 

किस स्कूल का पास प्रतिशत है सबसे ज्यादा 

केंद्रीय विद्यालय– 98.55%
जवाहर नवोदय विद्यालय – 98.47%
सरकारी विद्यालय – 89.55%
सरकारी सहायता प्राप्त – 86.07%
एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल – 85.55%
स्वतंत्र विद्यालय – 84.22%

शामिल हुए थे इतने लोग 

सीबीएसई 12वीं क्लास में 17,80,365 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, जिनमें से 17,68,968 छात्र परीक्षा में शामिल हुए और 15,07,109 छात्र पास हो गए हैं. इस साल पास प्रतिशत 85.20% रहा है. यह पिछले साल के पास प्रतिशत से कम है. पिछले साल पास प्रतिशत 88.39% था. 

यहां देखें CBSE 12वीं का रिजल्‍ट

    cbse.gov.in
    results.nic.in
    results.digilocker.gov.in
    umang.gov.in
    DigiLocker, UMANG ऐप

ऐसे चेक करें SMS से रिजल्ट
    अपने फोन में मैसेज बॉक्स ओपन करें।
    इसमें सीबीएसई 12वीं रिजल्ट 2026 (रोल नंबर) टाइप करें और 7738299899 पर भेज दें।
    कुछ ही सेकंड में 12वीं का रिजल्ट मोबाइल के इनबॉक्स में दिखाई देगा।

ऐसे चेक करें डिजिलॉकर से रिजल्ट
    डिजिलॉकर ऐप डाउनलोड करें या इसकी वेबसाइट पर जाएं।
    अपने मोबाइल नंबर या आधार से साइन अप/लॉगिन करें।
    “Education” सेक्शन में जाएं और CBSE को चुनें।
    “Class XII Marksheet 2026” क्लिक करें।
    अपना रोल नंबर और अन्य जरूरी जानकारी दर्ज करें।
    “Get Document” या “Fetch” बटन पर क्लिक करें।
    डिजिटल मार्कशीट स्क्रीन पर आ जाएगी। इसे डाउनलोड या सेव करके रखें।

हर विषय में 33% अंक लाना जरूरी
सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा पास करने के लिए छात्रों को कुल अंको के साथ हर विषय में कम से कम 33% अंक लाना होगा। इससे कम अंक आने पर उन्हें उस विषय में फेल माना जाएगा।

जो छात्र 1 सब्जेक्ट में फेल होंगे, उन्हें कंपार्टमेंट परीक्षा में शामिल होकर साल बचाने का मौका दिया जाएगा। लेकिन 2 या उससे अधिक सब्जेक्ट में फेल होने वाले छात्रों को दोबारा 12वीं क्लास में बैठना होगा। सीबीएसई 12वीं 2025 में 88.39% अंक प्राप्त किए थे। जिसमें साल 2024 की तुलना में 0.41% की बढ़ोतरी हुई थी।

CBSE के 18 लाख से ज्यादा छात्रों को इंतजार 
सीबीएसई 12वीं के 18.5 लाख से ज्यादा छात्रों को रिजल्ट का बेसब्री से इंतजार है. इस साल बोर्ड परीक्षाओं की शुरुआत 17 फरवरी से हुई थी, जो 10 अप्रैल तक चलीं. बोर्ड ने बताया कि पहली बार 12वीं की कॉपियां डिजिटल तरीके से चेक हो रही हैं. ऐसे में छात्रों को उम्मीद थी कि रिजल्ट जल्दी जारी हो सकता है, हालांकि ऐसा नहीं हुआ। 

CBSE 12वीं में कुल इतने छात्रों ने हासिल किया 90-95% स्कोर
सीबीएसई ने आज रिजल्ट जारी कर दिया है. इस साल लड़कियों ने फिर बाजी मारी है. आपको बता दें कि इस साल  95 प्रतिशत से ज्यादा नंबर हासिल करने वाले छात्रों की संख्या 17113 है. वहीं 90 प्रतिशत से ज्यादा नंबर लाने वाले कुल छात्र 94028 हैं।  

