हमजा बुरहान भी ढेर, पाकिस्तान में छिपे भारत के दुश्मनों का लगातार हो रहा सफाया

नई दिल्ली
 पाकिस्तान की धरती पर भारत के दुश्मनों का काल बनकर मंडरा रहे अज्ञात हमलावरों ने एक और बड़े आतंकी को जहन्नुम पहुंचा दिया है. गुरुवार को खबर आई कि पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड हमजा बुरहान की पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके में ताबड़तोड़ गोलियां मारकर हत्या कर दी गई है. पिछले कुछ सालों से पाकिस्तान के अलग-अलग शहरों में भारत के मोस्ट वांटेड आतंकियों को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है. मोटरसाइकिल पर आने वाले इन अज्ञात हमलावरों ने अब तक लश्कर, जैश और हिजबुल के कई टॉप कमांडरों को मौत के घाट उतार दिया है । इन रहस्यमय हत्याओं ने पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों और वहां पनाह लिए बैठे आतंकियों के आकाओं की नींद उड़ा दी है. कोई नहीं जानता कि इन आतंकियों की जान लेने वाले ये अज्ञात लोग आखिर कौन हैं। 

पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड हमजा बुरहान को कैसे मिली मौत?

भारत सरकार की तरफ से साल 2022 में आतंकी घोषित किया गया हमजा बुरहान अब इस दुनिया में नहीं है. उसे मुजफ्फरराबाद में अज्ञात हमलावरों ने कई गोलियां मारीं, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई. हमजा बुरहान का असली नाम अर्जुमंद गुलजार डार था और वह खतरनाक आतंकी संगठन अल बदर से जुड़ा हुआ था. साल 2019 में पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले की साजिश में उसका बड़ा हाथ था, जिसमें भारत के 40 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे. इस हमले के बाद से ही वह भारत का बड़ा दुश्मन बना हुआ था, लेकिन पीओके में अज्ञात बंदूकधारियों ने उसे गोलियां मारकर हमेशा के लिए खामोश कर दिया । 

लाहौर में लश्कर के संस्थापक अमीर हमजा पर कैसे हुआ था हमला?

पाकिस्तान के लाहौर शहर में लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक सदस्यों में शामिल अमीर हमजा को भी इसी साल अप्रैल में निशाना बनाया गया था. बाइक पर सवार होकर आए अज्ञात हमलावरों ने अमीर हमजा पर अचानक अंधाधुंध फायरिंग कर दी. इस जानलेवा हमले में वह बुरी तरह जख्मी हो गया, जिसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था. अमीर हमजा भारत के खिलाफ लंबे समय से जहर उगलने और आतंकी नेटवर्क को मजबूत करने का काम कर रहा था। 
मसूद अजहर और हाफिज सईद के करीबियों को किसने ढेर किया?

जैश-ए-मोहम्मद के चीफ मौलाना मसूद अजहर के बड़े भाई मोहम्मद ताहिर अनवर की भी पिछले महीने पाकिस्तान में रहस्यमयी हालात में मौत हो गई. वह जैश के सभी बड़े ऑपरेशन्स को संभालता था. वहीं, पिछले साल मार्च में 26/11 मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के बेहद करीबी अबू कतल उर्फ कतल सिंधी को झेलम सिंध में अज्ञात हमलावरों ने मार गिराया. कतल सिंधी साल 2024 में जम्मू-कश्मीर के रियासी में तीर्थयात्रियों की बस पर हुए हमले का मुख्य आरोपी था. इसके अलावा कराची में हाफिज सईद के एक और खास मुफ्ती कैसर फारूक को भी अज्ञात हमलावरों ने मदरसा के पास पीठ में गोलियां मारकर ढेर कर दिया था। 

पठानकोट हमले के गुनहगार शाहिद लतीफ का अंत कैसे हुआ?

साल 2016 में भारत के पठानकोट एयरबेस पर हुए बड़े आतंकी हमले के मुख्य साजिशकर्ता शाहिद लतीफ को सियालकोट की एक मस्जिद में अज्ञात बंदूकधारियों ने गोलियां मार दी थीं. 54 साल का शाहिद लतीफ भारत की मोस्ट वांटेड लिस्ट में शामिल था और लंबे समय से पाकिस्तान में बैठकर कश्मीरी युवाओं को भड़काने का काम कर रहा था. इसी तरह लश्कर का एक और खतरनाक भर्ती कमांडर अकरम खान गाजी भी नवंबर 2023 में मोटरसाइकिल सवार हमलावरों की गोलियों का शिकार बन गया. गाजी भारत में आतंकियों की घुसपैठ कराने के लिए नए लड़कों का ब्रेनवॉश करता था। 

ख्वाजा शाहिद का सिर कलम और विमान हाईजैक के आरोपी की मौत कैसे हुई?

लश्कर-ए-तैयबा के टॉप कमांडर ख्वाजा शाहिद उर्फ मियां मुजाहिद की लाश एलओसी के पास नीलम घाटी में बेहद डरावनी हालत में मिली थी. अज्ञात हमलावरों ने पहले उसका अपहरण किया, फिर उसे बुरी तरह टॉर्चर करने के बाद उसका सिर धड़ से अलग कर दिया. इससे पहले साल 1999 में इंडियन एयरलाइंस के आईसी-814 विमान को हाईजैक करने वाले मुख्य आतंकियों में शामिल मिस्त्री जहूर इब्राहिम को कराची में मौत के घाट उतारा गया था. वह जाहिद अखुंद नाम से फर्जी पहचान छिपाकर रह रहा था, लेकिन अज्ञात हमलावरों ने उसके सिर में पॉइंट ब्लैंक रेंज से दो गोलियां मारकर उसका काम तमाम कर दिया था। 

यूएपीए (UAPA) के तहत घोषित व्यक्तिगत आतंकियों की लिस्ट

    मौलाना मसूद अजहर उर्फ मौलाना मोहम्मद मसूद अजहर अल्वी उर्फ वली आदम इस्सा.
    हाफिज मोहम्मद सईद उर्फ हाफिज मोहम्मद साहिब उर्फ हाफिज मोहम्मद सईद उर्फ हाफिज मोहम्मद उर्फ हाफिज सईद उर्फ हाफेज मोहम्मद सईद उर्फ हाफिज मोहम्मद सयीद उर्फ मोहम्मद सईद उर्फ मोहम्मद सईद.
    जकी-उर-रहमान लखवी उर्फ अबू वाहीद इर्शाद अहमद अर्शद उर्फ काकी उर-रहमान उर्फ जाकिर रहमान लखवी उर्फ जकी-उर-रहमान लकवी उर्फ जाकिर रहमान.
    दाऊद इब्राहिम कास्कर.
    वधावा सिंह बब्बर उर्फ चाचा.
    लखबीर सिंह उर्फ रोडे.
    रंजीत सिंह उर्फ नीता.
    परमजीत सिंह उर्फ पंजवड़.
    भूपिंदर सिंह भिंडा.
    गुरमीत सिंह बग्गा.
    गुरपतवंत सिंह पन्नून.
    हरदीप सिंह निज्जर.
    परमजीत सिंह उर्फ पम्मा.
    साजिद मीर उर्फ साजिद मजीद उर्फ इब्राहिम शाह उर्फ वासी उर्फ खाली उर्फ मोहम्मद वसीम.
    यूसुफ मुजम्मिल उर्फ अहमद भाई उर्फ यूसुफ मुजम्मिल बट उर्फ हुरैरा भाई.
    अब्दुर रहमान मक्की उर्फ अब्दुल रहमान मक्की.
    शाहिद महमूद उर्फ शाहिद महमूद रहमतुल्लाह.
    फरहातुल्लाह गोरी उर्फ अबू सूफियान उर्फ सरदार साहब उर्फ फारू.
    अब्दुल रऊफ असगर उर्फ मुफ्ती उर्फ मुफ्ती असगर उर्फ साद बाबा उर्फ मौलाना मुफ्ती रऊफ असगर.
    इब्राहिम अथर उर्फ अहमद अली मोहम्मद अली शेख उर्फ जावेद अमजद सिद्दीकी उर्फ ए.ए. शेख उर्फ चीफ.
    यूसुफ अजहर उर्फ अजहर यूसुफ उर्फ मोहम्मद सलीम.
    शाहिद लतीफ उर्फ छोटा शाहिद भाई उर्फ नूर अल दीन.
    सैयद मोहम्मद यूसुफ शाह उर्फ सैयद सलाहुद्दीन उर्फ पीर साहब उर्फ बुजुर्ग.
    गुलाम नबी खान उर्फ आमिर खान उर्फ सैफुल्लाह खालिद उर्फ खालिद सैफुल्लाह उर्फ जवाद उर्फ दांद.
    जफर हुसैन भट उर्फ खुर्शीद उर्फ मोहम्मद जफर खान उर्फ मौलवी उर्फ खुर्शीद इब्राहिम.
    रियाज इस्माइल शाहबांदरी उर्फ शाह रियाज अहमद उर्फ रियाज भटकल उर्फ मोहम्मद रियाज उर्फ अहमद भाई उर्फ रसूल खान उर्फ रोशन खान उर्फ अजीज.
    मोहम्मद इकबाल उर्फ शाहबांदरी मोहम्मद इकबाल उर्फ इकबाल भटकल.
    शेख शकील उर्फ छोटा शकील.
    मोहम्मद अनीस शेख.
    इब्राहिम मेमन उर्फ टाइगर मेमन उर्फ मुश्ताक उर्फ सिकंदर उर्फ इब्राहिम अब्दुल रजाक मेमन उर्फ मुस्तफा उर्फ इस्माइल.
    जावेद चिकना उर्फ जावेद दाऊद टेलर.
    हाफिज तलहा सईद.
    मोहिउद्दीन औरंगजेब आलमगीर उर्फ मकतब अमीर उर्फ मुजाहिद भाई उर्फ मोहम्मद भाई उर्फ एम. अम्मार उर्फ अबू अम्मार मैडम उर्फ औरंगजेब अंजार उर्फ मौलाना अम्मार मदनी उर्फ मौलाना अम्मार उर्फ अबू अम्मार उर्फ अम्मार अल्वी.
    अली काशिफ जान उर्फ जान अली काशिफ.
    मुश्ताक अहमद जरगर उर्फ लाट्रम.
    आशिक अहमद नेंगरू उर्फ नेंगरू उर्फ आशिक हुसैन नेंगरू उर्फ आशिक मौलवी.
    शेख साजाद उर्फ शेख सज्जाद गुल उर्फ सज्जाद गुल उर्फ सज्जाद अह शेख.
    अर्जुमंद गुलजार डार उर्फ हमजा बुरहान उर्फ डॉक्टर.
    इम्तियाज अहमद कंदू उर्फ साजाद उर्फ फैयाज सोपोर.
    शौकत अहमद शेख उर्फ शौकत मोची.
    बासित अहमद रेशी.
    हबीबुल्लाह मलिक उर्फ साजिद जट्ट उर्फ सैफुल्लाह उर्फ नूमी उर्फ नुमान उर्फ लंगड़ा.
    बशीर अहमद पीर उर्फ इम्तियाज आलम.
    इर्शाद अहमद उर्फ इदरीस.
    रफीक नाई उर्फ सुल्तान.
    जफर इकबाल उर्फ सलीम उर्फ जमालदीन उर्फ शमशेर नाई उर्फ शमशेर खान.
    बिलाल अहमद बेग उर्फ बाबर.
    शेख जमील-उर-रहमान.
    एजाज अहमद अहंगर.
    मोहम्मद अमीन खुबैब.
    अरबाज अहमद मीर.
    डॉ. आसिफ मकबूल डार.
    अर्शदीप सिंह गिल उर्फ अर्श डला.
    हरविंदर सिंह संधू उर्फ रिंदा.
    लखबीर सिंह उर्फ लांडा.
    सतविंदर सिंह उर्फ सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बरार.
    मोहम्मद कासिम गुज्जर उर्फ सलमान उर्फ सुलेमान.

