आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, स्कूल-हॉस्पिटल के आसपास मौजूदगी पर रोक वाले आदेश पर मुहर

नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्‍तों पर अपने पूर्व के फैसलों को बदलने की मांग को खारिज कर दिया है. Supreme Court of India ने आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे और उनसे जुड़ी सार्वजनिक सुरक्षा चिंताओं को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए अपने 25 नवंबर के आदेश में बदलाव करने से साफ इनकार कर दिया है. अदालत ने स्कूलों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों और अन्य संस्थागत क्षेत्रों से सभी आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देश को बरकरार रखा है. साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि हटाए गए कुत्तों को दोबारा उसी स्थान पर छोड़ने की अनुमति नहीं होगी। 

मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ (Vikram Nath) की अगुवाई वाली बेंच ने की. सुनवाई के दौरान अदालत ने देशभर में बढ़ती स्ट्रे डॉग्स की समस्या पर गंभीर चिंता जताई और राज्यों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए. सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी के अनुपात में आवश्यक बुनियादी ढांचे का विकास नहीं किया गया. अदालत के मुताबिक नसबंदी और वैक्सीनेशन अभियान बिना किसी ठोस और दीर्घकालिक योजना के चलाए गए, जिसके कारण पूरे तंत्र का उद्देश्य प्रभावित हुआ। 

सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
आज की सुनवाई में सबसे जरूरी बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी बताया कि अनुच्छेद 21 के तहत जिंदगी और आजादी के अधिकार में हर नागरिक का यह अधिकार शामिल है कि वह बिना किसी शारीरिक हमले के लगातार डर या सार्वजनिक जगहों पर कुत्तों के काटने जैसी जानलेवा घटनाओं के खतरे के आजादी से घूम सके और सार्वजनिक जगहों तक पहुंच बना सके। 

बेंच ने आगे कहा, ‘राज्य मूक दर्शक बनकर नहीं रह सकता, जहां ह्यूमन लाइफ के लिए ऐसे खतरे, जिन्हें रोका जा सकता है. ऐसी घटनाएं उन वैधानिक तंत्रों के बावजूद बढ़ती जा रही हैं, जिन्हें विशेष रूप से इन खतरों से निपटने के लिए ही बनाया गया है। 

बता दें कि आवारा कुत्तों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 28 जुलाई को स्वत संज्ञान लिया था.  सुनवाई पूरी होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. कोर्ट ने सभी पक्षों को एक हफ्ते के अंदर अपनी लिखित दलीलें जमा करने का निर्देश भी दिया था और इस मामले में 29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली बेंच ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. याचिकाकर्ताओं, प्रतिवादियों, भारत सरकार, भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (AWBI), कुत्तों से प्यार करने वाले लोगों, कुत्तों के काटने से पीड़ित लोगों, पशु अधिकार कार्यकर्ताओं, केंद्र और राज्य सरकारों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों और इस मामले से जुड़े अन्य लोगों की दलीलें विस्तार से सुनने के बाद, अब मंगलवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। 

नवंबर 2025 में क्या हुआ?
पिछले साल कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे सार्वजनिक जगहों जैसे अस्पताल, पार्क, रेलवे स्टेशन जैसी सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाकर उन्हें शेल्टर में ले जाएं. कोर्ट ने फैसला सुनाया कि इन कुत्तों को एक बार नसबंदी हो जाने के बाद वापस उन्हीं इलाकों में नहीं छोड़ा जा सकता, जहां वो मिले थे। 

कोर्ट ने सार्वजनिक जगहों पर कुत्तों को खाना खिलाने पर भी रोक लगा दी थी, सिवाय उन जगहों के जो इसके लिए तय की गई थीं 

अदालत का फैसला आने के बाद डॉग लवर्स और जानवरों के अधिकारों के लिए काम करने वाले एनजीओ ने इस आदेशों को वापस लेने के लिए याचिकाएं दायर कीं. इनमें से कई याचिकाओं पर सुनवाई करने के बाद कोर्ट ने जनवरी में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। 

राज्‍य सरकारों पर तीखी टिप्‍पणी
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि यदि राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों ने समय रहते दूरदर्शिता के साथ काम किया होता, तो आज स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती. अदालत ने यह भी संकेत दिया कि सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस मुद्दे पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को आवारा कुत्तों से होने वाली घटनाओं और बढ़ती शिकायतों के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है. अदालत के निर्देशों के बाद अब राज्यों और नगर निकायों पर संस्थागत क्षेत्रों को आवारा कुत्तों से मुक्त रखने और प्रभावी नियंत्रण नीति लागू करने का दबाव बढ़ गया है। 

मौसम देगा राहत की खबर! मॉनसून की एंट्री कब, आज 10 राज्यों में बारिश का अलर्ट

नई दिल्ली

भारत में मॉनसून की एंट्री में बस कुछ ही दिन बाकी हैं। खबर है कि मई के अंतिम सप्ताह में राहत भरी बौछारें केरल में दस्तक दे सकती हैं। वहीं, उत्तर पश्चिम भारत के अधिकांश राज्य गर्मी का सामना करेंगे। हालांकि, उत्तराखंड समेत कुछ राज्यों में बारिश के आसार हैं। इसके अलावा IMD यानी भारत मौसम विज्ञान विभाग ने मंगलवार को कम से कम 10 राज्यों में बारिश की संभावनाएं जताई हैं।