 

फेल छात्रों को मिलेगा दूसरा मौका
एक या अधिक विषयों में पास नहीं होने वाले छात्रों को इस बार भी कंपार्टमेंट परीक्षा का मौका मिलेगा। इससे उनका साल खराब नहीं होगा और वे अपने अंक सुधार सकेंगे। बोर्ड जल्द ही कंपार्टमेंट परीक्षा का शेड्यूल जारी करेगा, जिसके बाद आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी।

कांग्रेस नेता सोनिया गांधी अस्पताल में भर्ती, मेदांता में चल रहा इलाज

नई दिल्ली

कांग्रेस नेता सोनिया गांधी को गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में एडमिट कराया गया है। उन्हें एक छोटे से ऑपरेशन के लिए अस्पताल ले जाया गया है। राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी को जनवरी से अब तक तीसरी बार अस्पताल में भर्ती होना पड़ा है। इससे पहले मार्च में उन्हें सर गंगाराम अस्पताल ले जाया गया था। पेट में इंफेक्शन से जुड़ी समस्या बताई गई थी, जिसके इलाज के लिए वह वहां पहुंची थीं। वहीं जनवरी में उन्हें सांस लेने में समस्या हुई थी। यह भी कहा गया था कि दिल्ली में बढ़े हुए प्रदूषण और सर्दी के चलते भी उन्हें यह परेशानी हुई है। 79 वर्षीय सोनिया गांधी फिलहाल राजस्थान से राज्यसभा की सांसद हैं।

इससे पहले वह यूपी की रायबरेली लोकसभा सीट से सांसद थीं, लेकिन 2024 में उन्होंने संसदीय चुनाव न लड़ने का फैसला लिया था। इसके बाद वह राज्यसभा के रास्ते संसद पहुंची थीं। जून 2025 में भी सोनिया गांधी को सर गंगा राम अस्पताल में एडमिट कराया गया था। तब उन्हें हाई ब्लड प्रेशर की समस्या बताई गई थी। बीते कुछ सालों से सोनिया गांधी का स्वास्थ्य थोड़ा खराब रहा है। माना जाता है कि इसी के चलते उन्होंने कांग्रेस में अपनी सक्रियता भी पहले के मुकाबले थोड़ी कम की है। यही नहीं राजनीतिक बैठकों, रैलियों आदि में भी वह पहले के मुकाबले कम ही दिखाई देती हैं। अभी 5 राज्यों के चुनाव प्रचार में भी उनकी सक्रियता नहीं देखी गई थी।

प्रचार की पूरी कमान राहुल गांधी, प्रियंका वाड्रा, मल्लिकार्जुन खरगे जैसे नेताओं ने ही संभाल रखी थी।

PM मोदी की सादगी की मिसाल: आधा किया अपना काफिला, SPG को दिए खास निर्देश

नई दिल्ली

देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से ‘किफायत’ बरतने की अपील के बाद सरकार ने सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाई है. पीएम मोदी ने लोगों से आग्रह किया है कि वे एक साल के लिए सोना न खरीदें और विदेश यात्राओं पर खर्च कम करें. इसके अलावा पेट्रोल-डीजल का इस्तेमाल भी संभलकर करने को कहा ताकि देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम हो सके। 

PM Narendra Modi: पीएम मोदी जो कहते हैं, वो खुद भी करते हैं. इसका सबूत उन्होंने खुद दिया है. पूरी दुनिया में ईंधन संकट की आहट है. संकट से बचने को भारत में भी इसकी तैयारी शुरू हो चुकी है. यही कारण है कि पीएम मोदी अब लोगों को विदेश यात्रा न करने की अपील कर रहे हैं. सोना न खरीदने को कह रहे हैं. खर्च कम करने को प्रेरित कर रहे हैं. पीएम मोदी केवल देशवासियों से ही ऐसा करने को नहीं कह रहे. वह खुद भी इसे अमल में ला रहे हैं. या यूं कहिए कि उन्होंने एग्जांपल सेट कर दिया है. जी हां, पीएम मोदी ने अपना काफिला आधा कर दिया है. एसपीजी को खास निर्देश देकर काफिले में गाड़ियों की संख्या 50 फीसदी कम करने को कहा है। 