UAPA की लिस्ट के कौन-से आतंकी मारे जा चुके हैं?

यूएपीए लिस्ट में शामिल कुल 57 मोस्ट वांटेड आतंकियों में से कई बड़े नाम पिछले कुछ समय में ढेर किए जा चुके हैं. इनमें से अधिकतर आतंकियों को पाकिस्तान में अज्ञात हमलावरों ने अपनी गोली का शिकार बनाया, जबकि कुछ अन्य देशों में मारे गए.

नंबर 6. लखबीर सिंह उर्फ रोडे: खालिस्तान लिबरेशन फ्रंट का यह टॉप आतंकी पाकिस्तान में छिपा बैठा था. दिसंबर 2023 में पाकिस्तान के लाहौर में बीमारी (हार्ट अटैक) के कारण इसकी मौत की रिपोर्ट सामने आई थी.

नंबर 8. परमजीत सिंह उर्फ पंजवड़: खालिस्तान कमांडो फोर्स का चीफ, जो लंबे समय से पाकिस्तान में शरण लिए हुए था. 6 मई 2023 को लाहौर की जौहर टाउन सोसाइटी में सुबह की सैर के दौरान दो अज्ञात बाइक सवार हमलावरों ने इसे गोलियां मारकर ढेर कर दिया.

नंबर 12. हरदीप सिंह निज्जर: खालिस्तानी आतंकी संगठन ‘खालिस्तान टाइगर फोर्स’ का चीफ. 18 जून 2023 को कनाडा के सरे शहर में एक गुरुद्वारे की पार्किंग में अज्ञात हमलावरों ने इसकी गोली मारकर हत्या कर दी थी.

नंबर 22. शाहिद लतीफ उर्फ छोटा शाहिद भाई: साल 2016 के पठानकोट एयरबेस हमले का मुख्य मास्टरमाइंड. अक्टूबर 2023 में पाकिस्तान के सियालकोट की एक मस्जिद में अज्ञात बंदूकधारियों ने इसे गोलियां मारकर हमेशा के लिए खामोश कर दिया.

नंबर 38. अर्जुमंद गुलजार डार उर्फ हमजा बुरहान: साल 2019 के पुलवामा आत्मघाती हमले का मुख्य साजिशकर्ता और अल बदर का आतंकी. हाल ही में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के मुजफ्फरराबाद में अज्ञात हमलावरों ने इसे कई गोलियां मारकर जहन्नुम पहुंचा दिया.

नंबर 43. बशीर अहमद पीर उर्फ इम्तियाज आलम: हिजबुल मुजाहिद्दीन का टॉप कमांडर, जो कश्मीर में आतंकियों की घुसपैठ कराने का इंचार्ज था. फरवरी 2023 में पाकिस्तान के रावलपिंडी में एक दुकान के बाहर अज्ञात हमलावरों ने इसे पॉइंट ब्लैंक रेंज पर गोली मारकर ढेर कर दिया था.

इस तरह भारत सरकार की इस लिस्ट में शामिल कम से कम 6 बड़े और खूंखार आतंकी अब तक मारे जा चुके हैं. अधिकतर का अंत ‘अज्ञात हमलावरों’ की गोलियों से हुआ है.

 

India on Alert: दुनिया की जंग का असर भारत पर क्यों? संकट के पीछे ये 4 बड़े कारण

नई दिल्ली

भारत आर्थिक तौर पर संकट के दौर से गुजर रहा है. कारण सबको पता है, मिडिल-ईस्ट में तनाव. हालात ये हैं कि भारत के लोग सुबह उठकर सबसे पहले नजर डालते हैं कि दुनिया में कच्चा तेल और युद्ध को लेकर क्या अपडेट्स हैं। 

दरअसल, दुनिया के किसी कोने में कोई मिसाइल दागता है, दो देश आपस में टकराते हैं, या कोई बड़ा देश कमजोर देश पर पाबंदियां लगाता है, तो उसकी सीधी मार भारत की जेब पर पड़ती है. यानी करे कोई, और भुगते कोई. यह सिस्टम हर भारतीय को चुभता है। 

रूस-यूक्रेन का युद्ध हो, या फिलहाल अमेरिका और ईरान की जंग. तबाही का मंजर भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखा है? जबकि इस दौरान अमेरिकी शेयर बाजार रिकॉर्ड ऊंचाई के आसपास बना हुआ है, भारत का बाजार ही पस्त नहीं है, बल्कि जीडीपी की रफ्तार थमने वाली है। 

अब सवाल उठता है कि आखिर क्यों दुनिया की हर जंग का बिल भारत को चुकाना पड़ता है, इसके पीछे के असली कारण क्या हैं और इस चक्रव्यूह से निकलने का रास्ता क्या है. ऐसा नहीं है कि यह पहली बार हो रहा है, और इसके पीछे कोई इत्तेफाक है, मुख्यतौर पर फिलहाल 4 कारण सामने दिख रहे हैं। 

1. कच्चा तेल (भारत की मजबूरी)
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है. यानी एक तरह से भारत की इकोनॉमी तेल पर टिकी है. जब भी पश्चिम एशिया में तनाव होता है, हॉर्मुज जैसे समुद्री रास्तों पर संकट आता है, तेल की कीमतें आसमान छूने लगती हैं, और भारत कुछ नहीं कर पाता है। 

जबकि अमेरिका का गणित अलग है. अमेरिका अब सिर्फ तेल खरीदता नहीं है, वह दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक भी है. जब तेल महंगा होता है, तो अमेरिकी कंपनियों को फायदा होता है, यानी ऐसे संकट में भी अमेरिका को कोई बड़ा आर्थिक नुकसान नहीं होता. जबकि भारत के डॉलर पानी की तरह बहने लगते हैं. इसे अर्थशास्त्र की भाषा में ‘आयातित महंगाई’ कहते हैं, यानी महंगाई बढ़ने के कारण विदेशी फैसले होते हैं। 

2. डॉलर की दादागीरी
दुनिया में व्यवस्था ऐसी है कि भारत को कच्चा तेल खरीदने के लिए डॉलर में भुगतान करना पड़ता है. जब दुनिया में अनिश्चितता बढ़ती है, तो ग्लोबल इंवेस्टर्स अपना पैसा सुरक्षित रखने के लिए डॉलर खरीदने भागते हैं. इससे डॉलर मजबूत होता है और भारतीय रुपया कमजोर पड़ जाता है. मौजूदा दौर में पिछले करीब 2 महीने से यही हो रहा है. रुपया कमजोर होने का सीधा मतलब है कि जो तेल दो महीने पहले महज 70-75 डॉलर प्रति बैरल में खरीद रहे थे, अब उसके लिए 100 डॉलर से ज्यादा का भुगतान करना पड़ रहा है. एक तो कच्चा तेल का महंगा होना, और फिर रुपया का कमजोर पड़ना, भारतीय अर्थव्यवस्था पर दोहरी चोट पहुंचाता है. इसका सीधा असर विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ता है। 

3. शेयर बाजार का गणित
वैश्विक तनाव के दौरान हमेशा भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आती है, और उसकी वजह भी विदेशी निवेशक (FII) ही होते हैं. जबकि ऐसे संकट के समय में अमेरिका बच जाता है. क्योंकि अमेरिका को दुनिया का ‘सेफ हेवन’ माना जाता है. जैसे ही दुनिया में युद्ध जैसी स्थिति बनती है, विदेशी निवेशक भारत जैसे ‘इमर्जिंग मार्केट्स’ से अपना मुनाफा समेटते हैं और उस पैसे को निकालकर अमेरिका के सरकारी बॉन्ड्स या अमेरिकी शेयर बाजार में लगा देते हैं. जिसका नतीजा ये होता है कि भारत का बाजार गिर जाता है और अमेरिका का बाजार मजबूती से डटा रहता है। 

4. तनाव का एक्सपोर्ट पर सीधा असर
भारत इंजीनियरिंग गुड्स, टेक्सटाइल और केमिकल्स जैसी कई चीजें एक्सपोर्ट करता है. लेकिन जब समुद्री रास्तों पर युद्ध का साया होता है, तो एक्सपोर्ट बाधित हो जाता है, या फिर जहाजों की आवाजाही दूसरे लंबे रूटों से करनी पड़ती है. इससे जहाजों का किराया और इंश्योरेंस का प्रीमियम 3 से 4 गुना बढ़ जाता है. फिर विदेशी बाजारों में पहुंचते-पहुंचते इनमें आयात किया जाने वाला सामान काफी महंगा हो जाता है, प्रोडक्ट महंगा होने की वजह से बिक्री घट जाती है. यानी कुल मिलाकर एक्सपोर्ट ठप पड़ जाता है और देश में आने वाली विदेशी करेंसी कम हो जाती है। 

