तेलंगाना में भीषण गर्मी का कहर, हीटस्ट्रोक से 51 लोगों की मौत

हैदराबाद

 तेलंगाना राज्य में गर्मी लोगों पर भारी पड़ रही है. शनिवार को राज्य के अलग-अलग हिस्सों में हीटस्ट्रोक से 51 लोगों की मौत हो गई. सबसे ज़्यादा मौतें वारंगल जिले में हुईं, जहां 23 लोगों की मौत हुई.

संयुक्त करीमनगर जिले में 11, खम्मम में सात, आदिलाबाद में पांच और नलगोंडा में पांच लोगों की जान चली गई. उनमें से एक की मौत सरस्वती अंतिम संस्कार में शामिल होने के दौरान हीटस्ट्रोक से हुई. वहीं शुक्रवार को तेज गर्मी की वजह से 34 लोगों की मौत हो गई. राज्य के राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी ने ऐलान किया कि मरने वालों के परिवारों को 4 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा.

तेज़ गर्मी और लू को देखते हुए, मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी ने सचिवालय में इमरजेंसी रिव्यू किया. उन्होंने बताया कि जिन मंडलों और गांवों में सबसे ज़्यादा तापमान रिकॉर्ड किया जाता है, उनकी पहचान की जानी चाहिए और वहां के लोगों को पहले से चेतावनी दी जानी चाहिए और जागरूकता फैलाई जानी चाहिए.

मंत्री ने आदेश दिया कि बस स्टैंड, बाजार, मुख्य सड़कों, उन इलाकों में जहां मजदूर ज़्यादा काम करते हैं और जहां लोग ज़्यादा आते-जाते हैं, वहां ठंडा पीने का पानी, छाछ और ओआरएस पैकेट उपलब्ध कराए जाने चाहिए.

जीवों की रक्षा करना हमारी ज़िम्मेदारी: उन्होंने कहा कि कलेक्टरों को खुद हीटवेव की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए और गांव और मंडल लेवल के सभी स्टाफ को फील्ड लेवल पर रहना चाहिए.

उन्होंने कहा कि सनस्ट्रोक के लक्षण दिखते ही इमरजेंसी मेडिकल सर्विस को इलाज के लिए तैयार रहना चाहिए. मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी ने कहा कि लोगों के साथ-साथ जीवों की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है और उन्होंने पानी की टंकियों और मिट्टी के बर्तनों के जरिए पक्षियों और जानवरों को पीने का पानी देने की अपील की.

तेलंगाना के 15 जिलों में 45 डिग्री से ज़्यादा तापमान रिकॉर्ड किया गया. सबसे ज़्यादा 46.3 डिग्री तापमान कोठागुडेम जिले में रिकॉर्ड किया गया, जबकि सबसे कम 39.8 डिग्री तापमान नारायणपेट जिले में रिकॉर्ड किया गया.

आंध्र प्रदेश में हीटस्ट्रोक से 16 लोगों की मौत
दूसरी तरफ आंध्र प्रदेश में तेज गर्मी की वजह से, अकेले शनिवार को अलग-अलग इलाकों में हीटस्ट्रोक से 16 लोगों की मौत हो गई. इनमें से बारह मौतें एनटीआर, कृष्णा और गुंटूर जिलों में हुईं. मचावरम मंडल (पलनाडु ज़िला) के वेमावरम गांव के जल्ला कोंडालू (54), केथनकोंडा के पठान नागुलमीरा (32), कोटिकलापुडी की मेका निर्मला (50), कांचीकाचेरला के मोहम्मद अबिदुन्निसा (26) और मेडिकोंडुरु मंडल (गुंटूर ज़िला) के सिरिपुरम के कडियाला बलैया (94) की मौत हीटस्ट्रोक की वजह से हुई. वहीं विजयवाड़ा के पंडित नेहरू बस स्टेशन पर हीटस्ट्रोक की वजह से तीन यात्रियों की मौत हो गई.

इसी तरह सत्यनारायणपुरम पुलिस स्टेशन के इलाके में एक अनजान व्यक्ति (60) की मौत हो गई, जबकि पेनामलुरु मंडल (कृष्णा ज़िला) के चोडावरम में एक भिखारी (45) की मौत हो गई. वारंगल के वी. नरसय्या (50) की विजयवाड़ा के ओल्ड टाउन इलाके में राजकुमारी थिएटर के पास हीटस्ट्रोक से मौत हो गई. मुटलुरु, वट्टीचेरुकुरु मंडल (गुंटूर जिला) में, पदावला बसवैया (86) तेज़ गर्मी के कारण बीमार पड़ गए और बाद में उनकी मौत हो गई. आखिर में, पिडुगुराल्ला शहर (पलनाडु जिला) में डोंडेती वेंकटरावम्मा (80) और केबीपी अग्रहारम, रविकामथम मंडल (अनकापल्ली जिला) में दिव्यांग गडिगोयिला सत्यनारायण (28) की भी हीटस्ट्रोक से मौत हो गई. एलुरु जिले के पेडावेगी मंडल के पेडावेगी निवासी मारगानी श्रीनिवास राव (60) और उसी मंडल के कोप्पाका निवासी चल्लारी रत्नाला राव (55) की मौत हो गई.