आज भीगेंगे ये राज्य
IMD ने मंगलवार को बताया है कि 19 मई से 22 मई के बीच जम्मू और कश्मीर, 20 से 22 मई के बीच उत्तराखंड में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। वहीं, इस दौरा हवा की रफ्तार 30-40 किमी प्रतिघंटा पहुंच सकती है। साथ ही अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 19 से 24 मई, गंगीय पश्चिम बंगाल में 21 और 22 मई, ओडिशा में 19 मई और 22 मई से 24 मई को बारिश के आसार हैं।

बिहार में 19 से 21 मई के बीच, झारखंड में 20 मई, ओडिशा में 20 और 21 मई को तेज हवा के साथ भारी बारिश की संभावना है। दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु, तटीय कर्नाटक, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, केरल और माहे में 19 मई को भारी बारिश हो सकती है। 19 से 22 मई के बीच असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में बारिश के आसार हैं। अरुणाचल प्रदेश में 22 मई को भारी बारिश हो सकती है। जबकि, असम और मेघालय में ऐसा ही मौसम 21 और 22 को बन सकता है।

कहां पहुंचा मॉनसून
मौसम विभाग ने सोमवार को कहा कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के 26 मई को केरल पहुंचने की संभावना है। विभाग ने यह भी कहा कि मॉनसून के आगमन की तारीख में चार दिन का अंतर देखने को मिल सकता है। आईएमडी ने कहा कि अगले पांच दिनों में केरल और माहे के कुछ हिस्सों में बिजली गिरने और तेज हवाओं के साथ भारी बारिश होने का अनुमान है।

मौसम विभाग के अनुसार, ऐसा दक्षिणी तटीय आंध्र प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में चक्रवाती परिसंचरण के कारण हो सकता है, जिससे केरल, दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक, रायलसीमा और दक्षिण लक्षद्वीप से सटे दक्षिण-पूर्वी अरब सागर में निम्न वायु दाब का क्षेत्र बन गया है। आईएमडी के अनुसार, दक्षिण-पश्चिमी मॉनसून दक्षिण-पूर्वी अरब सागर के अधिकांश हिस्सों और कन्याकुमारी क्षेत्र के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ चुका है।

मौसम विभाग के अनुसार, यह दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी के अधिकांश हिस्सों, अंडमान सागर के अधिकांश भाग, अंडमान निकोबार द्वीप समूह और पूर्वी-मध्य बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों में भी आगे बढ़ चुका है।

PM मोदी का ‘फर्जी करीबी’ बताने वाला शख्स 3 साल बाद जेल से बाहर, SC ने बदला हाईकोर्ट का फैसला

नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्रियों का करीबी बताकर लोगों से करोड़ों रुपये ऐंठने के आरोपी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। मनी लॉन्ड्रिंग मामले में करीब तीन साल से जेल में बंद आरोपी मोहम्मद काशिफ को सर्वोच्च अदालत ने सोमवार को जमानत दे दी। काशिफ पर आरोप है कि उसने पीएम मोदी और अन्य मंत्रियों के साथ अपनी एडिट की हुई यानी मॉर्फ्ड तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालकर लोगों से धोखाधड़ी की थी।

हाईकोर्ट के फैसले को किया रद्द
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें काशिफ की जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि आरोपी लगभग तीन साल से हिरासत में है और इस मामले में अपराध की कथित आय 1.10 करोड़ रुपये है। अदालत ने कहा- हम विवादित आदेश को इस कारण से रद्द करने के इच्छुक हैं कि अपीलकर्ता तीन साल से जेल में है।

आरोपी ने कोर्ट में दी यह अंडरटेकिंग
सुनवाई के दौरान आरोपी काशिफ ने कोर्ट को यह वचन दिया कि वह भविष्य में किसी भी उच्च संवैधानिक या सरकारी अधिकारी के नाम का इस्तेमाल नहीं करेगा। इसके साथ ही, कोर्ट ने उसे ट्रायल में पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया है। अदालत ने साफ किया है कि यदि काशिफ सहयोग नहीं करता है या जमानत की शर्तों और अंडरटेकिंग का उल्लंघन करता है, तो प्रवर्तन निदेशालय (ED) जमानत रद्द कराने के लिए निचली अदालत का रुख कर सकता है।

क्या है पूरा मामला?
ऐसे करता था ठगी: ईडी के मुताबिक, काशिफ ने फेसबुक और इंस्टाग्राम पर पीएम मोदी और अन्य केंद्रीय मंत्रियों के साथ अपनी मॉर्फ्ड और एडिटेड तस्वीरें पोस्ट की थीं। इसका मकसद लोगों में यह भ्रम पैदा करना था कि उसकी सरकार के उच्च स्तर तक सीधी पहुंच है।

नौकरी और ठेके का झांसा: इस झूठे रसूख का इस्तेमाल कर उसने लोगों से सरकारी विभागों में काम कराने, सरकारी नौकरी दिलाने और सरकारी ठेके दिलाने का वादा करके पैसे ऐंठे।

1.10 करोड़ की बरामदगी: यह मामला अप्रैल 2023 में दर्ज एक प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ECIR) से जुड़ा है, जो गौतमबुद्ध नगर के सूरजपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज धोखाधड़ी, जालसाजी और आईटी एक्ट की एफआईआर पर आधारित था। ईडी ने काशिफ से जुड़े ठिकानों से 1.10 करोड़ रुपये से अधिक की बरामदगी का दावा किया है।