जब ये सारे संकट एक साथ आते हैं, तो देश की विकास दर यानी जीडीपी की रफ्तार सुस्त पड़ जाती है, भारत चाहकर भी कुछ नहीं कर पाता, क्योंकि घरेलू मोर्चे पर किसी तरह का कोई संकट नहीं होता है. केवल एक तेल महंगा होने से माल ढुलाई महंगी होती है. जिससे सब्जी, दूध, राशन से लेकर हर चीज के दाम बढ़ते हैं. फिर महंगाई को काबू करने के लिए रिजर्व बैंक को ब्याज दरें बढ़ानी पड़ती हैं. ब्याज दरें बढ़ते ही होम लोन, कार लोन और बिजनेस लोन महंगे हो जाते हैं। 

फिर जब लोन महंगा होगा और जेब में पैसा कम बचेगा. आम आदमी नया घर, गाड़ी या मोबाइल चाहकर भी नहीं खरीद पाएगा. जब लोग नहीं खरीदेंगे तो फैक्ट्रियों में सामान नहीं बनेगा. फैक्ट्रियों में सामान नहीं बनेगा, तो नई नौकरियां नहीं आएंगी. जिससे जीडीपी की रफ्तार अपने आप सुस्त पड़ जाएगी। 

इस चक्रव्यूह से बचने के लिए भारत को क्या करना चाहिए?
ये तो साफ है कि इस संकट के लिए दुनिया को कोसने से कुछ नहीं होगा. भारत को अगर वाकई में आत्मनिर्भर बनना है, तो कुछ मोर्चों पर युद्ध स्तर पर काम करना होगा। 

ऊर्जा पर विदेशी निर्भरता कम 
जब तक हम तेल के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर रहेंगे, हमारी नब्ज उनके हाथ में रहेगी, और ऐसे झटके लगते रहेंगे. हमें पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता को तेजी से कम करना होगा. गाड़ियों को इलेक्ट्रिक पर शिफ्ट करना और पेट्रोल में E30 यानी 30 फीसदी तक एथेनॉल मिलाना होगा. सौर ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन के मामले में भारत को इतनी आत्मनिर्भरता हासिल करनी होगी कि हमें बाहर से कच्चा तेल मंगाने की जरूरत सिर्फ पेट्रोकेमिकल्स के लिए पड़े, न कि ईंधन के लिए। 

इसके अलावा भारत को ‘डी-डॉलरइजेशन’ यानी डॉलर की दादागीरी को कम करने की दिशा में सोचना पड़ेगा. रूस, यूएई, ईरान या जिन भी देशों के साथ भारत व्यापार करता है. उनसे सीधे ‘रुपया-रुबल’ या ‘रुपया-दिरहम’ में ट्रेड सेटलमेंट को बढ़ावा देना होगा. अगर भारत कच्चा तेल रुपये में खरीदने में कामयाब हो जाता है, तो दुनिया के किसी भी युद्ध से फॉरेक्स रिजर्व पर कोई आंच नहीं आएगी। 

घरेलू निवेशकों को ‘सुपरपावर’ बनाना
भारतीय शेयर बाजार को मजबूत करना होगा, फिर विदेशी निवेशक आते-जाते रहेंगे, और उसका कोई खास असर नहीं होगा. इसका एक अच्छा उदाहरण ये है कि पिछले करीब एक साल से विदेशी निवेशक जमकर बिकवाली कर रहे हैं, उसके बावजूद बाजार एक दायरे में बना हुआ है, ये ताकत मार्केट को रिटेल निवेशकों से मिली है। 

‘चाइना प्लस वन’ का पूरा फायदा उठाना होगा
मौजूदा हालात में भारत को सिर्फ सर्विसेज (IT) के भरोसे नहीं बैठना है, ‘मेक इन इंडिया’ और PLI (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव) स्कीम्स को और कड़ा करके भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन का ऐसा हिस्सा बनाना होगा ताकि दुनिया भारत के बिना चल ही न सके. जब दुनिया की बड़ी कंपनियों के कारखाने भारत में होंगे, तो वैश्विक तनाव के समय भी विदेशी फंड भारत से पैसा निकालने की हिम्मत नहीं करेंगे। 
 

BJP का दबदबा अभी लंबा चलेगा? प्रदीप गुप्ता बोले- 20 साल तक मजबूत रहेगी पकड़

नई दिल्ली

एक्सिस माय इंडिया (Axis My India) के प्रमुख और पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रदीप गुप्ता ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर बड़ी भविष्यवाणी की है। उन्होंने कहा है कि 2014 में शुरू हुआ भाजपा के राजनीतिक दबदबे का मौजूदा दौर कम से कम 20 साल तक जारी रहेगा। ‘द एक्सिस माई इंडिया’ सर्वेक्षण संस्था के प्रमुख गुप्ता ने तर्क दिया कि सत्तारूढ़ दल की स्थिति तब तक सुरक्षित रहेगी जब तक उसके शासन का प्रदर्शन बहुत कमजोर नहीं हो जाता। मालूम है कि प्रदीप गुप्ता के एक्सिस माय इंडिया के अतीत में ज्यादातर सर्वे और एग्जिट पोल्स सही साबित हुए हैं। हालांकि, 2024 लोकसभा चुनाव के एग्जिट पोल में उनसे चूक हो गई थी।

कांग्रेस के लंबे समय तक रहे राजनीतिक प्रभुत्व के साथ तुलना करते हुए, गुप्ता ने कहा कि भारतीय राजनीति एक पार्टी के प्रभाव के एक और दौर की साक्षी बन रही है। गुप्ता ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए साक्षात्कार में कहा, ”राजनीति में एक सीमा होती है। पहले, कांग्रेस ने 1977 तक लगातार शासन किया। उसके बाद, उसे मुश्किलें आने लगीं। उन दिनों, हम लगभग 20 साल तक चलने वाली राजनीतिक पीढ़ी की बात करते थे। वह 20 साल का दौर अब भी बना रहेगा।”

‘राजनीति का केंद्रीय ध्रुव बनी रह सकती है BJP’
उन्होंने कहा कि भाजपा भी इसी तरह लंबे समय तक भारतीय राजनीति का केंद्रीय ध्रुव बनी रह सकती है। उनके विचार में, सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष दोनों का भविष्य काफी हद तक मौजूदा सरकार के कामकाज पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा, ”इतना बड़ा जनादेश मिलने के बाद, भाजपा से उम्मीदें भी बढ़ गई हैं। इसलिए भाजपा और एनडीए को अब शानदार कामकाज करना होगा।” गुप्ता ने कहा, ”जब तक उनका प्रदर्शन कमजोर या खराब नहीं होता, वे जीतते रहेंगे और विपक्ष हारता रहेगा।”

‘कांग्रेस के लिए विरासत में मिले मुद्दों का बोझ बना हुआ है’
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पर पहले कुशासन रहने की धारणाओं से जुड़े ‘विरासत में मिले मुद्दों’ का बोझ बना हुआ है जिससे उसके राजनीतिक नुकसान की भरपाई एक लंबी प्रक्रिया बन गई है। उन्होंने कहा, ”अगर आप 2029 की भी बात करें, तो इसका मतलब होगा लगभग 15 साल (कांग्रेस के लिए सत्ता से बाहर रहने के)। मुझे लगता है कि उन्हें पूरे देश को मनाने में कम से कम पांच साल और लग सकते हैं।” गुप्ता ने यह भी कहा कि राजनीतिक प्रभुत्व ने जनता की आकांक्षाएं भी बढ़ा दी हैं। उन्होंने कहा, ”जब आप बड़ी ऊंचाइयों पर पहुंचते हैं, तो बाद में नीचे आने की भी प्रवृत्ति बनी रहती है। भाजपा भी उस स्तर पर पहुंच गई है जहां उससे आकांक्षाएं बढ़ गई हैं।”

‘यूपी में शासन के प्रति संतुष्टि का स्तर अच्छा, पंजाब में मिला-जुला’
वहीं, प्रदीप गुप्ता का कहना है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में एक साल से भी कम समय बचा है और सत्तारूढ़ भाजपा मजबूत स्थिति में नजर आ रही है, क्योंकि जनता योगी आदित्यनाथ सरकार के कामकाज से काफी हद तक संतुष्ट है। गुप्ता ने कहा कि पंजाब में चार-कोणीय मुकाबले के उभरने के कारण सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के प्रति जनता की संतुष्टि का स्तर ”मिला-जुला’ बना हुआ है। प्रदीप गुप्ता ने राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इन दोनों राज्यों में अपनी एजेंसी के जमीनी स्तर पर किए गए काम से प्राप्त अवलोकन साझा किए। दोनों राज्यों में 2027 की शुरुआत में चुनाव प्रस्तावित है और जिनके परिणामों का व्यापक राष्ट्रीय प्रभाव होने की उम्मीद है।

पेट्रोल-डीजल के बाद अब महंगाई का नया झटका! रुपये की गिरावट बढ़ाएगी बोझ

नई दिल्‍ली
मिडिल ईस्‍ट में तनाव और तेल की कीमतें ऊपर जाने के कारण पेट्रोल और डीजल के दाम में अभी तक दो बार बढ़ोतरी की गई है और आगे भी बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है, लेकिन इन सबसे परे सरकार एक और बड़ा झटका देने की तैयारी कर रही है, जिसका बोझ आम आदमी के ऊपर आ सकता है। 

दरअसल, पिछले कुछ समय से भारतीय करेंसी (Rupee) में बड़ी गिरावट देखी गई है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रुपया एक साल के दौरान 10 से 12 फीसदी तक गिर गया है. ऐसे में कई एक्‍सपर्ट्स रुपये को 100 लेवल के पार जाने की संभावना जता रहे हैं. इस बीच, RBI कई बड़े कदम उठाने की तैयारी कर रहा है, ताकि रुपये की गिरावट को रोका जा सके।  

ब्‍लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, रुपये में स्थिरता लाने के लिए आरबीआई रेपो रेट बढ़ाने पर विचार कर रहा है. साथ ही करेंसी ट्रांसफर और डॉलर जुटाने की योजना पर भी काम किया जा रहा है. ऐसे में अगर रेपो रेट में बढ़ोतरी की जाती है तो इस संकट के समय में आपके बैंक लोन की ईएमआई बढ़ जाएगी, जो मिडिल क्‍लास के लिए एक बड़े झटके से कम नहीं होगा। 