इबोला संकट पर भारत अलर्ट: कांगो-युगांडा यात्रा से बचने की सलाह

 नई दिल्ली

 इबोला बीमारी के प्रकोप को देखते हुए, भारत सरकार ने रविवार को उन भारतीय नागरिकों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है जो कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान में रह रहे हैं या वहां यात्रा कर रहे हैं।

सरकार ने उन्हें स्थानीय अधिकारियों द्वारा जारी सार्वजनिक स्वास्थ्य दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करने और अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी है।

अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह
स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने परामर्श में कहा है कि कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान में बदलती स्थिति और विश्व स्वास्थ्य संगठन की सिफारिशों को देखते हुए, सभी भारतीय नागरिकों को अगली सूचना तक इन देशों की अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस स्थिति को अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है।

बुन्दिबुग्यो स्ट्रेन का प्रकोप और जोखिम
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत में अभी तक बुन्दिबुग्यो वायरस स्ट्रेन के कारण होने वाली इबोला बीमारी का कोई मामला सामने नहीं आया है। अफ्रीका सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने आधिकारिक तौर पर कांगो और युगांडा को प्रभावित करने वाले बुन्दिबुग्यो स्ट्रेन के प्रकोप को महाद्वीपीय सुरक्षा का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है।

कांगो और युगांडा की सीमाओं से सटे दक्षिण सूडान जैसे देशों को भी संक्रमण के उच्च जोखिम वाले क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है।

निगरानी बढ़ाने के निर्देश
WHO की आपातकालीन समिति ने 22 मई को प्रवेश बिंदुओं पर रोग निगरानी को मजबूत करने के लिए अस्थायी सिफारिशें जारी की हैं।

इसका उद्देश्य उन यात्रियों का पता लगाना, उनका आकलन करना और उन्हें रिपोर्ट करना है जो ऐसे क्षेत्रों से आ रहे हैं जहाँ बुन्दिबुग्यो वायरस की पुष्टि हुई है और जिनमें अस्पष्ट बुखार के लक्षण हैं।

इबोला की गंभीर स्थिति
इबोला बीमारी एक वायरल रक्तस्रावी बुखार है, जो इबोला वायरस के बुन्दिबुग्यो स्ट्रेन के संक्रमण से होता है। यह एक अत्यंत गंभीर बीमारी है जिसकी मृत्यु दर काफी अधिक है।

बुन्दिबुग्यो वायरस के कारण होने वाली इबोला बीमारी को रोकने या इलाज के लिए कोई वैक्सीन या विशिष्ट उपचार स्वीकृत नहीं है।

जम्मू-कश्मीर में बड़ा ऑपरेशन: बारामूला में आतंकी ठिकाना ध्वस्त, विस्फोटक बरामद

जम्मू कश्मीर

जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ जारी अभियान में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है. उत्तरी कश्मीर के अलग-अलग इलाकों में चलाए गए संयुक्त तलाशी अभियानों के दौरान सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों के ठिकानों को ढूंढ निकाला और उन्हें पूरी तरह तबाह कर दिया.

सुरक्षा बलों को उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले के क्रीरी इलाके में आतंकियों के छिपे होने की खुफिया जानकारी मिली थी. जिसके बाद सेना और स्थानीय पुलिस ने नीलसर इलाके में एक जॉइंट सर्च ऑपरेशन शुरू किया था.

आतंकवादी इस जगह का इस्तेमाल दोबारा न कर सकें, इसलिए सुरक्षा बलों ने इस ठिकाने को तुरंत तबाह कर दिया. पुलिस इस मामले में आगे की जांच कर रही है.

23 विस्फोटक स्टिक्स बरामद
इस ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों ने इलाके में बने एक गुप्त आतंकी ठिकाने का पर्दाफाश किया. सुरक्षा बलों को इन ठिकानों से भारी मात्रा में विस्फोटक और अन्य सामग्री बरामद हुई. ठिकाने की तलाशी लेने पर वहां से करीब 23 विस्फोटक स्टिक्स और अन्य आपत्तिजनक सामग्री जब्त की गई.

बांदीपोरा में प्राकृतिक गुफाओं में बना था ठिकाना
इससे पहले उत्तरी कश्मीर के ही बांदीपोरा जिले से भी ऐसी ही एक कामयाबी की खबर आई थी. सुरक्षा बलों ने बांदीपोरा के अरागम इलाके में स्थित खंजपत्री के जंगलों में एक बड़े आतंकी ठिकाने को ध्वस्त किया था. ये कार्रवाई 14 से 15 मई के बीच एक विशेष ‘सर्च एंड डिस्ट्रॉय ऑपरेशन’ के तहत की गई थी. इस बड़े ऑपरेशन को सेना की 13 राष्ट्रीय राइफल्स, बांदीपोरा पुलिस और CRPF की तीसरी बटालियन ने मिलकर अंजाम दिया था.

युद्ध जैसा सामान बरामद
पहाड़ी इलाके में तलाशी के दौरान सुरक्षा बलों की नजर वहां बनी प्राकृतिक गुफाओं पर गई. जब इन गुफाओं की तलाशी ली गई त वहां छिपाकर रखा गया भारी मात्रा में युद्ध जैसा सामान बरामद हुआ. इस ठिकाने से रोजमर्रा के कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स टूल्स, खाने-पीने का राशन, बर्तन जैसी चीजें भी मिली थीं.

SBI ग्राहकों के लिए बड़ी राहत! 25-26 मई की बैंक हड़ताल टली, सामान्य रहेंगे सभी कामकाज

नई दिल्ली

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के ग्राहकों के लिए जरूरी खबर है। बैंक ने बताया कि 25 और 26 मई 2026 को होने वाली बैंक कर्मचारियों की हड़ताल फिलहाल टाल दी गई है। इसका मतलब है कि इन दोनों दिनों में देशभर में SBI की सभी शाखाएं सामान्य रूप से खुली रहेंगी और ग्राहकों को सभी बैंकिंग सेवाएं बिना किसी रुकावट के मिलती रहेंगी।

SBI ने क्या कहा?
SBI ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने बयान में कहा, “हम अपने सम्मानित ग्राहकों को सूचित करते हैं कि ऑल इंडिया स्टेट बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ फेडरेशन (AISBISF) द्वारा 25 और 26 मई 2026 को प्रस्तावित हड़ताल टाल दी गई है। हमारी सभी शाखाएं सामान्य रूप से काम करेंगी और सभी नियमित बैंकिंग सेवाएं प्रदान करेंगी।”