कोर्ट में किसने क्या दी दलील?
काशिफ की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने दलील दी कि मूल अपराध में उसे पहले ही जमानत मिल चुकी है। वह 25 मई 2023 से हिरासत में है और मनी लॉन्ड्रिंग मामले के ट्रायल में काफी देरी हो रही है। उन्होंने बताया कि प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत नवंबर 2023 में आरोप तय हुए थे और अगस्त 2024 में पहले गवाह की गवाही पूरी हुई थी।

वहीं, ईडी की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) एसवी राजू ने जमानत का विरोध किया और कहा कि ट्रायल में कोई अनुचित देरी नहीं हुई है। इससे पहले, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी ईडी की दलीलों को मानते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया था, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने उसे जेल से रिहा करने का आदेश दे दिया है।

रूस से तेल खरीद पर अमेरिका फिर नरम, क्या भारत में सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल?

नई दिल्ली

दुनियाभर में युद्ध की वजह से उपजे तेल संकट के बीच एक राहत की खबर सामने आई है। अमेरिका ने रूसी तेल की खरीद के लिए एक बार फिर छूट देने का ऐलान किया है। भारत को भी इसका फायदा मिल सकता है। इससे पहले अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने रूसी तेल की खरीद के लिए 30 दिनों के लिए टेंपररी छूट देने का ऐलान किया है।

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा है कि छूट सिर्फ उन रूसी तेल कार्गो पर ही लागू होगी जो पहले से ही जहाजों पर लोड हो चुके हैं और समंदर में खड़े हैं। उन्होंने कहा है कि इसके तहत रूस के साथ कोई नया तेल सौदा या नए एक्सपोर्ट की इज्जत नहीं होगी।

वहीं बेसेंट ने यह भी कहा कि इस कदम का एक उद्देश्य यह भी है कि चीन संकट का फायदा उठाकर रूस से भारी डिस्काउंट पर तेल का स्टॉक न जमा कर सके और यह तेल उन देशों तक पहुंचे जिन्हें तुरंत ऊर्जा की जरूरत है। गौरतलब है कि हालिया युद्ध के बाद यह तीसरी बार है जब अमेरिका ने जनरल लाइसेंस के जरिए समुद्र में फंसे जहाजों को रास्ता साफ करने की मोहलत दी है।

भारत को कैसे होगा फायदा?
बता दें कि भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच बीते फरवरी महीने में शुरू हुए युद्ध के बाद से सप्लाई चेन ठप पड़ गया है। तेल आपूर्ति के लिए अहम रास्ता, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही बंद है और इससे तेल और LPG जैसे ईंधन की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसकी वजह से भारत समेत कई देशों में ईंधन संकट पैदा हुआ है और कीमतें आसमान छू रही हैं। ऐसे में अमेरिकी छूट का फायदा भारत को निश्चित रूप से होगा।

इस 30 दिनों की मोहलत के बाद भारतीय रिफाइनरियां समुद्र में फंसे उन रूसी जहाजों से बिना किसी अमेरिकी प्रतिबंध के साए में तेल आयात कर सकेंगी। इससे देश में तेल की सप्लाई चेन दुरुस्त होगी। इससे घरेलू रिफाइनरियों को वैश्विक ऊर्जा लागत में बढ़ोतरी से निपटने में भी मदद मिली। बता दें कि दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक भारत, पहले ही कम कीमतों का लाभ उठाने के लिए रूस से तेल खरीद में तेजी से वृद्धि कर चुका है। इससे पहले मार्च 2026 में भारत ने रूस से रिकॉर्ड 22.5 लाख बैरल प्रति दिन कच्चे तेल का आयात किया था।

खरीदते रहेंगे कच्चा तेल- भारत
इससे पहले भारत ने सोमवार को स्पष्ट किया है कि वह अमेरिकी प्रतिबंधों में छूट मिले या न, रूस से तेल खरीदता रहा है और आगे भी खरीदता रहेगा। पेट्रोलियम मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने एक बयान में कहा, “रूस पर अमेरिकी छूट के संबंध में मैं यह स्पष्ट करना चाहती हूं कि हम पहले भी रूस से तेल खरीदते रहे हैं। छूट से पहले भी, छूट के दौरान भी और अब भी खरीदते रहेंगे।” उन्होंने कहा कि भारत के कच्चे तेल खरीदने के फैसले मुख्य रूप से व्यावसायिक दृष्टिकोण और आपूर्ति की उपलब्धता पर आधारित होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कच्चे तेल की कोई कमी नहीं है और समझौतों के तहत पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की गई है।

93 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा, सान्या ने रचा इतिहास; वायुसेना में बनीं पहली महिला अधिकारी

नई दिल्ली

भारतीय वायुसेना में महिलाओं का दम लगातार बढ़ता जा रहा है. अब स्क्वाड्रन लीडर सान्या ने एक ऐसा मुकाम हासिल किया है जो आज तक कोई महिला अधिकारी हासिल नहीं कर सकी थी. सान्या भारतीय वायुसेना की पहली महिला अधिकारी बन गई हैं, जिन्हें सबसे प्रतिष्ठित कैट ए क्‍वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर (Cat-A Qualified Flying Instructor, QFI) रेटिंग मिली है. यह सिर्फ एक उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय सेना में महिलाओं की बदलती भूमिका और बढ़ते भरोसे की बड़ी तस्वीर भी है। 