टीओआई की खबर के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर उनके काफिले का आकार आधिकारिक रूप से कम कर दिया गया है. पीएम मोदी का यह एक बड़ा कदम है. इससे पीएम मोदी ने सरकारी खर्च में कटौती की मिसाल पेश की है. पीएम मोदी ने इस उम्मीद से ऐसा किया है, ताकि बाकी सरकारी विभाग भी इसका पालन करेंगे. हालांकि, पीएम मोदी के इस निर्देश का असर दिखने लगा है. यूपी से एमपी तक मंत्रियों के काफिले कम होने लगे हैं। 

PM मोदी का एसपीजी को निर्देश
सूत्रों की मानें तो, पीएम मोदी ने एसपीजी यानी स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप को काफिला कम करने का निर्दश दिया है. पीएम मोदी ने कहा है कि उनके काफिले में शामिल गाड़ियों की संख्या 50% तक कम की जाए. इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा है कि काफिले में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की संख्या बढ़ाई जाए. हालांकि, इसके लिए नई गाड़ियां न खरीदी जाएं ताकि अतिरिक्त खर्च से बचा जा सके। 

SPG ने एक्शन दिखाना शुरू किया
पीएम मोदी का निर्देश मिलते ही एसपीजी एक्शन में है. एसपीजी ने पीएम के निर्देशों को लागू करना शुरू कर दिया है एसपीजी यह भी सुनिश्चित कर रही है कि भले काफिला कम हो, मगर सुरक्षा के लिए जरूरी नियमों में कोई ढील न दी जाए. सूत्रों का कहना है कि हाल ही में पीएम की दिल्ली के बाहर की यात्राओं में काफिले का आकार पहले से छोटा नजर आया है. एसपीजी अब आगे भी इस दिशा में काम करेगी ताकि ब्लू बुक में दिए गए सख्त नियमों का पालन हो सके। 

पीएम मोदी ने ऐसा क्यों किया?
गौरतलब है कि पीएम मोदी का यह कदम ऐसे वक्त में आया है, जब वह लगातार देशवासियों से ईंधन और सोने की खपत कम करने की अपील कर रहे हैं. पीएम मोदी ने रविवार को हैदराबाद दौरे के दौरान लोगों से ईंधन और सोने की खपत कम करने की अपील भी की थी. इसके कुछ घंटे बाद गुजरात में भी पीएम मोदी ने यही दोहराया था. महज 24 घंटे में दो बार पीएम मोदी ने ईंधन और सोने की खपत में कमी की अपील की थी। 

पीएम मोदी के इस कार्य का क्या संकेत
अब सवाल है कि आखिर पीएम मोदी ने अपना काफिला छोटा क्यों किया? तो इसके पीछे वजह है एग्जांपल सेट करना. जी हां, पीएम ने खुद पहल करके अन्य विभागों और राज्य सरकारों को एक संकेत दिया है. अब पीएम मोदी की पहल के बाद बाकी सरकारी विभाग भी ऐसा ही कदम उठाएंगे. केंद्र सरकार के मंत्रालय भी अब खर्च कटौती के लिए ऐसे कदम उठाने की तैयारी कर रहे हैं. सरकार अपने कर्मचारियों को मेट्रो का ज्यादा इस्तेमाल करने, कारपूलिंग को अपनाने और बड़े-खर्चीले कार्यक्रम से बचने को प्रमोट कर रही है। 

बारामती में फिर विमान हादसा: उसी जगह क्रैश हुआ प्लेन, जहां गिरा था अजित पवार का विमान