क्यों टल गई हड़ताल?
SBI स्टाफ एसोसिएशन, बंगाल सर्किल के सचिव सुदीप दत्ता ने कहा, ‘प्रबंधन के साथ मुंबई में हुई बैठक पॉजिटिव रही और कर्मचारी महासंघ की कई मांगों पर प्रगति हुई है। इन परिस्थितियों में प्रस्तावित हड़ताल को स्थगित कर दिया गया है।’

SBI कर्मचारी महासंघ के महासचिव एल चंद्रशेखर ने अपने सदस्यों को भेजे संदेश में कहा, “मुंबई स्थित कॉरपोरेट सेंटर में बैंक प्रबंधन और महासंघ के बीच हुई बैठक सकारात्मक रही। हमें यह बताते हुए खुशी है कि हमारी मांगों पर सकारात्मक प्रगति हुई है। चर्चा के दौरान हुई प्रगति को देखते हुए प्रस्तावित हड़ताल स्थगित कर दी गई है।”

क्या थी मांगें?
यह हड़ताल All India State Bank of India Staff Federation (AISBISF) ने बुलाई थी। यूनियन का कहना था कि बैंक में कर्मचारियों की कमी, आउटसोर्सिंग, पेंशन से जुड़े मुद्दे और वेतन असमानता जैसे कई मामलों पर लंबे समय से उनकी मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है। यूनियन ने 16 मांगों की एक सूची रखी थी। इसमें नए कर्मचारियों की भर्ती, खाली पदों को भरना, स्थायी नौकरियों में आउटसोर्सिंग बंद करना, NPS (नेशनल पेंशन सिस्टम) में ज्यादा लचीलापन देना और कर्मचारियों के ट्रांसफर नियमों में बदलाव जैसी मांगें शामिल थीं।

कर्मचारी संगठन का कहना था कि स्टाफ कम होने से मौजूदा कर्मचारियों पर काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है। साथ ही, कई शाखाओं में सुरक्षा गार्डों की कमी से सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई थी। हालांकि, बैंक प्रबंधन और कर्मचारी प्रतिनिधियों के बीच बातचीत के बाद फिलहाल यह आंदोलन वापस ले लिया गया है। इससे बैंकिंग सेवाओं में संभावित रुकावट टल गई है और ग्राहकों को किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

8th Pay Commission से कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले! हेल्पर से सीनियर अफसर तक बढ़ सकती है इतनी सैलरी

नई दिल्ली

8वें वेतन आयोग के तहत कर्मचारी कई बड़ी मांग कर रहे हैं. खासकर बेसिक सैलरी, फिटमेंट फैटक्‍टर और महंगाई भत्ता को लेकर मांगे उठ रही हैं. अगर ये मांगे मान ली जाती हैं तो केंद्रीय कर्मचारियों की मौज हो सकती है, जिनकी सैलरी में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। 

रेलवे कर्मचारियों की मांग
इस बीच, रेलवे के कर्मचारियों की ओर से मांग उठी है कि उनकी मिनिमम बेसिक सैलरी बढ़ाकर ₹52,000 कर दिया जाए. इसके साथ ही फिटमेंट फैक्‍टर 4.38 तक बढ़ाने, HRA में भारी इजाफा और पुरानी पेंशन योजना लागू करने जैसी मांगें रखी हैं। 

रेलवे की ये संस्‍था कर रही मांग
अगर रेवले कर्मचारियों की ये मांगे मान ली जाती हैं तो जूनियर इंजीनियर, सीनियर सेक्शन इंजीनियर, असिस्टेंट मैनेजर और दूसरे तकनीकी कर्मचारियों के लिए 8वां वेतन आयोग बड़ी खुशखबरी ला सकता है. यह मांग इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर एसोसिएशन (IRTSA) की ओर से की गई है। 

अलग-अलग फिटमेंट फैक्‍टर की मांग
IRTSA संगठन ने अलग-अलग लेवल के कर्मचारियों के लिए अलग फिटमेंट फैक्टर का सुझाव दिया है. L-1 से L-5 के लिए 2.92, L-6 से L-8 के लिए 3.50, L-9 से L-12 के लिए 3.80, L-13 से L-16 के लिए 4.09 और L-17 और L-18 के लिए 4.38 फिटमेंट फैक्‍टर रखा गया है। 

कितनी बढ़ेगी सैलरी
अगर मांगे मान ली जाती हैं तो मिनिमम बेसिक सैलरी ₹52,000 होगी और अधिकमत करीब ₹9.85 लाख रुपये तक की सैलरी हो जाएगी। 

एचआरए में बढ़ोतरी की मांग
रेलवे कर्मचारी संगठन ने एचआरए में भी बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है, जो बढ़कर 40 फीसदी तक हो सकता है. संगठन का कहना है कि बड़े शहरों में रहने का खर्च तेजी से बढ़ा है, इसलिए HRA में बढ़ोतरी जरूरी है। 

हाउस रेंट अलाउंस पर प्रस्ताव
IRTSA ने कहा है कि 5वें वेतन आयोग द्वारा निर्धारित उस सिद्धांत का पालन 8वें वेतन आयोग में भी किया जाना चाहिए, जिसके तहत 50% DA को मूल वेतन के साथ मिला दिया जाता है। कर्मचारी संगठन ने यह सिफारिश की है कि DA पर टैक्स की राहत मिलनी चाहिए। IRTSA ने 8वें वेतन आयोग के लिए हाउस रेंट अलाउंस (HRA) की दरों में बढ़ोतरी का सुझाव दिया है। 7वें वेतन आयोग में HRA की दरें 8%, 16% और 24% थीं, जिन्हें 2024 में DA के 50% तक पहुंचने के बाद बढ़ाकर 10%, 20% और 30% कर दिया गया था।