IAF ने बताया ऐतिहासिक पल
भारतीय वायुसेना (IAF) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस ऐतिहासिक उपलब्धि की जानकारी साझा करते हुए लिखा-उत्कृष्टता को नई उड़ान मिली है. स्क्वाड्रन लीडर सान्या ने इतिहास रचते हुए Cat-A Qualified Flying Instructor की प्रतिष्ठित योग्यता हासिल करने वाली पहली महिला अधिकारी बनने का गौरव प्राप्त किया है.वायुसेना ने इसे देशभर के युवा एविएटर्स के लिए प्रेरणादायक बताया.IAF ने कहा कि सान्या की यह उपलब्धि समर्पण, कड़ी मेहनत और उत्कृष्टता हासिल करने की निरंतर कोशिश की मिसाल है। 

क्या होता है कैट ए क्‍वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर?
भारतीय वायुसेना अपने पायलट इंस्ट्रक्टर्स की क्षमता को अलग-अलग कैटेगरी में बांटती है. इसमें Cat-C सबसे शुरुआती स्तर होता है जहां प्रशिक्षु या प्रोबेशनरी इंस्ट्रक्टर्स होते हैं. इसके बाद Cat-B आता है, जिसमें सामान्य फ्लाइंग ट्रेनिंग देने वाले इंस्ट्रक्टर्स शामिल होते हैं, लेकिन Cat-A इस पूरी प्रणाली का सबसे ऊंचा स्तर माना जाता है. इस रेटिंग को हासिल करने वाले पायलट सिर्फ नए पायलटों को ही नहीं, बल्कि दूसरे फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर्स को भी ट्रेन कर सकते हैं. उन्हें एडवांस फ्लाइंग स्किल्स को परखने और एयर कॉम्बैट के लिए पायलट तैयार करने की जिम्मेदारी दी जाती है। 

नई पीढ़ी के फाइटर पायलट तैयार करेंगे ऐसे इंस्ट्रक्टर
Cat-A QFI की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है. ऐसे इंस्ट्रक्टर्स युवा पायलटों को ट्रेन करते हैं, उनकी गलतियों को सुधारते हैं.उनका आत्मविश्वास बढ़ाते हैं और उन्हें जटिल एयर कॉम्बैट स्किल्स के लिए तैयार करते हैं.इस भूमिका के लिए सिर्फ बेहतरीन उड़ान कौशल ही नहीं, बल्कि धैर्य, तकनीकी समझ, स्पष्ट निर्णय क्षमता और मानसिक संतुलन की भी जरूरत होती है. यही वजह है कि Cat-A रेटिंग को IAF में बेहद प्रतिष्ठित माना जाता है। 

2015 में हुई थी कमीशन
सार्वजनिक रिकॉर्ड्स के मुताबिक स्क्वाड्रन लीडर सान्या को 20 जून 2015 को 42 SSC (W) FP Course के जरिए भारतीय वायुसेना की फ्लाइंग ब्रांच में कमीशन मिला था.उन्हें 2017 में फ्लाइट लेफ्टिनेंट और फिर 2021 में स्क्वाड्रन लीडर के पद पर प्रमोट किया गया. पिछले 10 सालों में उन्होंने खुद को एक शानदार ट्रांसपोर्ट पायलट के रूप में साबित किया है। 

महिलाओं के लिए बड़ा माइलस्टोन
IAF के 93 साल के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी महिला अधिकारी ने Cat-A QFI रेटिंग हासिल की है. इसे भारतीय वायुसेना में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का बड़ा संकेत माना जा रहा है। 

आज महिला अधिकारी फाइटर जेट उड़ा रही हैं. हेलिकॉप्टर यूनिट्स संभाल रही हैं. फ्लाइट टेस्टिंग कर रही हैं और कमांड रोल्स में भी दिखाई दे रही हैं. अब फ्लाइंग इंस्ट्रक्शन जैसे सबसे कठिन क्षेत्रों में भी महिलाएं अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रही हैं। 

शिवांगी सिंह के बाद एक और बड़ी उपलब्धि
यह उपलब्धि ऐसे समय आई है जब कुछ महीने पहले ही स्क्वाड्रन लीडर शिवांगी सिंह भारत की पहली महिला फाइटर पायलट बनी थीं जिन्होंने QFI बैज हासिल किया था. उन्होंने तमिलनाडु के तांबरम स्थित Flying Instructors’ School में छह महीने का कठिन कोर्स पूरा किया था हालांकि इससे पहले महिला ट्रांसपोर्ट और हेलिकॉप्टर पायलटों को QFI बैज मिल चुका था लेकिन Cat-A रेटिंग हासिल करने वाली सान्या पहली महिला अधिकारी बन गई हैं। 

बदल रही है भारतीय सेना की तस्वीर
1990 के दशक में भारतीय सेना ने महिलाओं को शॉर्ट सर्विस कमीशन के जरिए शामिल करना शुरू किया था. तब महिलाओं की भूमिका सीमित मानी जाती थी, लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है.आज महिलाएं फाइटर प्लेन उड़ा रही हैं.युद्धपोतों पर तैनात हैं.फ्रंटलाइन यूनिट्स संभाल रही हैं. स्थायी कमीशन पा रही हैं और NDA जैसी प्रतिष्ठित सैन्य अकादमियों में ट्रेनिंग भी ले रही हैं हालांकि भारतीय सेना में अब भी टैंक और इन्फैंट्री की कुछ कॉम्बैट पोजिशन महिलाओं के लिए खुली नहीं हैं, लेकिन लगातार बदलाव की दिशा में कदम बढ़ रहे हैं। 