बारामती 

महाराष्ट्र के बारामती में एक बार फिर बड़े विमान हादसे की खबर सामने आई है. जानकारी के मुताबिक यह ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल किया गया टू सीटर विमान था, जो बारामती के गोजूबाबी गांव में जा गिरा. इससे पहले अजित पवार का प्लेन भी यहीं क्रैश हुआ था। 

शुरुआती जानकारी के मुताबिक, रेड बर्ड कंपनी का यह दो सीटर ट्रेनिंग विमान तकनीकी खराबी के बाद गोजूबाबी गांव के पास क्रैश लैंड किया. बताया जा रहा है कि उड़ान के दौरान विमान के इंजन में खराबी आ गई थी. इसके बाद पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए विमान को सुरक्षित उतारने की कोशिश की और बारामती के गोजूबाबी इलाके में हार्ड लैंडिंग की गई. शुरुआती जानकारी के अनुसार इस हादसे में किसी बड़े नुकसान या जनहानि की खबर नहीं है। 

पुलिस ने क्या बताया?
पुणे ग्रामीण पुलिस के एसपी संदीप सिंह गिल ने बताया, ‘आज सुबह करीब 8:50 बजे, रेड बर्ड एविएशन का एक ट्रेनिंग विमान बारामती हवाई अड्डे के पास गोजुबावी गांव में क्रैश लैंड हो गया. मौके पर मौजूद चश्मदीदों से मिली शुरुआती जानकारी के मुताबिक, कम ऊंचाई पर उड़ते समय विमान में कोई तकनीकी खराबी आ गई थी. क्रैश लैंडिंग के दौरान, विमान का एक हिस्सा बिजली के खंभे से टकरा गया और उसके बाद विमान ज़मीन पर जा गिरा. विमान में केवल एक ट्रेनी पायलट सवार था. गनीमत रही कि पायलट को कोई गंभीर चोट नहीं आई. घटना की सूचना मिलते ही पुलिसकर्मी तुरंत मौके पर पहुंचे, और अब ज़रूरी जांच-पड़ताल के साथ-साथ आगे की कार्रवाई भी की जा रही है. जैसे ही कोई और जानकारी मिलेगी, उसे साझा किया जाएगा। 

बारामती में इससे पहले इसी साल जनवरी में भी एक विमान क्रैश कर गया. उस हादसे में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और डिप्टी सीएम अजित पवार का निधन हो गया था. ऐसे में लगातार सामने आ रही घटनाओं ने विमानों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. फिलहाल प्रशासन की ओर से हादसे के कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है. शुरुआती तौर पर इंजन फेल होना दुर्घटना की मुख्य वजह माना जा रहा है। 

बंगाल में बदले सियासी समीकरण, अब एक्सप्रेसवे को मिली रफ्तार! 35 हजार करोड़ के वाराणसी-कोलकाता प्रोजेक्ट पर तेजी

कलकत्ता
पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस बार जो हुआ, उसने दिल्ली से लेकर कोलकाता तक सबको चौंका दिया. कभी बंगाल की राजनीति पर पूरी पकड़ रखने वाली ममता बनर्जी की पार्टी TMC को बड़ा झटका लगा और BJP ने ऐतिहासिक जीत दर्ज कर दी. अब शुभेंदु अधिकारी सूबे के नए मुख्यमंत्री बन चुके हैं. इस बदलाव का असर सिर्फ सत्ता बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि लंबे समय से अटके पड़े बड़े प्रोजेक्ट्स भी तेजी पकड़ते नजर आ रहे हैं. इन्हीं में सबसे बड़ा नाम है ‘वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे’. जिस प्रोजेक्ट की फाइलें सालों से मंजूरियों, रूट बदलाव और पर्यावरणीय अड़चनों में फंसी थीं, अब उसे तेजी से पूरा करने की तैयारी हो रही है।