अब इसे चार श्रेणियों में बांटने की मांग की गई है। 50 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में 40 प्रतिशत HRA, 20 से 50 लाख आबादी वाले शहरों में 30 प्रतिशत, 5 से 20 लाख आबादी वाले शहरों में 20 प्रतिशत और 5 लाख से कम आबादी वाले शहरों में 10 प्रतिशत HRA देने की मांग रखी गई। इसके अलावा नाइट ड्यूटी अलाउंस की सीमा हटाने और ट्रांसपोर्ट अलाउंस को तीन गुना बढ़ाने का भी प्रस्ताव दिया गया।

करियर प्रगति को लेकर IRTSA ने मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (MACP) योजना में बड़ा बदलाव सुझाया। संगठन चाहता है कि कर्मचारियों को 30 साल की सेवा में पांच प्रमोशन मिलें। ये प्रमोशन 6, 12, 18, 24 और 30 वर्ष की सेवा पूरी होने पर दिए जाएं। साथ ही जूनियर इंजीनियर (JE), सीनियर सेक्शन इंजीनियर (SSE) और अन्य तकनीकी कर्मचारियों की ट्रेनिंग अवधि को भी MACP के लिए सेवा अवधि में जोड़ा जाए।

वेतन विसंगतियों को दूर करने की मांग भी प्रमुख रही। IRTSA ने जूनियर इंजीनियरों को उनके अधीन काम करने वाले वरिष्ठ तकनीशियनों से अधिक ग्रेड पे देने, SSE के वेतन स्तर को बढ़ाने और तकनीकी कर्मचारियों के लिए अलग वेतन संरचना बनाने की मांग की। 

मोदी सरकार के मंत्रालयों का रिपोर्ट कार्ड तैयार, जानिए किस विभाग ने किया सबसे शानदार प्रदर्शन

नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में सभी मंत्रालयों के कामकाज का लेखा-जोखा रखा गया। कैबिनेट सचिवालय द्वारा तैयार किए गए इस नए असेसमेंट सिस्टम के तहत साल 2025 के प्रदर्शन के आधार पर मंत्रालयों का ‘रिपोर्ट कार्ड’ पेश किया गया। इसमें विभिन्न श्रेणियों में सबसे अच्छा और सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले मंत्रालयों की पहचान की गई है। इस दौरान पीएम मोदी ने मंत्रियों को खर्चों पर लगाम लगाने और फिजूलखर्ची से बचने के सख्त निर्देश भी दिए हैं।

नई मूल्यांकन प्रणाली: 2025 में कैसे तय हुई परफॉर्मेंस?
कैबिनेट सचिवालय द्वारा तैयार किए गए इस नए असेसमेंट सिस्टम के तहत मंत्रालयों के प्रदर्शन की बारीकी से समीक्षा की गई। इस दौरान कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन ने सभी मंत्रालयों का विस्तृत स्कोरकार्ड पेश किया। बैठक में नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि सरकारी कामकाज को नागरिकों के लिए अधिक सुलभ कैसे बनाया जाए।

किन पैमानों पर कसा गया मंत्रालयों को?
मूल्यांकन के दौरान मंत्रालयों को सिर्फ उनके कोर काम पर नहीं, बल्कि संकट की स्थिति में उनकी सक्रियता पर भी परखा गया।

शिकायत निवारण: आम जनता की समस्याओं को कितनी जल्दी और प्रभावी ढंग से सुलझाया गया।

फाइल मैनेजमेंट: दफ्तरों में अटकी हुई फाइलों का निपटारा कितनी तेजी से हुआ।

रणनीतिक सूझबूझ: अंतर-मंत्रालयी मामलों में सटीक और अहम सुझाव देना।

संकट प्रबंधन: पश्चिम एशिया युद्ध जैसे वैश्विक संकट के बीच देश के हितों को सुरक्षित रखना।

बेस्ट और वर्स्ट परफॉर्मर: किस मंत्रालय ने मारी बाजी?
इस कड़ी समीक्षा में कुछ मंत्रालयों ने बेहतरीन काम कर टॉप स्कोर हासिल किया है, जबकि खराब प्रदर्शन करने वाले मंत्रालयों को सुधार के लिए चिन्हित किया गया है ताकि खामियों को दूर किया जा सके। खराब प्रदर्शन करने वाले मंत्रालयों के नाम सामने नहीं आए हैं। यहां सबसे अच्छा परफॉर्म करने वाले मंत्रालयों की लिस्ट है।

मंत्रालय शानदार प्रदर्शन का क्षेत्र (Top Category)
उपभोक्ता मामले मंत्रालय जन शिकायत निवारण और पश्चिम एशिया संकट प्रबंधन
कोयला मंत्रालय फाइलों का त्वरित निपटान और उत्कृष्ट विभागीय प्रबंधन
ऊर्जा मंत्रालय ऊर्जा सुरक्षा और लक्ष्यों की समय पर प्राप्ति
स्वास्थ्य मंत्रालय स्वास्थ्य सुविधाओं और नीतिगत मोर्चे पर शानदार काम

पीएम मोदी का सख्त निर्देश: फिजूलखर्ची पर लगेगी लगाम

चार घंटे से अधिक चली इस बैठक में मोदी 3.0 की दूसरी वर्षगांठ (9 जून) से पहले सरकार की दिशा तय कर दी गई है। प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रियों को वीआईपी कल्चर से दूर रहने की सख्त सलाह दी है।

बैकग्राउंड और पीएम के प्रमुख निर्देश:

विदेशी दौरों पर पाबंदी: जब तक देश के हित में बहुत जरूरी न हो या भारत के भविष्य के लिए अहम न हो, विदेशी यात्राएं नहीं होंगी।

बड़े काफिलों से परहेज: मंत्रियों को अपने बड़े काफिलों को छोटा करने के निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही इसके लिए एक नया अभियान शुरू हो सकता है।

अंतरराष्ट्रीय समिट रद्द: फिजूलखर्ची रोकने के लिए अफ्रीका और ‘बिग कैट एलायंस’ जैसी इंटरनेशनल मीटिंग्स फिलहाल टाल दी गई हैं।

ऊर्जा संकट पर फोकस: पश्चिम एशिया के तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के गतिरोध को देखते हुए बायोगैस व नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल पर फोकस करने को कहा गया है।

आम जनता के लिए इसका क्या मतलब है?