देशभर की लड़कियों के लिए बनीं प्रेरणा
स्क्वाड्रन लीडर सान्या की यह उपलब्धि सिर्फ एक सैन्य रिकॉर्ड नहीं है. यह उन लाखों लड़कियों के लिए प्रेरणा है जो बड़े सपने देखती हैं और कठिन रास्तों पर आगे बढ़ना चाहती हैं.भारतीय वायुसेना ने भी कहा कि सान्या की सफलता आने वाली पीढ़ियों के एविएटर्स के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। 

आरजी कर केस में बड़ा एक्शन, पूर्व प्रिंसिपल पर चलेगा मनी लॉन्डिंग केस; बंगाल सरकार की मंजूरी

 कोलकाता

बंगाल सरकार ने सोमवार को वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों से संबंधित जांच में आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के पूर्व प्रिंसिपल के खिलाफ केस चलाने की मंजूरी दे दी। 

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 9 अगस्त 2024 को आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में हुई क्रूर हत्या और बलात्कार के मामले में, ईडी को तत्कालीन आरजीकर अधीक्षक संदीप घोष के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की अनुमति मिल गई है। 

शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने इस मामले की जांच प्रक्रिया को लंबे समय तक जबरन और अनैतिक रूप से रोके रखा। 

उन्होंने आगे कहा कि, हमारा मानना ​​है कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है. सच्चाई को दबाया नहीं जा सकता. मैं चाहता हूं कि असली दोषियों की जल्द से जल्द पहचान हो, उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिले, बंगाल की जनता को न्याय मिले। 

आरजी कर मामला क्या है?
कोलकाता के राधागोविंद कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में 9 अगस्त 2024 की रात 31 साल की महिला ट्रेनी डॉक्टर के साथ रेप के बाद उसकी हत्या का मामला सामने आया था. ट्रेनी डॉक्टर का शव अस्पताल के सेमिनार हॉल से बरामद हुआ था. इसके बाद इस मामले में कोलकाता पुलिस ने मुख्य आरोपी सिविल वॉलंटियर संजय रॉय को गिरफ्तार किया।

अस्पताल परिसर में हुई इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया. घटना के विरोध में पश्चिम बंगाल समेत देशभर में डॉक्टरों ने प्रदर्शन और हड़ताल देखने को मिली. कोलकाता के कई प्रमुख अस्पतालों में डॉक्टर करीब 42 दिनों तक काम पर नहीं लौटे। 

मामले की गंभीरता को देखते हुए कोलकाता हाई कोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए. जांच के बाद सीबीआई ने गैंगरेप के आरोपों से इनकार किया. मामले में संजय रॉय को दोषी पाया गया. इसके बाद जनवरी 2025 में अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई। 

केंद्रीय एजेंसियों को सौंपे 7 राष्ट्रीय राजमार्ग
इस बीच, पश्चिम बंगाल सरकार ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर में 7 राष्ट्रीय राजमार्ग खंडों को केंद्रीय एजेंसियों को सौंपने की मंजूरी दे दी है, जिससे करीब एक साल से लंबित प्रक्रिया पूरी हो गई। 

ये हाईवे पहले राज्य के लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधीन थे, लेकिन अब इन्हें भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और नेशनल हाईवेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHIDCL) संभालेंगे. करीब एक साल तक प्रस्ताव लंबित रहने की वजह से इन मार्गों पर विकास और निर्माण कार्य पूरी तरह रुके हुए थे। 

हंतावायरस-इबोला जैसे खतरों के बीच जरूरी हैं ये 8 हेल्थ डिवाइस, कम कीमत में मिल सकती है बड़ी सुरक्षा

 नई दिल्ली

दुनियाभर में इन दिनों हंतावायरस को लेकर चर्चा बढ़ गई है. यह एक खतरनाक वायरस माना जाता है, जो ज्यादातर चूहों और दूसरे रोडेंट्स से इंसानों तक पहुंचता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक संक्रमित चूहों की लार या गंदगी के संपर्क में आने से यह वायरस फैल सकता है. कई मामलों में बंद जगहों की सफाई के दौरान हवा में फैले छोटे कणों से भी संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। 

शुरुआती लक्षण आम वायरल जैसे लगते हैं, जैसे बुखार, शरीर दर्द, कमजोरी और सांस लेने में दिक्कत. गंभीर मामलों में यह फेफड़ों और शरीर के दूसरे अंगों को भी प्रभावित कर सकता है। 

हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि आम लोगों के लिए खतरा फिलहाल कम है, लेकिन सावधानी बेहद जरूरी है. दूसरे देशों में इस वायरस के मामले लगातार मिल रहे हैं। हंतावायरस के खौफ के बीच अब कांगो में इबोला से अब तक 80 मौतें हो चुकी हैं. WHO ने इसे ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया है। 

इबोला वायरस ने फिलहाल अफ्रिका के दो मुल्कों में हड़कंप मचा रखा है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर समय रहते इसे कंट्रोल नहीं किया गया तो हालात कोविड जैसे हो सकते हैं। 

ऐसे समय में सिर्फ दवाइयां ही नहीं, बल्कि कुछ जरूरी हेल्थ डिवाइस घर में होना भी बहुत काम आ सकता है. खासकर तब जब घर में बुजुर्ग, बच्चे या पहले से बीमार लोग हों. कई बार छोटी-सी हेल्थ दिक्कत अचानक बड़ी इमरजेंसी में बदल जाती है और तब ये गैजेट तुरंत मदद करते हैं। 