देश के पूर्वी हिस्से में रोड कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने के लिए केंद्र सरकार अब वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट को तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है. करीब 35 हजार करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस एक्सप्रेसवे को लेकर सरकार काफी गंभीर नजर आ रही है. हालांकि पश्चिम बंगाल में पर्यावरण मंजूरी और रूट बदलाव से जुड़ी दिक्कतों की वजह से परियोजना के कुछ हिस्सों में अभी भी देरी जरूर है. लेकिन केंद्र सरकार इस प्रोजेक्ट को तय समय पर पूरा करने के प्रयास कर रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, पर्यावरण मंत्रालय की एक्सपर्ट अप्रेजल कमेटी (EAC) ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) को झारखंड और पश्चिम बंगाल के हिस्सों में 200 किलोमीटर से ज्यादा लंबे हिस्से के निर्माण की मंजूरी दे दी है. इस क्लियरेंस के बाद एक्सप्रेसवे के रुके हुए हिस्सों पर काम तेज होने की उम्मीद है और इस मेगा प्रोजेक्ट को बड़ा बूस्ट मिला है. माना जा रहा है कि यह एक्सप्रेसवे पूर्वी भारत की कनेक्टिविटी, व्यापार और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क को नई रफ्तार देगा, हालांकि इसके लिए पश्चिम बंगाल में 103 हेक्टेयर से ज्यादा वन भूमि का डायवर्जन भी करना होगा।

6 घंटे में वाराणसी से कोलकाता!
करीब 610 किलोमीटर लंबे इस 6 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को काशी-बंगाल एक्सप्रेसवे के नाम से भी जाना जा रहा है. यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल को बेहतर तरीके से जोड़ने का काम करेगा. सबसे बड़ी बात यह है कि इसके शुरू होने के बाद वाराणसी से कोलकाता तक का सफर, जो अभी 12 से 14 घंटे में पूरा होता है, वह घटकर करीब 6 से 7 घंटे का रह जाएगा. इससे माल ढुलाई और व्यापारिक गतिविधियों को भी बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।

बिजनेस टुडे को सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में इस परियोजना का करीब 50 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है. वहीं बिहार में निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और झारखंड में वन विभाग से जरूरी मंजूरियां भी मिल चुकी हैं. इन राज्यों में प्रोजेक्ट की रफ्तार थोड़ी बताई जा रही है।

कहां अटक रहा प्रोजेक्ट?
दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल में यह परियोजना अभी धीमी गति से आगे बढ़ रही है. इसकी बड़ी वजह रूट अलाइनमेंट में बदलाव, जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया और पर्यावरण मंजूरियों में देरी बताई जा रही है. सूत्रों के अनुसार अगर वन्यजीवों से जुड़ी चिंताओं का जल्द समाधान नहीं निकला तो केंद्र सरकार बंगाल वाले हिस्से के रूट में कुछ बदलाव भी कर सकती है।

यह मुद्दा हाल ही में संसद में भी उठाया गया था. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए कहा था कि, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में निर्माण कार्य के ठेके पहले ही दिए जा चुके हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा मूल रूट में बदलाव की मांग किए जाने के बाद वहां काम की रफ्तार धीमी पड़ गई. उन्होंने बताया कि वाराणसी-रांची-कोलकाता वाले मूल रूट को केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी थी और 3 जनवरी 2023 को पश्चिम बंगाल सरकार की सहमति भी मिल गई थी. लेकिन राज्य सरकार की ओर से मांगे गए संशोधित रूट को अक्टूबर 2024 में मंजूरी मिली, जिससे आगे की प्रक्रिया में देरी हुई।

इन इलाकों में वन्यजीवों के लिए अंडरपास
अधिकारियों के अनुसार पश्चिम बंगाल के पुरुलिया, बांकुड़ा, पश्चिम मेदिनीपुर, हुगली और हावड़ा जिलों से गुजरने वाले हिस्सों में वन और वन्यजीवों की सेफ्टी एक बड़ी चिंता है. वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने एक्सप्रेसवे पर कई वन्यजीव अंडरपास बनाने का प्रस्ताव दिया है, ताकि जानवरों की आवाजाही प्रभावित न हो।

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