अक्सर आम लोग सरकारी दफ्तरों में लटकती फाइलों और लेट-लतीफी से परेशान रहते हैं। इस ‘रिपोर्ट कार्ड’ सिस्टम से नौकरशाही और मंत्रियों को सीधा संदेश गया है कि उनकी कुर्सी ‘परफॉर्मेंस’ से तय होगी।

इससे पब्लिक के लिए सरकारी योजनाओं का फायदा बिना किसी रुकावट के पहुंचने का रास्ता साफ होगा। साथ ही, अनावश्यक खर्चों पर रोक लगने से देश का पैसा सीधे विकास कार्यों और बुनियादी ढांचे पर खर्च हो सकेगा।

‘क्या कसाब-हाफिज सईद को भी जमानत देंगे?’ सुप्रीम कोर्ट में सरकार का तीखा सवाल

नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट में इन दिनों आतंकवाद निरोधी कानून ‘UAPA’ के तहत जमानत के नियमों को लेकर एक बड़ी बहस छिड़ी हुई है। केंद्र सरकार ने कोर्ट में एक बेहद कड़ा सवाल उठाया है- ‘क्या ट्रायल में देरी के आधार पर अजमल कसाब या हाफिज सईद जैसे खूंखार आतंकियों को भी जमानत दी जा सकती है?’ इस मामले का सीधा असर भारत की न्याय प्रणाली और जेलों में बंद उन सैकड़ों विचाराधीन कैदियों पर पड़ेगा, जो सालों से UAPA के तहत बिना सजा के जेल काट रहे हैं। यह बहस राष्ट्रीय सुरक्षा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच एक नई लकीर खींचेगी।

क्या है पूरा मामला और केंद्र की दलील?
सुप्रीम कोर्ट की दो अलग-अलग बेंचों ने UAPA आरोपियों की जमानत को लेकर विपरीत राय दी है। हाल ही में एक बेंच ने कहा था कि मुकदमे (Trial) में लंबी देरी होने पर आरोपियों को जमानत मिलनी चाहिए। इसी निष्कर्ष पर आपत्ति जताते हुए केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) एसवी राजू ने कोर्ट में कड़ा तर्क दिया। उन्होंने कहा कि ट्रायल में देरी के आधार पर सभी को एक ही चश्मे से नहीं देखा जा सकता।

“अजमल कसाब के मामले में बड़ी संख्या में गवाह थे, जिससे ट्रायल में देरी हुई। तो क्या आप उसे सिर्फ देरी के आधार पर जमानत दे देंगे? अगर हाफिज सईद को पाकिस्तान से लाया जाए और सबूत जुटाने के कारण ट्रायल में 5 साल लग जाएं, तो क्या उसे भी जमानत मिल जाएगी?” – एसवी राजू, ASG (सुप्रीम कोर्ट में)
अपराध की गंभीरता और भूमिका है अहम

ASG राजू ने जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की बेंच के सामने स्पष्ट किया कि जमानत देते समय अपराध की गंभीरता और उसमें आरोपी की भूमिका को जरूर देखा जाना चाहिए।

उन्होंने 2020 के दिल्ली दंगा मामले का उदाहरण दिया। कोर्ट ने इस मामले में 5 आरोपियों को जमानत दी थी, लेकिन उमर खालिद और शरजील इमाम जैसे आरोपियों को उनकी गंभीर भूमिका के चलते राहत नहीं दी थी। इसे महज एक गणितीय फॉर्मूले की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट की दो बेंचों में मतभेद
UAPA के तहत जमानत के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की ही दो बेंचों के फैसले आपस में टकरा रहे हैं। इसी वजह से यह विवाद इतना गहरा गया है। इसे समझने के लिए नीचे दी गई टेबल देखें:

बेंच (जज) मामला मुख्य टिप्पणी
जस्टिस बीवी नागरत्ना और उज्ज्वल भुइयां सैयद इफ्तिखार अंद्राबी केस (मई 2026) ट्रायल में लंबी देरी और जेल में लंबा समय बिताना जमानत का मजबूत आधार है। ‘जेल अपवाद है, बेल नियम है’ का सिद्धांत यहां भी लागू होता है।
जस्टिस अरविंद कुमार और पीबी वराले दिल्ली दंगा केस / उमर खालिद (जनवरी 2026) केवल लंबी कैद को जमानत का ‘गणितीय फॉर्मूला’ नहीं बनाया जा सकता। आरोपी की भूमिका और अपराध की गंभीरता देखना अनिवार्य है।

अब ‘बड़ी बेंच’ करेगी इस विवाद का फैसला 

इस मतभेद को हमेशा के लिए सुलझाने के लिए जस्टिस अरविंद कुमार और पीबी वराले की बेंच ने 22 मई 2026 को इस मामले को सुप्रीम कोर्ट की एक ‘बड़ी बेंच’ के पास भेज दिया है।

अब चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) इस कानूनी सवाल के लिए एक नई बेंच का गठन करेंगे। हालांकि, इस बीच कोर्ट ने 2020 दिल्ली दंगों के दो अन्य आरोपियों (तस्लीम अहमद और खालिद सैफी) को मामले के निपटारे तक 6 महीने की अंतरिम जमानत दे दी है। 