ऑक्सीमीटर
कोविड के बाद यह डिवाइस लगभग हर घर का हिस्सा बन गया. ऑक्सीमीटर उंगली में लगाकर शरीर का ऑक्सीजन लेवल और पल्स चेक करता है। 

अगर किसी को सांस लेने में दिक्कत हो रही हो, कमजोरी लग रही हो या वायरल के लक्षण हों, तो यह डिवाइस तुरंत संकेत दे सकता है कि बॉडी में ऑक्सीजन कम तो नहीं हो रही। 

डिजिटल थर्मामीटर
बुखार लगभग हर बीमारी का पहला संकेत होता है. इसलिए घर में एक अच्छा डिजिटल थर्मामीटर जरूर होना चाहिए. पुराने मर्करी थर्मामीटर के मुकाबले यह ज्यादा सेफ और तेज होता है. कुछ सेकंड में तापमान बता देता है और छोटे बच्चों के लिए भी आसान रहता है। 

ब्लड प्रेशर मॉनिटर
आजकल हाई BP और
लो BP की समस्या बहुत आम हो चुकी है. कई बार टेंशन, वायरल या कमजोरी की वजह से अचानक ब्लड प्रेशर ऊपर-नीचे होने लगता है. डिजिटल BP मॉनिटर घर में होने से तुरंत स्थिति समझी जा सकती है. खासकर बुजुर्गों और दिल के मरीजों के लिए यह बहुत जरूरी गैजेट माना जाता है। 

एयर प्यूरिफायर
हंतावायरस जैसी बीमारियों में साफ हवा और साफ माहौल बहुत जरूरी माना जाता है. अगर घर ऐसी जगह है जहां धूल, गंदगी या पॉल्यूशन ज्यादा रहता है, तो एयर प्यूरिफायर काफी मदद कर सकता है. अच्छे एयर प्यूरिफायर HEPA फिल्टर के साथ आते हैं, जो हवा में मौजूद छोटे पार्टिकल्स और डस्ट को फिल्टर करते हैं। 

स्टीम इनहेलर
नाक बंद होना, गले में परेशानी या सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याओं में स्टीम इनहेलर काफी काम आता है. गर्म भाप लेने से सांस की नली खुलती है और राहत मिलती है. वायरल सीजन में यह छोटा गैजेट बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है। 

नेब्युलाइजर
अगर घर में किसी को अस्थमा, एलर्जी या सांस से जुड़ी दिक्कत है, तो नेब्युलाइजर जरूर होना चाहिए. यह लिक्विड दवा को धुंध में बदलकर सीधे फेफड़ों तक पहुंचाता है. अचानक सांस फूलने जैसी स्थिति में यह काफी मदद कर सकता है। 

स्मार्ट हेल्थ वॉच
आजकल कई स्मार्ट
वॉच सिर्फ स्टेप्स नहीं गिनतीं, बल्कि हार्ट रेट, SpO2, स्ट्रेस लेवल और स्लीप ट्रैकिंग जैसी चीजें भी मॉनिटर करती हैं. कुछ डिवाइस इरेगुलर हार्टबीट का अलर्ट भी देती हैं. लगातार हेल्थ ट्रैकिंग के लिए यह काफी काम की डिवाइस बन चुकी है। 

पोर्टेबल इमरजेंसी लाइट और पावर बैंक
यह सुनने में हेल्थ गैजेट नहीं लगता, लेकिन मेडिकल इमरजेंसी में बिजली जाना बड़ी समस्या बन सकता है. खासकर रात में या खराब मौसम में. इसलिए घर में चार्ज्ड पावर बैंक और इमरजेंसी लाइट रखना भी जरूरी है ताकि जरूरत पड़ने पर फोन, मेडिकल डिवाइस या इंटरनेट बंद न हो। 

एक बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि कोई भी गैजेट डॉक्टर की जगह नहीं ले सकता. लेकिन सही समय पर सही जानकारी देकर ये डिवाइस बड़ी परेशानी को समय रहते पकड़ने में मदद जरूर कर सकते हैं. यही वजह है कि अब हेल्थ एक्सपर्ट्स भी सलाह देते हैं कि घर में कुछ जरूरी मेडिकल गैजेट हमेशा मौजूद होने चाहिए, ताकि इमरजेंसी में घबराहट कम और तैयारी ज्यादा हो। 

 

बैंकों के लिए सरकार का ‘लॉकडाउन’ जैसा सख्त आदेश, जानिए क्या करने से किया मना

 नई दिल्ली

देश में पेट्रोल-डीजल, सीएनजी की कीमतों में बीते सप्ताह इजाफा देखने को मिल चुका है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मिडिल ईस्ट युद्ध के गंभीर असर का हवाला देते हुए ईंधन के सीमित इस्तेमाल की अपील कर चुके हैं. अब वित्त मंत्रालय की ओर से सरकारी बैंकों, बीमा कंपनियों और अन्य वित्तीय संस्थानों को खर्च कम करने के उपाय लागू करने के निर्देश दिया गया है। 

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी आदेश में लागत कम करने के निर्देश दिए गए हैं. इसके तहत लागू किए जाने वाले उपायों में अधिकारियों की विदेश यात्राएं कम करने से लेकर, बैठकों के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का ज्यादा उपयोग और इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर शिफ्टिंग करना शामिल हैं. वित्तीय सेवा विभाग द्वारा सोमवार को जारी किया गया यह आदेश स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI, बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) समेत अन्य फाइनेंस और इंश्योरेंस फर्मों पर लागू होगा। 