रुपया 97 के करीब पहुंचने पर बढ़ी टेंशन 
बुधवार को रुपये के नए रिकॉर्ड लो ने सिर्फ देश के लोगों को ही चिंता में नहीं डाल दिया, बल्कि RBI अधिकारी भी तनाव में आ गए. रिपोर्ट का दावा है कि 97 के करीब रुपया पहुंचने के बाद  गवर्नर संजय मल्होत्रा समेत कई शीर्ष अधिकारियों ने संभावित उपायों पर चर्चा करने के लिए आंतरिक बैठकें की हैं। 

क्‍या-क्‍या उपाय कर सकता है आरबीआई? 
रिपोर्ट में आगे कहा गया कि उपलब्ध विकल्पों में से एक ब्याज दरों में वृद्धि करना है. आरबीआई की मॉनिटरी पॉलिसी की अलगी बैठक 5 जून को होगा, जिसमें रेपो रेट बढ़ोतरी पर विचार किया जा सकता है. अन्‍य उपायों में एनआरआई डिपॉजिट स्‍कीम के माध्‍यम से विदेशों से डॉलर जुटाना और सॉवरेन डॉलर बॉन्ड बेचना शामिल है। 

2013 से मिलता-जुलता दिख रहा ये उपाय 
विचाराधीन उपाय 2013 के टेपर टैंट्रम काल के दौरान उठाए गए कुछ उपायों से मिलते-जुलते हैं. उस समय भारत ने विदेशी मुद्रा प्रवाह को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय बैंकों के माध्यम से NRIs के लिए डिपॉजिट स्‍कीम शुरू की थीं. आरबीआई का अनुमान है कि इस बार इन योजनाओं से 50 अरब डॉलर तक की राशि आ सकती है, जबकि पहले यह राशि लगभग 30 अरब डॉलर थी। 

बता दें RBI की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति की बैठक 3 से 5 जून तक होनी है. समिति ने इस साल अपनी मानक दर को 5.25% पर अनचेंज रखा है, हालांकि ज्‍यादातर इकोनॉमिस्‍ट में तेजी के कारण आने वाले महीनों में इसमें तेजी की भविष्यवाणी कर रहे हैं।  

PM मोदी की 5 देशों की यात्रा से भारत को बड़ा फायदा, $40 अरब निवेश समेत कई अहम सौदे

नई दिल्ली

 दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच इस समय भारत सिर्फ एक बाजार नहीं बल्कि एक भरोसेमंद ताकत बनकर उभर रहा है. यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया पांच देशों की यात्रा अब सिर्फ कूटनीतिक दौरा नहीं मानी गई, इसे भारत के आर्थिक भविष्य की बड़ी जीत के तौर पर देखा गया है. विदेशों में अक्सर भारत की राजनीतिक बहस चर्चा में रहती है, लेकिन इस बार तस्वीर अलग थी. दुनिया की दिग्गज कंपनियों के सीईओ भारत में निवेश बढ़ाने की बात कर रहे थे. सेमीकंडक्टर से लेकर लॉजिस्टिक्स और टेक्नोलॉजी तक, हर सेक्टर में भारत को लेकर उत्साह दिखाई दिया. करीब ₹3.5 लाख करोड़ के निवेश और विस्तार योजनाओं ने यह संकेत दिया कि वैश्विक कंपनियां अब चीन प्लस वन रणनीति में भारत को सबसे मजबूत विकल्प मान रही हैं. यही कारण है कि इस दौरे को भारत की आर्थिक कूटनीति का बड़ा मास्टरस्ट्रोक कहा जा रहा है। 

पीएम मोदी की इस यात्रा के दौरान 50 से ज्यादा वैश्विक कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक हुई. इन कंपनियों की कुल वैल्यू लगभग 2.7 से 3 ट्रिलियन डॉलर बताई जा रही है. इनमें से कई कंपनियां पहले से भारत में काम कर रही हैं, लेकिन अब वे अपने कारोबार का दायरा बढ़ाना चाहती हैं. अधिकारियों के मुताबिक, भारत की तेज आर्थिक वृद्धि, बढ़ती खपत और स्थिर नीतियां विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं. संयुक्त अरब अमीरात ने अकेले करीब 5 अरब डॉलर यानी लगभग ₹45 हजार करोड़ के नए निवेश की घोषणा की. सरकार इसे भारत की मजबूत ग्लोबल इमेज और निवेशकों के भरोसे का बड़ा संकेत मान रही है. विपक्ष जहां सरकार पर सवाल उठाता रहा है, वहीं इस निवेश ने यह संदेश दिया कि वैश्विक मंच पर भारत की आर्थिक पकड़ लगातार मजबूत हो रही है। 

किन सेक्टर्स में आएंगे सबसे ज्यादा पैसे
प्रधानमंत्री मोदी की पांच देशों की यात्रा के दौरान जिन कंपनियों से बातचीत हुई, उनमें टेक्नोलॉजी, इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स, ग्रीन एनर्जी और सेमीकंडक्टर सेक्टर की कई बड़ी कंपनियां शामिल थीं. अधिकारियों का कहना है कि इन कंपनियों का भारत में पहले से करीब 180 अरब डॉलर का निवेश और कारोबारी एक्सपोजर है. अब वे नए प्रोजेक्ट्स और एक्सपेंशन प्लान पर तेजी से काम करना चाहती हैं. इससे आने वाले वर्षों में लाखों रोजगार पैदा होने की उम्मीद है। 

इस दौरे का सबसे बड़ा संदेश यह रहा कि दुनिया की बड़ी कंपनियां भारत को सिर्फ एक उपभोक्ता बाजार नहीं बल्कि मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन हब के रूप में देख रही हैं. चीन और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव के बाद कई कंपनियां अपनी सप्लाई चेन भारत में शिफ्ट करना चाहती हैं. यही वजह है कि पीएम मोदी की बैठकों में “मेक इन इंडिया” और “डिजिटल इंडिया” जैसे अभियानों को काफी समर्थन मिला। 

UAE ने सबसे बड़ा दांव क्यों लगाया?
संयुक्त अरब अमीरात ने भारत में करीब 5 अरब डॉलर के निवेश का ऐलान किया है. यह निवेश इंफ्रास्ट्रक्चर, बंदरगाह, ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में किया जाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और UAE के बीच तेजी से मजबूत होते व्यापारिक रिश्तों का यह बड़ा असर है. दोनों देशों के बीच CEPA समझौते के बाद व्यापार और निवेश में लगातार बढ़ोतरी हुई है। 

किन सेक्टर्स को होगा सबसे ज्यादा फायदा?
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, सेमीकंडक्टर,
एआई, लॉजिस्टिक्स, ग्रीन एनर्जी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर ऐसे सेक्टर हैं जहां सबसे ज्यादा निवेश आने की संभावना है. भारत सरकार इन सेक्टर्स में पहले ही कई प्रोत्साहन योजनाएं चला रही है. विदेशी कंपनियां अब भारत को लंबे समय के निवेश केंद्र के रूप में देख रही हैं। 

भारत की अर्थव्यवस्था के लिए कितना बड़ा संकेत?
करीब ₹3.5 लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावों को भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा सकारात्मक संकेत माना जा रहा है. इससे न केवल रोजगार बढ़ेंगे बल्कि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में भी इजाफा होगा. सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकता है। 

क्या विपक्ष के सवालों का जवाब है यह दौरा?
प्रधानमंत्री मोदी के विदेश दौरों को लेकर अक्सर विपक्ष सवाल उठाता रहा है. लेकिन इस बार निवेश और व्यापारिक समझौतों ने सरकार को मजबूत राजनीतिक संदेश देने का मौका दिया है. भाजपा इसे भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत और मोदी की व्यक्तिगत कूटनीतिक क्षमता का प्रमाण बता रही है। 

पीएम मोदी की इस यात्रा से भारत को कितना निवेश मिला?
प्रधानमंत्री मोदी की पांच देशों की यात्रा के दौरान करीब ₹3.5 लाख करोड़ यानी लगभग 40 अरब डॉलर के निवेश और कारोबारी विस्तार योजनाओं पर चर्चा हुई. इनमें कई बड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं. UAE ने अकेले 5 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की है. यह निवेश भारत के कई रणनीतिक सेक्टर्स में होगा। 

किन सेक्टर्स में सबसे ज्यादा निवेश आने की उम्मीद है?
सेमीकंडक्टर, ग्रीन एनर्जी, लॉजिस्टिक्स, टेक्नोलॉजी, एआई और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में सबसे बड़े निवेश होंगे. भारत सरकार पहले से इन क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ाने और विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए नीतियां चला रही है. इससे रोजगार और उत्पादन दोनों बढ़ सकते हैं। 

क्या यह निवेश भारत की अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा देगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े निवेश से भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ेगी, नई टेक्नोलॉजी आएगी और लाखों रोजगार पैदा होंगे. साथ ही भारत की वैश्विक सप्लाई चेन में हिस्सेदारी मजबूत होगी. इससे भारत की आर्थिक वृद्धि को लंबी अवधि में बड़ा फायदा मिल सकता है। 

नीदरलैंड ने भारत को लौटाए 1000 साल पुराने ताम्र पत्र, चोल इतिहास से जुड़ा खास कनेक्शन

नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने नीदरलैंड दौरे पर दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करते हुए 17 समझौतों पर हस्ताक्षर किए. पीएम मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन के बीच रक्षा, सेमीकंडक्टर, ऊर्जा, जल प्रबंधन, साइबर सुरक्षा, व्यापार, शिक्षा और समुद्री सहयोग समेत कई अहम क्षेत्रों में साझेदारी के लिए सहमति बनी.

इसके अलावा नीदरलैंड की यात्रा में देश को एक बड़ी सांस्कृतिक और राजनयिक उपलब्धि भी हासिल हुई है. देश की करीब 1000 साल पुरानी विरासत वापस मिल गई है. नीदरलैंड की डच सरकार ने 11वीं सदी की अनैमंगलम ताम्र पट्टिकाओं (Anaimangalam Copper Plates) को भारत को सौंप दिया है. आईए जानते हैं कि ‘लाइडेन प्लेट्स’ (Leiden Plates) के नाम से मशहूर 30 किलोग्राम की ये 21 बड़ी और 3 छोटी पट्टिकाओं में क्या लिखा है? इनका तमिलनाडु और चोल वंश से क्या कनेक्शन है?