UAPA मामलों की टाइमलाइन

इस कानूनी विवाद की जड़ें पिछले कुछ सालों के बड़े फैसलों से जुड़ी हैं।

2021 (केए नजीब केस): सुप्रीम कोर्ट की 3 जजों की बेंच ने ऐतिहासिक फैसला दिया था। इसमें माना गया कि अगर ट्रायल में बहुत ज्यादा देरी हो रही है, तो मौलिक अधिकारों (अनुच्छेद 21) के तहत UAPA में भी जमानत दी जा सकती है।

जनवरी 2026: दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका इसी आधार पर खारिज हुई कि उनका अपराध गंभीर था और केवल समय बीतने पर जमानत नहीं मिल सकती।

मई 2026 (अंद्राबी केस): दूसरी बेंच ने कहा कि ट्रायल में देरी होने पर जमानत मिलनी ही चाहिए, जिससे यह मौजूदा विरोधाभास पैदा हुआ।

22 मई 2026: सुप्रीम कोर्ट ने जमानत के इस अहम मामले को अंतिम और स्पष्ट फैसले के लिए ‘लार्जर बेंच’ के पास रेफर कर दिया।

 

136 साल पुरानी मस्जिद पर सियासत तेज! कोलकाता एयरपोर्ट से हटाने की मांग पर गरमाई राजनीति

कोलकाता
 पश्चिम बंगाल की राजनीति बदलते ही अब उन मुद्दों पर भी तेजी दिखने लगी है, जो दशकों तक फाइलों और विवादों में दबे रहे. कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट के भीतर मौजूद 136 साल पुरानी गौरीपुर जामे मस्जिद को लेकर फिर से हलचल तेज हो गई है. यह वही मस्जिद है, जिसे लेकर पिछले करीब 30 साल से केंद्र सरकार और एयरपोर्ट अथॉरिटी लगातार चिंता जताती रही थी. लेकिन हर बार मामला धार्मिक संवेदनशीलता और राजनीतिक टकराव के कारण आगे नहीं बढ़ पाया. अब बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद तस्वीर बदलती दिख रही है. सूत्रों के मुताबिक नई सरकार और केंद्र के बीच तालमेल बढ़ने के बाद मस्जिद को एयरपोर्ट परिसर से बाहर शिफ्ट करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है. यही वजह है कि प्रशासन, एयरपोर्ट अथॉरिटी और जिला अधिकारियों की लगातार बैठकें हो रही हैं. सवाल सिर्फ एक इमारत का नहीं है, बल्कि एयरपोर्ट सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय एविएशन नियमों और बंगाल की नई राजनीतिक दिशा का भी बन चुका है। 

दिलचस्प बात यह है कि यह मस्जिद एयरपोर्ट बनने से भी पहले की बताई जाती है. स्थानीय लोग इसे बांकड़ा मस्जिद के नाम से जानते हैं. मस्जिद रनवे के बेहद करीब मौजूद है और इसी कारण एयरपोर्ट संचालन में लंबे समय से दिक्कतें आ रही हैं. एविएशन अधिकारियों का दावा है कि मस्जिद की वजह से सेकेंडरी रनवे का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पा रहा. बड़े इंटरनेशनल विमानों की लैंडिंग और आधुनिक ILS सिस्टम लगाने में भी रुकावट बनी हुई है. यही कारण है कि एयरपोर्ट अथॉरिटी लंबे समय से इसे दूसरी जगह शिफ्ट करने का प्रस्ताव देती रही. अब सूत्र बता रहे हैं कि ईद-उल-अजहा के बाद इस मुद्दे पर बड़ा फैसला हो सकता है. हालांकि प्रशासन फिलहाल इसे पूरी तरह आपसी सहमति और शांति के साथ हल करने की रणनीति पर काम कर रहा है. मस्जिद कमेटी से भी कई दौर की बातचीत हो चुकी है और अगले हफ्ते फिर अहम बैठक होने की संभावना है। 

एयरपोर्ट सुरक्षा बनाम धार्मिक ढांचा, अब तेज हुई हलचल
    कोलकाता एयरपोर्ट के भीतर मौजूद यह मस्जिद सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एयर ट्रैफिक ऑपरेशन के लिए भी बड़ी चुनौती मानी जा रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक यह ढांचा एयरपोर्ट की बाउंड्री वॉल से करीब 150 मीटर अंदर और सेकेंडरी रनवे से सिर्फ 165 मीटर की दूरी पर मौजूद है. अंतरराष्ट्रीय एविएशन नियमों के अनुसार सक्रिय रनवे के 240 मीटर के दायरे में कोई स्थायी निर्माण नहीं होना चाहिए. इसी वजह से एयरपोर्ट अधिकारियों को रनवे के टचडाउन पॉइंट को 88 मीटर पीछे शिफ्ट करना पड़ा था। 

    हालांकि मौजूदा रनवे छोटे और मीडियम साइज के विमानों के लिए पर्याप्त है, लेकिन बोइंग 787 और एयरबस A330 जैसे बड़े विमानों के संचालन में परेशानी आती है. एयरपोर्ट सूत्रों का कहना है कि अगर यह बाधा हटती है तो कोलकाता एयरपोर्ट की इंटरनेशनल क्षमता और बढ़ सकती है. यही नहीं, कोहरे के दौरान इस्तेमाल होने वाला एडवांस ILS सिस्टम भी इस क्षेत्र में पूरी तरह इंस्टॉल नहीं हो पाया है. इससे सर्दियों में फ्लाइट ऑपरेशन प्रभावित होते हैं। 

30 साल तक क्यों अटका रहा मामला?