विदेश यात्रा में करें कटौती 
सरकार द्वारा लागू किए जाने वाले नए कॉस्ट कटिंग उपायों के तहत सभी बैठकें, काम-प्रोजेक्ट्स की समीक्षाएं और सुझावों के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मीटिंग आयोजित की जानी चाहिए, ऐसा तब तक होना चाहिए, जब तक कि शारीरिक उपस्थिति अनिवार्य न हो. इसके अलावा चेयरमैन, एमडी या CEO समेत अन्य टॉप ऑफिशियल की विदेश यात्रा निर्धारित लिमिट से कम रखी जानी चाहिए, और जहां तक ​​संभव हो, विदेशी कार्यक्रमों में वर्चुअल तौर पर भाग लिया जाना चाहिए। 

इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल
सरकार की ओर से इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में तेजी लाने की भी अपील की गई है. जारी आदेश में कहा गया है कि सभी संगठनों को अपने हेडक्वाटरों और ब्रांचों के लिए किराए पर अटैच किए गए पेट्रोल और डीजल वाहनों को जितना संभव हो इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने का टारगेट सेट करना चाहिए। 

PM मोदी ने की थी अपील
गौरतलब है कि यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की अपील के बाद उठाया गया है, जिसमें उन्होंने अधिकारियों और देश के नागरिकों से कोरोना महामारी के दौरान लागू किए गए उपायों की तरह वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन बैठकें और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को फिर से शुरू करने का आग्रह किया था, उन्होंने इसे राष्ट्रीय हित में उठाया जाने वाला कदम करार दिया था। 

पीएम मोदी ने कहा था कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और ग्लोबल अस्थिरता भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव डाल रही हैं. दुनिया की तेल-गैस जरूरत के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट और इसके आसपास रुकावट ने तेल आयात पर निर्भर भारत जैसे देशों की चिंता बढ़ाने का काम किया है। 

अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने मेट्रो कनेक्टिविटी वाले शहरों के लोगों से सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने और निजी वाहनों का अनावश्यक उपयोग न करने की अपील की थी. इसके अलावा PM Modi ने मिडिल क्लास से विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए कम से कम एक वर्ष तक विदेश यात्रा न करने,  एक वर्ष तक सोना न खरीदने और भारत में निर्मित उत्पादों की खरीदने की अपील की थी। 

PM मोदी को मिला 32वां ग्लोबल सम्मान, नॉर्वे ने दिया ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द रॉयल ऑर्डर ऑफ मेरिट’

नई दिल्ली

स्वीडन के बाद अब नॉर्वे ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सर्वोच्च सम्मान ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट’ से सम्मानित किया है। यह सम्मान नॉर्वे की ओर से विदेशी नागरिकों को दिए जाने वाले सबसे बड़े सम्मानों में शामिल है। ‘ग्रैंड क्रॉस’ रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट का सर्वोच्च ग्रेड माना जाता है। प्रधानमंत्री मोदी को यह सम्मान वैश्विक कूटनीति, भारत-नॉर्वे संबंधों को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके नेतृत्व के योगदान के लिए दिया गया।

क्या है रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट ?
नार्वे ने पीएम मोदी को जिस रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट से सम्मानित किया है, वह नॉर्वे का एक प्रतिष्ठित शाही सम्मान है। ग्रैंड क्रॉस नॉर्वे के शाही सम्मान का सर्वोच्च श्रेणी का पुरस्कार है। इसकी स्थापना 1985 में राजा ओलाव पंचम ने की थी। नॉर्वे और मानवता के हित में उत्कृष्ट सेवा देने वाले विदेशियों और विदेश में रहने वाले नॉर्वे के नागरिकों को यह प्रदान किया जाता है

किसे दिया जाता है यह सम्मान?
रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट को मुख्य रूप से विदेशी राजनयिकों, सिविल सेवकों, मानद वाणिज्य दूतों और अंतर्राष्ट्रीय हस्तियों को दिया जाता है। इस सम्मान को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों या ग्रेड में बांटा गया है। इसमें ‘ग्रैंड क्रॉस’सर्वोच्च ग्रेड है। इसके बाद सेंट ओलाव आता है। सेंट ओलाव का शाही नॉर्वेजियन पदक ऑर्डर ऑफ सेंट ओलाव नॉर्वे के नागरिकों के लिए है, वहीं, ‘ऑर्डर ऑफ मेरिट’मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नॉर्वे के साथ संबंधों को मजबूत करने वालों को दिया जाता है।

कल स्वीडन ने किया था सम्मानित
एक दिन पहले,मोदी को द्विपक्षीय संबंधों में उनके असाधारण योगदान और दूरदर्शी नेतृत्व के सम्मान में स्वीडन के प्रतिष्ठित ‘रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार, डिग्री कमांडर ग्रैंड क्रॉस’ से सम्मानित किया गया था। यह पुरस्कार स्वीडन का सर्वोच्च सम्मान है जो विदेशी राष्ट्राध्यक्षों को प्रदान किया जाता है।

अब तक 32 देश पीएम मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से कर चुके हैं सम्मानित
इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी को दुनिया भर में मिले अंतरराष्ट्रीय सम्मानों की संख्या 32 पहुंच गई है। बीते दिन ही स्वीडन ने भी उन्हें अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा था।

ट्रेड पर भी हुई बात
सम्मान समारोह में दोनों देशों के बीच व्यापार, ग्रीन एनर्जी, जलवायु परिवर्तन और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई. विशेषज्ञों का मानना है कि यह सम्मान भारत की बढ़ती वैश्विक साख और प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति की सफलता को दर्शाता है. इस सम्मान के बाद भारत और नॉर्वे के रिश्तों में और अधिक मजबूती आने की उम्मीद जताई जा रही है.