क्या हैं अनैमंगलम ताम्र पट्टिकाएं: अनैमंगलम ताम्र पट्टिकाओं को ‘लीडेन प्लेट्स’ भी कहा जाता है. ये 11वीं सदी की अत्यंत दुर्लभ और ऐतिहासिक तांबे की प्लेटें हैं, जो दक्षिण भारत के गौरवशाली चोल राजवंश से संबंधित हैं. लगभग 30 किलोग्राम वजनी इन पट्टिकाओं में 21 बड़ी और 3 छोटी प्लेटें शामिल हैं, जो एक विशाल तांबे की अंगूठी से जुड़ी हुई हैं. इस पर चोल शासक राजेंद्र चोल प्रथम की शाही मुहर भी अंकित है. 1690 ईस्वी के आसपास इन्हें डच ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारी भारत से नीदरलैंड ले गए थे. लंबे समय तक ये लीडेन विश्वविद्यालय (Leiden University) में सुरक्षित थीं. इसीलिए इनको इतिहासकार लीडेन प्लेट्स के नाम से भी जानते हैं.

अनैमंगलम ताम्र पट्टिकाओं का क्या है इतिहास: अनैमंगलम ताम्र पट्टिकाएं 1005 ईस्वी के आसपास चोल सम्राट राजराजा चोल प्रथम और उनके बेटे राजेंद्र चोल प्रथम के शासनकाल के दौरान जारी की गई थीं. ये पट्टिकाएं चोल शासकों द्वारा तमिलनाडु के नागापट्टनम में स्थित ‘चूड़ामणि विहार’ नामक बौद्ध मठ को अनैमंगलम गांव का राजस्व और कर दान करने के शाही आदेश को प्रमाणित करती हैं. यह मठ दक्षिण-पूर्व एशिया (जावा/सुमात्रा) के शैलेंद्र सम्राट द्वारा बनवाया गया था.

कैसी दिखती हैं अनैमंगलम ताम्र पट्टिकाएं: अनैमंगलम पट्टिकाओं में 21 तांबे की प्लेटें शामिल हैं, जिन्हें एक कांस्य की अंगूठी से बांधा गया है. इस अंगूठी पर राजा राजेंद्र चोल प्रथम की मुहर लगी है, जिन्होंने 11वीं शताब्दी में शासन किया था. 5 प्लेटों पर संस्कृत में शिलालेख हैं और बाकी 16 प्लेट्स पर तमिल में शिलालेख हैं. संस्कृत में चोल राजाओं का इतिहास और वंशावली लिखी हुई है.

जबकि तमिल भाषा में दान और प्रशासनिक नियमों की जानकारी दी गई है. तमिल में प्रशासनिक डेटा, भूमि की सीमाएं, टैक्स छूट और स्थानीय शासन के नियम लिखे गए हैं. ये प्लेटें राजेंद्र चोल प्रथम की आधिकारिक शाही मुहर से बंद की गई हैं. इस मुहर पर चोल बाघ का प्रतीक, दो मछलियां (पांड्य प्रतीक) और एक धनुष (चेर प्रतीक) अंकित हैं, जो दक्षिण भारत पर चोलों की सर्वोच्चता को दर्शाते हैं.

ताम्र पट्टिकाओं पर क्या लिखा है: तांबे की 5 पट्टियां संस्कृत भाषा में हैं, जिन पर चोल राजवंश की वंशावली अंकित है. इसकी शुरुआत विष्णु की स्तुति और पौराणिक दिव्य (सूर्यवंशी) पूर्वजों के नामों से होती है. वहीं, तमिल भाग राजा राजराज प्रथम (शासनकाल: 985-1012 ई.) के शासनकाल से संबंधित है, जो राजेंद्र चोल प्रथम के पिता थे. शिलालेख में कहा गया है कि राजा राजराज प्रथम ने अपने शासनकाल के 21वें वर्ष में यह घोषणा की थी कि एक बौद्ध तीर्थस्थल (विहार) के निर्माण के लिए एक गांव (अनैमंगलम) का संपूर्ण राजस्व और उसकी भूमि दान में दी जाएगी.

चोलों की हिंदू धर्म के प्रति आस्था का प्रमाण हैं ताम्र पट्टिकाएं: यह शिलालेख चोलों की धार्मिक सहिष्णुता (एक हिंदू सम्राट द्वारा बौद्ध मठ को आर्थिक सहायता देना) का एक महत्वपूर्ण प्रमाण है. इसके साथ ही यह श्रीविजय साम्राज्य (आधुनिक सुमात्रा, इंडोनेशिया) जिसके शासक ने इस मठ का निर्माण करवाया था, के साथ उनके गहरे समुद्री और भू-राजनीतिक संबंधों को भी उजागर करता है.

तांबे की 3 छोटी प्लेट्स में क्या लिखा: तीन तांबे की प्लेट्स भी एक कांस्य की अंगूठी से एक साथ बांधी हैं. इस पर राजा कुलोत्तुंग चोल प्रथम (जिन्होंने 1070 से 1120 तक शासन किया) की मुहर लगी है. इन पर तमिल में शिलालेख हैं. चोल प्लेटें, जो 1862 से लीडेन विश्वविद्यालय के पास सुरक्षित हैं. जो दक्षिण भारत में शाही फरमानों (राजकीय आदेशों) के महत्वपूर्ण स्रोत हैं. ये प्लेटें चोल और श्रीविजय साम्राज्यों के बीच संबंधों के बारे में ऐतिहासिक जानकारी भी देती हैं. इनका कुल वजन 30 किलोग्राम है.

चोल वंश का पूरा इतिहास खोलती हैं ये तांबे की प्लेट्स: इन तांबे की प्लेट्स को चोल साम्राज्य के सबसे मूल्यवान अभिलेखों में से एक माना जाता है, जिनमें इनके प्रशासन, कराधान, भूमि सुधार, सिंचाई प्रणालियों और व्यापारिक प्रथाओं का विस्तृत विवरण मिलता है. ये शिलालेख इस राजवंश की धार्मिक सद्भाव की भावना को भी उजागर करते हैं. इनमें दक्षिण-पूर्व एशिया के श्रीविजय शासकों द्वारा स्थापित एक बौद्ध विहार के लिए ‘अनैमंगलम’ गांव को दान में दिए जाने का उल्लेख है.

इतिहासकारों का मानना ​​है कि ये प्लेट्स लगभग एक हजार साल पहले दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच मौजूद मजबूत समुद्री, कूटनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों का दुर्लभ प्रमाण प्रस्तुत करती हैं. चोल शासन के स्वर्ण युग से जुड़ी ये पट्टिकाएं भारत के दो सबसे शक्तिशाली समुद्री सम्राटों- राजराज चोल प्रथम (985-1014 ईस्वी) और उनके बेटे राजेंद्र चोल प्रथम (1014-1044 ईस्वी) के शासनकाल को दर्शाती हैं.

अनैमंगलम गांव का इतिहास: अनैमंगलम, भारत के तमिलनाडु राज्य में नागापट्टनम के पास स्थित एक गांव है. ऐतिहासिक दृष्टि से यह गांव इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां सम्राट राजराजा चोल प्रथम ने ‘चूड़ामणि विहार’ नामक बौद्ध मठ को शाही भूमि दान में दी थी. इस मठ का निर्माण 1005 ईस्वी के आसपास श्रीविजय राजा श्री विजय मारविजयतुंगवर्मन ने करवाया था.

सम्राट राजराजा चोल प्रथम ने इस मठ के भरण-पोषण के लिए अनैमंगलम गांव से प्राप्त होने वाले राजस्व को अनुदान के रूप में दे दिया था. राजराजा के पुत्र, राजेंद्र चोल प्रथम ने इस अनुदान को औपचारिक रूप प्रदान करते हुए, इसे 24 ताम्र-पत्रों (21 बड़े और 3 छोटे) पर उत्कीर्ण करवाने का आदेश दिया.

चोल वंश की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था का प्रमाण हैं ताम्र पट्टिकाएं: लीडेन ताम्र-पत्रों (Leiden Plates) में इस गांव का उल्लेख होना, चोलों की अत्यंत सुव्यवस्थित कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था का प्रमाण है. गांव के राजस्व को बौद्ध मठ को सौंपकर, चोल प्रशासन ने स्थानीय करों, कृषि-उपज और भूमि-राजस्व को सीधे तौर पर इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र के रखरखाव के लिए प्रभावी ढंग से उपयोग में लाया. यह घटना गांव-स्तरीय स्वशासन और भूमि-स्वामित्व की उन अत्यंत बारीकी से प्रलेखित प्रणालियों के अध्ययन के लिए एक ऐतिहासिक ‘केस स्टडी’ के रूप में कार्य करती है, जिनके लिए चोल राजवंश विश्व-प्रसिद्ध है.

अनैमंगलम ताम्र पट्टिकाओं के नीदरलैंड पहुंचने की क्या है कहानी: राजेंद्र चोल प्रथम ने संस्कृत और तमिल में 24 ताम्रपत्रों (21 बड़े, 3 छोटे) पर उत्कीर्ण करवाकर अनुदान को औपचारिक रूप दिया था. ये चोल प्रतीक चिह्न वाले एक विशाल कांसे के छल्ले से बंधी हुई हैं. पट्टिकाएं खुदाई के दौरान संभवतः 1687 और 1700 के बीच डच ईस्ट इंडिया कंपनी (VOC) द्वारा विजफ सिन्नेन किले के निर्माण और ‘चीनी’ पैगोडा स्थल के पुनर्निर्माण के दौरान मिली थीं.

खुदाई के समय, तमिलनाडु के नागापट्टनम पर VOC का कब्जा था और यह डच क्षेत्राधिकार के तहत एक व्यापारिक केंद्र के रूप में कार्य करता था. अनैमंगलम ताम्र पट्टिकाओं को 17वीं सदी के अंत में डच ईस्ट इंडिया कंपनी की ओर से तमिलनाडु के नागापट्टनम पर नियंत्रण करने के बाद भारत से बाहर निकाला गया था. ये वस्तुएं संभवतः 1712 में पादरी फ्लोरेंटियस कैम्पर और उनकी पत्नी (कैम्पर-केटिंग परिवार) द्वारा नीदरलैंड ले जाई गई थीं.

हालांकि, उन्हें ये कैसे प्राप्त हुईं, यह कहना मुश्किल है. लेकिन, कैम्पर-केटिंग परिवार के वंशजों ने 1862 में इन प्लेट्स को लीडेन विश्वविद्यालय को दान कर दिया था. जहां उनके रिश्तेदार, हेनड्रिक एरेंट हैमेकर, पहले पूर्वी भाषाओं के प्रोफेसर के रूप में कार्यरत थे.