    एयरपोर्ट अथॉरिटी ने पहली बार इस मस्जिद को शिफ्ट करने का प्रस्ताव करीब तीन दशक पहले दिया था. उस दौरान ज्योति बसु सरकार थी. इसके बाद बुद्धदेव भट्टाचार्य और फिर ममता बनर्जी सरकार के समय भी यह मुद्दा उठा, लेकिन हर बार राजनीतिक और धार्मिक संवेदनशीलता के कारण मामला आगे नहीं बढ़ पाया. प्रशासन को डर था कि किसी भी जल्दबाजी से तनाव पैदा हो सकता है। 

    अब सत्ता परिवर्तन के बाद माहौल बदला हुआ दिखाई दे रहा है. नई सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कर रही है. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी पहले भी सार्वजनिक रूप से एयरपोर्ट सुरक्षा और ऑपरेशनल दिक्कतों का मुद्दा उठा चुके हैं. सूत्रों का दावा है कि केंद्र और राज्य के बीच समन्वय बढ़ने के बाद अब इस प्रोजेक्ट को गंभीरता से आगे बढ़ाया जा रहा है। 

मस्जिद कमेटी ने क्या कहा?
सूत्रों के मुताबिक मस्जिद कमेटी ने भी बातचीत में सहयोग का संकेत दिया है. कमेटी का कहना है कि वे एयरपोर्ट के विकास और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के खिलाफ नहीं हैं. लेकिन वे चाहते हैं कि पूरी प्रक्रिया सम्मानजनक और सहमति के साथ हो. कमेटी ने यह भी मांग रखी है कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड जैसे संगठनों से भी राय ली जाए। 

फिलहाल प्रशासन वैकल्पिक जमीन और नई मस्जिद के ब्लूप्रिंट पर काम कर रहा है. बताया जा रहा है कि नई जगह पहले से ज्यादा बड़ी और सुविधाजनक हो सकती है. अधिकारियों की कोशिश है कि ईद के बाद इस मुद्दे पर सहमति का अंतिम फार्मूला तैयार कर लिया जाए। 

हाई सिक्योरिटी के बीच होती है नमाज
मौजूदा समय में इस मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए बेहद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था अपनाई जाती है. नमाजियों को CISF की जांच से गुजरना पड़ता है. इसके बाद उन्हें एयरपोर्ट के हाई सिक्योरिटी जोन के भीतर बस से मस्जिद तक ले जाया जाता है. रोजाना 10 से 25 लोग यहां नमाज पढ़ने आते हैं, जबकि शुक्रवार को यह संख्या 80 तक पहुंच जाती है। 

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि एयरसाइड के भीतर किसी भी सिविलियन मूवमेंट से ऑपरेशन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. यही कारण है कि लंबे समय से इसे सुरक्षा जोखिम भी माना जाता रहा है. एयरपोर्ट प्रशासन चाहता है कि भविष्य में ऐसी स्थिति पूरी तरह खत्म हो और रनवे क्षेत्र पूरी तरह प्रतिबंधित जोन बना रहे। 

क्या बंगाल में अब बदल रही है राजनीति की दिशा?
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह सिर्फ एयरपोर्ट या मस्जिद का मुद्दा नहीं है. यह बंगाल की नई राजनीतिक कार्यशैली का संकेत भी माना जा रहा है. भाजपा लंबे समय से इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा के मुद्दों को प्राथमिकता देने की बात करती रही है. अब जब राज्य और केंद्र की सोच एक दिशा में दिखाई दे रही है, तो कई पुराने विवादित प्रोजेक्ट्स भी तेजी पकड़ सकते हैं। 

हालांकि विपक्ष इस पूरे मामले को राजनीतिक नजरिए से भी देख रहा है. उनका कहना है कि धार्मिक मामलों में सरकार को बेहद संतुलन और संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़ना चाहिए. आने वाले दिनों में यह मुद्दा सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस का बड़ा विषय भी बन सकता है। 

Petrol-Diesel Crisis: क्या देश में पेट्रोल-डीजल की कमी हो गई है? इंडियन ऑयल ने दिया बड़ा अपडेट

नई दिल्ली

 देश की सबसे बड़ी पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) ने देश में पेट्रोल एवं डीजल की समग्र किल्लत से इनकार करते हुए शनिवार को कहा कि कुछ पेट्रोल पंपों पर ईंधन की कमी होने से संबंधित खबरें ‘बेहद स्थानीय’ और अस्थायी प्रकृति की हैं जो क्षेत्रीय मांग-आपूर्ति असंतुलन और बिक्री के प्रारूप में बदलाव का नतीजा हैं।

क्या कुछ कहा है IOC ने 
आईओसी ने कहा कि कुछ पेट्रोल पंपों पर बढ़ी हुई मांग का कारण फसल कटाई के समय डीजल की खपत में मौसमी वृद्धि, अपेक्षाकृत अधिक कीमत वाले निजी पेट्रोल पंपों से ग्राहकों का सरकारी क्षेत्र के पंपों की तरफ स्थानांतरण और थोक ईंधन की कीमतों में अंतरराष्ट्रीय दरों के अनुरूप वृद्धि के कारण संस्थागत खरीद में बढ़ोतरी है।

पेट्रोल की बिक्री में हुआ इजाफा
पब्लिक सेक्टर की कंपनी ने एक बयान में कहा कि एक से 22 मई के दौरान पेट्रोल की बिक्री में सालाना आधार पर 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि डीजल की बिक्री लगभग 18 प्रतिशत बढ़ी जो मांग में निरंतर और अत्यंत उच्च वृद्धि को दर्शाता है, जिसे वह देशभर में पूरा कर रही है। आईओसी ने कहा, “हम ग्राहकों और आम जनता को यह आश्वस्त करना चाहते हैं कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई समग्र किल्लत नहीं है। कुछ खुदरा केंद्रों पर देखी जा रही स्थिति अत्यंत स्थानीय और अस्थायी है, जो स्थानीय मांग-आपूर्ति असंतुलन तथा चुनिंदा क्षेत्रों में बिक्री प्रवृत्ति के पुनर्संतुलन के कारण उत्पन्न हुई है।”