अब तक 32वां सम्‍मान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अब तक 32 देशों ने सर्वोच्‍च नागर‍िक सम्‍मान से सम्‍मान‍ित क‍िया है. एक द‍िन पहले ही स्‍वीडन ने भी पीएम मोदी अपने सर्वोच्च सम्मान ‘रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार, कमांडर ग्रैंड क्रॉस’ से सम्मानित किया था.

यूरोप दौरे पर PM मोदी का बड़ा दांव, दुनिया भर के निवेशकों को भारत आने का खुला न्योता

नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने वैश्विक मंच पर भारत की धमक एक बार फिर साबित की है। स्वीडन की अपनी आधिकारिक यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने यूरोपीय कंपनियों को भारत में निवेश के लिए आमंत्रित करते हुए एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत की ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ इस समय पूरी रफ्तार से दौड़ रही है। गोटेबर्ग में आयोजित ‘यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री’ (ERT) की एक उच्च स्तरीय बैठक में पीएम मोदी ने स्वीडिश और यूरोपीय कंपनियों को भारत के मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन हाइड्रोजन और क्लीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

इस खास बैठक की सह-मेजबानी स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने की, जिसमें वोल्वो ग्रुप (Volvo Group) समेत यूरोप और भारत की कई दिग्गज कंपनियों के प्रमुख शामिल हुए।

प्रधानमंत्री मोदी ने यूरोपीय कंपनियों के सामने सहयोग के लिए 5 बड़े सेक्टर को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि टेलीकॉम और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं, जो भारत को वैश्विक रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) हब बनाने में मदद कर सकता है। इसके अलावा उन्होंने निम्नलिखित प्रमुख सेक्टर्स में पार्टनरशिप की डिमांड की।

डीप टेक और एआई (AI):- इलेक्ट्रॉनिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग।

ग्रीन और क्लीन एनर्जी:- नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन और सस्टेनेबल मोबिलिटी।

इंफ्रास्ट्रक्चर और हेल्थकेयर:- शहरी परिवर्तन, अत्याधुनिक बुनियादी ढांचा, डिफेंस, सेमीकंडक्टर और लाइफ साइंसेज (दवाइयां और स्वास्थ्य)।

पीएम मोदी ने कंपनियों को भरोसा दिलाया कि आने वाले सालों में भारत के फ्लैगशिप प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बनने के लिए उनके लिए एक मजबूत और संस्थागत व्यवस्था (Institutional System) तैयार की जाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि तकनीकी नवाचार (Technology Innovation) की अगली लहर का सह-निर्माण (Co-creation) अब भारत में होना चाहिए।

राउंड टेबल बैठक को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि पिछले 12 सालों से भारत सरकार रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म (सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन) के मूल मंत्र पर काम कर रही है। मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति के दम पर हमारी रिफॉर्म एक्सप्रेस पूरी स्पीड से आगे बढ़ रही है। उन्होंने भारत की युवा आबादी, तेजी से बढ़ते मध्यम वर्ग और बुनियादी ढांचे के विकास को देश की सबसे बड़ी ताकत बताया। मोदी ने कहा कि स्वीडन की ताकत इनोवेशन और सस्टेनेबिलिटी में है, जबकि भारत के पास ‘स्केल, टैलेंट और ग्रोथ मोमेंटम’ (बड़ा बाजार, हुनर और विकास की रफ्तार) है। इन दोनों को मिलाकर 21वीं सदी की चुनौतियों का समाधान खोजा जा सकता है।

प्रधानमंत्री ने भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच जनवरी 2026 में संपन्न हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की जमकर तारीफ की। उन्होंने इसे एक बदलाव लाने वाली आर्थिक साझेदारी बताया, जो व्यापार, प्रौद्योगिकी, मैन्युफैक्चरिंग और सेवाओं में नए रास्ते खोलेगी। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के शब्दों को दोहराते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यह ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ है और हम इसे जल्द से जल्द जमीन पर लागू करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) का जिक्र करते हुए कहा कि कनेक्टिविटी की यह परियोजना भारत-यूरोप के व्यापारिक रिश्तों को एक नया आयाम देगी।

पीएम मोदी ने भारत के विजन को स्पष्ट करते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य अब केवल भारत में सामान बनाना नहीं है, बल्कि “भारत के लिए डिजाइन करना, भारत में निर्माण करना और भारत से पूरी दुनिया को निर्यात करना” है। उन्होंने स्वीडन की क्राउन प्रिंसेस विक्टोरिया और चुनिंदा सीईओ के साथ भी बातचीत की और स्पष्ट किया कि भारत और स्वीडन का रिश्ता अब महज एक ‘खरीदार और विक्रेता’ (Buyer-Seller) का नहीं रह गया है, बल्कि यह विचारों, तकनीक और साझेदारी का एक दीर्घकालिक औद्योगिक सफर बन चुका है।

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