भारत को कैसे वापस मिली प्राचीन विरासत: भारत 2012 से ही अनैमंगलम प्लेट्स की वापसी के लिए औपचारिक रूप से प्रयास कर रहा था. 2023 में ये प्रयास तब और तेज हो गए, जब भारत ने UNESCO की सांस्कृतिक संपत्ति की वापसी को बढ़ावा देने वाली अंतर-सरकारी समिति के के सामने अपना पक्ष रखा. इस बीच नीदरलैंड्स ने औपनिवेशिक काल के दौरान हटाई गई सांस्कृतिक वस्तुओं की वापसी के संबंध में एक प्रगतिशील राष्ट्रीय नीति अपनाई.

डच औपनिवेशिक संग्रह समिति ने भारत के दावे की समीक्षा की और आधिकारिक तौर पर यह निष्कर्ष निकाला कि 1000 साल पुरानी ये प्लेट्स दक्षिण भारत से उनके असली मालिकों की सहमति के बिना ले जाई गई थीं. समिति की सिफारिश के बाद, लीडेन विश्वविद्यालय के कार्यकारी बोर्ड ने इस कलाकृति की बिना शर्त वापसी को मंजूरी दे दी. साथ ही, भारत के लोगों के लिए इसके गहरे ऐतिहासिक, सभ्यतागत और भावनात्मक महत्व को स्पष्ट रूप से स्वीकार किया.

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को सौंपी जाएंगी ताम्र प्लेट्स: चोल प्लेटें नई दिल्ली स्थित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को सौंपी जाएंगी. ASI, भारत के संस्कृति मंत्रालय के अधीन कार्य करता है और देश में पुरातात्विक अनुसंधान तथा संरक्षण के लिए प्रमुख संस्था है. ASI ही यह तय करेगा कि इन वस्तुओं को भारत में आम जनता के लिए प्रदर्शित किया जाएगा या नहीं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीदरलैंड्स के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के बीच हुआ यह औपचारिक हस्तांतरण, दोनों देशों के बीच “रणनीतिक साझेदारी” और आपसी सम्मान के एक नए युग का प्रतीक है.

नीदरलैंड के साथ भारत ने किए 17 समझौते: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीदरलैंड दौरे पर रक्षा, सेमीकंडक्टर निर्माण और ग्रीन एनर्जी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग के लिए 17 महत्वपूर्ण समझौते (MoUs) किए. साथ ही दोनों देशों के बीच संबंधों को ‘रणनीतिक साझेदारी’ (Strategic Partnership) के स्तर तक मजबूत किया गया. भारत में सेमीकंडक्टर विनिर्माण (फैब) को बढ़ावा देने के लिए टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स (Tata Electronics) और डच कंपनी एएसएमएल (ASML) के बीच समझौता हुआ है. साथ ही भारत और नीदरलैंड्स ने वर्ष 2026-2030 के लिए ‘रणनीतिक साझेदारी रोडमैप’ की शुरुआत की है, जिससे रक्षा, क्वांटम कंप्यूटिंग, स्पेस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में साझा प्रगति होगी.

रणनीतिक साझेदारी का रोडमैप क्या है: भारत और नीदरलैंड ने 2026-2030 के लिए रणनीतिक साझेदारी रोडमैप को अपनाया है. इसके तहत व्यापार और निवेश, रक्षा सहयोग, राजनीतिक संवाद, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, ऊर्जा संक्रमण, AI, क्वांटम तकनीक, स्वास्थ्य, कृषि, जलवायु परिवर्तन और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाया जाएगा. इससे दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को नई मजबूती मिलेगी.

भारत-नीदरलैंड में रक्षा-सुरक्षा सहयोग पर जोर: पीएम मोदी और जेटन की वार्ता में रक्षा और सुरक्षा सहयोग को गहरा करने पर जोर दिया गया. दोनों देशों ने रक्षा मंत्रालयों के बीच संवाद, संयुक्त अनुसंधान, प्रशिक्षण और रक्षा औद्योगिक सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई. साथ ही तकनीक हस्तांतरण, सह-विकास और सह-उत्पादन के जरिए रक्षा उपकरण निर्माण को बढ़ावा देने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई. दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी सहयोग को मजबूत करने पर सहमति जताई. नीदरलैंड ने पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा करते हुए आतंकवाद के खिलाफ भारत के प्रति समर्थन दोहराया.

सेमीकंडक्टर निर्माण में सहयोग पर बनी बात: पीएम मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री जेटन ने सेमीकंडक्टर निर्माण में सहयोग को भविष्य की रणनीतिक साझेदारी का अहम स्तंभ बताया. दोनों नेताओं ने धोलेरा में भारत के पहले फ्रंट-एंड सेमीकंडक्टर फैब के लिए टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और एएसएमएल के बीच हुए समझौते को ऐतिहासिक कदम बताया. इसके अलावा डच सेमीकंडक्टर कॉम्पिटेंस सेंटर और भारतीय सेमीकंडक्टर मिशन के बीच सहयोग पर भी सहमति बनी.

ऊर्जा, जल प्रबंधन और ग्रीन हाइड्रोजन को लेकर भी हुआ समझौता: हरित हाइड्रोजन विकास के लिए दोनों देशों ने भारत-नीदरलैंड रोडमैप तैयार किया. इसके अलावा नवीकरणीय ऊर्जा और चक्रीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी. भारत और नीदरलैंड ने जल प्रबंधन के क्षेत्र में नमामि गंगे मिशन, शहरी नदी प्रबंधन, अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण और गुजरात की कल्पसर परियोजना में तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने का फैसला किया.

व्यापार और निवेश को नई गति देने के लिए हुआ समझौता: पीएम मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री जेटन ने व्यापार और निवेश को बढ़ाने पर जोर दिया. दरअसल, नीदरलैंड भारत में चौथा सबसे बड़ा विदेशी निवेशक है. इस यात्रा से दोनों देशों के बीच व्यापार को नई गति मिली, जो पहले से ही 27.8 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है. दोनों देशों ने सीमा शुल्क सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिससे व्यापार प्रक्रियाएं आसान होंगी और वैध व्यापार को बढ़ावा मिलेगा.

कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा में भी सहयोग करेगा नीदरलैंड: दोनों देशों ने कृषि और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग के लिए भी समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. इसके तहत डेयरी, बागवानी, खाद्य प्रसंस्करण और संरक्षित खेती में निवेश बढ़ाया जाएगा. बेंगलुरु में पशुपालन उत्कृष्टता केंद्र में भारत-डच डेयरी प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की घोषणा भी की गई.

स्वास्थ्य क्षेत्र में संक्रामक रोगों, डिजिटल हेल्थ, महिला स्वास्थ्य और सार्वजनिक स्वास्थ्य अनुसंधान में सहयोग को आगे बढ़ाने पर दोनों देशों में सहमति बनी है. शिक्षा क्षेत्र में उच्च शिक्षा सहयोग समझौते और भारतीय तथा डच विश्वविद्यालयों के बीच नए शैक्षणिक सहयोग का भी स्वागत किया गया.

 

इबोला को लेकर भारत सरकार अलर्ट, एयरपोर्ट्स पर बढ़ाई गई स्क्रीनिंग

नई दिल्ली

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने वैश्विक स्तर पर बढ़ रहे इबोला वायरस के खतरे को देखते हुए देश के सभी बंदरगाहों, हवाई अड्डों और एंट्री पॉइंट्स पर सख्त हेल्थ एडवाइजरी जारी की है। यह कदम विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा पिछले हफ्ते इबोला प्रकोप को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किए जाने के बाद एहतियात के तौर पर उठाया गया है। एडवाइजरी के अनुसार, अत्यधिक जोखिम वाले देशों से आने या वहां से होकर गुजरने करने वाले यात्रियों की सघन निगरानी की जाएगी। उनमें कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, युगांडा और दक्षिण सूडान जैसे देश शामिल हूं।

इन देशों से आने वाले किसी भी यात्री में यदि बीमारी के लक्षण दिखते हैं तो उन्हें इमिग्रेशन चेक से पहले एयरपोर्ट के हेल्थ ऑफिसर या हेल्प डेस्क को इसकी सूचना देनी होगी। यदि कोई यात्री इबोला के किसी संदिग्ध या पुष्ट मरीज के खून या शारीरिक तरल पदार्के सीधे संपर्क में आया है, तो उसे भी अनिवार्य रूप से स्वास्थ्य अधिकारियों को रिपोर्ट करना होगा।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपील करते हुए कहा, “यात्रियों की सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य नियमों को ध्यान में रखते हुए कृपया हेल्थ स्क्रीनिंग और सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों में सहयोग करें।” यह व्यवस्था काफी हद तक कोविड-19 महामारी के दौर की याद दिलाती है।

राहत की बात यह है कि वर्तमान में भारत में इबोला का एक भी मामला सामने नहीं आया है। यह एडवाइजरी पूरी तरह से एहतियाती तौर पर जारी की गई है। हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस बात पर चिंता जताई थी कि यह वायरस बेहद तेजी से फैल रहा है, जिसके बाद ही इसे अंतर्राष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया गया।

खतरे को भांपते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने बुधवार को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक में राज्यों को सभी मोर्चों पर तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।

एसओपी के मुताबिक, केंद्र ने राज्यों के साथ विस्तृत SOP साझा की है, जिसमें आगमन से पहले और बाद की स्क्रीनिंग, क्वारंटाइन प्रोटोकॉल, केस मैनेजमेंट, रेफरल सिस्टम और लैब टेस्टिंग की प्रक्रिया शामिल है। स्वास्थ्य सचिव ने सभी नामित स्वास्थ्य केंद्रों को आपसी समन्वय के साथ निगरानी रखने और समय पर रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।

यह वायरस ऑर्थोइबोलावायरस परिवार से संबंधित एक जूनोटिक संक्रमण है, जो इंसानों के लिए बेहद घातक और जानलेवा साबित हो सकता है। सामान्य फ्लू की तरह बुखार, कमजोरी, थकान, सिरदर्द, गले में खराश, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द इसके लक्षण है। गंभीर स्थिति में उल्टी और दस्त जैसे लक्षण होते हैं।

शरीर के आंतरिक और बाहरी अंगों से बिना किसी स्पष्ट कारण के खून बहना इस बीमारी का सबसे मुख्य और विशिष्ट लक्षण है।

कैसे फैलता है यह संक्रमण?