लगभग सभी पेट्रोल पंप पर तेल : IOC
बयान के मुताबिक, आईओसी के 42,000 से अधिक पेट्रोल पंपों के नेटवर्क में बहुत ही कम जगहों पर आपूर्ति बाधित हुई है, जबकि अधिकांश पंपों पर भंडार और आपूर्ति सामान्य एवं पर्याप्त बनी हुई है।

आईओसी ने कहा कि सरकारी तेल विपणन कंपनियां देशभर में पर्याप्त ईंधन भंडार बनाए हुए हैं तथा अलग-अलग क्षेत्रों में उत्पन्न इन सीमित बाधाओं को दूर करने और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रही हैं। आईओसी ने कहा, “मांग में इस निरंतर और अत्यंत उच्च वृद्धि के बावजूद इंडियन ऑयल देशभर में ग्राहकों की जरूरतों को लगातार पूरा कर रही है।”

कंपनी ने उपभोक्ताओं से घबराकर खरीदारी से बचने की अपील करते हुए निर्बाध ईंधन उपलब्धता बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। बयान में कहा गया, “इंडियन ऑयल अन्य तेल विपणन कंपनियों के साथ मिलकर देशभर में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार एवं आपूर्ति बनाए हुए है।”

शुभेंदु अधिकारी के निशाने पर ममता की एक और पहचान! कोलकाता स्टेडियम के बाहर तोड़ी गई फुटबॉल मूर्ति

कलकत्ता

ममता बनर्जी को सत्ता से बेदखल कर सरकार बनाने वाले सीएम शुभेंदु सरकार लगातार बड़े फैसले ले रहे हैं। इसी क्रम में पश्चिम बंगाल में शनिवार को ममता के कार्यकाल में बने एक स्टैच्यू को हटा दिया गया। यह स्टेच्यू साल्ट लेक स्टेडियम के बाहर बनाया गया था। यह फैसला, पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री निसीथ प्रमाणिक के बयान के बाद आया है। इस बयान में निशीथ ने स्टेडियम में सुविधाओं को बढ़ाने का ऐलान किया था।

खेल मंत्री ने क्या कहा था
इस दौरान प्रमाणिक ने इस स्टैच्यू की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि यह स्टैच्यू दिखने में अच्छा नहीं है। यह बहुत बदसूरत है। कमर के नीचे के दो पैर और उनके ऊपर रखा हुआ फुटबॉल अजीब सा लगता है। शुभेंदु सरकार में खेल मंत्री ने कहाकि यह देखने में भी बिल्कुल भी आकर्षक नहीं लगती, इसलिए हम इस तरह की बेतुकी और अर्थहीन बनावट को यहां नहीं रखेंगे और इसे हटा दिया जाएगा। प्रमाणिक ने कहाकि जब से यह मूर्ति लगी है, पिछली सरकार के बुरे दिन शुरू हो गए । इसके बाद मेस्सी विवाद हुआ और सरकार की सत्ता भी चली गई।

राजनीतिक बयान भी आए सामने
इस मामले पर राजनीतिक बयान भी सामने आए हैं. बीजेपी नेता कीया घोष ने सोशल मीडिया पर लिखा कि स्टेडियम के सामने लगी यह संरचना अब तोड़ दी गई है, जैसा पहले कहा गया था. उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा और तेज हो गई है. दरअसल, कुछ समय पहले पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री निशीथ प्रमाणिक ने भी इस प्रतिमा को लेकर बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि यह संरचना स्टेडियम की सुंदरता के अनुरूप नहीं है और इसे हटाने की जरूरत है. साथ ही उन्होंने स्टेडियम के इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार की बात भी कही थी। 

साल्ट लेक स्टेडियम देश के प्रमुख फुटबॉल मैदानों में से एक है, जहां ईस्ट बंगाल और मोहन बागान जैसे बड़े मुकाबले होते रहे हैं. पिछले साल यहां फुटबॉल स्टार लियोनेल मेसी के कार्यक्रम के दौरान भी भारी भीड़ देखने को मिली थी. यह प्रतिमा साल 2017 में FIFA U-17 वर्ल्ड कप से पहले लगाई गई थी. इसे लेकर शुरुआत से ही अलग-अलग राय बनी हुई थी. कुछ लोग इसे स्टेडियम की पहचान मानते थे, जबकि कुछ इसे असामान्य और विवादित बताते थे. अब इसके तोड़े जाने के बाद कोलकाता में एक बार फिर राजनीतिक और खेल दोनों ही स्तर पर नई बहस शुरू हो गई है। 

साल 2017 में हुआ तैयार
आखिर शनिवार को, स्टेडियम के पास होने वाले बदलाव के तहत इस स्टैच्यू को हटा दिया गया। साल्ट लेक स्टेडियम के बाहर यह स्टैच्यू साल 2017 में बनाया गया था। उस साल अंडर-17 फीफा विश्वकप से पहले इसे वीवीआईपी गेट के पास लगाया गया था। इस मूर्ति में फुटबॉल खेलने वाले विशाल पैर दिखाए गए हैं, जो ‘विश्व बांग्ला’ लोगो में विलीन होते हुए प्रतीत होते हैं और फुटबॉल पर ‘जयी’ शब्द अंकित है।

खेलमंत्री के कई ऐलान
इसके अलावा खेल मंत्री प्रमाणिक ने विवेकानंद युवा भारती क्रीडांगन के आसपास फूड कोर्ट बनाने से लेकर बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने का भी ऐलान किया। खेलमंत्री ने यह भी कहाकि लियोनेल मेस्सी के दौरे को लेकर हुए विवाद की फिर से जांच की जाएगी और यह सुनिश्चित किया जायेगा कि टिकट धारकों को पैसे वापिस मिलें।

गौरलब है कि भारतीय जनता पार्टी ने बंगाल में ममता बनर्जी की टीएमसी को हराकर सरकार बनाई है। शुभेंदु सरकार यहां पर भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बने हैं।

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