संक्रमित व्यक्ति के खून, लार, पसीना, आंसू, उल्टी, मल और मां के दूध जैसे शारीरिक तरल पदार्थों के सीधे संपर्क में आने से।

वायरस से दूषित कपड़ों, बिस्तरों या सतहों को छूने से।

संक्रमण से मरने वाले व्यक्ति के शव के सीधे संपर्क में आने से भी यह तेजी से फैलता है।

SOP की भी की जा रही समीक्षा
सरकार की ओर से उठाए गए प्रमुख कदमों में स्क्रीनिंग, निगरानी, क्वॉरंटीन और केस मैनेजमेंट से जुड़े एसओपी की समीक्षा शामिल है। पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी को इबोला जांच के लिए नामित किया गया है, जबकि चरणबद्ध तरीके से अन्य प्रयोगशालाओं को भी तैयार किया जा रहा है।

अपील जारी, घबराएं नहीं
स्वास्थ्य मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और किसी भी अपुष्ट जानकारी को साझा करने से बचें। कहा, सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह सतर्क और किसी भी उभरती स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।

कैसे फैलता है इबोला वायरस
बता दें कि इबोला वायरस को जानलेवा संक्रमण माना जाता है। इसमें हेमोरेजिक फीवर यानी रक्त स्त्राव के साथ बुखार होता है। इससे पीड़ित मरीज को तेज बुखार आता है और शरीर के इंटर्नल अंगों में खून बहना शुरू हो जाता है और ऑर्गन फेलियर जैसी चीजें भी होती हैं।

    इबोला वायरस संक्रमित जंगली जानवरों (जैसे चमगादड़) का मांस खाने से इंसानों में पहुंच सकता है।
    इसके अलावा किसी संक्रमित व्यक्ति के खून, पसीने, लार, मल-मूत्र या उल्टी के सीधे संपर्क में आने से फैलता है।
    बता दें कि इबोला वायरस पानी या हवा के संपर्क में आने पर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता।

पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड का पाकिस्तान में खात्मा, आतंकी हमजा ढेर

श्रीनगर 

पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड आतंकी हमजा बुरहान का खात्मा कर दिया गया है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के मुजफ्फराबाद में एक अज्ञात हमलावर ने उसे गोलियों से भूनकर खत्म कर दिया। उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हमजा बुरहान 2019 में कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले के मास्टरमाइंड्स में एक था। यह शख्स खुद को एक शिक्षक बताता था। वह लंबे समय से अपनी पहचान छिपाकर पाकिस्तान में छिपता फिर रहा था।

इस घटनाक्रम से जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। अरजुमंद गलजार डार उर्फ हमजा बुरहान प्रतिबंधित आतंकी संगठन अल बद्र (Al-Badr) का प्रमुख कमांडर था।हजमा बुरहान मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के रत्नीपोरा का रहने वाला था। वह 2017 में उच्च शिक्षा के बहाने पाकिस्तान गया था। इसके बाद वह स्थानीय युवाओं की भर्ती करने, आतंकी फंडिंग जुटाने और घुसपैठ नेटवर्क को संचालित करने में सक्रिय हो गया।

UAPA कानून के तहत आतंकवादी घोषित
14 फरवरी 2019 को हुए पुलवामा हमले में सीआरपीएफ के 40 से अधिक जवान शहीद हुए थे। इस बर्बर हमले की साजिश में बड़ी भूमिका होने के कारण, भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने 2022 में उसे यूएपीए (UAPA) कानून के तहत आतंकवादी घोषित किया था। मंत्रालय के अनुसार हमजा बुरहान पुलवामा और दक्षिण कश्मीर में आतंक फैलाने, युवाओं को आतंकी संगठनों में भर्ती कराने और आतंकवाद के लिए आर्थिक सहायता जुटाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा था लेकिन अब उसका खात्मा हो चुका है।

पहलगाम हमले में भी था शामिल
बता दें कि पुलवामा की घटना भारत में सुरक्षाकर्मियों पर किया गया अब तक का सबसे घातक हमला था, जिसे जैश-ए-मोहम्मद (JeM) ने अंजाम दिया था। 14 फरवरी, 2019 को जैश के एक आतंकवादी ने लेथपोरा में CRPF के काफिले में विस्फोटकों से भरी एक कार से टक्कर मार दी, जिसमें 40 जवान शहीद हो गए थे। इस घटना की जंच कर रही भारतीय राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA)ने हमजा बुरहान का नाम पुलवामा हमले की साजिश रचने और आतंकवादियों को स्थानीय स्तर पर लॉजिस्टिक और वित्तीय मदद पहुंचाने वाले मुख्य किरदारों में शामिल किया था। जांच एजेंसियों के अनुसार, वह सिर्फ पुलवामा ही नहीं बल्कि कश्मीर घाटी के पहलगाम और अन्य क्षेत्रों में हुए बड़े आतंकी हमलों को सीमा पार से सीधे निर्देशित कर रहा था।

पुलवामा हमला 14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर में हुआ था
पुलवामा हमला 14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर में हुआ था, जिसमें CRPF के 40 जवान शहीद हो गए थे। इस हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था और इसके बाद भारत ने बालाकोट एयरस्ट्राइक कर आतंकियों के ठिकानों को निशाना बनाया था।
हमजा लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर था

2017 में पुलवामा से पाकिस्तान चला गया था
हमजा बुरहान पुलवामा हमले के साजिशकर्ताओं में शामिल था. वह खुद को पाकिस्तान में टीचर बताता था. साथ ही 2019 के बाद से कई आतंकी घटनाओं में शामिल रहा था. वह पीओके के इलाके में कई आतंकी संगठनों को ट्रेनिंग दे रहा था. साथ ही बॉर्डर इलाके में वह आतंकियों को घुसपैठ कराने में मदद करता था। 

हमजा बुरहान का पूरा नाम अरजुमंद गुलजार डार है. इसे हमजा बुरहान के नाम से भी जाना जाता है अपने सर्किल में ये आतंकी ‘डॉक्टर’ के नाम से भी जाना जाता है। 

27 साल का हमजा बुरहान पुलवामा के रत्नीपोरा का रहने वाला है. हमजा 2017 में पाकिस्तान गया और वहां जाकर आतंकवादी संगठन ‘अल बद्र’ में शामिल हो गया. ‘अल बद्र’ को भारत में एक आतंकवादी संगठन के तौर पर लिस्ट किया गया है. हमजा ‘अल बद्र’ के कमांडर के तौर पर काम कर रहा था। 

ये शख्स पुलवामा में ‘ओवर ग्राउंड वर्कर्स’ से विस्फोटक बरामद होने के मामलों में, जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में CRPF पर ग्रेनेड हमले में और युवाओं को आतंकवादी संगठन ‘अल बद्र’ में शामिल होने के लिए उकसाने के मामलों में शामिल पाया गया है। 

ISI ने मुहैया कराया था ऑफिस और सिक्योरिटी
आतंकी हमजा बुरहान उर्फ डॉक्टर न सिर्फ पुलवामा के अलावा दूसरे आतंकी हमले में शामिल था बल्कि वह युवाओं को बरगलाकर उन्हें कट्टरपंथ के रास्ते पर ले जाता था. इस काम के लिए ISI ने उसे एक ऑफिस मुहैया कराया था. और इसकी सुरक्षा में 24 घंटे AK-47 के साथ गनर तैनात रहते थे। 

आतंकी गतिविधियों का अड्डा मुजफ्फराबाद
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित मुजफ्फराबाद भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों का अड्डा है. यहां कई तंजीमों के लोग रहते हैं और उसी की आड़ में भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों को अंजाम देते हैं. आतंकी हमजा बुरहान इसी काम में शामिल था और वह लो प्रोफाइल रहता था। 

पुलवामा हमला और भारत का ऑपरेशन बालाकोट 
14 फरवरी 2019 को दोपहर करीब 3:15 बजे जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर एक भयानक आतंकी हमला हुआ.  पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी और स्थानीय कश्मीरी युवक आदिल अहमद डार ने 300-350 किलो IED से भरी SUV को CRPF के काफिले की एक बस में घुसा दिया. इसमें 40 CRPF जवान शहीद हो गए और कई घायल हुए. यह 1989 के बाद जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों पर सबसे घातक हमला था. जैश-ए-मोहम्मद ने हमले की जिम्मेदारी ली थी। 

हमले के 12 दिन बाद 26 फरवरी 2019 को भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में बालाकोट स्थित जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ट्रेनिंग कैंप पर सर्जिकल एयर स्ट्राइक किया. इसमें बड़ी संख्या में आतंकी मारे गए। 
 

उसकी हत्या ऐसे समय में हुई है, जब पाकिस्तान में आतंकी संगठनों और कट्टरपंथी नेटवर्क से जुड़े कई लोगों पर हमलों की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। हमजा लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर था। बता दें कि हाल के सालों में कई आतंकियों को अज्ञात हमलावरों ने निशाना बनाया है या तो गैंगवार में उनकी मौत हुई है।

PoK में एक स्कूल टीचर का फर्जी पहचान के साथ रह रहा था
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक बताया जा रहा है कि वह पिछले कई सालों से PoK में एक स्कूल टीचर का फर्जी पहचान के साथ रह रहा था। वहीं आतंकी ट्रेनिंग कैंप और घुसपैठ के नेटवर्क को चला रहा था। वैसै वह जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के रत्नीपोरा का रहने वाला था। 

UN में भारत का पाकिस्तान पर करारा प्रहार, कहा- नरसंहार का इतिहास रखने वाला दे रहा उपदेश

 नई दिल्ली

भारत ने बुधवार को यूनाइटेड नेशन्स सिक्योरिटी काउंसिल (UNSC) में पाकिस्तान पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, “नरसंहार के कृत्यों का ‘लंबे वक्त से दागदार’ रिकॉर्ड एक ऐसा पैटर्न दिखाता है, जिसमें पाकिस्तान अपनी सीमाओं के अंदर और बाहर हिंसा के ज़रिए अपनी अंदरूनी नाकामियों का ठीकरा दूसरों पर फोड़ने की कोशिश करता है.” भारत का यह बयान सशस्त्र संघर्षों में नागरिकों की सुरक्षा पर UN सुरक्षा परिषद की सालाना खुली बहस के दौरान आया। 

UN में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत हरीश परवथनेनी ने ये टिप्पणियां तब कीं, जब पाकिस्तान के प्रतिनिधि ने बहस के दौरान जम्मू-कश्मीर का जिक्र किया। हरीश ने कहा, “यह विडंबना है कि पाकिस्तानने ऐसे मुद्दों का जिक्र करना चुना है, जो पूरी तरह से भारत का अंदरूनी मामला है। 

‘पवित्र महीने में…’
इस साल की शुरुआत में अफगानिस्तान पर पाकिस्तान के हमलों का जिक्र करते हुए भारतीय प्रतिनिधि परवथनेनी ने कहा, “दुनिया यह नहीं भूली है कि इसी साल मार्च में रमजान के पवित्र महीने के वक्त पाकिस्तान ने काबुल में ‘उम्मीद एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल’ पर एक बर्बर हवाई हमला किया था। 

अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, “हिंसा की इस कायरतापूर्ण और अमानवीय हरकत में 269 नागरिकों की जान चली गई और 122 अन्य घायल हो गए. यह घटना एक ऐसी जगह पर हुई, जिसे किसी भी तरह से मिलिट्री टारगेट के तौर पर सही नहीं ठहराया जा सकता.” उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान का यह रवैया ‘दोहरे मापदंड’ वाला है कि वह एक तरफ तो अंतरराष्ट्रीय कानून के ऊंचे सिद्धांतों की बात करता है और दूसरी तरफ अंधेरे की आड़ में बेकसूर नागरिकों को निशाना बनाता है। 

UNAMA के मुताबिक,प ये हवाई हमले शाम की तरावीह की नमाज खत्म होने के वक्त हुए, जब कई मरीज मस्जिद से बाहर निकल रहे थे. परवथानेनी ने UNAMA के उस आकलन का भी जिक्र किया, जिसके मुताबिक अफगान नागरिकों के खिलाफ सीमा पार से की गई सशस्त्र हिंसा की वजह से 94 हजार से ज्यादा लोग विस्थापित हुए। 

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की तरफ से इस तरह की हरकतें किसी ऐसे देश के लिए हैरानी की बात नहीं होनी चाहिए, जो अपने ही लोगों पर बम बरसाता है और सुनियोजित तरीके से नरसंहार करता है। 

राजदूत हरीश ने यह भी कहा कि 1971 में ‘ऑपरेशन सर्चलाइट’ के दौरान पाकिस्तान ने अपनी ही सेना द्वारा चार लाख महिलाओं के साथ सुनियोजित तरीके से सामूहिक बलात्कार और नरसंहार का अभियान चलाया था. इस बहस में भारत का हस्तक्षेप इन्हीं आरोपों पर केंद्रित रहा, क्योंकि उसने पाकिस्तान की उस कोशिश को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें पाकिस्तान ने इस मामले को अपना ‘आंतरिक मामला’ बताया था। 

तमिलनाडु में विजय कैबिनेट विस्तार, TVK के 21 और कांग्रेस के 2 विधायक बने मंत्री

चेन्नई

तमिलनाडु में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) सरकार का पहला मंत्रिमंडल विस्तार हो गया है। नई सरकार में विजय की टीवीके पार्टी के 21 और सहयोगी दल कांग्रेस के 2 विधायकों ने मंत्री के रूप में शपथ ली।

टीवीके सरकार के बहुमत के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले दो अहम सहयोगी दल, आईयूएमएल और वीसीके फिलहाल इस कैबिनेट विस्तार का हिस्सा नहीं हैं। दोनों दलों के पास 2-2 विधायक हैं।

एनडीटीवी के अनुसार, IUML और VCK दोनों के लिए कैबिनेट में एक-एक पद आरक्षित रखा गया है, लेकिन उन्होंने अभी तक अपने मंत्रियों के नाम तय नहीं किए हैं। इन दोनों सहयोगी दलों को बाद के चरण में सरकार में शामिल किया जाएगा।

सहयोगियों को सरकार में शामिल होने का न्यौता
टीवीके नेतृत्व लगातार वीसीके, सीपीआई, सीपीएम और आईयूएमएल को औपचारिक रूप से गठबंधन सरकार में शामिल होने के लिए आमंत्रित कर रहा है, जो फिलहाल सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे हैं।

तमिलनाडु के लोक निर्माण और खेल मंत्री आधव अर्जुन ने मंगलवार को कहा था कि मुख्यमंत्री ने इस बात को दोहराया है। यह उनकी इच्छा और सपना भी है। हमें अच्छी खबर की उम्मीद है। हम चाहेंगे कि वीसीके प्रमुख थोल तिरुमावलवन भी मंत्रिमंडल में शामिल हों।

सीएम विजय ने 10 मई को 9 मंत्रियों के साथ पद की शपथ ली थी। उनके मंत्रिमंडल में अधिकतम 35 मंत्री हो सकते हैं। आज 23 नए मंत्रियों के शामिल होने से विजय सरकार में मंत्रियों की कुल संख्या 32 हो गई है। ऐसे में वीसीके और आईयूएमएल जैसे सहयोगी दलों के लिए अभी भी 3 पद खाली हैं।

थलापति विजय के नेतृत्व वाली सरकार में शपथ लेने वाले दो कांग्रेस विधायक राजेश कुमार और थिरु पी. विश्वनाथन हैं. शपथ ग्रहण समारोह की शुरुआत में ‘वंदे मातरम’ और अंत में तमिल गान बजाया गया. टीवीके ने सीपीआई, सीपीएम को गठबंधन सरकार में शामिल होने का न्योता दिया। 

टीवीके नेतृत्व ने वीसीके, सीपीआई, सीपीएम और आईयूएमएल को, जो फिलहाल सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे हैं, औपचारिक रूप से गठबंधन सरकार में शामिल होने का न्योता दिया है. तमिलनाडु के लोक निर्माण और खेल मंत्री आधव अर्जुना ने मंगलवार को कहा, ‘मुख्यमंत्री ने इसे दोहराया है. यही उनकी इच्छा और सपना भी है. हमें अच्छी खबर की उम्मीद है. हम चाहते हैं कि वीसीके प्रमुख थोल तिरुमावलवन भी कैबिनेट में शामिल हों.’
10 मई को विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, उनके साथ नौ मंत्रियों ने भी शपथ ली थी. संविधान के प्रावधानों के अनुसार, वे अधिकतम 35 मंत्रियों की नियुक्ति कर सकते हैं, जो विधानसभा की कुल संख्या का 15% है। 

आज 23 और मंत्रियों के शपथ लेने के बाद मंत्री परिषद की संख्या 32 हो गई है. इससे तीन पद खाली हैं, जिन्हें वीसीके और आईयूएमएल जैसे सहयोगियों को दिया जा सकता है. मंत्रिमंडल में कांग्रेस विधायकों की एंट्री तमिलनाडु के लिए एक बड़ा राजनीतिक क्षण है. लगभग 60 साल बाद पहली बार कांग्रेस राज्य सरकार का हिस्सा बनी है. पार्टी ने आखिरी बार पूर्व मुख्यमंत्री एम. भक्तवत्सलम के कार्यकाल में राज्य में सरकार चलाई थी, जो मार्च 1967 में खत्म हुआ था। 

ऐतिहासिक 1967 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सी. एन. अन्नादुरै के नेतृत्व वाली डीएमके ने सत्ता से बाहर कर दिया था. तब से अब तक कांग्रेस राज्य सरकार से बाहर रही थी, लेकिन अब विजय के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल हो गई है। 

थलापति विजय सरका कैबिनेट मिनिस्टर्स लिस्ट:

    श्रीनाथ (थूथुकुडी)
    कमाली एस (अविनाशी)
    सी. विजयलक्ष्मी (कुमारपालयम)
    आर.वी. रंजीतकुमार (कांचीपुरम)
    विनोद (कुंभकोणम)
    राजीव (तिरुवदनाई)
    बी. राजकुमार (कुड्डालोर)
    वी. गांधीराज (अरक्कोणम)
    मथन राजा पी (ओट्टापिडारम)
    जगदेश्वरी के (राजपालयम)
    एम. विजय बालाजी (इरोड पूर्व)
    लोगेश तमिलसेल्वन डी (रासीपुरम)
    विजय तमिलन पार्थिबन ए (सेलम दक्षिण)
    रमेश (श्रीरंगम)
    कुमार आर (वेलाचेरी)
    थेन्नारासु के (श्रीपेरुम्बुदूर)
    वी. संपत कुमार (कोयंबटूर उत्तर)
    मोहम्मद फरवास जे (अरंथांगी)
    डी. सरथकुमार (तांबरम)
    एन. मैरी विल्सन (डॉ. राधाकृष्णन नगर)
    विग्नेश के (किनाथुकडावु)

शपथ लेने वाले विधायकों की सूची
शपथ लेने वाले विधायकों में 21 टीवीके से हैं, जिनमें श्रीनाथ, कमली एस, सी विजयलक्ष्मी, आरवी रंजीतकुमार, विनोद, राजीव, बी राजकुमार, वी गांधीराज, मथन राजा पी, जगदेश्वरी के, राजेश कुमार एस, एम विजय बालाजी, लोगेश तमिलसेल्वन डी, विजय तमिलन पार्थीबन ए, रमेश, पी विश्वनाथन, कुमार आर, थेन्नारासु के, वी संपत कुमार, मोहम्मद फरवास जे, डी सरथकुमार, एन मैरी विल्सन और विग्नेश के शामिल हैं।

छह दशक बाद तमिलनाडु की सत्ता में कांग्रेस की वापसी
विजय के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल होने वाले दो कांग्रेस विधायक राजेश कुमार और तिरु पी. विश्वनाथन हैं। लगभग छह दशकों में यह पहली बार है जब कांग्रेस तमिलनाडु में सरकार का हिस्सा बनने जा रही है।

पिछली बार कांग्रेस ने एम. भक्तवत्सलम के नेतृत्व में सरकार चलाई थी, जो राज्य में कांग्रेस के आखिरी मुख्यमंत्री थे और उनका कार्यकाल मार्च 1967 में समाप्त हुआ था।

1967 के ऐतिहासिक विधानसभा चुनावों में सीएन अन्नादुरई के नेतृत्व वाले डीएमके ने कांग्रेस पार्टी को हरा दिया था। तब से लेकर अब तक कांग्रेस राज्य में किसी भी सरकार का हिस्सा नहीं रही थी। अब विजय के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में शामिल होकर पार्टी ने लंबे अंतराल के बाद सत्ता में वापसी की है।

 

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